राष्ट्रीय समाचार
भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी को मिलेगी मजबूती, 10 बड़े समझौतों से बढ़ेगा सैन्य-औद्योगिक सहयोग
भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग केवल राजनीतिक वार्ता तक सीमित नहीं रहने वाला है। दोनों देश सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक के साथ-साथ रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भी साझेदारी को जमीन पर उतारने की तैयारी में हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े 10 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ 15 रक्षा कंपनियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इनमें से अधिकांश कंपनियों का प्रतिनिधित्व उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौतों के तहत बेल्जियम की कई रक्षा तकनीकों का भारत में उत्पादन और असेंबली शुरू होने की संभावना है। इनमें रॉकेट, गोला-बारूद, हथियार प्रणालियां, ड्रोन, रडार और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी तकनीक शामिल हैं।
बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक तेजी से उभरती आर्थिक और सैन्य शक्ति बताते हुए कहा, “यूरोप और एशिया की सुरक्षा अब एक-दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती। रूस-यूक्रेन में युद्ध जारी है और वह ईरान तथा उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं चीन हिंद-प्रशांत में लगातार अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। ऐसे में एशिया में होने वाली घटनाओं का असर यूरोप पर और यूरोप की घटनाओं का असर एशिया पर पड़ता है।”
फ्रांकेन के मुताबिक, बेल्जियम जैसे खुले व्यापार वाले देश के लिए दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है इसलिए भारत जैसे मजबूत साझेदार के साथ सैन्य, तकनीकी और औद्योगिक स्तर पर सहयोग बढ़ाना समय की जरूरत है।
भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा रक्षा पहल की नींव पिछले आर्थिक मिशन के दौरान रखी गई थी। उस दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ा और राजनीतिक स्तर पर भी सहयोग के रास्ते खुले।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेल्जियम के प्रधानमंत्री की बैठक और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ पर हस्ताक्षर इस बढ़ते विश्वास को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इस समझौते में दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अधिकारियों का आदान-प्रदान, अनुसंधान एवं विकास, सेमिनार, संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा तैयार किया जाएगा।
दोनों देश रक्षा उद्योग के लिए एक साझा औद्योगिक रोडमैप तैयार करने पर भी काम करेंगे। इसके अलावा बेल्जियम डिफेंस कॉलेज 2027 में अपनी ‘वर्ल्ड स्टडी ट्रिप’ के लिए भारत को मेजबान देश के रूप में चुनने की योजना बना रहा है।
फ्रांकेन ने कहा कि अब अगला चरण सिर्फ घोषणाओं का नहीं, बल्कि संयुक्त प्रशिक्षण, औद्योगिक परियोजनाओं और कंपनियों के लिए वास्तविक कारोबारी अवसर पैदा करने का है।
भारत के रक्षा उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैनुफैक्चर्स (एसआईडीएम) और बेल्जियम के बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (बीएसडीआई) के बीच भी सहयोग समझौता किया जाएगा।
इसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों को भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन परियोजनाओं में भाग लेने का रास्ता आसान करना है।
बेल्जियम का मानना है कि भारत जिस बड़े पैमाने पर अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है, उससे उसकी कंपनियों के लिए लंबे समय के बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
दोनों देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र ‘समुद्री सुरक्षा’ है। भारत अपनी नौसेना की माइन काउंटरमेजर्स क्षमता, स्वायत्त समुद्री प्रणालियों, अंडरवाटर रोबोटिक्स और अत्याधुनिक सेंसरों को मजबूत करना चाहता है।
बंदरगाहों, पाइपलाइनों और समुद्र के भीतर बिछी डेटा केबल जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा भी सहयोग के दायरे में है।
इसके अलावा हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तथा काउंटर-ड्रोन तकनीक में भी बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
बेल्जियम की न्यू लाचौसे और भारत की टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच होने वाली परियोजना सबसे ठोस औद्योगिक समझौतों में से एक है।
इसके तहत दो प्रकार के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता करीब 10 करोड़ राउंड प्रति वर्ष होगी।
परियोजना का अनुमानित मूल्य 5 करोड़ यूरो है और इसकी डिलीवरी 2028 तथा 2029 में निर्धारित की गई है। इसके बाद मशीनरी के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और आधुनिकीकरण में भी बेल्जियम की कंपनी की भूमिका बनी रहेगी।
इसके अलावा दो कंपनियों के बीच हुए सहयोग के तहत बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेट अब भारत में भी असेंबल किए जाएंगे। भारतीय कंपनियां इसकी उत्पादन प्रक्रिया में भाग लेंगी। भारत में पूरी तरह निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है।
एक्सैल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो के बीच सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण है। एलएंडटी भारत के लिए माइन काउंटरमेजर वेसल बना रही है, जबकि एक्सैल इन जहाजों के लिए समुद्री बारूदी सुरंगों को खोजने, पहचानने और निष्क्रिय करने वाली स्वायत्त प्रणालियां उपलब्ध कराएगी।
पहले चरण में 12 जहाजों का कार्यक्रम है, लेकिन भविष्य में यह संख्या 59 तक पहुंच सकती है।
बेल्जियम की एफएन हर्स्टल और कल्याणी स्ट्रेटजिक सिस्टम्स भारत में हथियार तथा काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं तलाशेंगी।
बेल्जियम की ओआईपी सेंसर सिस्टम्स और भारत की सरकारी कंपनी इंडिया ओप्टेल के बीच भी सहयोग जारी है।
ओआईपी पहले ही अर्जुन एमके-I टैंक के लिए 130 से अधिक साइट उपलब्ध करा चुकी है। अर्जुन एमके-II के लिए कंपनी ने नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है, जो लेजर-गाइडेड मिसाइलों को लॉन्च करने में भी सक्षम है।
यह सहयोग भविष्य में भारतीय बख्तरबंद वाहनों के नए संस्करणों और अपग्रेड कार्यक्रमों तक बढ़ सकता है।
वहीं, भारत के हल्के टैंक जोरावर कार्यक्रम में भी बेल्जियम की जॉन कॉकेरिल डिफेंस महत्वपूर्ण भूमिका हासिल करने की कोशिश कर रही है। कंपनी जोरावर के लिए टरेट (टैंक या युद्धपोत पर लगी वह घूमने वाली संरचना जिसमें तोप या मशीन गन फिट होती है) उपलब्ध कराने की दावेदार है।
जोरावर को ऊंचाई वाले इलाकों में सैन्य अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा है और इसका संबंध चीन से लगी भारत की सीमा पर सैन्य क्षमता बढ़ाने से भी है।
बेल्जियम की पिटागन भारत में अपनी मोबाइल बैरियर तकनीक के उत्पादन और बिक्री के लिए क्रिशना एलिड के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित कर रही है। इसमें पिटागन बेल्जिमय की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
कंपनी भारत को केवल घरेलू बाजार के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे बाजारों तक पहुंच बनाने के संभावित केंद्र के रूप में भी देख रही है।
इसी तरह ऑक्टेव और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (भेल) के बीच सहयोग भारत की वायु रक्षा प्रणालियों में पहले से मौजूद है। ऑक्टेव की तकनीक आकाश तीर, अरुधरा, आईपीएसएस और आईएसीसीएस जैसे कार्यक्रमों में इस्तेमाल हो रही है।
वहीं बेल्जियम और भारतीय कंपनियों के बीच समुद्री इंजन क्षेत्र में सहयोग की बातचीत चल रही है। भारतीय कंपनी पहला पूरी तरह भारत में विकसित 6 मेगावाट का समुद्री डीजल इंजन तैयार कर रही है।
भारत और बेल्जियम के बीच यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
बेल्जियम के लिए भारत केवल एक बड़ा रक्षा बाजार नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी बन रहा है। वहीं भारत के लिए बेल्जियम के साथ सहयोग का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इससे अत्याधुनिक यूरोपीय तकनीक के साथ-साथ संयुक्त उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और वैश्विक सप्लाई चेन में नए अवसर खुल सकते हैं।
फ्रांकेन के शब्दों में, दोनों देशों ने भरोसा कायम कर लिया है और अब उस भरोसे को “ठोस सहयोग” में बदलने का समय है।
राजनीति
उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के लिए वोटिंग जारी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह और सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने डाला वोट

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान हो रहा है। सुबह 8 बजे से वोटिंग शुरू हुई है जो शाम 4 बजे तक चलेगी। कई जिलों में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने अपना वोट डाला। वोट डालने के बाद उन्होंने कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि हम शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सभी 11 सीटें जीतेंगे। हमने शिक्षा और शिक्षकों के हितों के लिए लड़ाई लड़ी है और मुझे विश्वास है कि हमें लोगों का भरोसा मिल रहा है।”
लखनऊ में ही समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने भी वोट डाला। लखनऊ स्नातक क्षेत्र से चुनाव लड़ रहीं कांति सिंह ने कृष्णा नगर के विजयनगर स्थित टेक्निकल इंटर कॉलेज में अपना वोट डाला। उन्होंने कहा कि मतदाताओं में उत्साह है, लेकिन कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। इटावा में सैफई ब्लॉक प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की समधन मृदुला यादव ने सैफई ब्लॉक मतदान केंद्र पर स्नातक एमएलसी चुनाव में वोट डाला।
वाराणसी में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 81 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 21 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 34,899 मतदाता वोट डालने के पात्र हैं, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 2,88,567 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
वाराणसी की एसीपी प्रज्ञा पाठक ने बताया, “एमएलसी चुनाव के लिए शुक्रवार सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान हो रहा है। विभिन्न मतदान केंद्रों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, सुरक्षा में पुरुष और महिला दोनों पुलिस अधिकारियों को लगाया गया है।”
हरदोई में लखनऊ शिक्षक और स्नातक विधान परिषद चुनाव के लिए जीआईसी इंटर कॉलेज में मतदान चल रहा है। एक मतदाता ने कहा कि प्रशासन ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है।
गोरखपुर में एमएलसी चुनाव के लिए अलग-अलग मतदान बूथ बनाए गए हैं। मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। मतदाताओं की एंट्री से पहले एक-एक कर चेकिंग की जा रही है और अंदर सिर्फ आधार कार्ड ले जाने की अनुमति है।
रायबरेली में 20 मतदान केंद्र और 61 बूथ बनाए गए हैं। जिले में कुल 29,261 स्नातक मतदाता और 4,384 शिक्षक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्रों पर पुलिसकर्मी तैनात हैं।
हाथरस में आगरा एमएलसी चुनाव के लिए वोटिंग जारी है, जहां शिक्षकों के लिए तीन और स्नातकों के लिए चार मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वहीं प्रयागराज में इलाहाबाद-झांसी स्नातक एमएलसी क्षेत्र के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान हो रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
महाराष्ट्र: मेडिकल कराने आए आरोपी ने महिला डॉक्टर को जड़ा थप्पड़, डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल

महाराष्ट्र के वर्धा से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जिससे डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वर्धा के तलेगांव (शामजी) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच पुलिसकर्मियों के साथ आरोपी कादिर अली रज्जाक को कोर्ट में पेश करने से पहले मेडिकल टेस्ट कराने के लिए लाया गया था।
मेडिकल कराने के दौरान गुस्से में आए आरोपी कादिर अली रज्जाक ने ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। यह पूरी घटना पीएचसी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसका फुटेज अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को तुरंत काबू में किया।
आरोपी के खिलाफ सरकारी कर्मचारी पर हमला और ड्यूटी में बाधा डालने की धाराओं में अलग से मामला दर्ज किया गया है। घटना के बाद वर्धा जिले के डॉक्टरों और मेडिकल एसोसिएशन में भारी नाराजगी है। डॉक्टरों ने आरोपी पर सख्त कार्रवाई और पीएचसी में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
बता दें इससे पहले बीते महीने दही हांडी उत्सव के दौरान मानव पिरामिड बनाते समय घायल हुए लोगों को पालघर के अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की प्रतिक्रिया सामने आई थी।
एकनाथ शिंदे ने इस मामले में शिवसेना पालघर शहर प्रमुख राहुल घरत को पार्टी से निलंबित कर निष्कासित करने की घोषणा की थी। उन्होंने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा था कि डॉक्टरों या अस्पताल कर्मचारियों के साथ मारपीट किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा था, “यदि किसी मरीज के इलाज को लेकर कोई शिकायत थी तो कानूनी रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। कानून को अपने हाथ में लेना गलत है और शिवसेना ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करेगी।”
राष्ट्रीय समाचार
क्या है एक्यूआई और प्रदूषण स्तर बिगड़ने पर कौन सा मास्क रखेगा आपको सुरक्षित

बदलते मौसम और बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच आजकल एक शब्द सबसे अधिक चर्चा में है, एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स)। अब लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है कि वे सुबह उठते ही मौसम की जानकारी के साथ अपने शहर का एक्यूआई स्तर भी जांचते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक्यूआई कैसे निर्धारित किया जाता है और प्रदूषित हवा से बचाव के लिए किस प्रकार का मास्क प्रभावी माना जाता है? सरल शब्दों में कहें तो एक्यूआई एक पैमाना है, जो यह बताता है कि किसी क्षेत्र की हवा कितनी स्वच्छ या प्रदूषित है। इसके आधार पर सरकारी एजेंसियां और संबंधित संस्थान लोगों को वायु गुणवत्ता की स्थिति से अवगत कराते हैं तथा आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं।
एक्यूआई की गणना हवा में मौजूद मुख्य प्रदूषकों के आधार पर की जाती है, जिनमें पीएम 2.5 (धूल और धुएं के बेहद बारीक कण जो सीधे फेफड़ों में जाते हैं), पीएम 10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2), सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2), और कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) शामिल हैं।
सरल और आसान भाषा में समझें तो एक्यूआई का नंबर जितना अधिक होगा, हवा उतनी ही प्रदूषित होगी और स्वास्थ्य पर उसका उतना ही बुरा असर पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय और प्रमुख वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार, एक्यूआई को मुख्य रूप से 6 श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें अच्छा (0 से 50), मध्यम (51 से 100), खराब (101 से 150), अस्वास्थ्यकर (151 से 200), गंभीर (201 से 300), खतरनाक (301 से अधिक) शामिल हैं।
लोग गंभीर स्तर पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन शुरुआती तीन स्तरों को समझना भी बेहद जरूरी है।
अच्छा (0 से 50) : यह सबसे सुरक्षित स्तर है। इस श्रेणी में हवा बिल्कुल स्वच्छ मानी जाती है। प्रदूषण का जोखिम शून्य के बराबर होता है और यह खुली हवा में व्यायाम करने या घूमने के लिए सबसे बेहतरीन समय है।
मध्यम (51 से 100) : इस स्तर पर हवा की गुणवत्ता स्वीकार्य होती है। हालांकि, कुछ प्रदूषकों के कारण उन लोगों को हल्की परेशानी हो सकती है जो वायु प्रदूषण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं (जैसे अस्थमा के गंभीर मरीज)। आम लोगों के लिए यह सामान्य है।
अस्वास्थ्यकर (151 से 200) : यहां से खतरे की घंटी बजनी शुरू होती है। इस स्तर पर संवेदनशील समूहों, जैसे बच्चों, बुजुर्गों, और सांस या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है। स्वस्थ लोगों को भी लंबे समय तक बाहर भारी मेहनत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
प्रदूषण से बचने के लिए लोग मास्क तो खरीदते हैं, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण गलत मास्क लगा लेते हैं। ऐसे में कौन-सा मास्क कब लगाना है, इस बात की भी जानकारी होना बहुत जरूरी है। आमतौर पर मास्क 4 प्रकार के होते हैं, जिनमें कपड़े का मास्क, सर्जिकल मास्क, एन95 / केएन95 मास्क और एन99 / एन100 मास्क शामिल हैं।
कपड़े का मास्क सिर्फ बड़े धूल कणों को रोकता है। वहीं, मुख्यतः डॉक्टर्स द्वारा पहना जाने वाला सर्जिकल मास्क संक्रमण (ड्रॉपलेट्स) रोकने के लिए पहना जाता है।
एन95 / केएन95 मास्क की बात करें, तो यह एक रेस्पिरेटर मास्क है, जो हवा में मौजूद 95 प्रतिशत तक बेहद सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5 को फिल्टर करने की क्षमता रखता है। जबकि एन99 / एन100 मास्क सबसे उच्च श्रेणी का मास्क है, जो 99 प्रतिशत से अधिक प्रदूषक कणों को रोकने में सक्षम है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर मास्क हर समय काम नहीं आता। खास बात यह है कि कपड़े और सर्जिकल मास्क पीएम 2.5 जैसे जहरीले और बारीक कणों को रोकने में पूरी तरह नाकाम होते हैं।
आमतौर पर एक्यूआई 0 से 50 (अच्छा) तक किसी भी मास्क की आवश्यकता नहीं होती है। एक्यूआई 51 से 100 (मध्यम) तक आम लोगों को मास्क की जरूरत नहीं होती, लेकिन यदि आपको धूल से एलर्जी या अस्थमा है, तो बाहर निकलते समय सर्जिकल मास्क या साधारण मास्क लगा सकते हैं।
एक्यूआई 101 से 150 (अस्वास्थ्यकर) तक पहुंचे तो बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को घर से बाहर निकलते समय एन95 या केएन95 मास्क लगाना शुरू कर देना चाहिए।
एक्यूआई 151 से 300 (गंभीर से खतरनाक) की स्थिति में हर व्यक्ति को घर से बाहर कदम रखते ही एन95 मास्क अनिवार्य रूप से पहनना चाहिए। यदि आप ट्रैफिक या ज्यादा धुएं वाले इलाके में हैं, तो वाल्व रहित एन95 मास्क का प्रयोग करें।
एक्यूआई 301 से ज्यादा (खतरनाक) एक हेल्थ इमरजेंसी जैसी स्थिति है। इसमें बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि जाना बेहद जरूरी हो, तो केवल एन99 या अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क ही लगाएं, जो चेहरे को चारों तरफ से सील कर दे।
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