राजनीति
योगी ने चुनाव से पहले जितिन प्रसाद समेत 7 नए मंत्रियों को कैबिनेट में दी जगह
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सात नए मंत्रियों को शामिल कर अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आनन-फानन में राजभवन में मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगियों की मौजूदगी में सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शपथ लेने वालों में1 कैबिनेट मंत्री और 6 राज्य मंत्री शामिल हैं।
कैबिनेट विस्तार से भाजपा ने यह साफ कर दिया है कि वह अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने के लिए ओबीसी और एससी/ एसटी श्रेणियों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले जितिन प्रसाद रविवार के विस्तार में जगह पाने वाले अकेले ब्राह्मण नेता हैं, बाकी 6 ओबीसी (तीन) और अनुसूचित जाति (दो) और अनुसूचित जनजाति (एक) के हैं।
जिन 6 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली, वे संजीव गोंड (एसटी-सोनभद्र), धर्मवीर प्रजापति (ओबीसी-आगरा), छत्रपाल गंगवार (ओबीसी-बरेली), संगीता बलवंत बिंद (ओबीसी-गाजीपुर),पल्टू राम (एससी-) बलरामपुर) और दिनेश खटीक (एससी-मेरठ) हैं।
जाति संतुलन सुनिश्चित करने के अलावा, पार्टी ने राज्य के सभी हिस्सों में प्रतिनिधित्व प्रदान करना भी सुनिश्चित किया है।
रविवार की सूची में एक आश्चर्यजनक चूक पीएमओ के पूर्व नौकरशाह अरविंद कुमार शर्मा का नाम है, जिन्होंने राजनीति में शामिल होने के लिए इस साल जनवरी में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। वे लखनऊ आए और उन्हें तुरंत यूपी विधान परिषद का सदस्य बना दिया गया था।
माना जा रहा था कि उन्हें जल्द ही मंत्रालय में शामिल किया जाएगा और एक महत्वपूर्ण विभाग दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
वर्तमान में यूपी कैबिनेट में 53 मंत्री हैं और सात और को संवैधानिक सीमा के अनुसार शामिल किया जा सकता है।
19 मार्च, 2017 को पहली बार मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद से यह तीसरी बार है, जब योगी मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया है।
21 अगस्त, 2019 को 23 नए मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया गया।
महाराष्ट्र
नवी मुंबई में स्कूल बस में साढ़े तीन साल की मासूम से दरिंदगी, आरोपी ड्राइवर गिरफ्तार

नवी मुंबई के कामोठे इलाके में सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां स्कूल बस के ड्राइवर ने घर लौट रही साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ घिनौनी करतूत की। घटना की गंभीरता को देखते हुए कामोठे पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी ड्राइवर को हिरासत को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी एक प्राइवेट बस का ड्राइवर था, जिसे छात्रों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए हायर किया गया था। बच्ची रोजाना दूसरे छात्रों के साथ प्राइवेट स्कूल बस से स्कूल आती-जाती थी। बुधवार दोपहर 12:30 बजे, आरोपी कामोठे में किंडरगार्टन और प्राइमरी स्कूल के छात्रों को छोड़ने के लिए बस में चढ़ा। जब दूसरे बच्चे उतर गए और बच्ची बस में अकेली रह गई, तो आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया।
यह घटना तब सामने आई जब घर पहुंचने के बाद बच्ची ने पेट दर्द की शिकायत की। उसने अपनी दादी को बताया कि बस ड्राइवर ने उसके साथ गलत हरकत की है। इसके बाद दादी ने स्कूल मैनेजमेंट को जानकारी दी और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। मेडिकल जांच में यौन उत्पीड़न की पुष्टि होने के बाद, पुलिस ने आरोपी ड्राइवर के खिलाफ ‘प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज’ (पोक्स) एक्ट और 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ रेप से संबंधित क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। गुरुवार को आरोपी को पनवेल कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे शनिवार तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया।
इस घिनौनी करतूत के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और स्कूल प्रशासन द्वारा वाहनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसी तरह कुछ दिन पहले दिल्ली के बवाना इलाके के एक स्कूल में तीन साल की छात्रा के यौन शोषण का मामला सामने आया था। स्कूल बस के ड्राइवर विकास ने बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर उसके साथ कई बार गलत टच किया था। इस मामले में भी पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
राष्ट्रीय समाचार
फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी, विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार

विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर फर्जी कॉल सेंटर के जरिए धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ नोएडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। थाना सेक्टर-142 पुलिस ने सेक्टर-138 स्थित एक इमारत की तीसरी मंजिल पर संचालित अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्किंग उपकरण और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर विदेशी सिम कार्ड और कंप्यूटर-मोबाइल के माध्यम से विदेशी नागरिकों के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 2/3 सितंबर की देर रात की गई। थाना सेक्टर-142 पुलिस को सेक्टर-138 के प्लॉट संख्या-58 स्थित एक इमारत की तीसरी मंजिल पर अवैध गतिविधियों के संबंध में जानकारी मिली थी।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर प्रभावी छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वहां कॉल सेंटर संचालित होता मिला। पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मंसूरी राशिद (26), तरुण मिश्रा (39) और चन्द्रकांत (39) के रूप में हुई है। मंसूरी राशिद गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला है, जबकि तरुण मिश्रा राजस्थान के सिरोही जिले और चन्द्रकांत कर्नाटक के करवर क्षेत्र का निवासी बताया गया है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी कॉल सेंटर का संचालन कब से किया जा रहा था और अब तक कितने विदेशी नागरिकों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया है। पुलिस की कार्रवाई में 9 सीपीयू, 9 डेस्कटॉप कंप्यूटर, 9 माउस, 9 की-बोर्ड, 9 हेडफोन, एक राउटर और चार आईफोन बरामद किए गए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस कॉल सेंटर के संचालन, विदेशी नागरिकों से संपर्क और कथित धोखाधड़ी के नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों द्वारा फर्जी पहचान का इस्तेमाल और विदेशी सिम कार्ड के जरिए विदेशी नागरिकों से संपर्क कर धोखाधड़ी की जा रही थी। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच नोएडा पुलिस लगातार ऐसे फर्जी कॉल सेंटरों और साइबर ठगी के नेटवर्क के खिलाफ अभियान चला रही है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जांच के दौरान कॉल सेंटर से जुड़े अन्य लोगों और इसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क की जानकारी सामने आने की संभावना है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को विदेशी सिम कार्ड और अन्य संसाधन कहां से उपलब्ध होते थे तथा ठगी से प्राप्त रकम को किस माध्यम से इस्तेमाल या ट्रांसफर किया जाता था।
राजनीति
राघव चड्ढा के वोट कटने पर सियासत तेज, आप ने एसआईआर की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पंजाब की मतदाता सूची से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटने को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ‘आप’ ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अलग-अलग बयान जारी कर राघव चड्ढा के वोट कटने के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा।
आप की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा का नाम पंजाब की मतदाता सूची से एसआईआर प्रक्रिया के तहत काटा गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है। उनके मुताबिक, पंजाब में करीब 20 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि देशभर में लगभग 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश के अलग-अलग राज्यों में इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं तो क्या इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि राघव चड्ढा को केवल अपने वोट की चिंता करने के बजाय पंजाब के उन लाखों लोगों की आवाज भी उठानी चाहिए, जिनके नाम मतदाता सूची से हटे हैं। उन्होंने कहा कि चड्ढा को पंजाब के लोगों ने राज्यसभा भेजा है और उनके प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया में बड़ी खामियां हैं और भाजपा के निर्देश पर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
आप प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली के राजेंद्र नगर में बैक-डेटेड फॉर्म के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की कोशिश की थी। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी वीआईपी के लिए नियमों को दरकिनार कर नाम जोड़ने का प्रयास किया जाता है तो यह उन आम मतदाताओं के साथ अन्याय होगा, जिनके पास ऐसे विकल्प उपलब्ध नहीं हैं।
इस पूरे विवाद पर आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, ऐसे में उनका वोट पंजाब में क्यों होना चाहिए। उन्होंने एसआईआर के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यदि सत्यापन के दौरान कोई व्यक्ति अपने पते पर नहीं मिलता है तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। भारद्वाज के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के तहत राघव चड्ढा का नाम पंजाब की सूची से हटाया गया।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में भी बड़ी संख्या में लोगों के वोट केवल इसलिए हटाए गए क्योंकि वे एक मकान से दूसरे मकान में चले गए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी मकान में किराए पर रह रहा है और बाद में सामने वाले मकान में शिफ्ट हो जाता है तो उसका पता बदलने के कारण उसे एसआईआर फॉर्म नहीं दिया जाता और उसका नाम ‘शिफ्टेड’ दिखाया जा सकता है।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भाजपा राघव चड्ढा के वोट को लेकर चिंता जता रही है, लेकिन दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चुप है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठा रही है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है। भारद्वाज ने दावा किया कि उन्हें कुछ पत्रकारों से बातचीत के दौरान राघव चड्ढा के दिल्ली में बैक-डेट में वोट बनवाने की कथित कोशिश की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने जब चुनाव आयोग से इस संबंध में सवाल पूछा तो कथित तौर पर ऐसी प्रक्रिया को रोक दिया गया।
सौरभ भारद्वाज ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में एसआईआर से पहले की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में गरीब मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति अस्थायी रूप से दूसरे शहर या गांव चला जाता है तो केवल उस समय घर पर मौजूद नहीं होने के आधार पर उसका नाम हटाना उचित नहीं है। सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के पुराने ‘राइट टू रिजेक्ट’ के विचार को लेकर भी उन पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि चड्ढा पहले चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार की बात करते रहे हैं, इसलिए अब उन्हें यह सिद्धांत अपने ऊपर भी लागू करना चाहिए।
भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी के विधायकों ने राज्यसभा भेजा था। पार्टी छोड़ने के बाद उनके नैतिक अधिकार को लेकर सवाल उठना चाहिए। हालांकि, किसी सांसद की पार्टी बदलने या छोड़ने से उसकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। ऐसे मामलों में संवैधानिक और कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
सौरभ भारद्वाज ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उसकी पत्रकारिता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि अखबार के पत्रकारों को राघव चड्ढा के दिल्ली में कथित तौर पर बैक-डेटेड तरीके से वोट बनवाने की कोशिश की जानकारी मिली थी, लेकिन यह खबर प्रकाशित नहीं हुई।
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