राष्ट्रीय समाचार
भारत इनोवेट्स राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन को सुदृढ़ करता है: धर्मेंद्र प्रधान
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को भारत इनोवेट्स पर दो रणनीतिक दस्तावेज जारी किए, जिनमें उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में निहित भारत के उभरते नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित किया गया है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उस दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती है, जिसके तहत भारत को ज्ञान के उपभोक्ताओं के राष्ट्र से ज्ञान के निर्माताओं, नवोन्मेषकों और प्रौद्योगिकी नेताओं के राष्ट्र में परिवर्तित किया जाना है।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद; विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार; उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी; नीति आयोग के अटल नवाचार मिशन के मिशन निदेशक दीपक बागला; शिक्षा मंत्रालय में तकनीकी शिक्षा की संयुक्त सचिव सौम्या गुप्ता और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।
इस अवसर पर बोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रमुख उद्देश्यों में से एक भारत को ज्ञान उपभोग प्रणाली से ज्ञान सृजन और नवाचार प्रणाली में परिवर्तित करना है। उन्होंने कहा कि भारत इनोवेट्स रणनीतिक दस्तावेज में शामिल स्टार्टअप भारत के प्रमुख संस्थानों, इनक्यूबेटरों और अनुसंधान प्रणालियों से उभर रहे हैं, जो देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र की बढ़ती नवाचार क्षमता को दर्शाते हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत इनोवेट्स पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत की नवाचार क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर ले जाने के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने आगे कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के नवाचार-आधारित विकसित भारत के व्यापक मिशन के अनुरूप है।
मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत इनोवेट्स कार्यक्रम भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेश फर्मों के साथ जुड़ने के अवसर प्रदान कर रहा है, जो 3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करती हैं और विश्व स्तर पर 12,000 से अधिक निवेशों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस कार्यक्रम में 100 से अधिक वैश्विक निवेशकों और प्रमुख संस्थानों के एक साथ आने की उम्मीद है, जो भारत के डीप-टेक और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है।
प्रधान ने बताया कि इस पहल ने निवेशकों की काफी रुचि जगाई है, और लगभग 20 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश पर अंतिम सहमति बन चुकी है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों से जोड़ने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव मजबूत करने के लिए पेरिस, टोक्यो और बेंगलुरु में कई रोडशो आयोजित किए गए हैं।
उच्च शिक्षा संस्थानों के भीतर अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि आईआईटी, आईआईएससी, बीआईटीएस पिलानी और अन्य प्रमुख संस्थान भारत इनोवेट्स के तहत अपनी प्रमुख अनुसंधान और नवाचार परियोजनाओं का प्रदर्शन करेंगे, जो राष्ट्रीय विकास में अकादमिक नेतृत्व वाले नवाचार के बढ़ते योगदान को उजागर करेगा।
प्रधान ने कहा कि भारत इनोवेट्स, इनक्यूबेटर इनोवेशन ब्रिज और इंडस्ट्री इनोवेशन ब्रिज के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ाव के लिए सुनियोजित मार्ग तैयार कर रहा है, जो भारतीय नवप्रवर्तकों को अग्रणी वैश्विक संस्थानों, निगमों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों से जोड़ता है। इस संदर्भ में, उन्होंने बताया कि फ्रांस और अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ नवाचार-केंद्रित 28 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने भारत के डीप-टेक स्टार्टअप एजेंडा को आगे बढ़ाने में शिक्षा मंत्रालय की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि अकादमिक और अनुसंधान संस्थानों से उभरने वाले शोध-आधारित स्टार्टअप्स की संख्या बढ़ाकर डीप-टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को गति देने में मंत्रालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रोफेसर सूद ने आगे कहा कि भारत को न केवल डीप-टेक कंपनियां बनानी चाहिए, बल्कि डीप-टेक नवाचार की एक गहरी संस्कृति भी विकसित करनी चाहिए।
इस अवसर पर जारी किए गए दो रणनीतिक दस्तावेजों में भारत इनोवेट्स स्टार्टअप कंपेंडियम शामिल है, जिसमें देश भर से चयनित 120 उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप्स का विवरण दिया गया है। ये दस्तावेज स्टार्टअप्स को भविष्य में विकास के अवसरों की पहचान करने में मदद करने के लिए क्षेत्रवार बाजार की जानकारी, प्रौद्योगिकी रुझान, वैश्विक अवसरों का मानचित्रण और रणनीतिक जुड़ाव के मार्ग प्रदान करते हैं। दूसरा रणनीतिक दस्तावेज आईआईटी, आईआईएससी और अन्य प्रमुख संस्थानों सहित अग्रणी उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की लगभग 50 अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार परियोजनाओं को प्रदर्शित करता है।
भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के तत्वावधान में, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय 14-16 जून 2026 तक फ्रांस के नीस शहर में भारत इनोवेट्स 2026 का आयोजन कर रहा है। यह आयोजन 3,000 से अधिक उद्यमों में से चयनित 120 विशिष्ट डीप टेक नवोन्मेषकों को एक साथ लाता है, जो अंतरिक्ष, रक्षा, जैव प्रौद्योगिकी और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत की अनुसंधान क्षमताओं को उजागर करता है। इस आयोजन की एक प्रमुख विशेषता आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी मद्रास जैसे 15 प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों की भागीदारी है। इस समूह के पास 1,500 से अधिक पेटेंट हैं और इन्होंने सामूहिक रूप से 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की धनराशि जुटाई है, जिसमें दो सूचीबद्ध कंपनियां, आइडियाफोर्ज और एथर एनर्जी शामिल हैं।
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी ने बल प्रयोग को बताया गलत, बातचीत से समाधान की अपील

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को गलत बताते हुए राज्य सरकार से छात्रों की बात सुनने और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करने की अपील की।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि झारखंड में विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल का इस्तेमाल गलत है। छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है। उन्होंने झारखंड सरकार से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की अपील की।
इससे पहले भी राहुल गांधी ने झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों का समर्थन किया था। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से फोन पर बातचीत कर उनकी समस्याएं जानी थीं और उनकी मांगों के प्रति समर्थन जताया था।
इधर, झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड में जंतर-मंतर जैसी बर्बरता और संवादहीनता की स्थिति नहीं बनी है। सरकार ने छात्रों के आंदोलन से पहले ही मामले में कार्रवाई शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच, गिरफ्तारियों और डिजिटल समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर विस्तृत जांच जारी है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई दोषी बच न पाए।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि भर्ती व्यवस्था में मौजूद कमियों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सीधी नजर है। उन्होंने कहा कि छात्रों को व्यवस्था में सुधार का आश्वासन दिया गया है। उनके अनुसार, सरकार ने छात्रों से दोबारा बातचीत का आग्रह किया है और वह संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने भाजपा पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। मंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट रुख है कि समस्याओं का समाधान संवाद से ही निकाला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने भी माना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर राज्य सरकार ने सकारात्मक कार्रवाई की है। यह कदम कई अन्य राज्यों में देखने को नहीं मिला है। मंत्री ने कहा कि विधानसभा के मौजूदा सत्र में भी सरकार छात्रों के मुद्दे को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पहले से तय था और सरकार ने उनसे बातचीत की कोशिश की थी, लेकिन छात्र इसके लिए तैयार नहीं हुए।
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एसबीआई भर्ती 2026: जूनियर एसोसिएट्स के 1,538 पदों पर आवेदन जारी, जानें योग्यता और सैलरी

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने एससी/एसटी/ओबीसी बैकलॉग रिक्तियों के लिए विशेष भर्ती अभियान के तहत क्लर्क कैडर में जूनियर एसोसिएट्स (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) के कुल 1,538 पदों को भरने के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करके रिक्तियों की घोषणा की है।
एसबीआई की ओर से जूनियर एसोसिएट्स (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) पोस्ट के लिए राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के आधार पर जारी 1,538 रिक्तियों में आंध्र प्रदेश में 88, कर्नाटक में 120, मध्य प्रदेश में 134, छत्तीसगढ़ में 26, ओडिशा में 111, चंडीगढ़ यूटी में 22, जम्मू एवं कश्मीर यूटी में 42, हिमाचल प्रदेश में 11, पंजाब में 18, तमिलनाडु में 65, तेलंगाना में 32, राजस्थान में 106, पश्चिम बंगाल में 55, उत्तर प्रदेश में 31, महाराष्ट्र में 165, दिल्ली में 17, गुजरात में 289, असम में 39, त्रिपुरा में 22, बिहार में 12 और झारखंड में 133 पद शामिल हैं। इनमें एससी के 207, एसटी के 1,219 और ओबीसी के 112 पद शामिल हैं।
इन सभी रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 27 अगस्त तक की गई है। एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवार एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपना रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं।
आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से किसी भी विषय में ग्रेजुएशन या केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कोई समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। वहीं, जिन उम्मीदवारों के पास इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री (आईडीडी) सर्टिफिकेट है, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आईडीडी पास करने की तारीख 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले की हो। इसी के साथ जूनियर एसोसिएट्स पोस्ट के लिए वे लोग भी आवेदन कर सकते हैं, जो लोग अपने ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष/सेमेस्टर में हैं, बशर्ते कि प्रोविजनल रूप से चुने जाने पर उन्हें 31 दिसंबर 2026 को या उससे पहले ग्रेजुएशन परीक्षा पास करने का सबूत देना होगा।
आवेदकों की न्यूनतम आयु 20 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 1 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन ऑनलाइन टेस्ट (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) और चुनी हुई स्थानीय भाषा के टेस्ट के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 24,050 से 64,480 रुपए के बीच प्रति माह होगी। इसके अलावा कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो ओबीसी के लिए 750 रुपए तय किया गया है। वहीं, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूबीडी/एक्सएस/डीएक्सएस श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी जाएगी।
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केंद्र का 1,847 बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स पर खर्च बढ़कर 21.97 लाख करोड़ रुपए हुआ

भारत का 1,847 बड़े इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स (जिन्हें अभी बनाया जा रहा है) पर पूंजीगत खर्च जून, 2026 तक 21.97 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह केंद्र सरकार द्वारा बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए निर्धारित किए गए 40.54 लाख करोड़ रुपए के कुल निवेश का 54 प्रतिशत से अधिक है। यह जानकारी केंद्र द्वारा सोमवार को जारी फैक्टशीट में दी गई।
फैक्टशीट के अनुसार, कई प्रोजेक्ट पूरे होने के एडवांस स्टेज पर पहुंच चुके हैं। लगभग 709 प्रोजेक्ट्स में से 80 प्रतिशत से ज्यादा विकसित हो चुके हैं, जबकि 337 अन्य प्रोजेक्ट्स में 80 प्रतिशत से ज्यादा वित्तीय काम पूरा हो चुका है।
कनेक्टिविटी पर फोकस को देखते हुए, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर 1,341 प्रोजेक्ट्स (जिनकी कीमत 22.32 लाख करोड़ रुपए है) के साथ सबसे आगे है।
ये प्रोजेक्ट देश की आर्थिक विकास दर को बढ़ाने और ज्यादा नौकरियां पैदा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
पीएआईएमएएनए (राष्ट्र-निर्माण के लिए प्रोजेक्ट असेसमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और एनालिटिक्स) डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुशल निगरानी की जा रही है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा विकसित, पीएआईएमएएनए का इस्तेमाल 150 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा लागत वाले चल रहे केंद्रीय क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए किया जाता है।
प्रोजेक्ट की निगरानी को मजबूत करने के अलावा, पीएआईएमएएनए ने 16 अप्रैल, 2026 को लॉन्च किए गए एक समर्पित ‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदर्शन की निगरानी में मदद करने के लिए अपनी भूमिका का विस्तार किया है।
‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों के प्रदर्शन संकेतक को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक साथ लाता है। ये संकेतक संबंधित मंत्रालयों और विभागों द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक डेटा से संकलित किए जाते हैं और नवीनतम उपलब्ध जानकारी के आधार पर समय-समय पर अपडेट किए जाते हैं।
एक विस्तृत संकेतक ढांचा छह इंफ्रास्ट्रक्चर उप-क्षेत्रों तक फैला हुआ है। इनमें बिजली, नागरिक उड्डयन, दूरसंचार, रेलवे, सड़कें, और बंदरगाह, शिपिंग और जलमार्ग शामिल हैं।
‘परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ का विस्तार अब 165 संकेतक तक कर दिया गया है। इस विस्तार में 54 नए संकेतक को शामिल किया गया है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदर्शन की निगरानी की व्यापकता में काफी वृद्धि हुई है।
एक ही डिजिटल इंटरफेस क्षेत्र-दर-क्षेत्र प्रदर्शन की निगरानी की सुविधा देता है। यह नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं और हितधारकों के लिए इंटरैक्टिव विज़ुअलाइजेशन और टाइम-सीरीज विश्लेषण की सुविधा प्रदान करता है।
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