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Monday,28-September-2026
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तमिलनाडु विधानसभा ने ‘नीट’ को खत्म करने का प्रस्ताव पास किया, भाजपा ने किया वॉकआउट

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तमिलनाडु विधानसभा ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पास किया, जिसमें केंद्र सरकार से अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए ‘नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट’ को खत्म करने की मांग की गई। इस प्रस्ताव के जरिए राज्य ने इस सेंट्रलाइज्ड एंट्रेंस एग्जाम के प्रति अपने लंबे समय से चले आ रहे विरोध को फिर से दोहराया।

इस दौरान सदन में तीखी बहस देखने को मिली और भाजपा विधायक एम. भोजराजन ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए वोटिंग से ठीक पहले सदन से वॉकआउट कर दिया।

राज्य के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण मंत्री केजी अरुणराज ने सदन के पटल पर नीट विरोधी प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह मेडिकल प्रवेश की इस केंद्रीकृत व्यवस्था को तुरंत समाप्त करे। सरकार ने अपने प्रस्ताव में नीट को खत्म करने के मुख्य कारण गिनाए, जिनमें परीक्षा के आयोजन में सामने आई कथित अनियमितताएं, महंगी कोचिंग सेंटरों का तेजी से बढ़ता कारोबार और सबसे दुखद, छात्रों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं शामिल थीं।

मंत्री अरुणराज ने मांग की है कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग अधिनियम 2020 और राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम 2020 सहित अन्य प्रासंगिक केंद्रीय कानूनों में जरूरी संशोधन करे। सरकार की स्पष्ट मांग है कि पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए, ताकि तमिलनाडु फिर से कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर छात्रों को मेडिकल कोर्सेज में प्रवेश दे सके।

प्रस्ताव में इस बात का जिक्र किया गया है कि नीट परीक्षा सामाजिक न्याय और समानता के मूल सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ है और यह मेडिकल शिक्षा के मामलों में राज्यों के अधिकारों को भी प्रभावित करती है। तर्क दिया गया कि यह परीक्षा ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों पर असमान रूप से बुरा असर डाल रही है। विशेषकर उन छात्रों पर जिन्होंने तमिल माध्यम से पढ़ाई की है और जिनके पास महंगी प्राइवेट कोचिंग लेने के साधन नहीं हैं। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि इस प्रणाली ने छात्रों का ध्यान नियमित स्कूली पाठ्यक्रम से हटाकर केवल एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी तक सीमित कर दिया है, जिससे कोचिंग सेंटरों को भारी फीस वसूलने का मौका मिल रहा है।

बता दें कि तमिलनाडु पहले भी नीट से छूट पाने की कोशिश कर चुका है। वर्ष 2021 में जब डीएमके सत्ता में आई थी, तब भी विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया था। हालांकि, उस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए सुरक्षित रख लिया गया था और उसे राष्ट्रपति की स्वीकृति नहीं मिल सकी थी। अब इस नए प्रस्ताव के जरिए राज्य ने अपनी मांग फिर से दोहराई है।

सदन में दूसरा विशेष प्रस्ताव एफसीआरए 2026 कानून से जुड़ा था। मंत्री राजमोहन ने इस प्रस्ताव को लेकर कहा, “विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) साल 2010 से ही लागू है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारत में आने वाले विदेशी फंड को रेगुलेट करना है ताकि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और संप्रभुता पर कोई प्रभाव न पड़े।”

उन्होंने सदन को जानकारी दी कि केंद्र ने संसद में एफसीआरए 2026 संशोधन विधेयक पेश किया है। इसी सिलसिले में बीते कल ही अल्पसंख्यक समुदायों के नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। नेताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि वे केंद्र पर इस संशोधन बिल को वापस लेने का दबाव बनाएं, क्योंकि इसका असर शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों और अन्य संगठनों पर पड़ सकता है।

मंत्री राजमोहन ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु सरकार को इन संशोधनों के जरिए केंद्र सरकार को मिलने वाली अतिरिक्त शक्तियों पर सख्त आपत्ति है। राज्य सरकार यह मानती है कि विदेशी चंदे का विनियमन होना चाहिए, लेकिन यह संविधान और कानून के दायरे में होना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि एफसीआरए से जुड़ा कोई भी नया ढांचा ऐसा होना चाहिए जो न्याय, वैध संपत्तियों की सुरक्षा और सबसे बढ़कर संघवाद के सिद्धांतों का मजबूती से सम्मान करे। इसलिए, तमिलनाडु विधानसभा सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से इस संशोधन विधेयक को वापस लेने का आग्रह करती है।

राष्ट्रीय समाचार

एफडीए की सख्ती के बीच उगाही का आरोप, संजय राउत ने कमिश्नर तुकाराम मुंढे को लिखा पत्र, 2 लाख तक वसूली का दावा

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शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को पत्र लिखकर विभाग में कथित उगाही और भ्रष्टाचार को लेकर चिंता जताई है।

27 सितंबर के अपने पत्र में, राउत ने मिलावटी खाने, नकली डेयरी उत्पादों और गंदे होटल किचन के खिलाफ मुंढे की सख्ती की तारीफ की। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि भ्रष्ट एफडीए अधिकारी इन कार्रवाइयों का इस्तेमाल स्थानीय व्यवसायों से उगाही करने के लिए कर रहे हैं।

राउत ने सोमवार सुबह अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर पत्र पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि डेजिग्नेटेड ऑफिसर (डीओ) और फूड सेफ्टी ऑफिसर (एफएसओ) भारी रिश्वत की मांग के लिए होटलों, रेस्तरां और क्विक-कॉमर्स व्यवसायों को लाइसेंस सस्पेंड करने की धमकी दे रहे हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘क्लोजिंग नोटिस’ के लिए ‘रेट’ बहुत बढ़ गए हैं। पत्र के अनुसार, हाल की हाई-प्रोफाइल प्रवर्तन कार्रवाइयों के बाद ‘क्लोजिंग नोटिस’ को निपटाने का रेट 10,000-12,000 रुपए से बढ़कर 75,000 से 2,00,000 रुपए के बीच हो गया है।

राउत ने बांद्रा में एफडीए मुख्यालय और इसके ठाणे कार्यालय को इन गतिविधियों के मुख्य केंद्र के रूप में चिह्नित किया। उन्होंने कहा कि उन्हें नागपुर, पुणे, सोलापुर, वर्धा और छत्रपति संभाजीनगर में छोटे व्यवसाय मालिकों से कई शिकायतें मिली हैं।

पत्र में ठाणे की एक घटना का जिक्र किया गया है, जहां कथित तौर पर दो डीओ ने एक क्विक-कॉमर्स कंपनी से सस्पेंड किए गए लाइसेंस को बहाल करने के लिए 17-18 लाख रुपए की मांग की थी।

राउत ने बिना उचित स्वतंत्र सत्यापन के, सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि वाली शिकायतों (जैसे चूहे दिखने की शिकायत) के आधार पर किए गए निलंबन की भी आलोचना की।

राउत ने दावा किया कि जहां छोटे खाद्य विक्रेताओं को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, वहीं गंभीर नियमों का पालन न करने वाली बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनियां अक्सर राजनीतिक समर्थन और कॉर्पोरेट प्रभाव के कारण जांच से बच जाती हैं।

राउत ने मुंढे से बांद्रा, ठाणे और अन्य क्षेत्रीय कार्यालयों में कथित ‘क्लोजिंग नोटिस रेट कार्ड’ और लाइसेंस बहाली रैकेट की तत्काल जांच करने की अपील की है। उन्होंने मांग की कि नकली आरोपों को रोकने के लिए ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर छापेमारी करने से पहले अनिवार्य भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए।

उन्होंने मुंढे से यह भी कहा कि वे उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करें जो पैसे ऐंठने के लिए कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हैं। साथ ही, उन्होंने ठाणे के डीओ से जुड़े 17-18 लाख रुपए की उगाही के खास मामले की अलग से जांच करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस रद्द करने और बहाल करने से जुड़ी सभी जानकारी, तारीखें, सुनवाई का सारांश और वजहें डिजिटल रूप से पब्लिश करने को कहा।

पत्र में राउत ने जोर दिया कि जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा उगाही का बहाना नहीं बननी चाहिए। उन्होंने मुंढे से कहा कि वे जनता के बीच की कार्रवाई के साथ-साथ अपने विभाग में भी सुधार लाएं। राउत ने इस पत्र की एक कॉपी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी भेजी है।

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राजनीति

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने नवजात शिशुओं को सोने की अंगूठी वितरित की

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को मदुरै के सरकारी राजाजी अस्पताल में ‘थाई मामन गोल्ड रिंग स्कीम’ की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने नवजात शिशुओं को एक-ग्राम सोने की अंगूठियां भेंट कीं और उनके परिवारों से मुलाकात की। उनके इस दौरे के दौरान शहरभर में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

सीएम विजय ने इस योजना की शुरुआत तीन बच्चों की उंगलियों में अंगूठियां पहनाकर की। इस दौरान, नवजात की माएं उनके बगल में बैठी थी। उन्होंने कई बच्चों को अपनी गोद में लिया और उनके माता-पिता से बात की। कुछ माता-पिता ने मुख्यमंत्री से अपने बच्चों का नाम रखने का अनुरोध किया।

विजय ने उनके अनुरोध स्वीकार किए, बच्चों को गोद में लिया और पारंपरिक नामकरण रीति का पालन करते हुए हर नाम को तीन बार दोहराया। उन्होंने सेल्फी भी खिंचवाईं और उनके पास आने वाली माताओं से हाथ मिलाया।

बाद में मुख्यमंत्री ने अस्पताल के इंटीग्रेटेड चाइल्ड डेवलपमेंट वार्ड का दौरा किया, जहां उन्होंने 10 और बच्चों को अंगूठियां दी। बच्चों के साथ समय बिताते और उनके माता-पिता के साथ हंसी-मजाक करते हुए डॉक्टर भी वहां मौजूद थे। राजाजी अस्पताल में वितरण कार्यक्रम सीएम विजय की मदुरै यात्रा का मुख्य कार्यक्रम था।

मुख्यमंत्री के चेन्नई से मदुरै हवाई अड्डे पहुंचने पर सैकड़ों पार्टी कार्यकर्ता ने उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। जब उनका काफिला अस्पताल की ओर बढ़ा, तो समर्थकों और स्थानीय लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया और गाड़ियों पर फूल बरसाए।

सरकारी राजाजी अस्पताल पहुंचने पर सीएम विजय लोगों के उत्साह के बीच कार्यक्रम स्थल तक गए। रास्ते में उन्होंने अस्पताल के कर्मचारियों सहित कई लोगों का अभिवादन करने के लिए कई बार रुककर उनसे बात की और उनमें से कुछ के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

अस्पताल परिसर में अलग-अलग जगहों पर तैनात नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने भी उनका अभिवादन किया और उनके साथ सेल्फी ली। अस्पताल के अंदर सभी का ध्यान नवजात शिशुओं और उनके परिवारों पर केंद्रित हो गया। सीएम ने इस योजना के तहत पहली अंगूठियां बांटी।

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राजनीति

अखिलेश यादव का चुनावी ऐलान : सत्ता में आए तो पुरानी पेंशन बहाल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाने का वादा

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समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को विधानसभा चुनाव को लेकर कई बड़े चुनावी वादे किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा और शिक्षामित्रों को शिक्षक के रूप में सम्मान देने के साथ उनकी स्थिति बेहतर की जाएगी। उन्होंने मदरसा शिक्षकों के बकाया वेतन के भुगतान और संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं के समाधान का भी भरोसा दिया।

लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर समाज को बांटने और शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास लोगों को बांटने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं है। मदरसों के साथ भेदभाव किया गया है। भाजपा को केवल समाज को तोड़ना आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने आधी-अधूरी नौकरियां और आधी-अधूरी शिक्षा देने का काम किया।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार बनने पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। शिक्षामित्रों के संबंध में उन्होंने कहा कि उन्हें बेहतर बनाने के साथ शिक्षक के रूप में सम्मान देने का काम किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि शिक्षामित्रों की समस्या का समाधान होने से बंद पड़े स्कूलों को भी फिर से संचालित करने में मदद मिलेगी। अखिलेश यादव ने कहा कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की मांग पर काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के साथ मंथन कर पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

उन्होंने मदरसा शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आधुनिक मदरसा शिक्षकों का लंबे समय से लंबित वेतन दिलाने का काम किया जाएगा। साथ ही संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का भी समाधान करने का उन्होंने आश्वासन दिया। अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान सपा समर्थकों के बड़ी संख्या में वोट काटे गए, जिसके कारण प्रदेश में सपा की सरकार नहीं बन सकी।

उन्होंने कहा कि 2017 में पार्टी इस तरह की गड़बड़ियों को समझ नहीं सकी थी और तब वह मानते थे कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां लंबे समय से होती रही हैं, लेकिन अब इससे जुड़ी बातें सामने आ रही हैं। अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा के लोगों ने गांव-गांव से वोट कटवाने के प्रयास किए और बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरकर भेजे गए। उन्होंने लखनऊ का उदाहरण देते हुए दावा किया कि एक व्यक्ति ने 100 से अधिक वोट कटवाने के लिए फॉर्म-7 भरवाए, जबकि एक व्यक्ति के लिए पांच लोगों के संबंध में ही ऐसा आवेदन करने का प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों के बीच चुनाव आयोग का बचाव कर रहे हैं तो इससे सवाल उठता है कि वह भी कथित घोटाले में शामिल हैं। सपा अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव में वोटों की कथित चोरी और बेईमानी का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। उनके मुताबिक, 2022 में सपा समर्थकों के बड़ी संख्या में वोट काटे गए और अब इस तरह की खबरें सार्वजनिक होने के बाद लोगों को चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जानकारी हो रही है। उन्होंने नोएडा में अभी भी फर्जी वोट बनाए जाने का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने कहा कि वोट चोरी से जुड़ी खबरों का स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत को पश्चिम बंगाल और बिहार में दोबारा चुनाव कराने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराया और 2027 में उत्तर प्रदेश से भाजपा का सफाया कर दिया जाएगा। भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि वह पूंजीपतियों और बड़े कारोबारियों के हित में काम करती है।

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