राष्ट्रीय समाचार
महाराष्ट्र: मेडिकल कराने आए आरोपी ने महिला डॉक्टर को जड़ा थप्पड़, डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल
महाराष्ट्र के वर्धा से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जिससे डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। वर्धा के तलेगांव (शामजी) प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पांच पुलिसकर्मियों के साथ आरोपी कादिर अली रज्जाक को कोर्ट में पेश करने से पहले मेडिकल टेस्ट कराने के लिए लाया गया था।
मेडिकल कराने के दौरान गुस्से में आए आरोपी कादिर अली रज्जाक ने ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। यह पूरी घटना पीएचसी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसका फुटेज अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घटना के बाद पुलिस ने आरोपी को तुरंत काबू में किया।
आरोपी के खिलाफ सरकारी कर्मचारी पर हमला और ड्यूटी में बाधा डालने की धाराओं में अलग से मामला दर्ज किया गया है। घटना के बाद वर्धा जिले के डॉक्टरों और मेडिकल एसोसिएशन में भारी नाराजगी है। डॉक्टरों ने आरोपी पर सख्त कार्रवाई और पीएचसी में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
बता दें इससे पहले बीते महीने दही हांडी उत्सव के दौरान मानव पिरामिड बनाते समय घायल हुए लोगों को पालघर के अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की प्रतिक्रिया सामने आई थी।
एकनाथ शिंदे ने इस मामले में शिवसेना पालघर शहर प्रमुख राहुल घरत को पार्टी से निलंबित कर निष्कासित करने की घोषणा की थी। उन्होंने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा था कि डॉक्टरों या अस्पताल कर्मचारियों के साथ मारपीट किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा था, “यदि किसी मरीज के इलाज को लेकर कोई शिकायत थी तो कानूनी रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। कानून को अपने हाथ में लेना गलत है और शिवसेना ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करेगी।”
राजनीति
उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के लिए वोटिंग जारी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह और सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने डाला वोट

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के लिए शुक्रवार को मतदान हो रहा है। सुबह 8 बजे से वोटिंग शुरू हुई है जो शाम 4 बजे तक चलेगी। कई जिलों में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने अपना वोट डाला। वोट डालने के बाद उन्होंने कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि हम शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सभी 11 सीटें जीतेंगे। हमने शिक्षा और शिक्षकों के हितों के लिए लड़ाई लड़ी है और मुझे विश्वास है कि हमें लोगों का भरोसा मिल रहा है।”
लखनऊ में ही समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने भी वोट डाला। लखनऊ स्नातक क्षेत्र से चुनाव लड़ रहीं कांति सिंह ने कृष्णा नगर के विजयनगर स्थित टेक्निकल इंटर कॉलेज में अपना वोट डाला। उन्होंने कहा कि मतदाताओं में उत्साह है, लेकिन कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं। इटावा में सैफई ब्लॉक प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की समधन मृदुला यादव ने सैफई ब्लॉक मतदान केंद्र पर स्नातक एमएलसी चुनाव में वोट डाला।
वाराणसी में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 81 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 21 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 34,899 मतदाता वोट डालने के पात्र हैं, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 2,88,567 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।
वाराणसी की एसीपी प्रज्ञा पाठक ने बताया, “एमएलसी चुनाव के लिए शुक्रवार सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान हो रहा है। विभिन्न मतदान केंद्रों पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं, सुरक्षा में पुरुष और महिला दोनों पुलिस अधिकारियों को लगाया गया है।”
हरदोई में लखनऊ शिक्षक और स्नातक विधान परिषद चुनाव के लिए जीआईसी इंटर कॉलेज में मतदान चल रहा है। एक मतदाता ने कहा कि प्रशासन ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है।
गोरखपुर में एमएलसी चुनाव के लिए अलग-अलग मतदान बूथ बनाए गए हैं। मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। मतदाताओं की एंट्री से पहले एक-एक कर चेकिंग की जा रही है और अंदर सिर्फ आधार कार्ड ले जाने की अनुमति है।
रायबरेली में 20 मतदान केंद्र और 61 बूथ बनाए गए हैं। जिले में कुल 29,261 स्नातक मतदाता और 4,384 शिक्षक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए केंद्रों पर पुलिसकर्मी तैनात हैं।
हाथरस में आगरा एमएलसी चुनाव के लिए वोटिंग जारी है, जहां शिक्षकों के लिए तीन और स्नातकों के लिए चार मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वहीं प्रयागराज में इलाहाबाद-झांसी स्नातक एमएलसी क्षेत्र के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान हो रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
क्या है एक्यूआई और प्रदूषण स्तर बिगड़ने पर कौन सा मास्क रखेगा आपको सुरक्षित

बदलते मौसम और बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच आजकल एक शब्द सबसे अधिक चर्चा में है, एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स)। अब लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है कि वे सुबह उठते ही मौसम की जानकारी के साथ अपने शहर का एक्यूआई स्तर भी जांचते हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक्यूआई कैसे निर्धारित किया जाता है और प्रदूषित हवा से बचाव के लिए किस प्रकार का मास्क प्रभावी माना जाता है? सरल शब्दों में कहें तो एक्यूआई एक पैमाना है, जो यह बताता है कि किसी क्षेत्र की हवा कितनी स्वच्छ या प्रदूषित है। इसके आधार पर सरकारी एजेंसियां और संबंधित संस्थान लोगों को वायु गुणवत्ता की स्थिति से अवगत कराते हैं तथा आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं।
एक्यूआई की गणना हवा में मौजूद मुख्य प्रदूषकों के आधार पर की जाती है, जिनमें पीएम 2.5 (धूल और धुएं के बेहद बारीक कण जो सीधे फेफड़ों में जाते हैं), पीएम 10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2), सल्फर डाइऑक्साइड (एसओ2), और कार्बन मोनोऑक्साइड (सीओ) शामिल हैं।
सरल और आसान भाषा में समझें तो एक्यूआई का नंबर जितना अधिक होगा, हवा उतनी ही प्रदूषित होगी और स्वास्थ्य पर उसका उतना ही बुरा असर पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय और प्रमुख वायु गुणवत्ता मानकों के अनुसार, एक्यूआई को मुख्य रूप से 6 श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें अच्छा (0 से 50), मध्यम (51 से 100), खराब (101 से 150), अस्वास्थ्यकर (151 से 200), गंभीर (201 से 300), खतरनाक (301 से अधिक) शामिल हैं।
लोग गंभीर स्तर पर ही ध्यान देते हैं, लेकिन शुरुआती तीन स्तरों को समझना भी बेहद जरूरी है।
अच्छा (0 से 50) : यह सबसे सुरक्षित स्तर है। इस श्रेणी में हवा बिल्कुल स्वच्छ मानी जाती है। प्रदूषण का जोखिम शून्य के बराबर होता है और यह खुली हवा में व्यायाम करने या घूमने के लिए सबसे बेहतरीन समय है।
मध्यम (51 से 100) : इस स्तर पर हवा की गुणवत्ता स्वीकार्य होती है। हालांकि, कुछ प्रदूषकों के कारण उन लोगों को हल्की परेशानी हो सकती है जो वायु प्रदूषण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं (जैसे अस्थमा के गंभीर मरीज)। आम लोगों के लिए यह सामान्य है।
अस्वास्थ्यकर (151 से 200) : यहां से खतरे की घंटी बजनी शुरू होती है। इस स्तर पर संवेदनशील समूहों, जैसे बच्चों, बुजुर्गों, और सांस या दिल की बीमारी से जूझ रहे लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो सकती है। स्वस्थ लोगों को भी लंबे समय तक बाहर भारी मेहनत करने से बचने की सलाह दी जाती है।
प्रदूषण से बचने के लिए लोग मास्क तो खरीदते हैं, लेकिन सही जानकारी न होने के कारण गलत मास्क लगा लेते हैं। ऐसे में कौन-सा मास्क कब लगाना है, इस बात की भी जानकारी होना बहुत जरूरी है। आमतौर पर मास्क 4 प्रकार के होते हैं, जिनमें कपड़े का मास्क, सर्जिकल मास्क, एन95 / केएन95 मास्क और एन99 / एन100 मास्क शामिल हैं।
कपड़े का मास्क सिर्फ बड़े धूल कणों को रोकता है। वहीं, मुख्यतः डॉक्टर्स द्वारा पहना जाने वाला सर्जिकल मास्क संक्रमण (ड्रॉपलेट्स) रोकने के लिए पहना जाता है।
एन95 / केएन95 मास्क की बात करें, तो यह एक रेस्पिरेटर मास्क है, जो हवा में मौजूद 95 प्रतिशत तक बेहद सूक्ष्म कणों (पीएम 2.5 को फिल्टर करने की क्षमता रखता है। जबकि एन99 / एन100 मास्क सबसे उच्च श्रेणी का मास्क है, जो 99 प्रतिशत से अधिक प्रदूषक कणों को रोकने में सक्षम है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर मास्क हर समय काम नहीं आता। खास बात यह है कि कपड़े और सर्जिकल मास्क पीएम 2.5 जैसे जहरीले और बारीक कणों को रोकने में पूरी तरह नाकाम होते हैं।
आमतौर पर एक्यूआई 0 से 50 (अच्छा) तक किसी भी मास्क की आवश्यकता नहीं होती है। एक्यूआई 51 से 100 (मध्यम) तक आम लोगों को मास्क की जरूरत नहीं होती, लेकिन यदि आपको धूल से एलर्जी या अस्थमा है, तो बाहर निकलते समय सर्जिकल मास्क या साधारण मास्क लगा सकते हैं।
एक्यूआई 101 से 150 (अस्वास्थ्यकर) तक पहुंचे तो बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को घर से बाहर निकलते समय एन95 या केएन95 मास्क लगाना शुरू कर देना चाहिए।
एक्यूआई 151 से 300 (गंभीर से खतरनाक) की स्थिति में हर व्यक्ति को घर से बाहर कदम रखते ही एन95 मास्क अनिवार्य रूप से पहनना चाहिए। यदि आप ट्रैफिक या ज्यादा धुएं वाले इलाके में हैं, तो वाल्व रहित एन95 मास्क का प्रयोग करें।
एक्यूआई 301 से ज्यादा (खतरनाक) एक हेल्थ इमरजेंसी जैसी स्थिति है। इसमें बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि जाना बेहद जरूरी हो, तो केवल एन99 या अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क ही लगाएं, जो चेहरे को चारों तरफ से सील कर दे।
राजनीति
रेहान वाड्रा के समर्थन में उतरे आदित्य ठाकरे, बोले-तिरंगे की फोटो हटाने से इनकार करना साहसिक कदम

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और कलाकार रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी को लेकर शुरू हुए विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने रेहान वाड्रा का समर्थन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ध्वज वाली तस्वीरों को हटाने से इनकार कर उन्होंने साहस का परिचय दिया है।
आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “शाबाश रेहान वाड्रा। ऐसे शासन का सामना करते हुए जो बिना किसी विवरण वाली तस्वीरों से भी डरता है, राष्ट्रीय ध्वज के समर्थन में खड़े रहने और तिरंगे वाली तस्वीरें न हटाने के लिए आपको बधाई।”
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी स्थल के प्रबंधन को यह सोचना चाहिए कि क्या वह वास्तव में भारतीय है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज की तस्वीरों को हटाना एक राष्ट्रविरोधी कृत्य है।
आदित्य ठाकरे ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “जब लोकतंत्र को फिर से स्थापित किया जाएगा, तब इस राष्ट्रविरोधी कार्य के लिए प्रबंधन को भारतीय संस्करण के नूर्नबर्ग ट्रायल का सामना करना चाहिए।” दरअसल नूर्नबर्ग ट्रायल वह ऐतिहासिक अदालत थी, जिसने नाजी जर्मनी के शीर्ष नेताओं पर युद्ध अपराध और आक्रामक युद्ध छेड़ने के आरोपों की सुनवाई की गई थी।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपने बेटे रेहान वाड्रा के समर्थन में एक्स पर भावनात्मक संदेश साझा किया। इसी पर आदित्य ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी है।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने लिखा कि जब सत्ता में बैठा व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो वह यह नहीं समझता कि वह जिस शक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा है, उसे पहले ही खो चुका है।”
प्रियंका ने कहा, “सच के साथ खड़े रहो और हर खूबसूरत चीज तुम्हारे पास अपना रास्ता तलाश लेगी। मुझे तुम पर गर्व है और हमेशा रहेगा।”
यह विवाद तब शुरू हुआ, जब रेहान वाड्रा ने आरोप लगाया कि बीकानेर हाउस प्रशासन ने उनकी एकल फोटो प्रदर्शनी “नो आइडिया इज फाइनल” से 70 से अधिक तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया।
आईएएनएस से बातचीत में रेहान वाड्रा ने कहा कि उन्होंने बीकानेर हाउस की राजनीतिक सामग्री संबंधी नीति का पालन करते हुए ही तस्वीरों का चयन किया था। उनके अनुसार, प्रदर्शनी में कोई राजनीतिक नारे नहीं थे और राजनीतिक नेताओं की तस्वीरें भी बहुत कम थीं।
रेहान वाड्रा ने कहा कि शुरुआत में उन्हें कुछ तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया था और उन्होंने सहयोग की इच्छा भी जताई थी। उन्होंने सुझाव दिया था कि यदि कोई आपत्ति है तो चार या पांच तस्वीरें हटाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए कारण बताया जाए। उनका आरोप है कि उन्हें कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया और बाद में पूरी प्रदर्शनी से 70 तस्वीरें हटाने के लिए कहा गया।
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