अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत, सऊदी अरब उर्वरक, पेट्रोकेमिकल और खनन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे
भारत और सऊदी अरब ने बुधवार को व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स और खनन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और सऊदी अरब के उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री बंदर बिन इब्राहिम अलखोरायफ के बीच रियाद में हुई बैठक में इन क्षेत्रों पर चर्चा की गई। गोयल आधिकारिक यात्रा पर रियाद में हैं।
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा, “हमने उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स और खनन क्षेत्रों में सहयोग के लिए संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया और उनकी खोज की।”
गोयल ने सऊदी अरब के निवेश मंत्री खालिद अल फलीह के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की।
गोयल ने लुलु हाइपरमार्केट में दिवाली समारोह का उद्घाटन किया
उन्होंने कहा, “हमने निवेश को सुविधाजनक बनाने पर गहन चर्चा की और फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए महत्वपूर्ण अवसरों की खोज की।” मंत्री ने लुलु हाइपरमार्केट में ‘लुलु वाली दिवाली’ का भी उद्घाटन किया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “लद्दाख के सेब के बागों से लेकर रियाद के बाजारों तक! पहली बार सऊदी अरब को इन विदेशी घरेलू व्यंजनों का स्वाद चखने का मौका मिला है।”
भारत सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
कुल द्विपक्षीय व्यापार
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 में 43 बिलियन अमरीकी डॉलर रहा, जबकि 2022-23 में यह 53 बिलियन अमरीकी डॉलर था। 2,700 से अधिक भारतीय कंपनियाँ संयुक्त उद्यम/पूर्ण स्वामित्व वाली संस्थाओं के रूप में पंजीकृत हैं, जिनका सऊदी अरब में लगभग 2 बिलियन अमरीकी डॉलर का निवेश है।
एलएंडटी, टाटा, विप्रो, टीसीएस, टीसीआईएल, तथा शापूरजी एंड पालोनजी सहित प्रमुख भारतीय कंपनियों और कॉर्पोरेट समूहों ने सऊदी अरब में अपनी मजबूत उपस्थिति स्थापित की है।
सऊदी अरब का प्रत्यक्ष निवेश
अप्रैल 2000 से जून 2024 के दौरान भारत में सऊदी अरब का प्रत्यक्ष निवेश 3.22 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। प्रमुख सऊदी निवेश समूहों में अरामको, एसएबीआईसी, ज़मिल, ई-हॉलिडेज़ और अल बैटरजी ग्रुप शामिल हैं।
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एआई सीक्रेट्स पर चीन की नजर! अमेरिका ने आर्थिक जासूसी, साइबर ऑपरेशन को लेकर दी चेतावनी

अमेरिका के सीनेटरों ने चेतावनी दी है कि चीन आर्थिक जासूसी, साइबर ऑपरेशन और व्यापारिक निवेश के जरिए अमेरिकी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी और दूसरी उन्नत तकनीक हासिल करने की कोशिशें तेज कर रहा है। उन्होंने इस कैंपेन को राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व, दोनों के लिए बढ़ता खतरा बताया है।
यह चेतावनी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर हाउस सेलेक्ट कमेटी की सुनवाई के दौरान आई, जहां डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के पूर्व कार्यवाहक निदेशक डेविड शेड ने कहा कि बीजिंग ने अमेरिकी कमर्शियल और टेक्नोलॉजिकल सीक्रेट्स हासिल करने के लिए एक बड़ा सिस्टम बनाया है।
शेड ने प्रतिनिधियों से कहा, “यह कैंपेन जिसमें साइबर जासूसी, ह्यूमन इंटेलिजेंस, एकेडमिक सहयोग और कमर्शियल इन्वेस्टमेंट शामिल हैं, चीन की तेजी से आर्थिक और सैन्य बढ़त में अहम रहा है।”
उन्होंने कहा कि चीन ने संवेदनशील तकनीक हासिल करने के लिए साइबर जासूसी, इंटेलिजेंस ऑपरेशन, एकेडमिक पार्टनरशिप और कमर्शियल निवेश को मिलाकर खुद को एक ग्लोबल तकनीकी शक्ति में बदल लिया है।
शेड के अनुसार, बीजिंग की इंटेलिजेंस एजेंसियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेलीकम्युनिकेशन, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस्ड वेपन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों, विश्वविद्यालयों और रिसर्चर को टारगेट करती हैं।
उन्होंने कहा, “कॉर्पोरेट अमेरिका, प्रोफेसर, एकेडमिक रिसर्चर, सभी सही टारगेट हैं। चीन की इंटेलिजेंस सर्विस का साइज और काबिलियत बहुत बढ़ गई है।”
सुनवाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर उभरती चिंताओं पर भी फोकस किया गया। सीनेटरों ने उन रिपोर्ट्स का जिक्र किया जिनमें कहा गया था कि चीनी तकनीक की बड़ी कंपनी अलीबाबा ने यूएस एआई कंपनी एंथ्रोपिक को “डिस्टिलेशन” अटैक के जरिए टारगेट किया था, जिसे एडवांस्ड एआई मॉडल्स से जानकारी निकालने के लिए डिजाइन किया गया था।
इस तकनीक को लेकर शेड ने कहा कि इसमें महंगे एआई मॉडल से डेटा को आसान बनाना शामिल है ताकि उन्हें बहुत कम लागत पर दोबारा बनाया जा सके।
उन्होंने कहा, “इससे चीनी कंपनियां उन बड़े एआई उद्यमों द्वारा अमेरिका में किए गए भारी निवेश को दरकिनार करने में सक्षम हो जाती हैं।” उनका तर्क था कि यह तरीका चीनी कंपनियों को वर्षों के महंगे शोध एवं विकास (आरएंडडी) की प्रक्रिया को पीछे छोड़ते हुए तेजी से आगे बढ़ने (लीपफ्रॉग) का अवसर देता है।
शेड ने अमेरिकी तकनीक के “क्राउन ज्वेल्स” के तौर पर बताई गई चीजों की मजबूत सुरक्षा की अपील की और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की सुरक्षा के लिए सरकार और उद्योग के बीच ज्यादा सहयोग की अपील की।
जब उनसे पूछा गया कि चीनी असर वाले ऑपरेशन्स की लागत बढ़ाने के लिए कांग्रेस तुरंत क्या कर सकती है, तो उन्होंने टिकटॉक से जुड़ी चिंताओं की ओर इशारा किया और कहा कि प्लेटफॉर्म पर प्रभाव डालने वाले मौजूदा कानून को लागू करने से बीजिंग को एक जरूरी संकेत जाएगा, साथ ही यूजर डेटा तक पहुंच सीमित हो जाएगी।
सुनवाई के दौरान वाशिंगटन में इस बात पर बढ़ती चिंता दिखाई गई कि चीन के साथ तकनीकी कॉम्पिटिशन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बीच बड़ी रणनीतिक दुश्मनी का केंद्र बन गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर तकनीक, क्वांटम कंप्यूटिंग और बायोटेक्नोलॉजी को कमर्शियल और सैन्य दोनों तरह के इस्तेमाल वाले जरूरी क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है।
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भारत और यूके आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को गहरा करने के लिए तलाश रहे नए अवसर: पीयूष गोयल

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत और यूके एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो दोनों देशों के लिए इनोवेशन, निवेश और व्यापक विकास को बढ़ावा दे।
बिजनेस और ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल के साथ बातचीत के बाद गोयल ने कहा, “इस बातचीत में वह आत्मीयता, भरोसा और भविष्य की सोच दिखी, जो हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की पहचान बनी हुई है।”
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “15 जुलाई, 2026 से भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) के लागू होने के साथ, हम एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो दोनों देशों के लिए इनोवेशन, इन्वेस्टमेंट और व्यापक विकास को बढ़ावा दे।”
इससे पहले, उन्होंने एक व्यापार जगत से जुड़े कार्यक्रम को संबोधित किया जिसमें भारत और यूके, दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स और इन्वेस्टर्स ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
गोयल ने कहा, “मैंने वार्ता में इस बारे में बात की कि कैसे भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) दोनों देशों में विकास और समृद्धि के लिए बड़े अवसर पैदा करेगा।”
उन्होंने उनसे इस अहम समझौते का पूरा फायदा उठाने का आग्रह किया ताकि सहयोग को गहरा किया जा सके, व्यापार और निवेश को बढ़ाया जा सके और अलग-अलग सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा दिया जा सके।
इससे पहले गोयल ने कहा था कि भारत-यूके कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट, व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक सेक्टर में दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करके ग्लोबल इकॉनमी के लिए एक ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ साबित होगा।
लंदन में इंडिया ग्लोबल फोरम के यूके-इंडिया वीक 2026 में बोलते हुए, गोयल ने कहा कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच साझेदारी पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ी है और अब यह कई सेक्टर को शामिल करते हुए एक बहुत ही रणनीतिक रिश्ते में बदल गई है।
उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक रिश्तों से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी, निवेश, रक्षा और जरूरी खनिजों में सहयोग तक फैल गए हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ता जुड़ाव भारत-यूके साझेदारी की बढ़ती गहराई और विस्तार को दिखाता है।
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पीएम मोदी से मिले अमेजन के सीईओ एंडी जेसी, 2030 तक भारत में 48 अरब डॉलर निवेश का किया ऐलान

अमेजन के सीईओ अमेजन एंडी जेसी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान जेसी ने भारत के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता दोहराई। जेसी ने देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए 2030 तक अतिरिक्त 13 अरब डॉलर निवेश का ऐलान भी किया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एंडी ने पीएम मोदी से मुलाकात की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र के साथ अमेजन के भारत में भविष्य की योजनाओं को लेकर हुई मुलाकात बेहद अच्छी रही। हम एक दशक से अधिक समय से भारत में ग्राहकों, विक्रेताओं, डेवलपर्स, स्टार्टअप्स और उद्योगों को सेवाएं दे रहे हैं और अभी हमारी यात्रा की शुरुआत ही हुई है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने उनसे आगामी योजना पर बात की। बताया कि अमेजन आने वाले पांच वर्षों में भारत में 48 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है, जिसमें 21 अरब डॉलर से अधिक निवेश एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में किया जाएगा।”
जेसी के मुताबिक, “2030 तक हमारी योजना 38 लाख नौकरियां उपलब्ध कराने, 80 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स निर्यात को सक्षम बनाने और 1.5 करोड़ छोटे व्यवसायों तथा 40 लाख सरकारी स्कूल छात्रों तक एआई के लाभ पहुंचाने की है। आने वाले समय को लेकर उत्साहित हूं। भारत में हम जो कुछ बना सकते हैं, उसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है।”
अमेजन की आधिकारिक साइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, इस नए निवेश के साथ 2026 से 2030 के बीच भारत में एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए अमेजन का कुल नियोजित निवेश 21 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। कंपनी के अनुसार, यह भारत में एआई और क्लाउड क्षेत्र में सबसे बड़े वैश्विक निवेशों में से एक होगा।
अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) के डेटा सेंटर नेटवर्क को मुंबई और हैदराबाद में विस्तार दिया जाएगा। इससे स्टार्टअप, बड़े उद्योग और सरकारी संस्थानों को एआई चिप्स, प्रबंधित एआई सेवाओं, सुरक्षित क्लाउड तकनीक और डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
कंपनी ने बताया कि 2010 से 2030 तक भारत में उसका कुल निवेश 88 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। इसके अलावा अमेजन अपने ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी निवेश जारी रखेगा।
अमेजन इस साल देशभर में 20 से ज्यादा नए फुलफिलमेंट सेंटर और 100 से अधिक नए लास्ट-माइल डिलीवरी स्टेशन शुरू करने की योजना बना रहा है। इससे खासकर टियर-3 और टियर-4 शहरों में ग्राहकों को तेज और भरोसेमंद डिलीवरी सुविधा मिलेगी।
कंपनी ने डिलीवरी कर्मचारियों के कल्याण के लिए ‘सम्मान’नाम से एक विशेष कार्यक्रम भी शुरू करने की घोषणा की है।
एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत में अमेजन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, खासकर ई-कॉमर्स, एआई और क्लाउड सेवाओं के क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि कंपनी की प्राथमिकताएं भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था, छोटे कारोबारों के डिजिटलीकरण, रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने के लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
अमेजन के अनुसार, भारत में कंपनी ने अब तक 1.2 करोड़ छोटे व्यवसायों को डिजिटल बनाया है, 20 अरब डॉलर से अधिक के ई-कॉमर्स निर्यात को सक्षम किया है और 28 लाख नौकरियों का समर्थन किया है। कंपनी ने 1 करोड़ से अधिक भारतीयों को क्लाउड स्किल्स की ट्रेनिंग भी दी है।
जेसी ने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में अमेजन भारत में अपने कारोबार के विस्तार के लिए कुल 48 अरब डॉलर निवेश करेगा और “विकसित और आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य में लंबे समय तक साझेदार बना रहेगा।
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