राष्ट्रीय समाचार
सेशेल्स स्वर्ण जयंती स्वतंत्रता दिवस समारोह, भारतीय सेना की भागीदारी, पीएम मोदी मुख्य अतिथि
भारत और सेशेल्स के बीच मजबूत होते रणनीतिक संबंधों का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण 29 जून, यानी सोमवार को देखने को मिलेगा। दरअसल, सोमवार को सेशेल्स अपनी स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय दिवस समारोह आयोजित करने जा रहा।
इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय सेना का मार्चिंग दल समारोह में हिस्सा लेगा। वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। गौरतलब है कि भारत और सेशेल्स के संबंध लंबे समय से मित्रता, सहयोग और विश्वास पर आधारित रहे हैं। समय के साथ दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, विकास, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।
इस विशेष समारोह में भारतीय सेना का 32 सदस्यीय मार्चिंग दल भाग लेगा। सेना के मुताबिक मार्चिंग दल में असम रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। दल का नेतृत्व कैप्टन आर्यन एच. देओलकर करेंगे। भारतीय नौसेना का एक मार्चिंग दल और सैन्य बैंड भी इस विशेष आयोजन का हिस्सा बनेगा। भारतीय सेना की यह भागीदारी दोनों देशों के बीच गहरे होते रक्षा संबंधों और आपसी विश्वास को प्रदर्शित करेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि मित्र देशों के राष्ट्रीय समारोहों में भारतीय सशस्त्र बलों की भागीदारी केवल औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह सैन्य सहयोग, आपसी सम्मान और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक होती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारत क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित करता है।
भारतीय सशस्त्र बल इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सैन्य समारोहों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्ष 2023 में फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस परेड, वर्ष 2021 में बांग्लादेश के विजय दिवस समारोह तथा वर्ष 2015 और 2020 में रूस के विजय दिवस परेड में भारतीय सैनिकों ने अपनी पेशेवर दक्षता और अनुशासन का प्रदर्शन किया था।
अब सेशेल्स की स्वतंत्रता के स्वर्ण जयंती समारोह में भारत की भागीदारी दोनों देशों के विशेष संबंधों की पुनर्पुष्टि कर रही है। यह आयोजन हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सहयोग, समुद्री सुरक्षा साझेदारी और व्यापक द्विपक्षीय संबंधों की गहराई को भी दर्शाता है। भारतीय सेना और नौसेना की उपस्थिति मित्रता, विश्वास और साझा सुरक्षा दृष्टिकोण का सशक्त संदेश देगी।
राजनीति
कांग्रेस नेतृत्व में अपने दम पर सरकार बनाने का जोश नहीं, अब तक जनादेश न आना राहुल की असफलता: शर्मिष्ठा मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान में अपने दम पर सरकार बनाने का जोश दिखाई नहीं देता है। इसके साथ ही, शर्मिष्ठा ने राहुल गांधी को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में 2029 के चुनावों को लेकर शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, “मैं राजनीतिक अटकलें बिल्कुल नहीं लगाना चाहूंगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीती। राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की थी और उसका एक अच्छा परिणाम आया। दुर्भाग्य यह है कि राहुल गांधी कुछ कार्यक्रम करते हैं, मगर उसके बाद वह फिर गायब हो जाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “राजनीति 24 घंटा और 365 दिनों का काम है। आप आएं और दो दिन बाद फिर कहीं चले जाएं। कुछ रैलियां करें और लोगों से मिलें, फिर गायब हो जाएं। इस तरह से राजनीति नहीं होती है। आम चुनावों के अलावा भी राज्यों के चुनाव होते हैं। आप सिर्फ गठबंधन करके जीत नहीं सकते हैं।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी की बेटी ने यह भी कहा कि कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करना बहुत जरूरी है। मैंने भी कांग्रेस में कुछ दिन काम किया है। मुझे लगता है कि कांग्रेस की सोच यही है कि गठबंधन करके सरकार बनाएं, लेकिन कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करना चाहिए और अपने बलबूते सरकार बनानी चाहिए। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान में यह जोश दिखाई नहीं देता है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, “सिर्फ आप दूसरों की बदौलत जीतेंगे, यह मानसिकता मुझे ठीक नहीं लगती है। कांग्रेस को अपने दम पर मैदान में आना चाहिए और संगठन की अपनी रणनीति होनी चाहिए। दूसरे कंधों पर बंदूक रखकर चलाने वाली रणनीति सही नहीं है।”
इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की तुलना पर उन्होंने कहा, “मैं राहुल गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच कोई तुलना नहीं करना चाहूंगी, क्योंकि वह तुलना कहीं न कहीं गलत होगी। 2014 से राहुल गांधी कांग्रेस का चेहरा हैं। उनके नेतृत्व में कुछ राज्यों को छोड़कर कांग्रेस पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। इसलिए तुलना करना सही नहीं है।”
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी एक लोकप्रिय नेता हैं और उनकी लोकप्रियता जनादेश से ही पता चलती है। राहुल गांधी वह जनादेश अपने और कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं ला पा रहे हैं। यह उनकी एक बड़ी असफलता है।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य प्रदेश में 65 पुलिस अधिकारियों के तबादले, बालाघाट में 18 डीएसपी की तैनाती

मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के 65 अधिकारियों के तबादले किए हैं। गृह विभाग द्वारा शनिवार देर रात जारी आदेश के तहत प्रदेश के कई जिलों और प्रमुख शहरी पुलिस इकाइयों में नई पदस्थापनाएं की गई हैं।
इस बदलाव के तहत ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर के नगर पुलिस अधीक्षकों (सीएसपी) के साथ-साथ भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
तबादला सूची का सबसे बड़ा फोकस नक्सल-प्रभावित बालाघाट जिला रहा है। राज्य सरकार ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से नक्सल-विरोधी इकाई ‘हॉक फोर्स’ में डीएसपी स्तर के 18 अधिकारियों की सहायक सेनानी के पद पर तैनाती की है। इन अधिकारियों में उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति, सचिन पटेल सहित कई अन्य अधिकारी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन अधिकारियों की तैनाती से नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में अभियान और सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा बालाघाट जिले की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलिस अनुविभागों में भी नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आदेश के अनुसार दीपक तोमर को एसडीओपी लांजी, चंद्रशेखर पांडे को एसडीओपी बैहर तथा अभिषेक गौतम को एसडीओपी परसवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की तैनाती कर पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की गई है।
प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी इस प्रशासनिक बदलाव का असर देखने को मिलेगा। ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर में नए सीएसपी पदस्थ किए गए हैं, जबकि भोपाल और इंदौर में भी पुलिस प्रशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से अधिकारियों की नई नियुक्तियां की गई हैं। सरकार का कहना है कि यह फेरबदल प्रशासनिक आवश्यकता, कानून-व्यवस्था की मजबूती और बेहतर पुलिसिंग को ध्यान में रखकर किया गया है।
गृह विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे शीघ्र अपने नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। इस व्यापक फेरबदल से न केवल शहरी क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि नक्सल प्रभावित बालाघाट जैसे संवेदनशील इलाकों में भी सुरक्षा तंत्र और अधिक प्रभावी बन सकेगा।
मनोरंजन
एक अच्छे मोड़ पर शुरू हुई दोस्ती झगड़े में बदल गई थी, ऐश्वर्या और रानी मुखर्जी के बीच आ गई थी दरार

एक बार हिंदी सिनेमा की अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन ने अभिनेत्री रानी मुखर्जी को लेकर अपनी दोस्ती के बारे में बात की थी। उन्होंने एक पुराने इंटरव्यू में अपनी दोस्ती का जिक्र किया था।
इंटरव्यू में ऐश्वर्या राय ने रानी के साथ अपनी बॉन्डिंग के बारे में बात की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे एक इंटरनेशनल कॉन्सर्ट टूर के दौरान लगभग 45 दिनों तक साथ रहने से वे दोनों एक-दूसरे के करीब आ गईं। ऐश्वर्या ने एक इंटरनेशनल वर्ल्ड टूर के दौरान अपनी मजबूत दोस्ती का जिक्र किया था।
शो “जीना इसी का नाम है” में ऐश्वर्या ने बताया था कि ट्रैवलिंग, परफॉर्मिंग और परिवारों के साथ रहने के दौरान लगभग 45 दिन साथ बिताने से उनके बीच एक करीबी और सहज रिश्ता बन गया। उन्होंने इस सोच को भी गलत बताया था कि एक ही इंडस्ट्री की अभिनेत्री दोस्त नहीं हो सकतीं; उन्होंने रानी मुखर्जी को ‘बहुत मिलनसार’ और ‘बहुत दोस्ताना’ बताया था।
ऐश्वर्या ने कहा था, “असल में, दो साल पहले हम एक बार मिले थे। वह भी बहुत मिलनसार लड़की है। बहुत दोस्ताना। बहुत सहज भी। हमारे बीच कोई झिझक नहीं है। सब कुछ बहुत आसान है। और हम साथ में वर्ल्ड टूर पर थे, हमारा पहला वर्ल्ड टूर साथ में था, जिसमें हम शो कर रहे थे।”
उन्होंने बताया था, “शो के दौरान, हमें लगभग 45 दिनों तक साथ रहने का मौका मिला। हम परफॉर्म कर रहे थे, काम कर रहे थे, साथ रह रहे थे, और वहीं से हमारा रिश्ता और गहरा हुआ। हम अपने परिवारों के साथ थे। यह ढाई साल पहले की बात है, और तब से हम लगातार संपर्क में हैं। मेरा मतलब है, मुझे पता है कि लोगों को यह विश्वास करना बहुत मुश्किल लगता है कि एक ही इंडस्ट्री की एक्ट्रेस के बीच कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है।”
अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने ऐश्वर्या के लिए एक मैसेज में कहा था, “आप जानती हैं कि मैं आपसे प्यार करती हूं। मुझे बहुत अफसोस है कि मैं शो के लिए नहीं आ पाई क्योंकि आप जानती हैं कि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। जैसा कि आप जानती हैं, मेरी तबीयत अक्सर खराब रहती है और मैं दिल्ली नहीं आ पाई। लेकिन बस आपको यह बताना चाहती हूं कि मैं आपसे प्यार करती हूं और आप मेरे लिए बहुत मायने रखती हैं।”
रानी मुखर्जी ने मैसेज में आगे कहा था, “ऐश, मैं बस आपसे प्यार करती हूं। मुझे नहीं लगता कि मुझे यह कहने की जरूरत है। लेकिन सबकी वजह से मुझे यह टीवी पर फिर से कहना पड़ रहा है। मैं बस एक बात कहना चाहती हूं कि हम हमेशा दोस्त रहेंगी।”
हालांकि, खबरों के मुताबिक उनकी दोस्ती ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। फिल्म ‘चलते-चलते’ के बनने के दौरान वर्ष 2003 में एक अहम मोड़ आ गया था। शाहरुख खान के साथ फीमेल लीड रोल के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन को कास्ट किया गया था, लेकिन बाद में उनकी जगह रानी मुखर्जी को ले लिया गया था। इस घटना ने दोनों अभिनेत्रियों के बीच दरार पैदा कर दी थी और वे एक-दूसरे से दूर हो गई थीं। जो दोस्ती एक अच्छे मोड़ पर शुरू हुई थी, वह जल्द ही बॉलीवुड के सबसे चर्चित झगड़ों में से एक बन गई।
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