राजनीति
जीडीपी के 7.8 प्रतिशत ग्रोथ को लेकर शरद पवार ने सरकार पर निशाना साधा, बोले- वे असल समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए जीडीपी ग्रोथ को लेकर सांख्यिकीय तरीकों में ‘हेरफेर’ का आरोप लगाया।
शरद पवार ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार की ओर से अप्रैल-जून तिमाही के लिए 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ रेट की हालिया घोषणा का जिक्र करते हुए कहा कि ये आंकड़े मजबूत आर्थिक स्थिति का संकेत हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश की आर्थिक स्थिरता के बारे में गलत नैरेटिव बना रही है।
पवार ने कहा, “प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था की स्थिति को बहुत अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे असल समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे यह समझने में नाकाम रहे हैं कि अर्थव्यवस्था असल में धीमी हो रही है।” उन्होंने प्रधानमंत्री पर यह आरोप भी लगाया कि वे घरेलू मुद्दों, जैसे कि तेजी से बढ़ती महंगाई और परिवारों की घटती बचत से लोगों का ध्यान हटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। पवार ने कई जरूरी क्षेत्रीय और कृषि संबंधी मुद्दों पर भी चिंता जताई।
चीनी की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने कहा कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। उन्होंने चीनी के आयात के खिलाफ सलाह देते हुए कहा कि इसके असर के बारे में कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता।
दूसरी ओर, उन्होंने महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे की ओर से डेयरी सेक्टर में मिलावट के खिलाफ हाल ही में चलाए गए सख्त अभियानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भले ही दूध की कीमतें 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं, लेकिन ग्राहक बेहतर क्वालिटी के लिए ज्यादा पैसे देने को तैयार हैं, जिससे अंततः उत्पादकों को फायदा हो रहा है।
महाराष्ट्र में बारिश की भारी कमी का जिक्र करते हुए पवार ने पीने के पानी और बुवाई के कामों को लेकर आने वाले संकट के बारे में चेतावनी दी और सामूहिक राहत प्रयासों की अपील की। उन्होंने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 16 अक्टूबर के आसपास बारामती आने की संभावना है, जहां उन्हें स्थानीय पहलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
छात्रों के विरोध-प्रदर्शन और शिवसेना पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर चल रही सुनवाई के बारे में सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का जक्र करते हुए पवार ने कहा कि न्यायपालिका की सख़्त चेतावनियाँ सरकार के फ़ैसले लेने के गलत तरीके को उजागर करती हैं।
जीडीपी ग्रोथ के आंकड़ों को लेकर एनसीपी (एसपी) का केंद्र सरकार पर निशाना साधना ऐसे समय में हुआ है जब कांग्रेस पार्टी ने जीडीपी की गणना के बदले हुए तरीके पर सवाल उठाते हुए सरकार पर हमला तेजे कर दिया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार सिर्फ “आंकड़ों का खेल” खेल रही है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग समेत कई अर्थशास्त्रियों ने जीडीपी की गणना के तरीके में बदलाव पर आपत्ति जताई है और कहा है कि मौजूदा तरीके से ग्रोथ रेट बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है।
हालांकि, केंद्र सरकार और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने विपक्ष के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस भारत की आर्थिक प्रगति और विकास की रफ्तार को पचा नहीं पा रही है। इसके अलावा, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने अपने डेटा इकट्ठा करने और गणना करने के तरीकों का बचाव करते हुए कहा कि 7.8 प्रतिशत विकास दर का आंकड़ा तिमाही आर्थिक प्रदर्शन को सही ढंग से दिखाता है।
राष्ट्रीय समाचार
अभिजीत दिपके का भाजपा पर हमला: ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का क्यों हो जाता है विरोध? बोले- हम छात्रों की ‘ए टीम’ हैं

कॉकरोच जनता पार्टी के अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बेहतर स्कूल और शिक्षा का मुद्दा किसी एक राजनीतिक पार्टी या संगठन का मुद्दा नहीं है, बल्कि देश के हर बच्चे के भविष्य से जुड़ा सवाल है।
अभिजीत दिपके ने कहा कि आम आदमी पार्टी के साथ-साथ महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी भी स्कूलों को बेहतर बनाने की बात कर रही हैं। ऐसे में जो भी लोग चाहते हैं कि देश के स्कूल अच्छे हों, उनका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भी स्कूलों को बेहतर बनाने की बात होती है, तो बीजेपी के लोग इसका विरोध क्यों करने लगते हैं। क्या बीजेपी को नहीं लगता कि शिक्षा महत्वपूर्ण है और देश के भविष्य के लिए अच्छे स्कूल जरूरी हैं?
अभिजीत दिपके पर आम आदमी पार्टी की ‘बी टीम’ होने और अरविंद केजरीवाल से फंडिंग मिलने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोग उन्हें अलग-अलग पार्टियों की ‘बी टीम’ बताते हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उन्हें कांग्रेस की ‘बी टीम’ बताते हैं, जबकि कुछ लोग अरविंद केजरीवाल की ‘बी टीम’ होने का आरोप लगाते हैं।
अभिजीत ने तंज कसते हुए कहा कि सभी लोग एक साथ बैठकर यह तय कर लें कि आखिर वह किसकी ‘बी टीम’ हैं। उन्होंने कहा, “हम किसी पार्टी की ‘बी टीम’ नहीं हैं, हमारे हिसाब से हम स्टूडेंट्स की ‘ए टीम’ हैं।”
अभिजीत दिपके की शैक्षणिक योग्यता और डिग्री को लेकर उठ रहे सवालों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग सार्वजनिक जीवन में हैं, उनकी डिग्री और शिक्षा को लेकर सवाल पूछे जा सकते हैं। खास तौर पर चुनाव लड़ने वाले लोगों और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल होना चाहिए।
देश के कई सांसदों की ओर से स्वर्ण समाज के लिए आयोग बनाने की मांग पर अभिजीत दिपके ने कहा कि यह मांग करने वालों को अपनी बात रखने का अधिकार है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का सर्विसेज पीएमआई अगस्त में बढ़कर 54.1 रहा, रोजगार वृद्धि 15 महीनों के उच्च स्तर पर

भारत के सर्विसेज सेक्टर में अगस्त में जोरदार वृद्धि देखने को मिली है और एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है। इससे रोजगार वृद्धि भी 15 महीनों के उच्च स्तर पर रही है। यह जानकारी गुरुवार को जारी एक निजी सर्वेक्षण में दी गई।
इससे पहले जुलाई में एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई 53.3 पर था।
सर्वेक्षण में सेवा प्रदाताओं ने बढ़त की वजह अच्छी मांग और बाजार पहलों से नए बिजनेस में वृद्धि होने को बताया है। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से मांग भी बनी रही है और नए निर्यात ऑर्डर करीब जुलाई के समान ही बढ़े हैं।
एचएसबीसी के डेटा के मुताबिक, अगस्त में भारतीय सेवा प्रदाताओं को ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, जापान, मलेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और यूएई से नए निर्यात ऑर्डर मिले थे।
इसके अलावा, भारत की सेवा अर्थव्यवस्था में रोजगार तेजी से बढ़ा है। सर्वेक्षण में शामिल लगभग 11 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनके यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ी है। साथ ही, पिछले 15 महीनों में नौकरी पैदा होने की दर सबसे ज्यादा रही, क्योंकि कंपनियां अपनी कस्टमर सर्विस, सेल्स और डिजिटल ऑपरेशन को बेहतर बना रही हैं।
एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगस्त में सर्विस सेक्टर की गतिविधियां तेजी से बढ़ीं, जिसमें बेहतर आउटपुट और नए बिजनेस का योगदान रहा।
भंडारी ने कहा, “रोजगार में तेजी से बढ़ोतरी हुई और नौकरियां पैदा होने का आंकड़ा 15 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।” उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों का दबाव बहुत कम बढ़ा।
इसके अलावा, अगस्त में एचएसबीसी इंडिया कम्पोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स 54.3 पर रहा, जो जुलाई के बराबर ही है, क्योंकि सर्विस सेक्टर में तेज ग्रोथ ने मैन्युफैक्चरिंग में आई सुस्ती की भरपाई कर दी।
एचएसबीसी के डेटा से यह भी पता चला कि कुल रोजगार में 14 महीनों में सबसे तेजी से बढ़ोतरी हुई। सर्विस सेक्टर में जबरदस्त हायरिंग ने मैन्युफैक्चरिंग में रोजगार की कमी की भरपाई से कहीं ज्यादा असर दिखाया है।
कुल नए ऑर्डर की मात्रा में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि कम्पोजिट इनपुट लागत महंगाई सात महीने के निचले स्तर पर आ गई है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: चीनी मिलों के लिए राहत पैकेज, सरकार लाएगी 2,000 करोड़ की आसान ऋण योजना

महाराष्ट्र सरकार की ओर से सहकारी चीनी मिलों के लिए आसान लोन योजना और बाय प्रोडक्ट पॉलिसी लाई जाएगी। सहकारी चीनी मिलों को आर्थिक स्थिरता देने और गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार केंद्र सरकार की पॉलिसी के आधार पर एक सॉफ्ट लोन स्कीम शुरू करने जा रही है।
डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के सामने तुरंत एक औपचारिक प्रस्ताव पेश करें। प्रस्तावित योजना के तहत, योग्य सहकारी चीनी मिलों को लगभग 2,000 करोड़ का कम ब्याज वाला सॉफ्ट लोन फंड मिल सकेगा। इन लोन को चुकाने के लिए 7 साल का समय मिलेगा और राज्य सरकार सालाना लगभग 100 करोड़ रुपए का ब्याज का बोझ उठाएगी।
यह फंड हर फैक्ट्री की गन्ना पेराई क्षमता और आर्थिक स्थिति की समीक्षा के बाद डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (डीसीसीबी) और महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (एमएससीबी) के जरिए दिया जाएगा। सरकार की ओर से यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है कि जब राज्य की चीनी मिलें भारी आर्थिक संकट से जूझ रही हैं और उन पर पिछले पेराई सीजन का किसानों का लगभग 200 करोड़ का बकाया है। इस फंड से मिलों को बकाया चुकाने और आने वाले पेराई सीजन के लिए आसानी से तैयारी करने में मदद मिलेगी।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने चीनी उद्योग की कच्ची चीनी उत्पादन पर निर्भरता कम करने और उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए चीनी उप-उत्पादों पर केंद्रित एक स्वतंत्र और व्यापक नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस रोडमैप का उद्देश्य सौर ऊर्जा, को-जनरेशन बिजली, प्रथम और द्वितीय पीढ़ी (1जी और 2 जी) एथेनॉल, कंप्रेस्ड बायो-गैस (सीबीजी), ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) जैसे वैकल्पिक क्षेत्रों में विनिर्माण और प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ावा देना है।
मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सुनेत्रा पवार ने कहा कि मूल्य संवर्धित उप-उत्पादों में विविधीकरण से उद्योग की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती बढ़ेगी, आय के नए स्रोत विकसित होंगे और गन्ना किसानों को मौसमी मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिलेगी।
सहकारी चीनी कारखानों के सूत्रों ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान में कारखानों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस व्यवस्था (एफआरपी) के तहत गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य होता है। हालांकि, चीनी की घरेलू बिक्री से मिलने वाली आय और एफआरपी भुगतान की बाध्यता के बीच असंतुलन के कारण अक्सर कार्यशील पूंजी की कमी और किसानों के बकाये की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
महाराष्ट्र में गन्ने की खेती राज्य की कुल कृषि भूमि का लगभग 4 प्रतिशत क्षेत्र घेरती है, लेकिन यह सिंचाई जल का 60 से 70 प्रतिशत तक उपयोग करती है। इसी वजह से फसल विविधीकरण और ड्रिप सिंचाई को अनिवार्य बनाने जैसे मुद्दों पर लगातार बहस होती रही है। अधिक उत्पादन वाले वर्षों में चीनी की कीमतों में गिरावट आ जाती है, जिससे किसानों के भुगतान में चूक रोकने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को निर्यात कोटा तथा रियायती ऋण जैसी हस्तक्षेपकारी नीतियां लागू करनी पड़ती हैं।
सूत्रों के अनुसार, चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिम को कम करने के लिए चीनी मिलें अब एकीकृत बायोरिफाइनरी मॉडल की ओर बढ़ रही हैं। भारत के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के तहत बी-हेवी शीरे (मोलासेस) और सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल उत्पादन करने पर सफेद चीनी की बिक्री की तुलना में अधिक तेजी से नकदी प्रवाह प्राप्त होता है। वहीं, गन्ने से बची रेशेदार सामग्री बैगास का उपयोग नवीकरणीय बिजली उत्पादन के लिए किया जा रहा है, जिससे कारखानों की अपनी जरूरतें पूरी होने के साथ-साथ ग्रिड को भी बिजली आपूर्ति की जा सकती है।
इसके अलावा, कंप्रेस्ड बायो-गैस, ग्रीन हाइड्रोजन और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल जैसे क्षेत्रों में विस्तार राज्य सरकार की उस योजना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य चीनी कारखानों के राजस्व मॉडल को पारंपरिक चीनी उत्पादन से आगे बढ़ाकर आधुनिक और बहुआयामी बनाना है।
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