राष्ट्रीय समाचार
भारत-बेल्जियम रक्षा साझेदारी को मिलेगी मजबूती, 10 बड़े समझौतों से बढ़ेगा सैन्य-औद्योगिक सहयोग
भारत और बेल्जियम के बीच रक्षा सहयोग केवल राजनीतिक वार्ता तक सीमित नहीं रहने वाला है। दोनों देश सैन्य प्रशिक्षण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तकनीक के साथ-साथ रक्षा उत्पादन क्षेत्र में भी साझेदारी को जमीन पर उतारने की तैयारी में हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर और रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन की भारत यात्रा के दौरान रक्षा उद्योग से जुड़े 10 प्रमुख समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के साथ 15 रक्षा कंपनियों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। इनमें से अधिकांश कंपनियों का प्रतिनिधित्व उनके मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर रहे हैं। प्रस्तावित समझौतों के तहत बेल्जियम की कई रक्षा तकनीकों का भारत में उत्पादन और असेंबली शुरू होने की संभावना है। इनमें रॉकेट, गोला-बारूद, हथियार प्रणालियां, ड्रोन, रडार और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी तकनीक शामिल हैं।
बेल्जियम के रक्षा एवं विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रांकेन ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक तेजी से उभरती आर्थिक और सैन्य शक्ति बताते हुए कहा, “यूरोप और एशिया की सुरक्षा अब एक-दूसरे से अलग नहीं देखी जा सकती। रूस-यूक्रेन में युद्ध जारी है और वह ईरान तथा उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं चीन हिंद-प्रशांत में लगातार अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है। ऐसे में एशिया में होने वाली घटनाओं का असर यूरोप पर और यूरोप की घटनाओं का असर एशिया पर पड़ता है।”
फ्रांकेन के मुताबिक, बेल्जियम जैसे खुले व्यापार वाले देश के लिए दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा बेहद जरूरी है इसलिए भारत जैसे मजबूत साझेदार के साथ सैन्य, तकनीकी और औद्योगिक स्तर पर सहयोग बढ़ाना समय की जरूरत है।
भारत और बेल्जियम के बीच मौजूदा रक्षा पहल की नींव पिछले आर्थिक मिशन के दौरान रखी गई थी। उस दौरान दोनों देशों की कंपनियों के बीच संपर्क बढ़ा और राजनीतिक स्तर पर भी सहयोग के रास्ते खुले।
अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बेल्जियम के प्रधानमंत्री की बैठक और दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ पर हस्ताक्षर इस बढ़ते विश्वास को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इस समझौते में दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण, अधिकारियों का आदान-प्रदान, अनुसंधान एवं विकास, सेमिनार, संयुक्त सैन्य अभ्यास और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा तैयार किया जाएगा।
दोनों देश रक्षा उद्योग के लिए एक साझा औद्योगिक रोडमैप तैयार करने पर भी काम करेंगे। इसके अलावा बेल्जियम डिफेंस कॉलेज 2027 में अपनी ‘वर्ल्ड स्टडी ट्रिप’ के लिए भारत को मेजबान देश के रूप में चुनने की योजना बना रहा है।
फ्रांकेन ने कहा कि अब अगला चरण सिर्फ घोषणाओं का नहीं, बल्कि संयुक्त प्रशिक्षण, औद्योगिक परियोजनाओं और कंपनियों के लिए वास्तविक कारोबारी अवसर पैदा करने का है।
भारत के रक्षा उद्योग संगठन सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैनुफैक्चर्स (एसआईडीएम) और बेल्जियम के बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री (बीएसडीआई) के बीच भी सहयोग समझौता किया जाएगा।
इसका उद्देश्य दोनों देशों की रक्षा कंपनियों को भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत संयुक्त विकास और उत्पादन परियोजनाओं में भाग लेने का रास्ता आसान करना है।
बेल्जियम का मानना है कि भारत जिस बड़े पैमाने पर अपनी सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहा है, उससे उसकी कंपनियों के लिए लंबे समय के बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं।
दोनों देशों के बीच सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र ‘समुद्री सुरक्षा’ है। भारत अपनी नौसेना की माइन काउंटरमेजर्स क्षमता, स्वायत्त समुद्री प्रणालियों, अंडरवाटर रोबोटिक्स और अत्याधुनिक सेंसरों को मजबूत करना चाहता है।
बंदरगाहों, पाइपलाइनों और समुद्र के भीतर बिछी डेटा केबल जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी संरचनाओं की सुरक्षा भी सहयोग के दायरे में है।
इसके अलावा हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर, कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम तथा काउंटर-ड्रोन तकनीक में भी बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
बेल्जियम की न्यू लाचौसे और भारत की टेंबो क्लासिक इंजीनियरिंग के बीच होने वाली परियोजना सबसे ठोस औद्योगिक समझौतों में से एक है।
इसके तहत दो प्रकार के गोला-बारूद के लिए पूरी उत्पादन लाइन और दो अन्य कैलिबर के लिए उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता करीब 10 करोड़ राउंड प्रति वर्ष होगी।
परियोजना का अनुमानित मूल्य 5 करोड़ यूरो है और इसकी डिलीवरी 2028 तथा 2029 में निर्धारित की गई है। इसके बाद मशीनरी के रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और आधुनिकीकरण में भी बेल्जियम की कंपनी की भूमिका बनी रहेगी।
इसके अलावा दो कंपनियों के बीच हुए सहयोग के तहत बेल्जियम के 70 मिमी रॉकेट अब भारत में भी असेंबल किए जाएंगे। भारतीय कंपनियां इसकी उत्पादन प्रक्रिया में भाग लेंगी। भारत में पूरी तरह निर्मित पहला रॉकेट 2027 की शुरुआत में तैयार होने की उम्मीद है।
एक्सैल बेल्जियम और लार्सन एंड टुब्रो के बीच सहयोग भी बेहद महत्वपूर्ण है। एलएंडटी भारत के लिए माइन काउंटरमेजर वेसल बना रही है, जबकि एक्सैल इन जहाजों के लिए समुद्री बारूदी सुरंगों को खोजने, पहचानने और निष्क्रिय करने वाली स्वायत्त प्रणालियां उपलब्ध कराएगी।
पहले चरण में 12 जहाजों का कार्यक्रम है, लेकिन भविष्य में यह संख्या 59 तक पहुंच सकती है।
बेल्जियम की एफएन हर्स्टल और कल्याणी स्ट्रेटजिक सिस्टम्स भारत में हथियार तथा काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाएं तलाशेंगी।
बेल्जियम की ओआईपी सेंसर सिस्टम्स और भारत की सरकारी कंपनी इंडिया ओप्टेल के बीच भी सहयोग जारी है।
ओआईपी पहले ही अर्जुन एमके-I टैंक के लिए 130 से अधिक साइट उपलब्ध करा चुकी है। अर्जुन एमके-II के लिए कंपनी ने नया फायर-कंट्रोल सिस्टम विकसित किया है, जो लेजर-गाइडेड मिसाइलों को लॉन्च करने में भी सक्षम है।
यह सहयोग भविष्य में भारतीय बख्तरबंद वाहनों के नए संस्करणों और अपग्रेड कार्यक्रमों तक बढ़ सकता है।
वहीं, भारत के हल्के टैंक जोरावर कार्यक्रम में भी बेल्जियम की जॉन कॉकेरिल डिफेंस महत्वपूर्ण भूमिका हासिल करने की कोशिश कर रही है। कंपनी जोरावर के लिए टरेट (टैंक या युद्धपोत पर लगी वह घूमने वाली संरचना जिसमें तोप या मशीन गन फिट होती है) उपलब्ध कराने की दावेदार है।
जोरावर को ऊंचाई वाले इलाकों में सैन्य अभियानों के लिए विकसित किया जा रहा है और इसका संबंध चीन से लगी भारत की सीमा पर सैन्य क्षमता बढ़ाने से भी है।
बेल्जियम की पिटागन भारत में अपनी मोबाइल बैरियर तकनीक के उत्पादन और बिक्री के लिए क्रिशना एलिड के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित कर रही है। इसमें पिटागन बेल्जिमय की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
कंपनी भारत को केवल घरेलू बाजार के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे बाजारों तक पहुंच बनाने के संभावित केंद्र के रूप में भी देख रही है।
इसी तरह ऑक्टेव और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (भेल) के बीच सहयोग भारत की वायु रक्षा प्रणालियों में पहले से मौजूद है। ऑक्टेव की तकनीक आकाश तीर, अरुधरा, आईपीएसएस और आईएसीसीएस जैसे कार्यक्रमों में इस्तेमाल हो रही है।
वहीं बेल्जियम और भारतीय कंपनियों के बीच समुद्री इंजन क्षेत्र में सहयोग की बातचीत चल रही है। भारतीय कंपनी पहला पूरी तरह भारत में विकसित 6 मेगावाट का समुद्री डीजल इंजन तैयार कर रही है।
भारत और बेल्जियम के बीच यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब यूरोप और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
बेल्जियम के लिए भारत केवल एक बड़ा रक्षा बाजार नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार भी बन रहा है। वहीं भारत के लिए बेल्जियम के साथ सहयोग का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इससे अत्याधुनिक यूरोपीय तकनीक के साथ-साथ संयुक्त उत्पादन, तकनीकी हस्तांतरण और वैश्विक सप्लाई चेन में नए अवसर खुल सकते हैं।
फ्रांकेन के शब्दों में, दोनों देशों ने भरोसा कायम कर लिया है और अब उस भरोसे को “ठोस सहयोग” में बदलने का समय है।
राजनीति
रेहान वाड्रा के समर्थन में उतरे आदित्य ठाकरे, बोले-तिरंगे की फोटो हटाने से इनकार करना साहसिक कदम

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और कलाकार रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी को लेकर शुरू हुए विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने रेहान वाड्रा का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज वाली तस्वीरों को हटाने से इनकार कर उन्होंने साहस का परिचय दिया है।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “शाबाश रेहान वाड्रा। ऐसे शासन का सामना करते हुए जो बिना किसी विवरण वाली तस्वीरों से भी डरता है, राष्ट्रीय ध्वज के समर्थन में खड़े रहने और तिरंगे वाली तस्वीरें न हटाने के लिए आपको बधाई।”
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी स्थल के प्रबंधन को यह सोचना चाहिए कि क्या वह वास्तव में भारतीय है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरों को हटाना एक राष्ट्रविरोधी कृत्य है।
आदित्य ठाकरे ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “जब लोकतंत्र को फिर से स्थापित किया जाएगा, तब इस राष्ट्रविरोधी कार्य के लिए प्रबंधन को भारतीय संस्करण के नूर्नबर्ग ट्रायल का सामना करना चाहिए।” दरअसल नूर्नबर्ग ट्रायल वह ऐतिहासिक अदालत थी, जिसने नाजी जर्मनी के शीर्ष नेताओं पर युद्ध अपराध और आक्रामक युद्ध छेड़ने के आरोपों की सुनवाई की गई थी।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने बेटे रेहान वाड्रा के समर्थन में एक्स पर भावनात्मक संदेश साझा किया। इसी पर आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी है।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने लिखा कि जब सत्ता में बैठा व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो वह यह नहीं समझता कि वह जिस शक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा है, उसे पहले ही खो चुका है।”
प्रियंका ने कहा, “सच के साथ खड़े रहो और हर खूबसूरत चीज तुम्हारे पास अपना रास्ता तलाश लेगी। मुझे तुम पर गर्व है और हमेशा रहेगा।”
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब रेहान वाड्रा ने आरोप लगाया कि बीकानेर हाउस प्रशासन ने उनकी एकल फोटो प्रदर्शनी “नो आइडिया इज फाइनल” से 70 से अधिक तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया।
आईएएनएस से बातचीत में रेहान वाड्रा ने कहा कि उन्होंने बीकानेर हाउस की राजनीतिक सामग्री संबंधी नीति का पालन करते हुए ही तस्वीरों का चयन किया था। उनके अनुसार, प्रदर्शनी में कोई राजनीतिक नारे नहीं थे और राजनीतिक नेताओं की तस्वीरें भी बहुत कम थीं।
रेहान वाड्रा ने कहा कि शुरुआत में उन्हें कुछ तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया था और उन्होंने सहयोग की इच्छा भी जताई थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि यदि कोई आपत्ति है तो चार या पांच तस्वीरें हटाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए कारण बताया जाए। उनका आरोप है कि उन्हें कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और बाद में पूरी प्रदर्शनी से 70 तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया।
राजनीति
मध्य प्रदेश: नगर निकाय की खरीद को लेकर एसीएस का वायरल वीडियो विवाद का कारण बना

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मध्य प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे, शहरी स्थानीय निकायों द्वारा की गई खरीद में कथित अनियमितताओं को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाते दिख रहे हैं। इस दौरान वरिष्ठ नौकरशाह ने खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी।
यह वायरल वीडियो भोपाल के भौरी स्थित एक प्रशिक्षण संस्थान में हुई समीक्षा बैठक का बताया जा रहा है। इस बैठक में दुबे ने पिछले तीन वर्षों के दौरान शहरी स्थानीय निकायों द्वारा ‘गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस’ पोर्टल के माध्यम से की गई खरीदारी पर चर्चा की। बैठक में पेश किए गए विश्लेषण के अनुसार, इस अवधि में 374 शहरी स्थानीय निकायों ने पोर्टल के जरिए 1,134 करोड़ रुपए की खरीदारी की।
विश्लेषण में एक जैसी वस्तुओं और उपकरणों की खरीद में कीमतों के बीच भारी अंतर पाया गया।
एक उदाहरण देते हुए दुबे ने बताया कि एक शहरी स्थानीय निकाय ने कचरा उठाने वाला वाहन 2 लाख रुपए में खरीदा, जबकि दूसरे निकाय ने उसी तरह के वाहन के लिए 6 लाख रुपए का भुगतान किया, जिसमें बस एक अतिरिक्त डस्टबिन लगा हुआ था।
विश्लेषण के मुताबिक, अगर ये खरीदारी औसत दरों पर की गई होती तो राज्य सरकार लगभग 250 करोड़ रुपए बचा सकती थी।
यह आंकड़ा संभावित बचत का अनुमान है। इससे यह साबित नहीं होता कि कोई वास्तविक वित्तीय नुकसान हुआ है या भ्रष्टाचार हुआ है।
दुबे ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि इस वर्ष से खरीद प्रक्रिया में कोई अनियमितता पाई जाती है तो उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने शहरी स्थानीय निकायों की खरीद प्रक्रियाओं और सार्वजनिक खर्च की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर कर्ज के बोझ और मुख्यमंत्री के लिए एक विमान खरीदने के प्रस्ताव को लेकर निशाना साधा।
पटवारी ने कहा, “इतिहास इस बात पर शर्मिंदा होगा कि जब मध्य प्रदेश 6 लाख करोड़ रुपए के कर्ज तले दबा हुआ था, तब मुख्यमंत्री अपनी निजी पसंद पूरी करने के लिए एक विमान पर 350 करोड़ रुपए खर्च कर रहे थे।”
उन्होंने भाजपा पर राज्य में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और इसे ‘भ्रष्टाचार का कैंसर’ करार दिया। साथ ही, उन्होंने मांग की कि गांव के सरपंच से लेकर संसद सदस्यों तक, हर स्तर से भाजपा को सत्ता से बाहर किया जाना चाहिए।
शहरी विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने गुरुवार को आईएएनएस के एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अनियमितताओं का पता लगाने के लिए उचित पर्यवेक्षण और नियमित निगरानी जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई की है और आगे भी गलत कामों के खिलाफ उचित कदम उठाती रहेगी।
राजनीति
‘जेल में बंद व्यक्ति हमले की योजना नहीं बना सकता,’ टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले पर बोलीं सुप्रिया सुले

बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी की घटना पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सांसद सुप्रिया ने प्रतिक्रिया दी है। हमले की जिम्मेदारी जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई ने ली है, जिसको लेकर सुप्रिया सुले ने गुरुवार को कहा कि जेल में बंद कोई भी व्यक्ति हमले की योजना नहीं बना सकता और फिर उसकी जिम्मेदारी लेकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकता।
सुप्रिया सुले ने कहा, “मुझे हैरानी हुई क्योंकि न्यूज चैनल और अखबार कहते हैं कि लॉरेंस बिश्नोई जेल में है। फिर भी, वह खुद पोस्ट कर रहा है और कह रहा है कि ‘मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं।’ यह समझना मुश्किल है कि जेल के अंदर बैठा कोई व्यक्ति इस तरह जिम्मेदारी कैसे ले सकता है। यह बहुत उलझन में डालने वाली बात है। जिस तरह से सबको डराया-धमकाया जा रहा है, उसे देखते हुए हम इस बात की जांच की मांग करेंगे कि जेल के अंदर बैठा कोई व्यक्ति यह सब कैसे कर सकता है।”
गुरुवार को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच इस मामले के सिलसिले में चार और आरोपियों, दो महिलाओं, राधा और बबीता, तथा कुणाल और सुमित, को ट्रांजिट रिमांड पर किला कोर्ट लेकर आई।
इस बीच, पुलिस सूत्रों से पता चला है कि हमले से पहले आरोपियों ने मुंबई के पास एक जगह पर शूटिंग (गोली चलाने) का अभ्यास किया था। बताया जा रहा है कि अंधेरी के अपने होटल के कमरे में हथियार की जांच करते समय एक बार गोली गलती से चल भी गई थी (मिसफायर हो गया था)।
खबरों के अनुसार, आरोपी असल में किसी और बॉलीवुड सेलिब्रिटी को निशाना बनाना चाहते थे। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब वे अपने पहले से तय टारगेट तक आसानी से नहीं पहुंच पाए तो उन्होंने टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने का फैसला किया।
बताया जा रहा है कि टाइगर के प्रशंसकों द्वारा सोशल मीडिया रील्स पर शेयर की गई जानकारी से आरोपियों को पता चला कि उस समय टाइगर के पास पुलिस सुरक्षा नहीं थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने उसे निशाना बनाने का फैसला किया।
शुरुआती पूछताछ में यह भी सामने आया है कि टाइगर पर हमले का मकसद इंडस्ट्री में डर फैलाना था।
18 अक्टूबर की शाम को मुंबई के जुहू इलाके में मोटरसाइकिल सवार तीन लोगों ने टाइगर पर गोलियां चलाईं, लेकिन वह बाल-बाल बच गए। इस हमले में अभिनेता को तो कोई चोट नहीं आई, लेकिन उनका ड्राइवर घायल हो गया।
घटना के कुछ ही घंटों के भीतर सोशल मीडिया पर एक वीडियो क्लिप वायरल होने लगी, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग के अनिल पंडित होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने गोलीबारी की जिम्मेदारी ली। उसने कहा कि यह अभिनेता के लिए एक चेतावनी थी कि वे सुपरस्टार सलमान खान के साथ काम करना बंद कर दें।
घटना के कुछ ही घंटों के अंदर, राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
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