राष्ट्रीय समाचार
फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी, विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाले तीन आरोपी गिरफ्तार
विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर फर्जी कॉल सेंटर के जरिए धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के खिलाफ नोएडा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। थाना सेक्टर-142 पुलिस ने सेक्टर-138 स्थित एक इमारत की तीसरी मंजिल पर संचालित अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर सिस्टम, नेटवर्किंग उपकरण और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर विदेशी सिम कार्ड और कंप्यूटर-मोबाइल के माध्यम से विदेशी नागरिकों के साथ धोखाधड़ी कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 2/3 सितंबर की देर रात की गई। थाना सेक्टर-142 पुलिस को सेक्टर-138 के प्लॉट संख्या-58 स्थित एक इमारत की तीसरी मंजिल पर अवैध गतिविधियों के संबंध में जानकारी मिली थी।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर प्रभावी छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान वहां कॉल सेंटर संचालित होता मिला। पुलिस ने मौके से तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मंसूरी राशिद (26), तरुण मिश्रा (39) और चन्द्रकांत (39) के रूप में हुई है। मंसूरी राशिद गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला है, जबकि तरुण मिश्रा राजस्थान के सिरोही जिले और चन्द्रकांत कर्नाटक के करवर क्षेत्र का निवासी बताया गया है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी कॉल सेंटर का संचालन कब से किया जा रहा था और अब तक कितने विदेशी नागरिकों को धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया है। पुलिस की कार्रवाई में 9 सीपीयू, 9 डेस्कटॉप कंप्यूटर, 9 माउस, 9 की-बोर्ड, 9 हेडफोन, एक राउटर और चार आईफोन बरामद किए गए हैं। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस कॉल सेंटर के संचालन, विदेशी नागरिकों से संपर्क और कथित धोखाधड़ी के नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों द्वारा फर्जी पहचान का इस्तेमाल और विदेशी सिम कार्ड के जरिए विदेशी नागरिकों से संपर्क कर धोखाधड़ी की जा रही थी। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच नोएडा पुलिस लगातार ऐसे फर्जी कॉल सेंटरों और साइबर ठगी के नेटवर्क के खिलाफ अभियान चला रही है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जांच के दौरान कॉल सेंटर से जुड़े अन्य लोगों और इसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क की जानकारी सामने आने की संभावना है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को विदेशी सिम कार्ड और अन्य संसाधन कहां से उपलब्ध होते थे तथा ठगी से प्राप्त रकम को किस माध्यम से इस्तेमाल या ट्रांसफर किया जाता था।
राजनीति
राघव चड्ढा के वोट कटने पर सियासत तेज, आप ने एसआईआर की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पंजाब की मतदाता सूची से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटने को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ‘आप’ ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अलग-अलग बयान जारी कर राघव चड्ढा के वोट कटने के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा।
आप की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा का नाम पंजाब की मतदाता सूची से एसआईआर प्रक्रिया के तहत काटा गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है। उनके मुताबिक, पंजाब में करीब 20 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि देशभर में लगभग 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश के अलग-अलग राज्यों में इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं तो क्या इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि राघव चड्ढा को केवल अपने वोट की चिंता करने के बजाय पंजाब के उन लाखों लोगों की आवाज भी उठानी चाहिए, जिनके नाम मतदाता सूची से हटे हैं। उन्होंने कहा कि चड्ढा को पंजाब के लोगों ने राज्यसभा भेजा है और उनके प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया में बड़ी खामियां हैं और भाजपा के निर्देश पर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
आप प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली के राजेंद्र नगर में बैक-डेटेड फॉर्म के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की कोशिश की थी। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी वीआईपी के लिए नियमों को दरकिनार कर नाम जोड़ने का प्रयास किया जाता है तो यह उन आम मतदाताओं के साथ अन्याय होगा, जिनके पास ऐसे विकल्प उपलब्ध नहीं हैं।
इस पूरे विवाद पर आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, ऐसे में उनका वोट पंजाब में क्यों होना चाहिए। उन्होंने एसआईआर के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यदि सत्यापन के दौरान कोई व्यक्ति अपने पते पर नहीं मिलता है तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। भारद्वाज के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के तहत राघव चड्ढा का नाम पंजाब की सूची से हटाया गया।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में भी बड़ी संख्या में लोगों के वोट केवल इसलिए हटाए गए क्योंकि वे एक मकान से दूसरे मकान में चले गए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी मकान में किराए पर रह रहा है और बाद में सामने वाले मकान में शिफ्ट हो जाता है तो उसका पता बदलने के कारण उसे एसआईआर फॉर्म नहीं दिया जाता और उसका नाम ‘शिफ्टेड’ दिखाया जा सकता है।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भाजपा राघव चड्ढा के वोट को लेकर चिंता जता रही है, लेकिन दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चुप है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठा रही है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है। भारद्वाज ने दावा किया कि उन्हें कुछ पत्रकारों से बातचीत के दौरान राघव चड्ढा के दिल्ली में बैक-डेट में वोट बनवाने की कथित कोशिश की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने जब चुनाव आयोग से इस संबंध में सवाल पूछा तो कथित तौर पर ऐसी प्रक्रिया को रोक दिया गया।
सौरभ भारद्वाज ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में एसआईआर से पहले की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में गरीब मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति अस्थायी रूप से दूसरे शहर या गांव चला जाता है तो केवल उस समय घर पर मौजूद नहीं होने के आधार पर उसका नाम हटाना उचित नहीं है। सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के पुराने ‘राइट टू रिजेक्ट’ के विचार को लेकर भी उन पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि चड्ढा पहले चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार की बात करते रहे हैं, इसलिए अब उन्हें यह सिद्धांत अपने ऊपर भी लागू करना चाहिए।
भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी के विधायकों ने राज्यसभा भेजा था। पार्टी छोड़ने के बाद उनके नैतिक अधिकार को लेकर सवाल उठना चाहिए। हालांकि, किसी सांसद की पार्टी बदलने या छोड़ने से उसकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। ऐसे मामलों में संवैधानिक और कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
सौरभ भारद्वाज ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उसकी पत्रकारिता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि अखबार के पत्रकारों को राघव चड्ढा के दिल्ली में कथित तौर पर बैक-डेटेड तरीके से वोट बनवाने की कोशिश की जानकारी मिली थी, लेकिन यह खबर प्रकाशित नहीं हुई।
राष्ट्रीय समाचार
अभिजीत दिपके का भाजपा पर हमला: ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का क्यों हो जाता है विरोध? बोले- हम छात्रों की ‘ए टीम’ हैं

कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बेहतर स्कूल और शिक्षा का मुद्दा किसी एक राजनीतिक पार्टी या संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के हर बच्चे के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
अभिजीत दिपके ने कहा कि आम आदमी पार्टी के साथ-साथ महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी भी स्कूलों को बेहतर बनाने की बात कर रही हैं। ऐसे में जो भी लोग चाहते हैं कि देश के स्कूल अच्छे हों, उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भी स्कूलों को बेहतर बनाने की बात होती है, तो बीजेपी के लोग इसका विरोध क्यों करने लगते हैं। क्या बीजेपी को नहीं लगता कि शिक्षा महत्वपूर्ण है और देश के भविष्य के लिए अच्छे स्कूल जरूरी हैं?
अभिजीत दिपके पर आम आदमी पार्टी की ‘बी टीम’ होने और अरविंद केजरीवाल से फंडिंग मिलने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोग उन्हें अलग-अलग पार्टियों की ‘बी टीम’ बताते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उन्हें कांग्रेस की ‘बी टीम’ बताते हैं, जबकि कुछ लोग अरविंद केजरीवाल की ‘बी टीम’ होने का आरोप लगाते हैं।
अभिजीत ने तंज कसते हुए कहा कि सभी लोग एक साथ बैठकर यह तय कर लें कि आखिर वह किसकी ‘बी टीम’ हैं। उन्होंने कहा, “हम किसी पार्टी की ‘बी टीम’ नहीं हैं, हमारे हिसाब से हम स्टूडेंट्स की ‘ए टीम’ हैं।”
अभिजीत दिपके की शैक्षणिक योग्यता और डिग्री को लेकर उठ रहे सवालों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में हैं, उनकी डिग्री और शिक्षा को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं। खास तौर पर चुनाव लड़ने वाले लोगों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल होना चाहिए।
देश के कई सांसदों की ओर से स्वर्ण समाज के लिए आयोग बनाने की मांग पर अभिजीत दिपके ने कहा कि यह मांग करने वालों को अपनी बात रखने का अधिकार है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का सर्विसेज पीएमआई अगस्त में बढ़कर 54.1 रहा, रोजगार वृद्धि 15 महीनों के उच्च स्तर पर

भारत के सर्विसेज सेक्टर में अगस्त में जोरदार वृद्धि देखने को मिली है और एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है। इससे रोजगार वृद्धि भी 15 महीनों के उच्च स्तर पर रही है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक निजी सर्वेक्षण में दी गई।
इससे पहले जुलाई में एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई 53.3 पर था।
सर्वेक्षण में सेवा प्रदाताओं ने बढ़त की वजह अच्छी मांग और बाजार पहलों से नए बिजनेस में वृद्धि होने को बताया है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से मांग भी बनी रही है और नए निर्यात ऑर्डर करीब जुलाई के समान ही बढ़े हैं।
एचएसबीसी के डेटा के मुताबिक, अगस्त में भारतीय सेवा प्रदाताओं को ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई से नए निर्यात ऑर्डर मिले थे।
इसके अलावा, भारत की सेवा अर्थव्यवस्था में रोजगार तेजी से बढ़ा है। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 11 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। साथ ही, पिछले 15 महीनों में नौकरी पैदा होने की दर सबसे ज्यादा रही, क्योंकि कंपनियां अपनी कस्टमर सर्विस, सेल्स और डिजिटल ऑपरेशन को बेहतर बना रही हैं।
एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगस्त में सर्विस सेक्टर की गतिविधियां तेजी से बढ़ीं, जिसमें बेहतर आउटपुट और नए बिजनेस का योगदान रहा।
भंडारी ने कहा, “रोजगार में तेजी से बढ़ोतरी हुई और नौकरियां पैदा होने का आंकड़ा 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।” उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों का दबाव बहुत कम बढ़ा।
इसके अलावा, अगस्त में एचएसबीसी इंडिया कम्पोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स 54.3 पर रहा, जो जुलाई के बराबर ही है, क्योंकि सर्विस सेक्टर में तेज ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग में आई सुस्ती की भरपाई कर दी।
एचएसबीसी के डेटा से यह भी पता चला कि कुल रोजगार में 14 महीनों में सबसे तेजी से बढ़ोतरी हुई। सर्विस सेक्टर में जबरदस्त हायरिंग ने मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार की कमी की भरपाई से कहीं ज्यादा असर दिखाया है।
कुल नए ऑर्डर की मात्रा में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि कम्पोजिट इनपुट लागत महंगाई सात महीने के निचले स्तर पर आ गई है।
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