खेल
5 आईएसएल क्लबों को एआईएफएफ ने 2020-21 सीजन के लिए दी छूट
एएफसी और राष्ट्रीय लाइसेंस पैमानों पर खरा नहीं उतरने वाले पांच इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) क्लबों को अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) ने 2020-21 सीजन में खेलने की छूट दे दी है। ओडिशा एफसी, नार्थईस्ट युनाइटेड एफसी, केरला ब्लास्टर्स, हैदराबाद एफसी और स्पोटिर्ंग क्लब ईस्ट बंगाल, यह वो पांच क्लब हैं जिन्हें एआईएफएफ ने इस सीजन एएफसी और राष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में खेलने के लिए लाइसेंस नहीं दिया था। यह क्लब हालांकि अब शुक्रवार से गोवा में शुरू हो रहे सातवें आईएसएल सीजन में खेल सकेंगे।
एआईएफएफ ने गुरुवार को एक बयान में कहा, “सभी पांच क्लब, एससी ईस्ट बंगाल, ओडिशा एफसी, हैदराबाद एफसी, केरला ब्लास्टर्स एफसी, नार्थईस्ट युनाइटेड एफसी जो 2020-21 के लिए राष्ट्रीय लाइसेंस हासिल नहीं कर सके थे, उन्होंने सीजन में हिस्सा लेने के लिए छूट मांगी थी और एआईएफएफ की लाइसेंस समिति ने यह छूट दे दी है। समिति ने क्लबों से हालांकि जल्दी सुधार करने को कहा है।”
उन्होंने कहा, “एआईएफएफ की क्लब लाइसेंस समिति के फैसले के खिलाफ किसी भी क्लब ने शिकायत नहीं की है।”
एफसी गोवा, एटीके मोहन बागान, बेंगलुरू एफसी, जमशेदपुर एफसी, चेन्नइयन एफसी और मुंबई सिटी एफसी ने पहले ही 2020-21 सीजन के लिए एएफसी और राष्ट्रीय लाइसेंस हासिल कर लिए हैं।
कुल 19 क्लबों ने लाइसेंस के लिए आवेदन किए थे जिसमें से आठ आई-लीग और 11 आईएसएल क्लब हैं।
खेल
आईसीसी का फैसला, गद्दाफी स्टेडियम से ‘डिमेरिट अंक’ हटाया

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अपील पैनल ने गुरुवार को पाकिस्तान के लाहौर स्थित गद्दाफी स्टेडियम की पिच को लेकर लगाया गया डिमेरिट अंक हटा दिया। यह फैसला जून में पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए तीसरे वनडे मैच की पिच को दी गई ‘असंतोषजनक’ रेटिंग के खिलाफ दायर अपील की समीक्षा के बाद लिया गया।
यह निर्णय पैनल की तरफ से मैच के फुटेज, मैच रेफरी की रिपोर्ट और 4 जून को खेले गए मुकाबले में शामिल कप्तानों की आधिकारिक टिप्पणियों की समीक्षा के बाद लिया गया। शुरुआत में आईसीसी की पिच और आउटफील्ड मॉनिटरिंग प्रोसेस के तहत पिच को ‘असंतोषजनक’ रेटिंग दी गई थी, जिसके कारण स्टेडियम पर एक डिमेरिट प्वाइंट लगाया गया था।
हालांकि, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की तरफ से दायर अपील के बाद, पैनल ने पाया कि भले ही मैच रेफरी ने संबंधित दिशानिर्देशों का सही ढंग से पालन किया था, लेकिन खेलने वाली सतह (पिच) में वे विशेषताएं नहीं थीं जो ‘असंतोषजनक’ रेटिंग के लिए जरूरी होती हैं।
पैनल ने विशेष रूप से गौर किया कि पिच में बहुत ज्यादा असमानता या बहुत ज्यादा स्पिन नहीं थी और इसके बाद डिमेरिट प्वाइंट को हटा दिया। नतीजतन, गद्दाफी स्टेडियम के रिकॉर्ड में अब ‘शून्य’ डिमेरिट प्वाइंट हैं। आईसीसी अपील पैनल ने टोरंटो के किंग सिटी में स्थित मेपल लीफ क्रिकेट ग्राउंड के संबंध में क्रिकेट कनाडा द्वारा दायर दो अपीलों पर भी विचार किया।
इस स्टेडियम को 8 जून को संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड के बीच आईसीसी मेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप लीग 2 मैच के लिए ‘असंतोषजनक’ रेटिंग मिली थी। पैनल ने पाया कि पिच की सतह संतोषजनक पिच के अनुरूप थी और उसमें बहुत ज्यादा असमानता, सीम मूवमेंट या स्पिन नहीं थी। इसलिए उस मैच से जुड़ा डिमेरिट प्वाइंट हटा दिया गया।
हालांकि, 16 जून को कनाडा-नीदरलैंड मैच के लिए स्टेडियम को ‘अनफिट’ करार दिए जाने के बाद लगाए गए तीन डिमेरिट प्वाइंट बरकरार रहेंगे। पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि उस मैच के दौरान पिच की स्थिति खतरनाक थी और इसलिए यह ‘अनफिट’ रेटिंग के अनुरूप थी।
इन फैसलों के बाद, गद्दाफी स्टेडियम पर कोई डिमेरिट प्वाइंट नहीं है, जबकि मेपल लीफ क्रिकेट ग्राउंड के रिकॉर्ड में तीन डिमेरिट प्वाइंट हैं।
खेल
‘उन्होंने हम पर दबाव बनाया,’ हार के बाद श्रीलंकाई कप्तान ने राहुल-पड्डिकल की साझेदारी को सराहा

श्रीलंका को भारत के खिलाफ गाले इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए टेस्ट सीरीज के पहले मैच में 165 रन से हार का सामना करना पड़ा। श्रीलंकाई टीम के कप्तान धनंजय डी सिल्वा का मानना है कि केएल राहुल और देवदत्त पड्डिकल ने भारतीय टीम को मजबूत स्थिति तक पहुंचाने में मदद की।
भारत की पहली पारी में केएल राहुल और देवदत्त पड्डिकल के बीच 162 रन की साझेदारी हुई थी। अगली पारी में दोनों खिलाड़ियों ने मिलकर 65 रन जुटाए। इस मैच में केएल राहुल ने 82 और 35 रन, जबकि पड्डिकल ने 167 और 44 रन की पारियां खेलीं।
मुकाबला गंवाने के बाद धनंजय डी सिल्वा ने कहा, “मुझे लगा कि दूसरे दिन से ही हम ज्यादातर समय गेम में बने हुए थे, और लड़कों ने यहां चौथी पारी में भी जबरदस्त संघर्ष किया। यह आसान नहीं था, लेकिन हां, मुझे लगा कि यह एक अच्छा मैच था।”
गाले की पिच को लेकर श्रीलंकाई कप्तान ने कहा, “शुरुआती तीन दिनों में बैटिंग करना अच्छा था। जाहिर है, गाले में चौथी पारी आसान नहीं होती, यह सब जानते हैं, लेकिन मुझे लगा कि (केएल) राहुल और (देवदत्त) पडिक्कल को जो शुरुआत मिली, उन्होंने उसे बड़ी पारियों में बदला और वहां से हम पर दबाव बनाया।”
इस मैच में श्रीलंका ने टॉस गंवाया और भारत ने पहले बल्लेबाजी का फैसला करते हुए 462 रन का विशाल स्कोर बनाकर मेजबान टीम को दबाव में डाल दिया। इसके बाद श्रीलंकाई टीम 284 रन पर सिमट गई। भारत के पास पहली पारी के आधार पर 178 रन की अहम बढ़त थी। अगली पारी में टीम इंडिया ने 193 रन बनाकर श्रीलंका को जीत के लिए 372 रन का टारगेट दिया, जिसके जवाब में मेजबान टीम 206 रन पर सिमट गई।
धनंजय डी सिल्वा ने टॉस की भूमिका को स्वीकारते हुए कहा, “शायद हां, क्योंकि उन्होंने टॉस जीता और बोर्ड पर रन बनाए। जब हम बैटिंग कर रहे थे, तो हमने जल्दी विकेट गंवा दिए और वहां से हम पिछड़ गए।”
खेल
‘जब गोल्ड जीतने पर राष्ट्रगान बजा, वह पल शानदार था,’ एरोबिक जिम्नास्टिक्स में इतिहास रचने के बाद अरिहा ने साझा किए अनुभव

भारतीय एयरोबिक जिम्नास्ट अरिहा पंगमबम ने कुछ हफ्तों पहले एशियन एयरोबिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता था, जिसके साथ वह एशियन चैंपियनशिप में सीनियर महिला व्यक्तिगत श्रेणी में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। फिलीपींस में हुए फाइनल में उन्होंने 19.100 अंक हासिल किए, जिसमें आर्टिस्ट्री (कलात्मकता) में 8.650, एग्जीक्यूशन (प्रदर्शन) में 7.600 और डिफिकल्टी (कठिनाई) में 2.850 अंक शामिल थे।
इस उपलब्धि के बाद अरिहा ने ‘आईएएनएस’ के साथ बातचीत में कहा, “जब मुझे यह गोल्ड मेडल मिला, तो वह पल बहुत शानदार था। मैं इसे शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती। जब मैंने पोडियम पर अपने देश का राष्ट्रगान बजते हुए सुना, तो उस पल मुझे गर्व भी महसूस हुआ क्योंकि मैं कुछ हासिल कर पाई थी, सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए। वह बहुत शानदार अनुभव था और मैं उस समय बहुत खुश थी।”
22 वर्षीय जिम्नास्ट ने कहा, “हम डबल फ्लेक्स फ्लोर, यानी लकड़ी का फ्लोर इस्तेमाल करते हैं। भारत में उत्तराखंड में एक फ्लोर है जो हमें नेशनल गेम्स के दौरान मिला था, लेकिन दुर्भाग्य से, न सिर्फ मैं, बल्कि पूरे भारत के ज्यादातर जिम्नास्ट उस पर ट्रेनिंग भी नहीं कर पाए। हम आमतौर पर रबड़ इंटरलॉकिंग मैट पर ट्रेनिंग करते हैं, इसलिए सिर्फ एक दिन में तालमेल बिठाना हमारे लिए बहुत मुश्किल होता है। प्रतियोगिता से पहले हमें खुद को ढालने के लिए एक दिन की पोडियम ट्रेनिंग दी जाती है, इसलिए हममें से ज्यादातर जिम्नास्ट को मुश्किल होती है, क्योंकि हमें उस फ्लोर पर कभी ठीक से ट्रेनिंग करने का मौका नहीं मिला। यही वह मुश्किल थी जिसका हमने सामना किया।”
उन्होंने कहा, “मुझे खुद पर बहुत गर्व था, और यह बहुत शानदार था क्योंकि हमने कभी अपना राष्ट्रगान बजते हुए नहीं सुना था। हम बस दूसरे देशों का राष्ट्रगान बजते हुए सुनते थे, और मैं सोचती थी कि पोडियम पर हमारा राष्ट्रगान कब सुनाई देगा? तो जब इस साल मुझे मेडल मिला और हमारा राष्ट्रगान बजा, तो वह वाकई बहुत शानदार अनुभव था। मैं इसे शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती। यह न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि हमारी पूरी टीम के लिए एक बहुत बड़ा पल था।”
“कोच ने मेरा काफी मार्गदर्शन किया है। सिर्फ जिम्नास्टिक्स में स्किल्स या मुश्किल एलिमेंट्स सीखने में ही नहीं, बल्कि आमतौर पर भी उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। वे कभी पढ़ना नहीं छोड़ते, कभी सीखना नहीं छोड़ते। उन्हें देखकर ही मुझे बहुत प्रेरणा मिलता है। चूंकि, मैंने फिजिकल एजुकेशन लिया है, इसलिए ट्रेनिंग के दौरान भी वे मुझे बायोमैकेनिक्स और एनाटॉमिकल टर्म्स सिखाते थे, ताकि मैं स्किल्स और जो हम कर रहे हैं, उसे गहराई से समझ सकूं। उन्होंने सफल एथलीट्स की कई कहानियाँ सुनाकर हमें मोटिवेट भी किया, ताकि मुझे हार न मानने और अपने लक्ष्यों के लिए आगे बढ़ने की वजह मिल सके। हालांकि प्रतियोगिता के समय मेरा परिवार वहां मौजूद नहीं था। असल में, मेरी बहन मेरे साथ उसी कैटेगरी में कॉम्पिटिशन में हिस्सा ले रही थी, जो हमारे लिए एक बहुत अच्छा पल था, लेकिन मेरे माता-पिता घर पर लाइवस्ट्रीम के जरिए इसे देख रहे थे। मेरे फोन करने से पहले ही उन्होंने मुझे फोन किया और वे बहुत खुश थे।”
डेलिगेशन के हेड इंदरजीत सिंह राठौर ने कहा, “उस जीत का अहसास बहुत शानदार था। हमने जो हासिल किया है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। असल में, पूरे भारत को भी वैसा ही महसूस हुआ होगा। जब पोडियम पर राष्ट्रगान बजता है और भारत का झंडा सबसे ऊपर होता है, तो यह कोई मामूली बात नहीं होती। जब अरिहा ने ऐसा किया, तो हमारी 49 लोगों की पूरी टीम खुशी से रो पड़ी। यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।”
उन्होंने कहा, “मैं बस यही सोच रहा था कि अगर हमने एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है, तो भविष्य में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीत सकते हैं। मुझे अपने खिलाड़ियों, बच्चों और कोचों की काबिलियत पर भरोसा है; उन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, और हमें उम्मीद है कि इस बार हम वर्ल्ड कप में और भी मेडल जीतेंगे। बेशक, दूसरे देशों के मुकाबले हमारे पोडियम और इंफ्रास्ट्रक्चर उतने अच्छे नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद हमने यह कामयाबी हासिल की। हमारे जिम्नास्ट्स की काबिलियत की वजह से, सही पोडियम न होने पर भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन भविष्य में, हमें उम्मीद है कि बड़ी कंपनियां और सरकार हमें अच्छा पोडियम इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेंगी ताकि हम और भी मेडल जीत सकें। अरिहा निश्चित रूप से बहुत अच्छा कर रही है। वह नेशनल चैंपियन है और अब एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडलिस्ट भी बन गई हैं। मुझे उसके लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सफलता की उम्मीद है। उसे जिस भी मदद या सपोर्ट की जरूरत होगी, मैनेजमेंट टीम उसके साथ है।”
-
दुर्घटना12 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
