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शिवसेना विवाद: कपिल सिब्बल ने महाराष्ट्र अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले की आलोचना की

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नई दिल्ली: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गट को “असली” शिवसेना घोषित किए जाने के एक दिन बाद, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने गुरुवार को कहा कि “नाटक की पटकथा बहुत पहले लिखी गई थी” और जो देखा गया वह “प्रहसन” था। बिना किसी सहारे के बाहर।

शिंदे के नेतृत्व वाला शिवसेना गट “असली राजनीतिक दल” था

शिंदे के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत में, विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को माना कि जून 2022 में प्रतिद्वंद्वी समूहों के उभरने पर उनके नेतृत्व वाला शिवसेना गुट “असली राजनीतिक दल” था, और उन्होंने दोनों खेमों के किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया।विद्रोह के 18 महीने बाद सत्तारूढ़ शिंदे ने शीर्ष पद पर अपनी जगह पक्की कर ली और लोकसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ गठबंधन में उनकी राजनीतिक ताकत बढ़ गई, जिसमें भाजपा और राकांपा (अजित पवार समूह) भी शामिल हैं।

‘नाटक की पटकथा बहुत पहले लिखी गई थी’

एक्स पर एक पोस्ट में सिब्बल ने कहा, “अध्यक्ष (न्यायाधिकरण के रूप में): शिंदे गट असली सेना है। नाटक की पटकथा बहुत पहले लिखी गई थी। हम बिना किसी सहारे के इस प्रहसन को खेलते हुए देख रहे हैं।” पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, “यह इस ‘लोकतंत्र की जननी’ की त्रासदी है।”

2022 में पार्टी में विभाजन के बाद एक-दूसरे के विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली शिवसेना गटों द्वारा क्रॉस-याचिकाओं पर बहुप्रतीक्षित फैसले के मुख्य बिंदुओं के अपने 105 मिनट लंबे पढ़ने में, नार्वेकर ने उद्धव ठाकरे गट की याचिका को भी खारिज कर दिया। शिंदे सहित सत्तारूढ़ समूह के 16 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के लिए।

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शादी के नाम पर सिया ने केतन अग्रवाल से 1 करोड़ रुपए लेकर प्रेमी चेतन को दिए थे, एक और खुलासा

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पुणे के 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या मामले की जांच में नए चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, केतन की मंगेतर सिया गोयल ने शादी की खरीदारी और विवाह संबंधी खर्चों के नाम पर केतन से करीब 1 करोड़ रुपए लिए थे। आरोप है कि उसने यह पूरी रकम अपने प्रेमी चेतन चौधरी को दे दी थी।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, 20 वर्षीय सिया गोयल और 22 वर्षीय चेतन चौधरी ने हत्या की साजिश काफी पहले से रची थी और अपराध के बाद किसी को शक न हो, इसके लिए लंबी योजना भी बनाई थी। दोनों को 18 जून को लोहागढ़ किले की पहाड़ी से केतन अग्रवाल को धक्का देकर हत्या करने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

एनडीटीवी के अनुसार, पुलिस सूत्रों का दावा है कि सिया ने शादी की शॉपिंग और अन्य विवाह संबंधी तैयारियों का हवाला देकर केतन से लगभग 1 करोड़ रुपए लिए थे, लेकिन इन पैसों का इस्तेमाल शादी में करने के बजाय उसने पूरी रकम चेतन चौधरी को दे दी, ताकि वह अपना करियर बना सके और आर्थिक रूप से मजबूत हो सके।

जांच एजेंसियों का मानना है कि पैसों का यह लेन-देन कथित साजिश का अहम हिस्सा था। पुलिस के अनुसार, चेतन आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से था और उसने सिया से कहा था कि आर्थिक रूप से स्थिर होने में उसे करीब तीन साल लगेंगे।

आरोप है कि दोनों ने योजना बनाई थी कि केतन की मौत के बाद सिया तीन साल तक शादी नहीं करेगी, ताकि किसी को उन पर शक न हो। जब चेतन आर्थिक रूप से सक्षम हो जाएगा और मामले को लेकर लोगों का ध्यान भी कम हो जाएगा, तब दोनों शादी करेंगे।

पुलिस का मानना है कि शादी में देरी करने का उद्देश्य उनके रिश्ते को हत्या से असंबंधित दिखाना और बाद में सिया के परिवार से भी स्वीकृति प्राप्त करना था।

जांच में हत्या की वारदात को अंजाम देने के तरीके का भी खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, सिया और चेतन के बीच पहले से एक तय संकेत निर्धारित किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, सिया को कहा गया था कि वह पानी पीने या जूते के फीते बांधने का बहाना बनाकर बैठ जाए। यही संकेत चेतन के लिए होगा कि अब केतन को चट्टान से धक्का देने का सही समय है।

जांचकर्ताओं का कहना है कि इस संकेत का दूसरा उद्देश्य यह भी था कि सिया केतन से सुरक्षित दूरी पर रहे, ताकि गिरते समय केतन उसे पकड़ न सके।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी पुलिस के दावों को मजबूत कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, घटना से करीब 34 मिनट पहले सिया ने चेतन से बातचीत की थी। पुलिस का संदेह है कि यह बातचीत हत्या से पहले अंतिम पुष्टि के लिए की गई थी।

जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या की साजिश मई के अंत तक पूरी तरह तैयार हो चुकी थी और 14 जून को केतन की हत्या का पहला प्रयास भी किया गया था।

बताया जा रहा है कि उस दिन केतन को धक्का दिया गया था, लेकिन वह पास की झाड़ियों को पकड़कर अपनी जान बचाने में सफल रहा। पुलिस सूत्रों के अनुसार बाद में सिया ने इस घटना को दुर्घटना बताते हुए कहा था कि सांप देखकर घबरा जाने के कारण उसने केतन को धक्का दे दिया था।

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महाराष्ट्र

मिलेजुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार सपाट खुला, फार्मा स्टॉक्स में खरीदारी

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मिलेजुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर की शुरुआत सोमवार को सपाट हुई। इस दौरान सेंसेक्स 45 अंक की मामूली कमजोरी के साथ 77,055 अंक और निफ्टी 5 अंक की मामूली बढ़त के साथ 24,061 पर था।

शुरुआती कारोबार में खरीदारी फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र में देखी जा रही थी। सूचकांकों में निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर टॉप गेनर थे। निफ्टी फिन सर्विस, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी पीएसयू बैंक में भी हरे निशान में कारोबार हो रहा था।

दूसरी तरफ, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑयलएंडगैस, निफ्टी आईटी, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी पीएसई, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी ऑटो लाल निशान में थे।

सेंसेक्स पैक में इटरनल, सन फार्मा, बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, एशियन पेंट्स, टेक महिंद्रा, एचयूएल, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी और अल्ट्राटेक सीमेंट गेनर्स थे। कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, इन्फोसिस, टीसीएस, एमएंडएम, बीईएल, भारती एयरटेल और एलएंडटी लूजर्स थे।

एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। टोक्यो, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे, जबकि शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक में तेजी थी। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को लाल निशान में बंद हुए थे। इस दौरान मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.09 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और नैस्डैक 0.24 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ था।

भारत के साथ एशियाई बाजारों के मिलाजुला कारोबार करने की वजह अमेरिका-ईरान के बीच फिर से युद्ध शुरू होना है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब दोनों देश एक-दूसरे पर हमले रोकने पर सहमत हो गए है। दोनों पक्ष मंगलवार को कतर में बैठक कर सकते हैं।

मध्य पूर्व में तनाव फिर बढ़ने से कच्चे तेल में मजबूती देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.23 प्रतिशत की तेजी के साथ 70.07 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 0.98 प्रतिशत की मजबूती के साथ 73.30 डॉलर प्रति बैरल पर था।

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महाराष्ट्र

पेपर लीक का केंद्र बन गया है महाराष्ट्र : शिवसेना (यूबीटी)

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार को भिवंडी में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह सड़ चुकी है और इतने जघन्य अपराधों के बावजूद किसी को भी कोई सजा नहीं मिलती। यही कारण है कि प्रश्नपत्र लीक का धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार को अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में महाराष्ट्र सरकार पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर तीखा हमला बोला।

संपादकीय में कहा गया, “बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य कभी सामूहिक नकल और सरकार प्रायोजित नकल के लिए बदनाम थे। महाराष्ट्र उनसे भी एक कदम आगे निकल गया है। यहां अब सरकार प्रायोजित ‘पेपर लीक’ का नया कारोबार पूरे जोर-शोर से चल रहा है। जो लोग राम मंदिर के दानपात्र तक लूट सकते हैं, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है?”

पार्टी ने अपने मुखपत्र में प्रकाशित तीखे संपादकीय में दावा किया कि आज देश में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का सबसे बड़ा केंद्र महाराष्ट्र बन चुका है। संपादकीय में कहा गया कि गृह मंत्री के रूप में देवेंद्र फडणवीस को इस विनाशकारी स्थिति की कोई चिंता नहीं दिखती। पिछले महीने हुए नीट पेपर लीक की जड़ें महाराष्ट्र तक पहुंची थीं और अब टीईटी का प्रश्नपत्र भी लीक हो गया है। यह महाराष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था का सार्वजनिक अपमान है।

संपादकीय में कहा गया, “यह कोई अकेली घटना नहीं बल्कि सत्तारूढ़ महायुति सरकार की विफलता और भ्रष्टाचार का काला इतिहास है। यह भ्रष्टाचार से पैदा हुई ऐसी भयावह व्यवस्था है, जिसने युवाओं के भविष्य के साथ खुला विश्वासघात किया है। महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाली ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। जिस राज्य ने भारत में शिक्षा और सामाजिक सुधार की नींव रखी थी, वही आज अपने निरंतर पतन का गवाह बनने को मजबूर है। ऐसा लगता है मानो प्रगतिशील महाराष्ट्र को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर किया जा रहा है।”

संपादकीय में आगे कहा गया कि आज की राजनीति में पेपर लीक उतना ही सामान्य हो गया है, जितना विधायक और सांसदों का दल-बदल। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा, “दल बदलने वाले विधायकों को कथित तौर पर 50-50 करोड़ रुपये मिलते हैं, जबकि पेपर लीक लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर देता है। ऐसी गंभीर स्थिति में महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री को एक दिन भी अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।”

संपादकीय में यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गृह मंत्री के रूप में भी पूरी तरह विफल साबित हुए हैं। इसमें कहा गया, “गृह विभाग का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और भाजपा के हितों के लिए किया जा रहा है। महाराष्ट्र को एक पूर्णकालिक गृह मंत्री की सख्त जरूरत है। यदि फडणवीस इस जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं कर सकते, तो उन्हें स्वयं पद छोड़ देना चाहिए। हालांकि यह भी सवाल है कि क्या महाराष्ट्र के सत्ताधारियों में अब राजनीतिक नैतिकता बची है?”

संपादकीय के अनुसार, राज्य की आधी पुलिस फोर्स इस समय दल बदलने वाले विधायकों और सांसदों की सुरक्षा में लगी हुई है। इसमें कहा गया, “गृह मंत्री को परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से ज्यादा राजनीतिक दल-बदलुओं की सुरक्षा की चिंता है। प्रशासन ने छात्रों को इतना असहाय और कमजोर बना दिया है कि उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है मानो उन्हें आसानी से कुचला और नजरअंदाज किया जा सकता है। इसलिए जब टीईटी का पेपर लीक होता है और परीक्षा रद्द कर दी जाती है, तब अभ्यर्थी सिर्फ निराशा में आह भरने के अलावा कुछ नहीं कर सकते।”

ठाकरे गुट ने कहा कि टीईटी कोई साधारण परीक्षा नहीं, बल्कि योग्य शिक्षक बनने की बुनियादी सीढ़ी है। लेकिन जिस चयन प्रक्रिया से भविष्य के शिक्षकों का चयन होना है, वही घोटालों और अनियमितताओं से ग्रस्त हो चुकी है। यह इस बात का चौंकाने वाला प्रमाण है कि महाराष्ट्र का भविष्य किस तरह संगठित माफियाओं के हाथों में चला गया है।

संपादकीय में आरोप लगाया गया कि “यह पेपर लीक माफिया, बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों का एक मजबूत और संगठित गिरोह है।”

पार्टी ने कहा, “परीक्षा से महज 24 घंटे पहले प्रश्नपत्र लीक होकर सोशल मीडिया पर खुलेआम नहीं फैल सकते, जब तक कि उन्हें सत्ता का मजबूत संरक्षण न मिला हो। नीट पेपर लीक की कड़ियां भाजपा से जुड़ी हैं और टीईटी पेपर लीक के जिम्मेदार लोग भी उसी राजनीतिक तंत्र का हिस्सा हैं। सरकार अब सिर्फ ‘जांच’ के नाम पर समय बिता रही है।”

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि नीट पेपर लीक गिरोह पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, लातूर और नासिक तक सक्रिय था, जबकि अब टीईटी घोटाले का केंद्र भिवंडी बन गया है।

पार्टी ने सवाल किया, “क्या गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस बता सकते हैं कि पेपर लीक के मामले बार-बार महाराष्ट्र में ही क्यों सामने आ रहे हैं?”

संपादकीय में कहा गया, “यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि युवाओं के सपनों, उम्मीदों और आकांक्षाओं को लूटने की एक सुनियोजित साजिश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश यात्राओं के दौरान युवाओं को नए सपने दिखाते हैं जबकि यहां की राजनीतिक व्यवस्था शिक्षा की पवित्रता की रक्षा करने के बजाय राजनीतिक जोड़-तोड़ में अधिक व्यस्त है।”

संपादकीय में दावा किया गया कि महाराष्ट्र की पूरी शिक्षा व्यवस्था गहरे संकट में है। इसमें कहा गया, “इतने बड़े अपराधों के बावजूद जवाबदेही तय नहीं होती, इसलिए पेपर लीक का अवैध कारोबार बिना किसी डर के चलता रहता है।”

अंत में संपादकीय में कहा गया, “दुर्भाग्य से महाराष्ट्र उन राज्यों से भी आगे निकल गया है, जो कभी सामूहिक नकल के लिए बदनाम थे। यहां संस्थागत स्तर पर पेपर लीक का संकट खड़ा हो चुका है। जब सत्ता में बैठे लोग संस्थाओं की बुनियादी विश्वसनीयता की रक्षा नहीं कर पाते, तो इसकी सबसे बड़ी कीमत युवाओं को चुकानी पड़ती है।”

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