महाराष्ट्र
सड़क कंक्रीटिंग प्रोजेक्ट के तहत बारिश के पानी के मैनेजमेंट के लिए 681 सोक पिट पूरे हुए
मुंबई गड्ढों से मुक्त सड़कें पहल के तहत, बृहन्मुंबई नगर निगम ने एक सड़क कंक्रीटिंग प्रोजेक्ट शुरू किया है। फेज़ 1 और फेज़ 2 के तहत कंक्रीटिंग के लिए प्लान की गई 700 केएम सड़कों में से, अब तक 576 केएम सड़कों पर कंक्रीटिंग की जा रही है, जिससे टारगेट का लगभग 81% पूरा हो गया है। कंक्रीटिंग प्रोजेक्ट के एक ज़रूरी हिस्से के तौर पर, बारिश के पानी को अच्छे से मैनेज करने और ग्राउंडवाटर रिचार्ज को बढ़ावा देने के लिए सोक पिट बनाए गए हैं। इसके मुताबिक, मुंबई शहर, पूर्वी उपनगर और पश्चिमी उपनगर के तीन डिवीज़न में अब तक कुल 681 सोक पिट पूरे हो चुके हैं। ये सोक पिट ज़मीन में बारिश का पानी इकट्ठा करने में मदद करेंगे और ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव कम करने में भी मदद करेंगे।
सड़क कंक्रीटिंग प्रोजेक्ट का लागू होना मुंबई के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मॉडर्न बनाने में एक बड़ा मील का पत्थर बन गया है। यह प्रोजेक्ट मुंबई की मुख्य और दूसरी सड़कों पर ट्रैफिक को आसान, तेज़ और ज़्यादा व्यवस्थित बनाने में मदद कर रहा है, और लोगों के रोज़ाना आने-जाने में काफ़ी सुधार हुआ है। अब तक 576 km सड़कों पर कंक्रीट बिछाई जा चुकी है और ये सभी सड़कें ट्रैफिक के लिए खोल दी गई हैं। यह प्रोजेक्ट तय समय में क्वालिटी स्टैंडर्ड का सख्ती से पालन करते हुए पूरा किया जा रहा है। मुंबई महानगरपालिका कमिश्नर अश्विनी भिडे की अगुवाई में मुंबई महानगरपालिका प्रशासन ने मुंबई में इंफ्रास्ट्रक्चर की क्वालिटी सुधारने के लिए एक बड़ा सीमेंट कंक्रीटिंग प्रोजेक्ट शुरू किया है। जिससे सड़कों पर सफर आसान हो रहा है। कंक्रीट की सड़कों पर बारिश की वजह से गड्ढे बहुत कम हो गए हैं और मेंटेनेंस का खर्च भी कम हुआ है। इसके अलावा कंक्रीट की सड़कें ज़्यादा समय तक चलती हैं। इसकी वजह यह है कि मुंबई के लोगों को गड्ढों से मुक्त सड़कें मिल रही हैं। इसके लंबे समय तक अच्छे असर दिख रहे हैं। कंक्रीटिंग की वजह से बारिश के पानी की नेचुरल निकासी बिना रुकावट हो और ग्राउंडवाटर रिचार्ज में तेज़ी आए, इसके लिए प्रोजेक्ट के तहत सेसपिट बनाए गए हैं। एडिशनल महानगरपालिका कमिश्नर (प्रोजेक्ट) अभिजीत बांगर ने बताया कि सड़क कंक्रीटिंग प्रोजेक्ट को लागू करते समय बारिश के पानी की नेचुरल निकासी और ग्राउंडवाटर रिचार्ज पर खास ध्यान दिया गया है। सड़क के काम के दौरान बारिश का पानी ज़मीन में रिसने देने के लिए सेसपिट बनाने का प्लान है। ये सेसपिट बारिश का पानी जमा करते हैं और उसे धीरे-धीरे ज़मीन में जाने में मदद करते हैं, जिससे ग्राउंडवॉटर का रिज़र्व रिचार्ज होता है। सेसपूल में पत्थर, बजरी और रेत जैसे फिल्टर मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है। सड़कों या नालियों में जमा बारिश का पानी इन नालियों में डाला जाता है और वहाँ से यह मिट्टी की गहरी परतों में जाता है। इससे बारिश का पानी बिना बर्बाद हुए लोकल लेवल पर जमा करने में मदद मिलती है और ग्राउंडवॉटर लेवल बनाए रखने में मदद मिलती है। यह भारी बारिश के दौरान पानी जमा होने की मात्रा को कम करने और शहरी इलाकों में ड्रेनेज सिस्टम में मदद करने में भी मदद करता है। पूरे हो चुके कंक्रीटिंग के काम से मार्च 2026 तक मुंबई शहर, पूर्वी उपनगरों और पश्चिमी उपनगरों में कुल 681 सेसपूल पूरे हो गए हैं। मुंबई में बाकी सभी सड़कों की कंक्रीटिंग पूरी होने के साथ-साथ और भी सेसपूल बनाए जाएंगे। इससे पूरे शहर में स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट सिस्टम बनाने में मदद मिलेगी।
गड्ढे भरने का तरीका
सीमेंट कंक्रीट की सड़कें बनाते समय, सड़क पर जमा बारिश के पानी को तेज़ी से ज़मीन में निकालने, ग्राउंडवॉटर को रिचार्ज करने और पानी को सड़क की सतह पर जमा होकर सड़क को नुकसान पहुँचाने से रोकने के लिए, मनचाही जगहों पर गड्ढे बनाए जाते हैं। सबसे पहले, चुनी हुई जगह पर लगभग 1.00 से 1.50 एम डायमीटर (गोलाकार) या 1.00 × 1.00 एम से 1.50 × 1.50 एम (स्क्वायर) साइज़ का और 1.50 से 3.00 एम गहरा गड्ढा खोदा जाता है। खुदाई पूरी होने के बाद, गड्ढे के नीचे बिना कंक्रीट की नेचुरल मिट्टी बिछाई जाती है, ताकि पानी आसानी से ज़मीन में जा सके।
फिर गड्ढे के नीचे 40 से 60 एमएम मोटी बड़ी बजरी की एक परत बिछाई जाती है। इसके ऊपर 20 से 40 एमएम बजरी और आखिर में 6 से 20 एमएम मनचाहे साइज़ की बजरी या मोटी रेत की एक परत भरी जाती है। इन लेयर्स की वजह से पानी फिल्टर होकर धीरे-धीरे मिट्टी में एब्जॉर्ब हो जाता है। गड्ढे के किनारों पर हनीकॉम्ब ईंटों की बनावट या छेद वाले आरसीसी रिंग लगाए जाते हैं, जिससे पानी किनारों से भी मिट्टी में जाता है और एब्जॉर्ब करने की क्षमता बढ़ जाती है।
सड़क किनारे के नाले या पानी के चैनल से पानी को एब्जॉर्ब करने वाले गड्ढे तक ले जाने के लिए, 110 एमएम से 160 एमएम डायमीटर के दो पीवीसी या आरसीसी पाइप सही ढलान के साथ जोड़े जाते हैं। पानी के साथ आने वाली गाद, प्लास्टिक, कचरा या दूसरी ठोस चीज़ों को एब्जॉर्ब करने वाले गड्ढे में जाने और उसे जाम होने से रोकने के लिए, पाइप से पहले एक सिल्ट ट्रैप या सिल्ट चैंबर तैयार किया जाता है। इस सिल्ट ट्रैप को समय-समय पर साफ करने की ज़रूरत होती है।
एब्जॉर्ब करने वाले गड्ढे के ऊपर लगभग 100 से 150 एमएम मोटाई का आरसीसी स्लैब लगाकर एक मैनहोल कवर लगाया जाता है। एब्जॉर्ब करने वाले गड्ढे की जगह है
महाराष्ट्र
घाटकोपर रोड चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर गिराए गए

मुंबई ; घाटकोपर (वेस्ट) में झुनझुनवाला कॉलेज और अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड के बीच सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर को गिराने का अभियान कल (7 अक्टूबर, 2026) मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ‘एन’ वार्ड (एन वार्ड) ऑफिस द्वारा चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व असिस्टेंट कमिश्नर (‘एन’ वार्ड) जयदीप मोरे ने किया। ऑपरेशन के दौरान म्युनिसिपल अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पर्याप्त पुलिस सुरक्षा भी तैनात की गई थी।
महाराष्ट्र
नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर बस दुर्घटनाग्रस्त; 2 यात्रियों की मौत और 6 घायल

महाराष्ट्र के नासिक जिले के पेठ तालुका में करंजाली के निकट सावलघाट क्षेत्र में नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में दो यात्रियों की मौत हो गई जबकि छह यात्री घायल हुए हैं।
जिला नियंत्रण कक्ष को दुर्घटना की सूचना 6 अक्टूबर की रात 11 बजे प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के समन्वय के लिए दो पुलिस निरीक्षक और एक अनुविभागीय पुलिस अधिकारी तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हुए। बस में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया और घायलों को अलग-अलग एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए नाशिक लाया गया।
रात 00:30 बजे से 02:15 बजे के बीच नासिक सिविल अस्पताल में आठ लोगों को लाया गया। इनमें सात व्यक्ति जीवित थे जबकि एक व्यक्ति को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। इसके अलावा दुर्घटना में एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हुई है। वर्तमान में दो घायल मरीज सिविल अस्पताल में भर्ती हैं जबकि अन्य घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें अस्पताल में भर्ती किए बिना छुट्टी दे दी गई।
हादसे में घायल प्रमिला राउत (53) को गंभीर चोट के कारण सिविल अस्पताल के ई-वार्ड में भर्ती किया गया है। वहीं, बाल विमल जगदीश (65) के बाएं हाथ की ह्यूमरस हड्डी में फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें एमओडब्ल्यू वार्ड में भर्ती किया गया है। अन्य घायलों में यश देसाई, आरती देसाई, नयन वासोने तथा स्वाति सुरेश बडाणे शामिल हैं।
दुर्घटना में राहुल ओझा और महेंद्र पाल (48) की मौत हुई है। महेंद्र पाल को सिविल अस्पताल, नासिक में मृत अवस्था में लाया गया था। मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पेठ तालुका के सावलघाट क्षेत्र में हादसे के समय बादल और कोहरे की स्थिति के कारण दृश्यता काफी कम थी। प्रशासन की प्राथमिक जांच में कम दृश्यता को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना गया है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर संबंधित एजेंसियों की जांच जारी है।
महाराष्ट्र
‘विद्यार्थियों की मांग नहीं मानी तो पूरा महाराष्ट्र बंद करेंगे,’ मनोज जरांगे पाटिल की सरकार को चेतावनी

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर पुणे में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन का जमीनी नेतृत्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं। इस बीच मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरंगे पाटिल भी आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, “बच्चों, अगर इन लोगों ने आपकी बात नहीं सुनी तो यहां बैठे सभी नेताओं से भी कहता हूं और आपसे भी कहता हूं, आपके लिए पूरा महाराष्ट्र बंद कर देंगे। इन्हें क्या हो गया है, इन्हें घमंड हो गया है।”
उन्होंने छात्रों से कहा, “आपके साथ हुआ अन्याय जाति से परे है। अगर मैं जातिवादी होता तो यहां नहीं आता। यहां महाराष्ट्र के किसानों के बच्चे बैठे हैं और मैं किसान का बेटा बनकर आया हूं, जाति के नाम पर नहीं।”
जरांगे पाटिल ने कहा कि आरक्षण की मांग करने का मतलब यह नहीं है कि वे छात्रों को उनके हाल पर छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि मेहनतकश माता-पिता की उम्मीद है कि उनके बेटे और बेटियां भी अधिकारी बनें और सरकार को इस भावना को समझना चाहिए।
छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने को राजनीति बताने पर भी जरांगे पाटिल ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि क्या सरकार चाहती है कि छात्रों के पीछे कोई खड़ा न हो और उन्हें कोई ताकत न मिले।
उन्होंने पूछा, “रोहित दादा राजनीतिक नेतृत्व करते हैं, इस पर किसी को संदेह है तो राज्य सरकार मुझे इसका जवाब दे। इससे पहले एमपीएससी में दो साल की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। क्या वह राजनीतिक था? फिर यह आंदोलन राजनीतिक कैसे हुआ? आज बच्चे अनशन पर बैठे हैं। उनकी जान का क्या? उनके सवालों का क्या? आप हर बात को राजनीतिक रंग क्यों देंगे?”
पत्रकारों से बातचीत में जरांगे पाटिल ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और सीएम फडणवीस को जवाब देना चाहिए। गृहमंत्री के तौर पर उन्हें विद्यार्थियों का दिल जीतने का काम करना चाहिए।
छात्रों के बीच तीन गुटों में आंदोलन होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “न कांग्रेस आपकी है, न राष्ट्रवादी आपकी है, न भाजपा आपकी है, न शिवसेना आपकी है, न महायुति आपकी है, न महाविकास आघाड़ी आपकी है। हमारे असली हीरो हमारे माता-पिता हैं। वे मेहनत करके हमें पढ़ाते हैं।”
उन्होंने कहा कि आंदोलन तीन जगह हो या एक जगह, न्याय छात्रों को ही चाहिए। मुख्यमंत्री को सभी आंदोलनों पर तत्काल ध्यान देकर उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए और उनका विश्वास जीतना चाहिए। उन्होंने छात्रों से एकजुट रहने की अपील भी की।
सरकार के मंत्री और विधायक एक आंदोलन की ओर जा रहे हैं जबकि दूसरे आंदोलन की ओर सरकार का प्रतिनिधिमंडल नहीं आया है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को सभी जगह जाना चाहिए और छात्रों की राय सुननी चाहिए।
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