राष्ट्रीय समाचार
अभिजीत दिपके का भाजपा पर हमला: ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का क्यों हो जाता है विरोध? बोले- हम छात्रों की ‘ए टीम’ हैं
कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बेहतर स्कूल और शिक्षा का मुद्दा किसी एक राजनीतिक पार्टी या संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के हर बच्चे के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
अभिजीत दिपके ने कहा कि आम आदमी पार्टी के साथ-साथ महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी भी स्कूलों को बेहतर बनाने की बात कर रही हैं। ऐसे में जो भी लोग चाहते हैं कि देश के स्कूल अच्छे हों, उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भी स्कूलों को बेहतर बनाने की बात होती है, तो बीजेपी के लोग इसका विरोध क्यों करने लगते हैं। क्या बीजेपी को नहीं लगता कि शिक्षा महत्वपूर्ण है और देश के भविष्य के लिए अच्छे स्कूल जरूरी हैं?
अभिजीत दिपके पर आम आदमी पार्टी की ‘बी टीम’ होने और अरविंद केजरीवाल से फंडिंग मिलने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोग उन्हें अलग-अलग पार्टियों की ‘बी टीम’ बताते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उन्हें कांग्रेस की ‘बी टीम’ बताते हैं, जबकि कुछ लोग अरविंद केजरीवाल की ‘बी टीम’ होने का आरोप लगाते हैं।
अभिजीत ने तंज कसते हुए कहा कि सभी लोग एक साथ बैठकर यह तय कर लें कि आखिर वह किसकी ‘बी टीम’ हैं। उन्होंने कहा, “हम किसी पार्टी की ‘बी टीम’ नहीं हैं, हमारे हिसाब से हम स्टूडेंट्स की ‘ए टीम’ हैं।”
अभिजीत दिपके की शैक्षणिक योग्यता और डिग्री को लेकर उठ रहे सवालों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में हैं, उनकी डिग्री और शिक्षा को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं। खास तौर पर चुनाव लड़ने वाले लोगों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल होना चाहिए।
देश के कई सांसदों की ओर से स्वर्ण समाज के लिए आयोग बनाने की मांग पर अभिजीत दिपके ने कहा कि यह मांग करने वालों को अपनी बात रखने का अधिकार है।
राजनीति
राघव चड्ढा के वोट कटने पर सियासत तेज, आप ने एसआईआर की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

पंजाब की मतदाता सूची से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटने को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। ‘आप’ ने आरोप लगाया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने अलग-अलग बयान जारी कर राघव चड्ढा के वोट कटने के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा।
आप की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा का नाम पंजाब की मतदाता सूची से एसआईआर प्रक्रिया के तहत काटा गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है। उनके मुताबिक, पंजाब में करीब 20 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि देशभर में लगभग 13 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जाने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर देश के अलग-अलग राज्यों में इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं तो क्या इसके लिए संबंधित राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि राघव चड्ढा को केवल अपने वोट की चिंता करने के बजाय पंजाब के उन लाखों लोगों की आवाज भी उठानी चाहिए, जिनके नाम मतदाता सूची से हटे हैं। उन्होंने कहा कि चड्ढा को पंजाब के लोगों ने राज्यसभा भेजा है और उनके प्रति उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर की प्रक्रिया में बड़ी खामियां हैं और भाजपा के निर्देश पर यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
आप प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राघव चड्ढा ने एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिल्ली के राजेंद्र नगर में बैक-डेटेड फॉर्म के माध्यम से अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने की कोशिश की थी। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी वीआईपी के लिए नियमों को दरकिनार कर नाम जोड़ने का प्रयास किया जाता है तो यह उन आम मतदाताओं के साथ अन्याय होगा, जिनके पास ऐसे विकल्प उपलब्ध नहीं हैं।
इस पूरे विवाद पर आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, ऐसे में उनका वोट पंजाब में क्यों होना चाहिए। उन्होंने एसआईआर के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यदि सत्यापन के दौरान कोई व्यक्ति अपने पते पर नहीं मिलता है तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। भारद्वाज के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के तहत राघव चड्ढा का नाम पंजाब की सूची से हटाया गया।
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में भी बड़ी संख्या में लोगों के वोट केवल इसलिए हटाए गए क्योंकि वे एक मकान से दूसरे मकान में चले गए थे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी मकान में किराए पर रह रहा है और बाद में सामने वाले मकान में शिफ्ट हो जाता है तो उसका पता बदलने के कारण उसे एसआईआर फॉर्म नहीं दिया जाता और उसका नाम ‘शिफ्टेड’ दिखाया जा सकता है।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि भाजपा राघव चड्ढा के वोट को लेकर चिंता जता रही है, लेकिन दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चुप है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी लगातार इस मुद्दे को उठा रही है और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रही है। भारद्वाज ने दावा किया कि उन्हें कुछ पत्रकारों से बातचीत के दौरान राघव चड्ढा के दिल्ली में बैक-डेट में वोट बनवाने की कथित कोशिश की जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने जब चुनाव आयोग से इस संबंध में सवाल पूछा तो कथित तौर पर ऐसी प्रक्रिया को रोक दिया गया।
सौरभ भारद्वाज ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में एसआईआर से पहले की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में गरीब मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति अस्थायी रूप से दूसरे शहर या गांव चला जाता है तो केवल उस समय घर पर मौजूद नहीं होने के आधार पर उसका नाम हटाना उचित नहीं है। सौरभ भारद्वाज ने राघव चड्ढा के पुराने ‘राइट टू रिजेक्ट’ के विचार को लेकर भी उन पर निशाना साधा।उन्होंने कहा कि चड्ढा पहले चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार की बात करते रहे हैं, इसलिए अब उन्हें यह सिद्धांत अपने ऊपर भी लागू करना चाहिए।
भारद्वाज ने कहा कि राघव चड्ढा को आम आदमी पार्टी के विधायकों ने राज्यसभा भेजा था। पार्टी छोड़ने के बाद उनके नैतिक अधिकार को लेकर सवाल उठना चाहिए। हालांकि, किसी सांसद की पार्टी बदलने या छोड़ने से उसकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त नहीं होती। ऐसे मामलों में संवैधानिक और कानूनी प्रावधान लागू होते हैं।
सौरभ भारद्वाज ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उसकी पत्रकारिता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि अखबार के पत्रकारों को राघव चड्ढा के दिल्ली में कथित तौर पर बैक-डेटेड तरीके से वोट बनवाने की कोशिश की जानकारी मिली थी, लेकिन यह खबर प्रकाशित नहीं हुई।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का सर्विसेज पीएमआई अगस्त में बढ़कर 54.1 रहा, रोजगार वृद्धि 15 महीनों के उच्च स्तर पर

भारत के सर्विसेज सेक्टर में अगस्त में जोरदार वृद्धि देखने को मिली है और एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है। इससे रोजगार वृद्धि भी 15 महीनों के उच्च स्तर पर रही है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक निजी सर्वेक्षण में दी गई।
इससे पहले जुलाई में एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई 53.3 पर था।
सर्वेक्षण में सेवा प्रदाताओं ने बढ़त की वजह अच्छी मांग और बाजार पहलों से नए बिजनेस में वृद्धि होने को बताया है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से मांग भी बनी रही है और नए निर्यात ऑर्डर करीब जुलाई के समान ही बढ़े हैं।
एचएसबीसी के डेटा के मुताबिक, अगस्त में भारतीय सेवा प्रदाताओं को ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई से नए निर्यात ऑर्डर मिले थे।
इसके अलावा, भारत की सेवा अर्थव्यवस्था में रोजगार तेजी से बढ़ा है। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 11 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। साथ ही, पिछले 15 महीनों में नौकरी पैदा होने की दर सबसे ज्यादा रही, क्योंकि कंपनियां अपनी कस्टमर सर्विस, सेल्स और डिजिटल ऑपरेशन को बेहतर बना रही हैं।
एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगस्त में सर्विस सेक्टर की गतिविधियां तेजी से बढ़ीं, जिसमें बेहतर आउटपुट और नए बिजनेस का योगदान रहा।
भंडारी ने कहा, “रोजगार में तेजी से बढ़ोतरी हुई और नौकरियां पैदा होने का आंकड़ा 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।” उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों का दबाव बहुत कम बढ़ा।
इसके अलावा, अगस्त में एचएसबीसी इंडिया कम्पोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स 54.3 पर रहा, जो जुलाई के बराबर ही है, क्योंकि सर्विस सेक्टर में तेज ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग में आई सुस्ती की भरपाई कर दी।
एचएसबीसी के डेटा से यह भी पता चला कि कुल रोजगार में 14 महीनों में सबसे तेजी से बढ़ोतरी हुई। सर्विस सेक्टर में जबरदस्त हायरिंग ने मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार की कमी की भरपाई से कहीं ज्यादा असर दिखाया है।
कुल नए ऑर्डर की मात्रा में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि कम्पोजिट इनपुट लागत महंगाई सात महीने के निचले स्तर पर आ गई है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी को मिलेगी मजबूती, 10 बड़े समझौतों से बढ़ेगा सैन्य-औद्योगिक सहयोग

भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग केवल राजनीतिक वार्ता तक सीमित नहीं रहने वाला है। दोनों देश सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक के साथ-साथ रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भी साझेदारी को जमीन पर उतारने की तैयारी में हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े 10 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ 15 रक्षा कंपनियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इनमें से अधिकांश कंपनियों का प्रतिनिधित्व उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौतों के तहत बेल्जियम की कई रक्षा तकनीकों का भारत में उत्पादन और असेंबली शुरू होने की संभावना है। इनमें रॉकेट, गोला-बारूद, हथियार प्रणालियां, ड्रोन, रडार और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी तकनीक शामिल हैं।
बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक तेजी से उभरती आर्थिक और सैन्य शक्ति बताते हुए कहा, “यूरोप और एशिया की सुरक्षा अब एक-दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती। रूस-यूक्रेन में युद्ध जारी है और वह ईरान तथा उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं चीन हिंद-प्रशांत में लगातार अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। ऐसे में एशिया में होने वाली घटनाओं का असर यूरोप पर और यूरोप की घटनाओं का असर एशिया पर पड़ता है।”
फ्रांकेन के मुताबिक, बेल्जियम जैसे खुले व्यापार वाले देश के लिए दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है इसलिए भारत जैसे मजबूत साझेदार के साथ सैन्य, तकनीकी और औद्योगिक स्तर पर सहयोग बढ़ाना समय की जरूरत है।
भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा रक्षा पहल की नींव पिछले आर्थिक मिशन के दौरान रखी गई थी। उस दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ा और राजनीतिक स्तर पर भी सहयोग के रास्ते खुले।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेल्जियम के प्रधानमंत्री की बैठक और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ पर हस्ताक्षर इस बढ़ते विश्वास को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इस समझौते में दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अधिकारियों का आदान-प्रदान, अनुसंधान एवं विकास, सेमिनार, संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा तैयार किया जाएगा।
दोनों देश रक्षा उद्योग के लिए एक साझा औद्योगिक रोडमैप तैयार करने पर भी काम करेंगे। इसके अलावा बेल्जियम डिफेंस कॉलेज 2027 में अपनी ‘वर्ल्ड स्टडी ट्रिप’ के लिए भारत को मेजबान देश के रूप में चुनने की योजना बना रहा है।
फ्रांकेन ने कहा कि अब अगला चरण सिर्फ घोषणाओं का नहीं, बल्कि संयुक्त प्रशिक्षण, औद्योगिक परियोजनाओं और कंपनियों के लिए वास्तविक कारोबारी अवसर पैदा करने का है।
भारत के रक्षा उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैनुफैक्चर्स (एसआईडीएम) और बेल्जियम के बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (बीएसडीआई) के बीच भी सहयोग समझौता किया जाएगा।
इसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों को भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन परियोजनाओं में भाग लेने का रास्ता आसान करना है।
बेल्जियम का मानना है कि भारत जिस बड़े पैमाने पर अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है, उससे उसकी कंपनियों के लिए लंबे समय के बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
दोनों देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र ‘समुद्री सुरक्षा’ है। भारत अपनी नौसेना की माइन काउंटरमेजर्स क्षमता, स्वायत्त समुद्री प्रणालियों, अंडरवाटर रोबोटिक्स और अत्याधुनिक सेंसरों को मजबूत करना चाहता है।
बंदरगाहों, पाइपलाइनों और समुद्र के भीतर बिछी डेटा केबल जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा भी सहयोग के दायरे में है।
इसके अलावा हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तथा काउंटर-ड्रोन तकनीक में भी बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
बेल्जियम की न्यू लाचौसे और भारत की टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच होने वाली परियोजना सबसे ठोस औद्योगिक समझौतों में से एक है।
इसके तहत दो प्रकार के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता करीब 10 करोड़ राउंड प्रति वर्ष होगी।
परियोजना का अनुमानित मूल्य 5 करोड़ यूरो है और इसकी डिलीवरी 2028 तथा 2029 में निर्धारित की गई है। इसके बाद मशीनरी के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और आधुनिकीकरण में भी बेल्जियम की कंपनी की भूमिका बनी रहेगी।
इसके अलावा दो कंपनियों के बीच हुए सहयोग के तहत बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेट अब भारत में भी असेंबल किए जाएंगे। भारतीय कंपनियां इसकी उत्पादन प्रक्रिया में भाग लेंगी। भारत में पूरी तरह निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है।
एक्सैल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो के बीच सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण है। एलएंडटी भारत के लिए माइन काउंटरमेजर वेसल बना रही है, जबकि एक्सैल इन जहाजों के लिए समुद्री बारूदी सुरंगों को खोजने, पहचानने और निष्क्रिय करने वाली स्वायत्त प्रणालियां उपलब्ध कराएगी।
पहले चरण में 12 जहाजों का कार्यक्रम है, लेकिन भविष्य में यह संख्या 59 तक पहुंच सकती है।
बेल्जियम की एफएन हर्स्टल और कल्याणी स्ट्रेटजिक सिस्टम्स भारत में हथियार तथा काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं तलाशेंगी।
बेल्जियम की ओआईपी सेंसर सिस्टम्स और भारत की सरकारी कंपनी इंडिया ओप्टेल के बीच भी सहयोग जारी है।
ओआईपी पहले ही अर्जुन एमके-I टैंक के लिए 130 से अधिक साइट उपलब्ध करा चुकी है। अर्जुन एमके-II के लिए कंपनी ने नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है, जो लेजर-गाइडेड मिसाइलों को लॉन्च करने में भी सक्षम है।
यह सहयोग भविष्य में भारतीय बख्तरबंद वाहनों के नए संस्करणों और अपग्रेड कार्यक्रमों तक बढ़ सकता है।
वहीं, भारत के हल्के टैंक जोरावर कार्यक्रम में भी बेल्जियम की जॉन कॉकेरिल डिफेंस महत्वपूर्ण भूमिका हासिल करने की कोशिश कर रही है। कंपनी जोरावर के लिए टरेट (टैंक या युद्धपोत पर लगी वह घूमने वाली संरचना जिसमें तोप या मशीन गन फिट होती है) उपलब्ध कराने की दावेदार है।
जोरावर को ऊंचाई वाले इलाकों में सैन्य अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा है और इसका संबंध चीन से लगी भारत की सीमा पर सैन्य क्षमता बढ़ाने से भी है।
बेल्जियम की पिटागन भारत में अपनी मोबाइल बैरियर तकनीक के उत्पादन और बिक्री के लिए क्रिशना एलिड के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित कर रही है। इसमें पिटागन बेल्जिमय की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
कंपनी भारत को केवल घरेलू बाजार के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे बाजारों तक पहुंच बनाने के संभावित केंद्र के रूप में भी देख रही है।
इसी तरह ऑक्टेव और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (भेल) के बीच सहयोग भारत की वायु रक्षा प्रणालियों में पहले से मौजूद है। ऑक्टेव की तकनीक आकाश तीर, अरुधरा, आईपीएसएस और आईएसीसीएस जैसे कार्यक्रमों में इस्तेमाल हो रही है।
वहीं बेल्जियम और भारतीय कंपनियों के बीच समुद्री इंजन क्षेत्र में सहयोग की बातचीत चल रही है। भारतीय कंपनी पहला पूरी तरह भारत में विकसित 6 मेगावाट का समुद्री डीजल इंजन तैयार कर रही है।
भारत और बेल्जियम के बीच यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
बेल्जियम के लिए भारत केवल एक बड़ा रक्षा बाजार नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी बन रहा है। वहीं भारत के लिए बेल्जियम के साथ सहयोग का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इससे अत्याधुनिक यूरोपीय तकनीक के साथ-साथ संयुक्त उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और वैश्विक सप्लाई चेन में नए अवसर खुल सकते हैं।
फ्रांकेन के शब्दों में, दोनों देशों ने भरोसा कायम कर लिया है और अब उस भरोसे को “ठोस सहयोग” में बदलने का समय है।
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