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सेलिब्रिटी के लिए भ्रामक विज्ञापन मामले में सजा का प्रावधान नहीं : पासवान
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने सोमवार को स्पष्ट किया कि नए उपभोक्ता कानून में किसी उत्पाद के भ्रामक विज्ञापन के मामले में विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी के लिए जेल या जुर्माने की सजा का प्रावधान नहीं है बशर्ते सेलिब्रिटी ने उत्पाद के संबंध में वही बोला या पढ़ा हो जो उसे लिखकर दिया गया हो। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून-2019 सोमवार से देशभर में लागू हो गया है। भ्रामक विज्ञापन देकर उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विनिमार्ता व सेवा प्रदाता के लिए इस कानून के तहत जेल की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नए कानून के मूल विधेयक में भ्रामक विज्ञापन का समर्थन करने पर सेलिब्रिटी के लिए भी दंड का प्रावधान था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया क्योंकि दूसरे देशों में भी सेलिब्रिटी के लिए ऐसे मामले में दंड का विधान नहीं है।
हालांकि भ्रामक विज्ञापन मामले में सेलिब्रिटी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते हैं और यह तय करने की शक्ति केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) के पास होगी।
नये उपभोक्ता संरक्षण कानून में सीसीपीए को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन की जांच करने और शिकायत दर्ज करने और अभियोजन करने, असुरक्षित वस्तु और सेवाओं को वापस लेने, अनुचित व्यापार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों को जारी न रखने का आदेश देने, भ्रामक विज्ञापनों के विनिमार्ताओं/ समर्थनकर्ताओं/ प्रकाशकों पर जुर्माना लगाने की शक्तियां प्रदान की गई हैं।
उपभोक्ता संरक्षण कानून-2019 के अध्याय-7 में अपराध और दंड का प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि कोई विनिर्माता या सेवा प्रदाता अगर गलत या भ्रामक विज्ञापन देता है तो इसके लिए दो साल कारावास की सजा और 10 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। सजा का यह प्रावधान पहली बार भ्रामक व झूठा विज्ञापन का दोषी पाए जाने पर है जबकि अगली बार भी दोषी पाए जाने पर पांच साल तक कारावास की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है।
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जैकलीन फर्नांडिस की अप्रूवर बनने की अर्जी पर सुनवाई टली, अब 8 मई को होगा फैसला

200 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। दरअसल, बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस की ओर से सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनने के लिए दाखिल अर्जी पर पटियाला हाउस कोर्ट में सुनवाई टल गई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 8 मई को होगी।
जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा है, साथ ही एजेंसी ने जैकलीन की इस अर्जी का विरोध भी किया है।
सुनवाई के दौरान ईडी ने अदालत के सामने कहा कि जैकलीन की ओर से दायर की गई अर्जी आधारहीन है। साथ ही कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की, जिसे अदालत ने स्वीकार किया।
इससे पहले पिछली सुनवाई में कोर्ट ने जैकलीन की अर्जी पर ईडी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
यह मामला कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा हुआ है, जिस पर 200 करोड़ रुपए की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। इस हाई-प्रोफाइल केस में जैकलीन फर्नांडिस का नाम तब सामने आया था, जब जांच एजेंसी ने दावा किया कि सुकेश ने ठगी के पैसों से उन्हें कई महंगे गिफ्ट्स दिए थे। इसी आधार पर ईडी ने उन्हें इस मामले में आरोपी बनाया था।
जैकलीन ने हाल ही में कोर्ट में अर्जी दाखिल कर यह इच्छा जताई थी कि वह इस मामले में सरकारी गवाह बनना चाहती हैं और जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। लेकिन ईडी ने उनके इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा है कि फिलहाल उनकी अर्जी को स्वीकार करने का कोई ठोस आधार नहीं दिखता।
मामले की शुरुआत 2021 में हुई थी, जब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने सुकेश चंद्रशेखर के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उसने रैनबैक्सी के पूर्व प्रमोटरों के परिवार से करीब 200 करोड़ रुपए की ठगी की। बाद में इस मामले की जांच ईडी ने अपने हाथ में ली और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
जांच के दौरान सामने आया कि सुकेश ने कथित तौर पर इस पैसे का इस्तेमाल कई लोगों को महंगे तोहफे देने में किया, जिनमें जैकलीन फर्नांडिस का नाम भी शामिल था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें लग्जरी बैग, डायमंड ज्वेलरी, महंगी घड़ियां और अन्य कीमती सामान दिए गए थे, जिसके चलते ईडी ने उन्हें भी इस केस में आरोपी के तौर पर शामिल किया।
वहीं, जैकलीन का कहना है कि उन्हें सुकेश की असलियत के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनका दावा है कि सुकेश ने खुद को एक बड़े बिजनेसमैन के रूप में पेश किया और उन्हें गुमराह किया।
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दो दिन में हॉफ सेंचुरी से चूकी अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’, वीकेंड पर बढ़ सकता है कलेक्शन

अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म भूत बंगला ने 2026 की शुरुआत एक हाई-प्रोफाइल हॉरर कॉमेडी के साथ की है।
फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर अच्छी शुरुआत की है। फिल्म के प्रेड-प्रीव्यू के वजह से फिल्म के कलेक्शन में अच्छा उछाल भी देखा गया और अब तक फिल्म बीते दो दिनों में 47 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है।
‘धुरंधर: द रिवेंज’ की आंधी में भूत बंगला अच्छा कलेक्शन करने में कामयाब हो रही है। फिल्म ने पहले दिन 21.60 करोड़ का शानदार कलेक्शन किया, जबकि दूसरे दिन फिल्म ने 25.65 करोड़ रुपए का कलेक्शन भी किया है। कुल मिलाकर फिल्म ने बीते दो दिनों में 47.25 करोड़ का कलेक्शन पूरा कर लिया है, हालांकि माना जा रहा है कि पहले वीकेंड पर फिल्म की कमाई में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म संडे को तकरीबन 20-22 करोड़ के बीच का शानदार कलेक्शन कर सकती है। अक्षय कुमार की भूत-बंगला कई मायनों में खास है क्योंकि फिल्म में लंबे समय बाद अक्षय कुमार और निर्देशक प्रियदर्शन की जोड़ी ने स्क्रीन पर वापसी की है। इस जोड़ी ने पर्दे पर कई कॉमेडी फिल्में साथ ही हैं, जिसे देखने के बाद दर्शक आज भी वैसी कॉमेडी फिल्मों का इंतजार कर रहे हैं। दोनों ने आखिरी बार साल 2010 में खट्टा मीठा नाम की फिल्म में भी काम किया था।
इसके अलावा फिल्म में तब्बू भी हैं। तब्बू और अक्षय कुमार ने आखिरी बार फिल्म हेरा-फेरी में साथ काम किया था लेकिन उसके बाद दोनों कभी एक साथ नजर नहीं आए। भूत-बंगला में कॉमेडी के किंग असरानी ने भी अपनी कॉमेडी से फैंस को पेट-पकड़कर हंसने को मजबूर कर दिया। भले ही असरानी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन वे अक्षय कुमार की अपकमिंग फिल्म ‘हैवान’ में भी नजर आएंगे।
खुद अक्षय ने हालिया इंटरव्यू में कहा था कि उनकी और निर्देशक प्रियदर्शन की साथ में गई फिल्में सुपरहिट होती हैं क्योंकि प्रियदर्शन की फिल्मों में कॉमेडी करने की जरूरत नहीं पड़ती। उनके साथ काम करने पर सहजता से खुद-ब-खुद कॉमेडी हो जाती है, जो एक्ट करने से भी बेहतर होती है।
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8 घंटे की शिफ्ट पर छिड़ी जंग : दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के काम करने के तरीके में बड़ा अंतर

हिंदी सिनेमा में आठ घंटे काम करने का मुद्दा दोबारा गरमा गया है। दीपिका पादुकोण ने मां बनने के बाद सिनेमा में आठ घंटे की शिफ्ट की मांग की थी।
उनका कहना था कि इंडस्ट्री में 8 घंटे से ज्यादा काम करने को प्रतिबद्धता मान लिया गया है। वहीं इस मुद्दे को दोबारा हवा देते हुए कंगना रनौत ने हालिया इंटरव्यू में एक्ट्रेस का सपोर्ट किया, जिसके बाद इंडस्ट्री में दोबारा 8 घंटों की शिफ्ट को लेकर बहस छिड़ गई है लेकिन क्या आप जानते हैं कि काम के मामले में दीपिका पादुकोण और उनके पति रणवीर सिंह दोनों की राय बहुत अलग है।
दीपिका पादुकोण जहां आठ घंटे की शिफ्ट को मेंटल और फिजिकल हेल्थ से जोड़कर देखती हैं, वहीं रणवीर सिंह के लिए काम ही सब कुछ है। उन्होंने धुरंधर में लगातार बिना ब्रेक लिए काम किया था। जिसका खुलासा, वे कई पोस्ट में कर चुके हैं। निर्देशक आदित्य धर ने खुद बताया था कि रणवीर सिंह समेत पूरी टीम ने 16-18 घंटे काम किया था।
वहीं अभिनेता ने एक पुराने इंटरव्यू में भी खुलासा किया था कि उनकी वजह से उनके बाकी को-स्टार को भी परेशानी होती थी, क्योंकि वह आठ घंटे की शिफ्ट पर यकीन नहीं करते। उन्होंने कहा था, हिंदी सिनेमा में या एक फिल्म को बनाने में आठ घंटे में काम कर पाना बहुत मुश्किल है, तो थोड़ा ज्यादा कर लो शूटिंग, क्योंकि मैं काम को ‘ट्रांजेक्शन’ या सिर्फ एक लेन-देन के रूप में नहीं देखता।”
उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि मेरे को-स्टार भी मुझसे परेशान हैं क्योंकि उनको लगता है कि मेरी वजह से उन्हें भी शिफ्ट से ज्यादा काम करना पड़ेगा और मैं सिनेमा के शिफ्ट स्टैंडर्ड को खराब कर रहा हूं, लेकिन अगर जो चीज हमें सीन के लिए चाहिए, अगर वह आठ घंटे में नहीं निकली तो क्या हुआ, थोड़ा सा और कर लो शूटिंग।
बता दें कि रणवीर सिंह का बयान दीपिका पादुकोण के बयान से पहले आया था, जब दोनों साथ में कई फिल्में कर रहे थे। हालांकि दीपिका के बयान का बहुत सारे सिलेब्स ने सपोर्ट किया, सिवाय रणवीर सिंह के। जबकि संदीप रेड्डी वांगा और फराह खान जैसे निर्देशकों ने जमकर विरोध किया। यही कारण था कि दीपिका पादुकोण ने संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘स्पिरिट’ को ठुकरा दिया था, जिसके बाद तृप्ति डिमरी को फिल्म में कास्ट किया गया।
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