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चुनावी बॉन्ड योजना पर फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने ईबीएस को रोका, इसे असंवैधानिक पाया; एसबीआई से दान की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की चुनावी बॉन्ड योजना की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया है, जो राजनीतिक दलों को गुमनाम फंडिंग की अनुमति देती है।सुप्रीम कोर्ट का मानना ​​है कि गुमनाम चुनावी बांड योजना अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि काले धन पर अंकुश लगाने के लिए सूचना के अधिकार का उल्लंघन उचित नहीं है।

अपने फैसले में, अदालत ने चुनावी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के महत्व पर जोर दिया, और इस बात पर प्रकाश डाला कि सूचित चुनावी निर्णयों के लिए उनकी फंडिंग के संबंध में पारदर्शिता महत्वपूर्ण है।

अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि राजनीतिक दलों को अज्ञात योगदान सूचना के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) का उल्लंघन है।यह नोट किया गया कि अनुकूल नीतियों के बदले में राजनीतिक संस्थाओं को दान के परिणामस्वरूप बदले की व्यवस्था हो सकती है।

इसके अलावा, अदालत ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक संबद्धता के संबंध में गोपनीयता का अधिकार सार्वजनिक नीति को प्रभावित करने के उद्देश्य से योगदान तक विस्तारित नहीं है, यह केवल एक निश्चित सीमा से नीचे के योगदान पर लागू होता है।आयकर अधिनियम प्रावधान और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29सी में संशोधन को न्यायालय द्वारा अधिकारातीत माना गया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ, जिसमें जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा शामिल थे, ने फैसला सुनाया।एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), डॉ. जया ठाकुर और स्पंदन बिस्वाल ने चुनावी बॉन्ड योजना को अदालत में चुनौती दी थी।

कोर्ट ने ईसीआई को 13 मार्च तक दान विवरण प्रकाशित करने का आदेश दिया

कोर्ट ने चुनावी बांड जारी करने वाले बैंकों को इसकी प्रक्रिया बंद करने का निर्देश दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), जिसे केंद्र द्वारा बांड बेचने के लिए अधिकृत किया गया था, को शीर्ष अदालत ने चुनावी बांड के माध्यम से किए गए दान का विवरण और उन राजनीतिक दलों के बारे में जानकारी प्रदान करने का निर्देश दिया है जिन्होंने ये योगदान प्राप्त किया था। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई)।

एसबीआई इन विवरणों को ईसीआई को प्रस्तुत करेगा। इसके बाद ईसीआई इस जानकारी को 13 मार्च 2014 तक अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करेगा।

चुनावी बांड योजना क्या है:

चुनावी बांड राजनीतिक दलों को धन दान करने के लिए 2018 में भारत में पेश किया गया एक वित्तीय साधन है। इसे भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की निर्दिष्ट शाखाओं से खरीदा जाता है, जिससे दानदाताओं को गुमनामी का एहसास होता है। आलोचक पारदर्शिता और राजनीतिक दलों पर प्रभाव को लेकर चिंता जताते हैं।

चुनावी बांड का पहला बैच 1-10 मार्च, 2018 के बीच भारतीय स्टेट बैंक की नामित शाखाओं में बेचा गया था।

राजनीति

मिड-डे मील को लेकर संजय राउत ने सरकार पर निशाना साधा, बोले-मिड-डे मील की गुणवत्ता देखनी चाहिए

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शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने ‘एक देश, एक चुनाव,’ मिड-डे मील और अखिलेश यादव को लेकर प्रतिक्रिया दी है।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए एनडीए के मंथन पर संजय राउत ने कहा, “उनको मंथन, चिंतन करने दो; कितना भी मंथन-चिंतन करें लेकिन 2029 में ये लोग सत्ता में नहीं आएंगे। राहुल गांधी बहुत आगे निकल चुके हैं। राहुल गांधी देश के निर्विवाद नेता बन गए हैं। 2012 में जहां मोदी थे, अब वहां राहुल गांधी हैं।

मिड-डे मील को लेकर संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र के स्कूलों में मिलने वाली मिड-डे मील की क्वालिटी को देखा जा सकता है। कुकर की 13 बार सीटी के बाद भी भोजन पकता नहीं है। उसको बच्चे खाते हैं। प्रधानमंत्री को इस बारे में भी ध्यान देना चाहिए।

अखिलेश यादव को लेकर संजय राउत ने कहा, “उन्होंने कहा है कि हर राज्य में कानून है कि वहां की स्थानीय भाषा आनी चाहिए। यह कानून सबके लिए होना चाहिए। बड़े-बड़े पदों पर ऑफिसों में काम करने वाले लोग भी मराठी नहीं बोलते। उनको भी मराठी आनी चाहिए। उनके ऊपर भी मराठी की सख्ती होनी चाहिए। हर राज्य में लोगों को वहां की स्थानीय भाषा को अभिमान और स्वाभिमान से बोलना चाहिए।

वहीं, समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “हालात बहुत खराब हैं, बहुत ही ज्यादा खराब। हर दिन हत्याएं हो रही हैं। मेरे इलाके और पूरे मुंबई में कई हत्याएं हुई हैं और भिवंडी में भी कई घटनाएं हुई हैं। हम हर दिन डकैती, लूट और रेप जैसी घटनाएं देख रहे हैं। स्थिति बहुत गंभीर है। मेरा मानना ​​है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को फिलहाल विकास के मुद्दे को एक तरफ रख देना चाहिए। विकास तो बाद में भी हो सकता है लेकिन सरकार को सबसे पहले कानून-व्यवस्था के बढ़ते संकट और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।”

अबू आजमी ने कहा, “वे हमेशा ऐसा ही करते हैं। जब भी कुछ होता है, वे तुरंत मुसलमानों का नाम ले लेते हैं, भले ही वे खुद ही इसके लिए ज़िम्मेदार हों। नितेश राणे के इलाके में एक 14 साल का लड़का था, जिससे पूछा गया, ‘क्रिकेट टूर्नामेंट में तुम किसका समर्थन करते हो, पाकिस्तान का या भारत का?’ उसने जवाब दिया, ‘मैं भारत का समर्थन करता हूं।’ उन्होंने उससे कहा, ‘नहीं, तुमने पाकिस्तान कहा।’ वह कहता रहा, ‘मैं भारत का समर्थन करता हूं’ लेकिन वे जिद करते रहे कि उसने पाकिस्तान कहा था।”

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राष्ट्रीय समाचार

भारत-पाकिस्तान सीमा के पास जोधपुर में गरज सकते हैं अमेरिकी एफ-35, तरंग शक्ति 2026 में हो सकती है एंट्री

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भारतीय वायुसेना के साल के सबसे बड़े मल्टीनेशनल अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2.0’ की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। तरंग शक्ति के दूसरे एडिशन में इस बार सबकी नजरें होंगी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट पर। अमेरिका अपने एफ-35 के साथ इस अभ्यास में शिरकत करने की तैयारी कर रहा है। यह पहली बार होगा कि भारत में एफ-35 किसी सैन्य अभ्यास का हिस्सा बन सकता है। इससे पहले एयरो इंडिया में पहली बार एफ-35 शामिल हुआ था।

रक्षा अधिकारी के मुताबिक, अभी तक तरंग शक्ति 2026 के लिए अमेरिका के शेड्यूल में एफ-35 लड़ाकू विमान मौजूद हैं। रक्षा अधिकारी के मुताबिक, इस अभ्यास में कुल आठ देश अपने एयरक्राफ्ट के साथ हिस्सा ले सकते हैं, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ग्रीस, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका के साथ-साथ बांग्लादेश भी शामिल है। इसके अलावा 30 से ज्यादा देश ऑब्जर्वर के तौर पर शामिल होंगे।

यह अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर एयरबेस पर आयोजित किया जाएगा। दो हफ्ते से ज्यादा समय तक चलने वाले इस अभ्यास में पाकिस्तान सीमा के करीब मित्र देशों के लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के साथ साझा युद्धाभ्यास करेंगे।

इससे पहले भारतीय वायुसेना ने साल 2024 में अपने सबसे बड़े मल्टीनेशनल वायु सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ की शुरुआत की थी। तरंग शक्ति का पहला संस्करण दो चरणों में आयोजित किया गया था। पहला चरण तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस में और दूसरा चरण राजस्थान के जोधपुर एयरबेस में आयोजित हुआ था।

सुलूर एयरबेस पर आयोजित पहले चरण में फ्रांस के राफेल, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन के यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमान शामिल हुए थे। वहीं, भारतीय वायुसेना के लगभग सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म- राफेल, सुखोई, मिराज-2000, जैगुआर, तेजस, मिग-29 और प्रचंड- ने अपनी ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन किया था।

दूसरा चरण जोधपुर में आयोजित किया गया था। इस चरण में ऑस्ट्रेलिया का ईए-18जी ग्रोलर, ग्रीस का एफ-16, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का एफ-16 तथा अमेरिका के ए-10 और एफ-16 सहित कुल 27 लड़ाकू विमान शामिल हुए थे। इसके अलावा दो एयर-टू-एयर रीफ्यूलर, दो एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम और तीन स्पेशल फोर्स एयरक्राफ्ट भी इस अभ्यास का हिस्सा बने थे।

तरंग शक्ति 2026 के आयोजन से ठीक पहले जोधपुर में भारत और जापान की वायुसेना के बीच द्विपक्षीय वायु सैन्य अभ्यास ‘वीर गार्जियन’ का आयोजन किया जा रहा है। यह अभ्यास 9 सितंबर से 22 सितंबर तक जारी रहेगा। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के सुखोई एसयू-30एमकेआई और जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमान इसमें हिस्सा लेने जा रहे हैं। जापान एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स के फाइटर जेट पहली बार भारत आएंगे और इस अभ्यास में हिस्सा लेंगे।

भारत और जापान के बीच सामरिक रिश्ते तेजी से नया आकार ले रहे हैं। 20 अगस्त को ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी के बीच दिल्ली में द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक के बाद एक साझा बयान जारी किया गया था। उस बयान में दोनों मंत्रियों ने जापान और भारत के बीच आयोजित द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के लगातार विस्तार का स्वागत किया, जिनमें जापान-भारत आर्मी अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ और जापान-भारत नौसैन्य अभ्यास “जेएआईएमईएक्स” शामिल हैं।

उन्होंने खास तौर पर इस साल आयोजित होने वाले जापान-भारत एयर एक्सरसाइज “वीर गार्जियन 26” की तैयारियों में हो रही प्रगति का स्वागत किया। भारत और जापान के बीच ‘वीर गार्जियन’ अभ्यास का पहला एडिशन साल 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर आयोजित किया गया था। उस दौरान भारतीय वायुसेना की ओर से सुखोई एसयू-30एमकेआई, सी-17 और आईएल-78 मिड-एयर रीफ्यूलर विमान शामिल हुए थे, जबकि जापान की ओर से चार एफ-2 और चार एफ-15 लड़ाकू विमानों ने भाग लिया था।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत का मानसून बेहतर हुआ, खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका आई कमी : रिपोर्ट

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भारत में मानसून की स्थिति हाल के महीनों में काफी बेहतर हुई है, जिससे खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान की आशंका कमी आई है। हालांकि, बारिश का वितरण अभी भी एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है, जिस पर नजर रखना जरूरी है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अगस्त तक संचयी बारिश की कमी घटकर 12.6 प्रतिशत रह गई है, जो जून में 35 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट में कहा गया, “स्थिति में सुधार हो रहा है, हालांकि यह पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।” मानसून में सुधार का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी देखने को मिला है। सीजन की कमजोर शुरुआत के बाद बुवाई में काफी सुधार हुआ है।

ब्रोकरेज के अनुसार, 14 अगस्त तक कुल खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर से 2 प्रतिशत कम थी, जबकि जून के अंत में यह कमी 21 प्रतिशत थी।

इसके अलावा, धान का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.7 प्रतिशत कम रहा, जबकि मक्का का रकबा 4 प्रतिशत घटा।

इसके विपरीत, दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास का रकबा पिछले साल के स्तर से करीब 1 प्रतिशत के दायरे में रहा।

मैक्वायरी ने कहा कि बुवाई में बची हुई कमी मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा फसलों तक सीमित है और यह व्यापक स्तर पर नहीं है।

इसके अलावा, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर भी बारिश की कमी के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान कर रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों में पानी का भंडारण 10 साल के औसत स्तर के बराबर या उससे अधिक है। वहीं, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में जल भंडारण उनके संबंधित औसत स्तर का करीब 80-100 प्रतिशत है।

हालांकि, बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों पर करीबी नजर रखने की जरूरत है।

रिपोर्ट के अनुसार, मानसून में सुधार, कुल बुवाई में सीमित कमी और पर्याप्त सिंचाई भंडार ने मिलकर खरीफ उत्पादन में गिरावट के जोखिम को कम कर दिया है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया कि मानसून की प्रगति महंगाई के लिहाज से भी सकारात्मक है। जून के स्तर की तुलना में खाद्य आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम कम हो रहे हैं।

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