खेल
बैंगलोर 175-180 रन तक पहुंच सकता था : हेसन
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के क्रिकेट निदेशक माइक हेसन ने स्वीकार किया कि राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ क्वालीफायर 2 की हार में टीम 175-180 तक पहुंचने की अच्छी स्थिति में थी, क्योंकि 15 ओवर के अंत में बैंगलोर 123/3 पर था और कम से कम 170 तक पहुंचने के लिए तैयार था। लेकिन ओबेद मैकॉय और प्रसिद्ध कृष्णा ने डेथ ओवरों में रन की गति की रोक दिया जिससे, बैंगलोर ने अंतिम पांच ओवरों में सिर्फ 34 रन बनाए और 20 ओवर में पांच विकेट खोकर 157/8 ही बना सका, अंतत: उनके सात विकेट से हारने में एक बड़ा कारक साबित हुआ।
हेसन ने कहा, “हम अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे। 15 ओवरों में 3 विकेट पर 123 रन बना चुके थे। हम ग्लेन मैक्सवेल के साथ रजत पाटीदार के साथ संभावित रूप से 175-180 प्राप्त करने की स्थिति में थे। हमने उन दो विकेटों को खो दिया और फिर में आखिरी तीन ओवर ओबेद मैकॉय और प्रसिद्ध कृष्णा ने अच्छी गेंदबाजी की, जिससे हम रन बनाने में संघर्ष करने लगे थे। हमने आखिरी पांच में केवल 30 रन बनाए, शायद 20 रन कम बने।”
हेसन ने महसूस किया कि क्वालीफायर 2 में हार बल्ले से आखिरी पांच ओवरों में बैंगलोर के लिए रन ना निकलना महत्वपूर्ण कारण था।
उन्होंने कहा, “पारी के आखिरी पांच ओवरों में पूरे सीजन में हमारा डेथ रन-स्कोरिंग असाधारण रहा है। यह शायद शीर्ष छोर पर अधिक है, जहां हमें वह गति नहीं मिली, लेकिन आज के अलावा, सर्वाधिक पारियों के अंतिम पांच ओवर में हमने काफी कुछ हासिल किया है।”
हेसन ने बताया कि टीम पूरे टूर्नामेंट में आगे जाने के लिए सिर्फ दो या तीन खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं थी, जो आमतौर पर पिछले सीजन में उनके साथ हुआ है।
उन्होंने कहा, “मोहम्मद सिराज एक अच्छे गेंदबाज हैं। उनके लिए अच्छा सीजन नहीं रहा है। लेकिन हम जानते हैं कि वह मजबूत वापसी करेंगे। उसने बिल्कुल भी नई गेंद के साथ विकेट नहीं लिए, गेंद को स्विंग नहीं कराया और उनका आत्मविश्वास भी थोड़ा कम हुआ है।”
उन्होंने आगे कहा, “ग्लेन मैक्सवेल का एक अच्छा ऑल-राउंड सीजन रहा। बहुत उच्च स्ट्राइक रेट, औसत 30 से रन बनाए और गेंद से भी प्रभावशाली साबित हुए। निश्चित रूप से, आप हमेशा अधिक चाहते हैं, लेकिन उनके लिए एक बहुत अच्छा टूर्नामेंट था।”
हेसन ने बताया, “शीर्ष क्रम में विराट कोहली और फाफ डु प्लेसिस अच्छे दिखाई दिए। जाहिर है, हमने विराट के साथ तीन पर शुरुआत की और उन्होंने शीर्ष क्रम में अच्छी बल्लेबाजी की। देखिए, पिछली चार या पांच पारियों में वास्तव में उनका अच्छा प्रदर्शन रहा है। कुल मिलाकर, टीम ने इस सीजन में जिस तरह से तालमेल बिठाया, उससे खुश हैं।”
राजनीति
मिडिल ईस्ट संकट पर पीएम मोदी शुक्रवार को मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे चर्चा

PM MODI
नई दिल्ली, 26 मार्च : एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे, जिसमें वे पश्चिम एशिया संघर्ष के संबंध में राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा करेंगे।
अधिकारी ने कहा कि इस बैठक का मुख्य मकसद ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ मिलकर काम करने की कोशिशों में तालमेल बिठाना होगा।
जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और इसका वैश्विक असर ज्यादा साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, यह बैठक पीएम मोदी के लिए एक मंच का काम कर सकती है। इस मंच के जरिए पीएम मोदी मुख्यमंत्रियों को मौजूदा हालात के बारे में जानकारी देंगे और इस संकट से निपटने के भारत के तरीके पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।
अधिकारी ने बताया, “चुनाव वाले राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वहां ‘आचार संहिता’ लागू है।”
उन्होंने बताया कि चुनाव वाले राज्यों के मुख्य सचिवों के लिए एक अलग बैठक होगी, जिसका आयोजन कैबिनेट सचिवालय के जरिए किया जाएगा।
इससे पहले, बुधवार शाम को नई दिल्ली में संसद भवन परिसर में सरकार ने पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा के लिए एक ‘सर्वदलीय बैठक’ बुलाई थी।
यह बैठक पीएम मोदी के संसद में पश्चिम एशिया के हालात पर दिए गए भाषण के बाद हुई। अपने बयान में पीएम मोदी ने कहा कि सरकार ने ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के असर को कम करने के लिए ईंधन, सप्लाई चेन, खाद और दूसरे क्षेत्रों में रणनीतियां बनाने के लिए सात ‘अधिकार प्राप्त समूह’ बनाए हैं।
बुधवार को हुई इस सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू, जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, राजीव रंजन (ललन) सिंह और दूसरे नेता शामिल हुए।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए किरण रिजिजू ने बैठक में शामिल हुए सभी दलों के सदस्यों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं द्वारा उठाए गए सभी सवालों और चिंताओं का सरकार ने जवाब दिया है।
उन्होंने आगे कहा कि सभी विपक्षी दलों ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार जो भी कदम उठाएगी, उसमें उन्हें उनका पूरा समर्थन मिलेगा।
इस बैठक में कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक और तारिक अनवर, सीपीआई-एम के सांसद जॉन ब्रिटास, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव और दूसरे विपक्षी नेता भी मौजूद थे।
यह बैठक पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हुई है। इस तनाव की वजह से समुद्री रास्ते से होने वाले जरूरी व्यापार में रुकावट आई है और खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय
नाटो पर बिफरे ट्रंप, बोले- ‘मदद नहीं की, ये समय कभी भूलना मत’

TRUMP
वाशिंगटन, 26 मार्च : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) देशों पर बिफरे हैं। उन्होंने सीधे-सीधे धमकी देते हुए कहा कि इस समय को कभी ‘भूलिएगा मत।’
राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ पोस्ट में ईरान के लिए विवादित शब्दों का प्रयोग किया। उन्होंने कहा, “नाटो देशों ने ईरान जैसे पागल देश के खिलाफ कोई मदद नहीं की। अमेरिका को नाटो से किसी चीज की आवश्यकता नहीं है, लेकिन ये समय कभी भूलिएगा मत!”
बीते शुक्रवार (20 मार्च) को भी ट्रंप ने ईरान-इजरायल तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में मदद न करने पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने नाटो को “कागजी शेर” और सदस्य देशों को “कायर” बताते हुए कहा था कि बिना अमेरिका के यह गठबंधन कुछ नहीं है। ट्रंप ने कहा कि नाटो देश केवल तेल की कीमतों पर शिकायत करते हैं, लेकिन मदद के लिए आगे नहीं आते।
उन्होंने ट्रुथ सोशल पर आरोप लगाया कि नाटो सदस्य देश परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते, जबकि वे केवल तेल की बढ़ती कीमतों की शिकायत करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सदस्य देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने में मदद करने को तैयार नहीं हैं, जो कि एक सामान्य सैन्य अभ्यास है और उनकी माने तो तेल की ऊंची कीमतों का मुख्य कारण है।
ट्रंप का आरोप रहा है कि नाटो सहयोगी देश होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद नहीं कर रहे हैं, जो तेल की ऊंची कीमतों का कारण है, जबकि यह एक आसान सैन्य कार्य है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ जंग सैन्य रूप से जीती जा चुकी है और अमेरिका को अब किसी देश की जरूरत नहीं है। तब भी उन्होंने कहा था कि नाटो के इन सहयोगियों को हम याद रखेंगे, जो इस मुश्किल समय में साथ नहीं खड़े हुए।
राजनीति
भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार, एलपीजी की एक महीने की पूरी व्यवस्था: सरकार

नई दिल्ली, 26 मार्च : सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कहा कि भारत में पेट्रोलियम और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रण में है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ‘जानबूझकर अफवाह और गलत जानकारी फैलाने वाले अभियान’ से गुमराह न हों, जिनका उद्देश्य बेवजह डर पैदा करना है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है और फिलहाल करीब 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पाद और रणनीतिक भंडारण शामिल हैं, जबकि ‘हम मध्य पूर्व संकट के 27 वें दिन में हैं’। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि देश के सभी खुदरा ईंधन आउटलेट्स के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन मौजूद है।
सरकार ने एक बयान में कहा कि देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। हर नागरिक के लिए लगभग दो महीने तक की सप्लाई सुनिश्चित है, चाहे वैश्विक हालात कैसे भी हों।
इसके अलावा, अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खरीद भी पहले से तय कर ली गई है। सरकार ने कहा कि भारत आने वाले कई महीनों तक पूरी तरह सुरक्षित है और भंडार कम होने जैसी बातें पूरी तरह गलत हैं।
दुनिया के कई देशों में जहां ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, राशनिंग लागू की जा रही है और पेट्रोल पंप बंद हो रहे हैं, वहीं भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। सरकार ने कहा कि कुछ जगहों पर घबराहट में खरीदारी सोशल मीडिया पर फैलाई गई अफवाहों के कारण हुई है।
सरकार ने यह भी बताया कि तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंपों को मिलने वाला क्रेडिट बढ़ाकर 3 दिन कर दिया है, ताकि किसी भी पंप पर कामकाजी पूंजी की कमी के कारण ईंधन की कमी न हो।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत अब 41 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल मंगा रहा है और पहले से ज्यादा सप्लाई मिल रही है। देश की सभी रिफाइनरी 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं और अगले 60 दिनों की सप्लाई पहले से तय है।
एलपीजी को लेकर भी सरकार ने कहा कि कोई कमी नहीं है। घरेलू उत्पादन 40 प्रतिशत बढ़ाकर रोजाना 50 टीएमटी कर दिया गया है, जबकि कुल जरूरत लगभग 80 टीएमटी है। यानी अब आयात की जरूरत कम होकर सिर्फ 30 टीएमटी रह गई है।
इसके अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से 800 टीएमटी एलपीजी पहले ही भारत के लिए भेजा जा चुका है, जो देश के 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगा। सरकार के अनुसार, कम से कम एक महीने की एलपीजी सप्लाई पूरी तरह सुनिश्चित है और आगे भी लगातार व्यवस्था की जा रही है।
तेल कंपनियां रोजाना 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। साथ ही, ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई 50 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है।
सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को भी बढ़ावा दे रही है, क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर है। भारत रोजाना 92 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह (एमएमएससीएमडी) गैस खुद पैदा करता है, जबकि कुल जरूरत 191 मिलियन क्यूबिक मीटर प्रति माह है, जिससे भारत एलपीजी की तुलना में गैस पर आयात के मामले में काफी कम निर्भर है।
देश में पीएनजी नेटवर्क भी तेजी से बढ़ा है। 2014 में जहां 57 क्षेत्र थे, वहीं अब 300 से ज्यादा क्षेत्रों में यह सुविधा पहुंच चुकी है। वहीं घरेलू पीएनजी कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से ज्यादा हो गए हैं।
सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी को बढ़ावा एलपीजी की कमी के कारण नहीं दिया जा रहा है, बल्कि यह एक बेहतर और सस्ता विकल्प है। एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है।
मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ईंधन और गैस से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ सरकारी आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
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