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Sunday,28-June-2026
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सरकार ने मेडिकल डिवाइस बनाने के लाइसेंस के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को तेज करने का दिया प्रस्ताव

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स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने रविवार को चिकित्सा उपकरण नियम, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन से संबंधित निर्धारित मानकों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करते हुए चिकित्सा उपकरणों की लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाना और उसमें तेजी लाना है।

मंत्रालय ने प्रस्तावित बदलावों पर लोगों की राय जानने के लिए सरकारी गजट में एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

मौजूदा ढांचे के तहत चिकित्सा उपकरणों को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों—क्लास ए, क्लास बी, क्लास सी और क्लास डी—में वर्गीकृत किया गया है। इनमें क्लास डी में सबसे अधिक जोखिम वाले चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। इन नियमों में प्रत्येक श्रेणी के चिकित्सा उपकरणों के लाइसेंस बनाने के लिए प्राप्त आवेदनों के निपटारे के लिए वैधानिक समय-सीमा निर्धारित है।

प्रस्तावित संशोधनों में इन समय-सीमाओं को कम करने की बात कही गई है, ताकि गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन के स्थापित मानकों से समझौता किए बिना नियंत्रक स्वीकृतियां अधिक तेजी से प्रदान की जा सकें।

मंत्रालय ने मुताबिक, प्रस्तावित संशोधनों में क्लास बी चिकित्सा उपकरणों, जिनमें निम्न से मध्यम जोखिम वाले उपकरण जैसे ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक सुइयां और पल्स ऑक्सीमीटर शामिल हैं, के लाइसेंस बनाने की समय-सीमा को 140 दिनों से घटाकर 115 दिन करने का प्रस्ताव किया गया है।

इसी तरह, क्लास सी और क्लास डी के चिकित्सा उपकरणों, जिनमें उच्च जोखिम वाले उपकरण जैसे हृदय स्टेंट, कूल्हे और घुटने के प्रत्यारोपण तथा अन्य हड्डी रोगों से संबंधित प्रत्यारोपण शामिल हैं, के लाइसेंस बनाने की समय-सीमा को 105 दिनों से घटाकर 90 दिन करने का प्रस्ताव है।

मंत्रालय के बयान के मुताबिक, प्रस्तावित मसौदे के संशोधनों में लाइसेंसिंग प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए भी स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की गई है। इसमें आवेदनों की जांच, अधिसूचित निकायों द्वारा ऑडिट, अनुपालन का सत्यापन तथा लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शामिल है। इससे नियामक व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता, पूर्वानुमान लगाने और दक्षता आने की उम्मीद है। इसका लाभ चिकित्सा उपकरण उद्योग के साथ-साथ रोगियों को भी मिलेगा, क्योंकि उनकी गुणवत्ता वाले चिकित्सा उपकरणों तक अधिक तेजी से पहुंच उपलब्ध हो सकेगी।

मंत्रालय ने कहा कि मसौदे की अधिसूचना को सभी हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित करने के लिए सार्वजनिक किया गया है। राजपत्र तथा केन्‍द्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की वेबसाइट पर यह अधिसूचना उपलब्ध है। सभी हितधारकों से निर्धारित अवधि के भीतर अपने सुझाव और टिप्पणियां भेजने का अनुरोध किया गया है।

राष्ट्रीय समाचार

मार्केट आउटलुक: भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगी शेयर बाजार की चाल

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भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई का रुझान और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले हफ्ते निवेशकों की निगाहें रहेंगी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं।

उनका यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात के बाद आया था। इस प्रस्तावित समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद है।

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसकी वजह ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट पर मालवाहक जहाज को निशाना बनाना था। हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिली है और ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

घरेलू आर्थिक डेटा भी बाजार की चाल को प्रभावित करेगा। 29 जून को इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट का डेटा जारी होगा। 30 जून को मई का राजकोषीय घाटे और व्यापार संतुलन, 1 जुलाई को जीएसटी, ऑटो सेल्स एवं मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और 2 जुलाई को सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े आएगा।

इस हफ्ते सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ।

इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की कम कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में सुधार के संकेतों के कारण इस हफ्ते भारतीय रुपया मजबूत हुआ। हालांकि, निवेशक यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बदलाव की संभावना को लेकर सतर्क बने रहे, क्योंकि इससे ग्लोबल कैपिटल फ्लो पर असर पड़ सकता है।

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राष्ट्रीय समाचार

रुपए में स्थिरता, कोरियाई और ताइवानी बाजार में उतार-चढ़ाव से भारत में हो सकती है विदेशी निवेशकों की वापसी

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कच्चे तेल की कीमत में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से चुनिंदा खरीदारी के चलते बिकवाली का दबाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार की धारणा में सुधार हुआ है। यह जानकारी विश्लेषकों की ओर से दी गई।

पिछले नौ ट्रेडिंग दिनों (15 जून – 25 जून) के दौरान, एफआईआई ने कैश मार्केट में पांच दिन खरीदारी की, हालांकि यह खरीदारी सीमित मात्रा में थी। इससे विदेशी निवेशकों की तरफ से लगातार हो रही भारी बिकवाली अब खत्म होती दिख रही है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, “विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की गतिविधियों में इस बदलाव के लिए दो बातें जिम्मेदार हैं। पहली, रुपया स्थिर हो गया है और 15 मई को डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से मजबूत भी हुआ है। अब रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 94.40 पर है।”

जब रुपया मजबूत हो रहा हो, तो एफपीआई के लिए बिकवाली करना समझदारी नहीं है।

दूसरी बात, दक्षिण कोरियाई और ताइवानी बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव एफपीआई को इन बाजारों में बिकवाली करने के लिए मजबूर कर रहा है।

उन्होंने कहा, “एक दिन दक्षिण कोरियाई बाजार 8 प्रतिशत गिर गया, जिससे ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इससे भारी मुनाफा कमाने वाले एफपीआई दक्षिण कोरिया और ताइवान में बिकवाली कर रहे हैं। यह एफआईआई को भारत में कम कमाई के बावजूद फिर से निवेश करने पर विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है।”

वहीं, कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना भारत के लिए बहुत अच्छी बात है।

भारत जिस ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’ संकट का सामना कर रहा था, वह अब खत्म हो चुका है। इस कारण यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि लगातार एफपीआई बिकवाली का दौर खत्म हो गया है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि एफपीआई को भारत में लगातार खरीदार बनने में कुछ समय लग सकता है।

भारत-अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर उम्मीदों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जबकि बीच-बीच में पैसे निकलने के बाद चुनिंदा एफआईआई की खरीदारी लौटने से बाजार का भरोसा बढ़ा।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा कि व्यापक घरेलू आर्थिक संकेतों में सुस्ती और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेश का एक अनुशासित और शेयर विशिष्ट तरीका अपनाने की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा कि ग्लोबल स्तर पर, कच्चे तेल की कीमतों का ट्रेंड, पश्चिम एशिया में अस्थिरता और एफआईआई के निवेश का ट्रेंड बाजार के सेंटीमेंट को तय करने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे। भारत-अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड एग्रीमेंट पर हो रही प्रगति पर भी करीबी नजर रखी जाएगी।

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राष्ट्रीय समाचार

केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने बढ़ाया अदाणी पोर्ट्स का ईएसजी स्कोर, पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में फिर साबित की मजबूत स्थिति

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पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन (ईएसजी) के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति को और मजबूत करते हुए अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईज़ेड) को केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने 84.3 का ईएसजी स्कोर दिया है।

यह स्कोर बताता है कि ईएसजी से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन, पारदर्शी खुलासों, मजबूत नीतियों और बेहतर प्रदर्शन के मामले में अदाणी पोर्ट्स “लीडरशिप” स्थिति में है। वहीं कंपनी के पिछले 81 अंकों के मुकाबले इस बार उसका स्कोर 3.3 अंक बढ़ा है।

कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, यह रेटिंग केयरएज ईएसजी रेटिंग्स की वार्षिक समीक्षा के बाद दी गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में किए गए नए खुलासों को भी शामिल किया गया है।

कंपनी के अनुसार, यह रेटिंग बढ़ोतरी ईएसजी प्रदर्शन और पारदर्शिता में लगातार हुए सुधार को दर्शाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण के क्षेत्र में उत्सर्जन, ऊर्जा, पानी और कचरे की तीव्रता में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग और पूरी वैल्यू चेन में पर्यावरण संबंधी पहलुओं को शामिल करने जैसे कदमों ने कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बनाया है।

सामाजिक क्षेत्र में सुरक्षा प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने, शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने, विविधता, समान वेतन और कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने जैसे प्रयासों का भी सकारात्मक असर देखने को मिला।

कंपनी ने बताया कि बोर्ड स्तर पर ईएसजी की निगरानी, व्यापक गवर्नेंस प्रशिक्षण कार्यक्रम और वैल्यू चेन से जुड़े साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय जैसी पहल ने उसके कॉरपोरेट गवर्नेंस ढांचे को और मजबूत किया है।

कंपनी ने कहा, “यह रेटिंग इस बात की पुष्टि करती है कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अदाणी पोर्ट्स ईएसजी के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। यह पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन से जुड़े सभी पहलुओं में सर्वोत्तम प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और लगातार सुधार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”

इसी सप्ताह एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी अदाणी पोर्ट्स की लंबी अवधि की इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की रेटिंग को “बीबीबी-” से बढ़ाकर “बीबीबी” कर दिया था। साथ ही कंपनी के लिए “स्टेबल” आउटलुक भी बरकरार रखा था।

एसएंडपी ने यह अपग्रेड कंपनी की मजबूत नकदी प्रवाह क्षमता और स्वस्थ वित्तीय स्थिति बनाए रखते हुए बड़े विस्तार कार्यक्रम को पूरा करने की क्षमता को देखते हुए दिया है।

इस अपग्रेड के बाद एसएंडपी की ओर से अदाणी पोर्ट्स की रेटिंग भारत की सॉवरेन रेटिंग के बराबर पहुंच गई है।

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