राजनीति
उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के लिए वोटिंग जारी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह और सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने डाला वोट
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान हो रहा है। सुबह 8 बजे से वोटिंग शुरू हुई है जो शाम 4 बजे तक चलेगी। कई जिलों में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने अपना वोट डाला। वोट डालने के बाद उन्होंने कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि हम शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सभी 11 सीटें जीतेंगे। हमने शिक्षा और शिक्षकों के हितों के लिए लड़ाई लड़ी है और मुझे विश्वास है कि हमें लोगों का भरोसा मिल रहा है।”
लखनऊ में ही समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने भी वोट डाला। लखनऊ स्नातक क्षेत्र से चुनाव लड़ रहीं कांति सिंह ने कृष्णा नगर के विजयनगर स्थित टेक्निकल इंटर कॉलेज में अपना वोट डाला। उन्होंने कहा कि मतदाताओं में उत्साह है, लेकिन कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। इटावा में सैफई ब्लॉक प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की समधन मृदुला यादव ने सैफई ब्लॉक मतदान केंद्र पर स्नातक एमएलसी चुनाव में वोट डाला।
वाराणसी में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 81 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 21 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 34,899 मतदाता वोट डालने के पात्र हैं, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 2,88,567 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
वाराणसी की एसीपी प्रज्ञा पाठक ने बताया, “एमएलसी चुनाव के लिए शुक्रवार सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान हो रहा है। विभिन्न मतदान केंद्रों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, सुरक्षा में पुरुष और महिला दोनों पुलिस अधिकारियों को लगाया गया है।”
हरदोई में लखनऊ शिक्षक और स्नातक विधान परिषद चुनाव के लिए जीआईसी इंटर कॉलेज में मतदान चल रहा है। एक मतदाता ने कहा कि प्रशासन ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है।
गोरखपुर में एमएलसी चुनाव के लिए अलग-अलग मतदान बूथ बनाए गए हैं। मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। मतदाताओं की एंट्री से पहले एक-एक कर चेकिंग की जा रही है और अंदर सिर्फ आधार कार्ड ले जाने की अनुमति है।
रायबरेली में 20 मतदान केंद्र और 61 बूथ बनाए गए हैं। जिले में कुल 29,261 स्नातक मतदाता और 4,384 शिक्षक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्रों पर पुलिसकर्मी तैनात हैं।
हाथरस में आगरा एमएलसी चुनाव के लिए वोटिंग जारी है, जहां शिक्षकों के लिए तीन और स्नातकों के लिए चार मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वहीं प्रयागराज में इलाहाबाद-झांसी स्नातक एमएलसी क्षेत्र के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान हो रहा है।
राजनीति
कांग्रेस ने पांच राज्यों के लिए वॉर रूम चेयरपर्सन नियुक्त किए, विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने पांच राज्यों के लिए चुनाव वॉर रूम के चेयरपर्सन की नियुक्ति की है। यह नियुक्तियां तुरंत प्रभाव से लागू होंगी।
शनिवार को जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, इन नियुक्तियों के प्रस्ताव को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंजूरी दी है। ये चेयरपर्सन संबंधित राज्यों में पार्टी के चुनाव वॉर रूम के कामकाज की निगरानी करेंगे।
नियुक्त किए गए नामों में उत्तर प्रदेश के लिए सचिन यादव, पंजाब के लिए कन्नन गोपीनाथन, गोवा के लिए इमरोज खान, मणिपुर के लिए बिस्वरंजन मोहंती और उत्तराखंड के लिए कृष्ण सत्रोड़ शामिल हैं। पार्टी ने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के तहत इन नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से मंजूरी दी गई है।
बता दें कि चुनावी वॉर रूम प्रचार से जुड़ी गतिविधियों में समन्वय, संचार प्रबंधन, राजनीतिक घटनाक्रमों की निगरानी और चुनाव के दौरान पार्टी इकाइयों के बीच तालमेल बैठाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन नियुक्तियों से पांचों राज्यों में कांग्रेस की संगठनात्मक और चुनाव प्रचार की तैयारियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह घोषणा 24 अक्टूबर की आधिकारिक प्रेस रिलीज के माध्यम से की गई थी।
इस बीच, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार को कहा था कि पार्टी ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के वरिष्ठ नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। यह बैठक 1 नवंबर को नई दिल्ली में ‘वोट चोरी’ के खिलाफ इंडिया ब्लॉक की मेगा रैली के लिए लामबंदी तेज करने को लेकर की गई थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के लिए एआईसीसी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना और राज्य के अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की और रैली में बड़े पैमाने पर भागीदारी के लिए रणनीतियों पर चर्चा की।
इसी तरह हरियाणा के लिए एआईसीसी प्रभारी संजय दत्त, हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह और हरियाणा के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी एक अलग बैठक हुई ताकि उस राज्य में संगठनात्मक प्रयासों को मजबूत किया जा सके।
राष्ट्रीय समाचार
तेलंगाना: 326 करोड़ बैंक फ्रॉड मामले में ईडी ने केवीपीएल से जुड़े 7 ठिकानों पर मारा छापा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने शुक्रवार को तेलंगाना के हैदराबाद, सिकंदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरी में स्थित 7 ठिकानों पर ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया। जिन जगहों पर तलाशी ली गई, उनमें मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (केवीपीएल) के रजिस्टर्ड ऑफिस, इसके निदेशकों के आवास और उन संस्थाओं व व्यक्तियों के ठिकाने शामिल हैं, जिन्होंने बैंक फंड को दूसरी जगह भेजने (डायवर्जन) में मदद की थी।
यह तलाशी मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके निदेशकों द्वारा क्रेडिट सुविधाओं के कथित डायवर्जन की चल रही जांच के सिलसिले में की गई। ईडी की यह जांच पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीई) द्वारा 8 दिसंबर 2022 में दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। एफआईआर में मेसर्स केवीपीएल के निदेशकों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
यह मामला पंजाब नेशनल बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह (आईडीबीआईबैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा) के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिससे 326.49 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
ईडी की जांच से पता चला है कि केवीपीएल को दी गई बैंक गारंटी और लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधाओं का गलत इस्तेमाल किया गया। साथ ही, फंड को संबंधित संस्थाओं और बिचौलियों के जरिए दूसरी जगह भेज दिया गया। इसमें स्टील खरीद के फर्जी इनवॉइस और ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया था। यह भी पता चला है कि केवीपीएल ने कर्ज देने वाले बैंकों की जानकारी के बिना, कंसोर्टियम व्यवस्था के बाहर बैंक खाते चलाए थे।
तलाशी अभियान के दौरान फंड को इधर-उधर करने (डायवर्जन) और उसे छिपाने (लेयरिंग) से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया। इसके अलावा, 15 लाख रुपये की बिना हिसाब-किताब वाली नकदी भी जब्त की गई। साथ ही, कई अचल संपत्तियों और निवेशों की भी पहचान की गई है। आगे की जांच चल रही है।
राजनीति
पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने शहरी निकाय चुनावों में सीट बंटवारे की संभावना से किया इनकार

पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने अगले महीने होने वाले राज्य के सात शहरी निकायों के चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट या माकपा (सीपीआई-एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा अथवा किसी भी दल के साथ सीट साझेदारी की संभावना से साफ तौर पर इनकार कर दिया है।
पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (डब्ल्यूबीपीसीसी) के सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की ओर से सीट बंटवारे की संभावना को लेकर अनौपचारिक संकेत दिए गए थे लेकिन राज्य कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।
राज्य कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि आगामी शहरी निकाय चुनाव ऐसे किसी प्रयोग के लिए उपयुक्त मंच नहीं हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार के अनुसार, आगामी नगर निकाय चुनावों के लिए किसी भी प्रकार का सीट साझा समझौता अर्थहीन होगा क्योंकि पिछले अनुभव बताते हैं कि सत्तारूढ़ दल और राज्य प्रशासन के संयुक्त प्रभाव के कारण स्थानीय निकाय चुनाव अक्सर एक औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
उन्होंने कहा, “इस बार भी स्थिति अलग नहीं होगी और पूरी संभावना है कि इन सात नगर निकायों के अधिकांश वार्डों में भाजपा उम्मीदवार अपने प्रभाव का लाभ उठाकर जीत हासिल करेंगे। ऐसे में भाजपा यह दावा कर सकेगी कि संयुक्त विपक्ष के खिलाफ उसे जनता का स्वतःस्फूर्त समर्थन मिला है। इसलिए शहरी निकाय चुनाव सीट साझेदारी के प्रयोग के लिए उचित अवसर नहीं हैं।”
वहीं, माकपा नेतृत्व ने भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) का हिस्सा होने के बावजूद स्थानीय निकाय चुनावों में वाम मोर्चा किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ सीट बंटवारा किए बिना स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगा।
माकपा की केंद्रीय समिति के एक सदस्य ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, “तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट के साथ सीट साझेदारी का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही, इस समय कांग्रेस के साथ भी किसी प्रकार की समझदारी वांछनीय नहीं है क्योंकि हमारा मानना है कि आगामी शहरी निकाय चुनाव हमारी संगठनात्मक ताकत का आकलन करने का सबसे अच्छा अवसर हैं।”
इस बीच, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के गुट ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह आगामी शहरी निकाय चुनाव किसी भी दल के साथ समझौता किए बिना लड़ेगा।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हुए 20 लोकसभा सदस्यों का समूह, जो स्वयं को भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा बताता है, नगर निकाय चुनावों के लिए भाजपा के साथ सीट साझेदारी का इच्छुक है।
कोलकाता और हावड़ा नगर निगम सहित सात शहरी निकायों के चुनावों का संभावित कार्यक्रम नवंबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है जबकि परिणाम दिसंबर के पहले सप्ताह में घोषित किए जाने की संभावना है।
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