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Friday,03-April-2026
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स्मिथ भारत के लिए सिरदर्द साबित होंगे : मैक्सवेल

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Glenn-Maxwell

आस्ट्रेलिया के हरफनमौला खिलाड़ी ग्लैन मैक्सवेल ने कहा है कि भारत के खिलाफ आगामी सीरीज में स्टीव स्मिथ मेहमान टीम के लिए सिरदर्द साबित होंगे। मैक्सवेल ने साथ ही आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के लिए शानदार प्रदर्शन करने वाले मार्कस स्टोइनिस की भी तारीफ की है। इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई पिछली सीमित ओवरों की सीरीज में आस्ट्रेलियाई का मध्य क्रम और निचला क्रम ज्यादा मजबूत नहीं दिखा था। मैक्सवेल ने कहा कि स्मिथ के आने से और स्टोइनिस जिस तरह की फॉर्म में हैं, उससे टीम की बल्लेबाजी मजबूत है।

मैक्सवेल ने शुक्रवार को वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में भारत के चुनिंदा मीडिया संस्थानों से बात की, जिसमें आईएएनएस भी शामिल रहा।

भारत के खिलाफ खेली जाने वाली सीमित ओवरों की सीरीज में टीम की बल्लेबाजी के बारे में आईएएनएस द्वारा पूछे गए सवाल पर मैक्सवेल ने कहा, “स्टोइनिस की फॉर्म इस समय शानदार है। अगर उन्हें मौका मिलता है तो वह अच्छा करेंगे। उन्होंने दिल्ली के लिए खेलते हुए आईपीएल में अच्छा किया है। वह गेंद को अच्छे से मार रहे थे। साथ ही स्मिथ भी पिछली वनडे सीरीज में कन्कशन के कारण बाहर थे। उनका वापसी करना भी हमारी टीम के लिए अच्छा है। वह भारतीय टीम के सिरदर्द हो सकते हैं। उन्होंने भारत के खिलाफ काफी सारे रन किए हैं इसलिए उनका टीम में आना अच्छा होगा।”

आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब के लिए खेलने वाला यह बल्लेबाज हालांकि अच्छा नहीं कर सका था। वह टीम के लिए न कोई बड़ी पारी खेल पाए थे न ही मैच जिताऊ पारी।

क्या आईपीएल के फॉर्म का भारत के खिलाफ सीरीज में असर पड़ेगा? इस सवाल पर मैक्सवेल ने हंसते हुए कहा, “आईपीएल के प्रदर्शन का आने वाली सीरीज में मेरे प्रदर्शन पर असर नहीं पड़ेगा।”

मैक्सवेल भारत के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करने को लेकर आत्मविश्वास से भरे हुए दिखे।

उन्होंने कहा, “मैं अपने आप को इस टीम में एक हरफनमौला खिलाड़ी की तरह देखता हूं। मेरे अलावा स्टोइनिस एक और हरफनमौला खिलाड़ी होंगे जो फ्रंटलाइन गेंदबाजों के साथ मिलकर काम करेंगे। उम्मीद है कि मुझे अगर गेंदबाजी का मौका मिलता है तो मैं अपना योगदान दे सकूंगा और कोशिश करूंगा कि बल्ले से निचले क्रम में मैंच खत्म कर सकूं।”

आस्ट्रेलिया के महान गेंदबाज ग्लैन मैक्ग्राथ ने हाल ही में कहा था कि आस्ट्रेलियाई पिचों में अब पहले जैसी बात नहीं रही।

इस पर मैक्सवेल ने कहा, “मैं काफी लंबे समय से आस्ट्रेलियाई पिचों पर नहीं खेला हूं। इसलिए मैं शायद इसका जवाब देने के लिए सही इंसान नहीं हूं, लेकिन मुझे लगता है कि यहां की पिचों में आज भी अच्छी खासी उछाल और तेजी है। मुझे अभी भी लगता है कि यहां की पिचों में अभी भी बल्लेबाजों को डराने वाली बात तो है।”

मैक्सवेल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में आईपीएल खेल कर लौटे हैं। यूएई की पिचें धीमी थी वहीं आस्ट्रेलिया की पिचें तेज और उछाल वाली हैं। मैक्सवेल के मुताबिक बल्लेबाजों को यूएई से आने के बाद आस्ट्रेलिया की पिचों के साथ सामंजस्य बिठाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

दाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने कहा, “मुझे लगता है कि यहां कि पिचें ईवन हैं। आप एक-दो गेंद खेलेंगे तो समझ जाएंगे। दुबई की पिचें टू-पेस थीं। हमें विकेट को समझने के लिए ज्यादा समय बिताना पड़ता था। भारत में पिचें धीमी होती हैं और आप जानते हैं कि यह और धीमी होंगी। मुझे नहीं लगता कि बल्लेबाजों को यहां की पिचों से सामंजस्य बिठाने में परेशानी होगी।”

भारत को आस्ट्रेलिया दौरे पर तीन मैचों की वनडे सीरीज और तीन मैचों की टी-20 सीरीज के अलावा चार मैचों की टेस्ट सीरीज भी खेलनी है। वनडे सीरीज की शुरुआत 27 नवंबर से सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) से होगी। दूसरा मैच भी 29 तारीख को इसी मैदान पर खेला जाएगा। तीसरा वनडे 2 दिसंबर को कैनबरा के मनुका ओवल पर खेला जाएगा। सीरीज का प्रसारण सोनी टेन-1, सोनी टेन-3 और सोनी सिक्स चैनल्स पर किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय

ऑस्ट्रेलिया ने दवाइयों पर शुल्क लगाने के मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत से किया इनकार

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कैनबरा, 3 अप्रैल : ऑस्ट्रेलियाई सरकार अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्क के दबाव के बावजूद दवाओं के लिए अपनी सब्सिडी योजना में कोई बदलाव नहीं करेगी। स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने शुक्रवार को सरकार का पक्ष रखा।

बटलर ने सेवन नेटवर्क को बताया कि ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी प्रशासन के साथ फार्मास्युटिकल बेनेफिट्स स्कीम (पीबीएस) के “मूलभूत सिद्धांतों” पर कोई बातचीत नहीं करेगा। इस योजना के तहत केंद्रीय सरकार प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों में सब्सिडी देती है।

बटलर ने कहा, “हम अमेरिका को यह सबसे स्पष्ट संदेश लगातार भेज रहे हैं क्योंकि हम जानते हैं कि वहां बड़ी दवा कंपनियां अपने दबाव में हमारे पीबीएस और दुनिया के अन्य देशों की समान योजनाओं को कमजोर करने की कोशिश करती हैं। हम इन मूलभूत सिद्धांतों पर बातचीत नहीं कर रहे हैं।”

बटलर यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा कुछ पेटेंट वाली दवाओं के आयात पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करने के बाद दे रहे थे।

मार्च के अंत में ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापारिक शिकायतों की अद्यतन सूची में अमेरिकी प्रशासन ने कहा कि पीबीएस अमेरिकी नवाचार का मूल्य कम करके दिखाता है और अनुचित दवा मूल्य निर्धारण प्रथाओं के माध्यम से अमेरिकी उद्योग को प्रभावित करता है।

इस योजना के तहत, फार्मास्युटिकल निर्माता सीधे ऑस्ट्रेलियाई सरकार के साथ बिक्री पर बातचीत करते हैं ताकि वाणिज्यिक बोली युद्धों को रोका जा सके।

संयुक्त राष्ट्र के कॉमट्रेड डेटा के अनुसार, 2025 में ऑस्ट्रेलियाई दवा निर्यात अमेरिका में 1.3 बिलियन डॉलर का था।

बायोटेक्नोलॉजी कंपनी सीएसएल ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी है, लेकिन बटलर ने कहा कि सरकार को भरोसा है कि मेलबर्न स्थित इस कंपनी को नए शुल्क से छूट मिलेगी क्योंकि इसका अमेरिका में बड़ा उत्पादन आधार है।

व्यापार मंत्री डॉन फैरेल के प्रवक्ता ने आस्ट्रेलियन ब्राडकास्टिंग कार्पोरेशन को शुक्रवार को बताया कि सरकार अमेरिकी दवा शुल्क से निराश है और “अनुचित और गैर-जरूरी” शुल्क को हटाने के लिए दबाव डालना जारी रखेगी।

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अंतरराष्ट्रीय

ट्रंप ने स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ

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TRUMP

वाशिंगटन, 3 अप्रैल : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा आदेश जारी किया है। जिसके तहत स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर के आयात पर भारी टैक्स (टैरिफ) लगाया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

इस आदेश के तहत, आयातित धातु उत्पादों और उनसे बने अन्य उत्पादों के “पूरे कस्टम मूल्य” पर टैरिफ लागू होगा। प्रशासन ने कहा कि इस कदम से पिछली नीतियों में मौजूद उन कमियों को दूर किया जा सकेगा, जिनका फायदा उठाया जा रहा था।

यह फैसला पहले से लागू सेक्शन 232 के नियमों को आगे बढ़ाता है। इस कानून के तहत पहले ही कहा जा चुका है कि धातुओं का बढ़ता आयात अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

नए नियमों के तहत, ज्यादातर स्टील और एल्युमिनियम उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाएगा। वहीं, इनसे बने कुछ अन्य उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगेगा।

अधिकारियों का कहना है कि अब आयातकों को असली कीमत के आधार पर टैक्स देना होगा, ताकि कम कीमत दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिश न हो सके।

प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संशोधित प्रक्रिया को समझाते हुए कहा, “हम अमेरिका में अमेरिकी ग्राहकों द्वारा स्टील के लिए चुकाए गए पूरे मूल्य का 50 प्रतिशत शुल्क के रूप में लेंगे।”

अधिकारी ने आगे कहा कि इस नई व्यवस्था को इसलिए तैयार किया गया है ताकि निर्यातक कीमतों में जो हेरफेर करते हैं, उसे खत्म किया जा सके। अधिकारी ने कहा, “वे जान-बूझकर कीमतों को आर्टिफिशियल रूप से कम करके दिखाते थे और अब हम इस चीज को खत्म कर रहे हैं, क्योंकि वे मूल रूप से इस पूरी व्यवस्था को धोखा दे रहे थे।”

प्रशासन ने अन्य उत्पादों के लिए भी एक ढांचा पेश किया है। जिन उत्पादों में धातु की मात्रा बहुत कम होगी, उन्हें अतिरिक्त टैरिफ से छूट दी जाएगी; जबकि जिन उत्पादों में धातु की मात्रा काफी ज़्यादा होगी, उन पर एक निश्चित दर से शुल्क लगाया जाएगा।

अधिकारी ने कहा, “अगर किसी उत्पाद में स्टील, एल्यूमीनियम या तांबे की मात्रा काफी ज़्यादा है तो उस पर सीधे-सीधे 25 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा।”

अधिकारियों का तर्क है कि इस बड़े बदलाव से नियमों का पालन करना आसान हो जाएगा और आयातकों के लिए प्रशासनिक जटिलताएं कम होंगी, जबकि दूसरी ओर नियमों को लागू करने की प्रक्रिया और भी मजबूत होगी।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले लगाए गए टैरिफ के बाद अमेरिका में एल्युमिनियम और स्टील का उत्पादन बढ़ा है। एल्युमिनियम की क्षमता का इस्तेमाल करीब 50.4 प्रतिशत और स्टील का 77.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

सरकार का कहना है कि अब इन आंकड़ों को 80 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब लाने के लिए और सख्ती जरूरी है, ताकि कोई भी कंपनियां नए तरीकों से नियमों को दरकिनार न कर सकें।

इस आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी, तो आगे चलकर और उत्पादों को भी इस टैक्स के दायरे में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि इन बदलावों का आम लोगों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और इससे चीजों की कीमतों में खास बढ़ोतरी नहीं होगी। उनका कहना है कि यह बदलाव सिर्फ व्यापार से जुड़े नियमों में है, खुदरा कीमतों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

ये नए टैरिफ 6 अप्रैल से लागू होंगे और उसी दिन से अमेरिका में आने वाले सभी संबंधित सामान पर लागू हो जाएंगे।

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान: पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी की हालत गंभीर, घर पर हुई थी एयर स्ट्राइक

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तेहरान, 2 अप्रैल : ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और सुप्रीम लीडर के सलाहकार कमाल खराजी की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार एयर स्ट्राइक में उनकी पत्नी की मौत हो गई जबकि खराजी घायल हो गए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान में उनके घर पर हमला हुआ। इस हमले के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। ईरानी मीडिया और स्थानीय रिपोर्ट्स में इसे एक ‘हत्या की कोशिश’ बताया गया है।

खराजी ईरान की ‘स्ट्रेटेजिक फॉरेन रिलेशंस काउंसिल’ के अध्यक्ष हैं। यह संस्था सीधे देश के सर्वोच्च नेता को सलाह देती है और विदेश नीति से जुड़े बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजरायल के हमले लगातार पांचवें हफ्ते भी ईरान पर जारी हैं।

ईरानी मीडिया ने बताया कि बुधवार को तेहरान में खराजी के घर को निशाना बनाया गया था। ‘शर्ग’, ‘एतेमाद’ और ‘हम मिहान’ दैनिक के अनुसार, उनकी हालत गंभीर है और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गुरुवार को भी तेहरान, इस्फाहान और शिराज पर हवाई हमलों की जानकारी स्थानीय मीडिया ने दी। दक्षिणी ईरान के लारेस्तान में चार लोगों के मारे जाने की खबर है।

इस बीच, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें पोस्ट कर दावा किया कि राजधानी स्थित 100 साल पुराने मेडिकल रिसर्च सेंटर पर हमला कर उसे तबाह कर दिया गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपोर ने एक्स पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से इस ‘आक्रामकता’ की ओर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने इसे वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया।

उन्होंने लिखा, “वैश्विक स्वास्थ्य के एक सदी पुराने स्तंभ ‘ईरानी पाश्चर इंस्टीट्यूट’ के खिलाफ की गई आक्रामकता, वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा हमला है। यह जिनेवा कन्वेंशन और आईएचएल के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (आईएचएल) को टैग करते हुए कहा, “हम डब्ल्यूएचओ, आईसीआरसी और वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं से अपील करते हैं कि वे इस हमले की निंदा करें, नुकसान का आकलन करें और पुनर्निर्माण में सहायता करें।

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