राजनीति
तेजस्वी का मार्च राजनीतिक फायदा के लिए, बिहार की जनता पहले ही कर चुकी है रिजेक्ट: संजय झा
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के मार्च पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मामला (छात्र आंदोलन) पहले ही सुलझ चुका है, लेकिन वे इसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कहा, “मैंने पहले भी कहा है कि वे एक गैर-मुद्दे को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मामला पहले ही सुलझ चुका है, लेकिन वे इसका इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह पूरी तरह से विफल रहा है।”
उन्होंन कहा, “यह उनका पार्ट-टाइम राजनीति करने का तरीका है। लोकतंत्र के लिए यह जरूरी है कि विपक्ष का नेता मजबूत रहे और राज्य के लिए सही मुद्दे उठाए, लेकिन वे इस मामले में लगातार विफल रहे हैं।”
संजय झा ने कहा, “उन्हें पहले अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए। उनकी पार्टी के विधायकों को भी लगता है कि जिस तरह की राजनीति वहां हो रही है, उसमें उनका कोई भविष्य नहीं है। मेरा मानना है कि बिहार सरकार ने जिस तरह से इस मामले को संभाला और मुख्यमंत्री ने जिस तरह से स्थिति पर नजर रखी और कार्रवाई की, वह तारीफ के काबिल है। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में भी कई कदम उठाए गए हैं। नीतीश जी ने पहले ही कई सुधार किए हैं और अभी भी कई सुधार लागू किए जा रहे हैं।”
भाजपा दफ्तर के सामने तेजस्वी यादव के वीडियो बनाने पर संजय झा ने कहा, “यह उनकी घटिया राजनीति है। उन्हें कोई ठोस बात करनी चाहिए। उन्हें पानी में कूदकर भी वीडियो बनाए थे। उसके बाद चुनावों के नतीजे सबसे सामने हैं। बिहार की जनता ने उन्हें बिल्कुल रिजेक्ट किया। इसलिए उन्हें लोगों के बीच में जाना चाहिए था और पता करना चाहिए था कि जनता ने क्यों रिजेक्ट किया।”
कांग्रेस के पूर्ण ‘वंदे मातरम’ गीत गाने से इनकार पर जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा, “राष्ट्रीय गीत को संसद ने पास किया है। इसलिए इसको सभी को मानना चाहिए। कोई भी उससे ऊपर नहीं है। सभी को कानून के दायरे में ही रहना है।”
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड : नियुक्ति परीक्षाएं रद्द करने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे अभ्यर्थी, चार याचिकाओं पर तीन बजे होगी सुनवाई

झारखंड में 22 नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द किए जाने के सरकार के फैसले के खिलाफ प्रभावित अभ्यर्थियों की कानूनी लड़ाई तेज हो गई है। इस फैसले को चुनौती देते हुए अब तक चार हो याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनपर गुरुवार को दूसरी पाली में अपराह्न तीन बजे सुनवाई होगी।
याचिकाएं दायर करने वालों में 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से जुड़े चयनित अभ्यर्थी शामिल हैं। याचिकाएं अवधेश कुमार, दीपमाला, सोनम कुमारी, सौरभ सिंह समेत अन्य सफल अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल की गई हैं।
अभ्यर्थियों का मुख्य तर्क है कि सरकार ने उनका पक्ष सुने बिना एकतरफा तरीके से परीक्षाओं और उनके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द कर दिया। बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी हैं, जो चयन के बाद सरकारी सेवा में योगदान दे चुके हैं। ऐसे में सरकार के फैसले से उनकी नौकरी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।
अभ्यर्थियों ने अपने पक्ष में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी अभ्यर्थी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को बिना जांच और सुनवाई नौकरी से हटाना उचित नहीं है।
उनका दावा है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी, मेरिट में स्थान हासिल किया और उसके बाद नियुक्ति मिली। जेएसएससी-सीजीएल के मामले में कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क भी दिया गया है कि परीक्षा का परिणाम हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बाद जारी हुआ था। ऐसे में बाद में पूरी परीक्षा को रद्द करने के सरकार के फैसले की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया गया है।
दरअसल, झारखंड सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीआईडी और एसआईटी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर बड़े पैमाने पर परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया है। इनमें जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल, सिविल जज, डिप्टी कलेक्टर, फूड सेफ्टी ऑफिसर, ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, लेक्चरर, असिस्टेंट इंजीनियर, वन क्षेत्राधिकारी और सहायक वन संरक्षक समेत विभिन्न पदों से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं।
राजनीति
राहुल ने राजीव गांधी को दी श्रद्धांजलि, लिखा-आपकी सीख मेरी शक्ति है और आपकी यादें मेरी हिम्मत

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारतीयों के बीच सद्भावना, हर दिल में करुणा और हर नागरिक को न्याय और लोकतंत्र में समान अधिकार। पापा, आपकी ये सीख मेरी शक्ति है और आपकी यादें मेरी हिम्मत। आपके सपनों का भारत बनाने का संकल्प हमेशा मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा।”
वहीं, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “भारत रत्न राजीव गांधी जी को उनकी जयंती पर गहरे स्नेह और सम्मान के साथ याद कर रहे हैं। वे एक दूरदर्शी और गतिशील नेता थे, जिन्होंने लाखों लोगों को प्रेरित किया और हमारे देश को 21वीं सदी के लिए तैयार करने के लिए उसमें बदलाव लाए।”
केसी वेणुगोपाल ने लिखा, “आज, लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता उनके दिखाए रास्ते पर चल रहे हैं। उनका मकसद देश के लिए राजीव जी के विजन को पूरा करना और उसी ऊर्जा व उत्साह के साथ पार्टी को आगे बढ़ाना है, जो वे लेकर आए थे। उनका जीवन-सफर बहुत जल्द समाप्त हो गया और भारत की एकता के लिए दी गई उनकी सर्वोच्च कुर्बानी को कभी नहीं भुलाया जा सकता। राजीव जी, हम आपको बहुत याद करते हैं! इस अवसर पर वीर भूमि पर राजीव गांधी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।”
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “आज जब हम राजीव गांधी की 82वीं जयंती मना रहे हैं और देशभर में युवाओं के बीच बढ़ती बेचैनी और हलचल को देख रहे हैं, तब यह याद करना महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री राजीव गांधी ही थे जिन्होंने संविधान में संशोधन कर मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष की और 18 साल के युवाओं को वोट देने का अधिकार दिया।”
जयराम रमेश ने लिखा,”जिन्होंने स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया। 1988 की नई शिक्षा नीति लेकर आए, जिसने कई अन्य नए प्रयासों के साथ देशभर में नवोदय विद्यालयों का नेटवर्क स्थापित किया। देश के सभी जिलों को कवर करने वाले नेहरू युवा केंद्र संगठन की स्थापना की (जिसका नाम अब बदलकर माई भारत कर दिया गया है) और भारत को निर्णायक रूप से आईटी युग में लेकर गए, जिससे रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा हुए।”
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “राजीव गांधी! सबसे युवा प्रधानमंत्री, डिजिटल इंडिया के वास्तुकार, आधुनिक भारत के स्वप्नदृष्टा, भारत की सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति के जनक जिनकी दूरदर्शिता के फलस्वरुप ही देश कंप्यूटर-युग में प्रवेश कर सका। भारत माता के सपूत, भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन।”
राष्ट्रीय समाचार
एलआईसी को एचडीएफसी बैंक में हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत तक करने की आरबीआई से मिली मंजूरी, दोनों के शेयरों में तेजी

देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को एचडीएफसी बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मंजूरी मिल गई है। इस खबर के बाद गुरुवार के कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में एलआईसी और एचडीएफसी बैंक, दोनों के शेयरों में बढ़त देखने को मिली।
एचडीएफसी बैंक के एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, आरबीआई ने एलआईसी के उस आवेदन को मंजूरी दे दी है जिसके तहत वह बैंक की चुकता शेयर पूंजी अथवा मतदान अधिकारों में 9.99 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकती है।
वर्तमान में एलआईसी के पास 14 अगस्त तक एचडीएफसी बैंक की कुल शेयर पूंजी का 4.11 प्रतिशत हिस्सा है। आरबीआई की मंजूरी के बाद अब सरकारी बीमा कंपनी के पास अपनी हिस्सेदारी को दोगुने से अधिक स्तर तक बढ़ाने का विकल्प उपलब्ध हो गया है।
हालांकि, इस मंजूरी का यह अर्थ नहीं है कि एलआईसी तुरंत अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 प्रतिशत कर देगी। किसी भी अतिरिक्त खरीदारी को आरबीआई द्वारा निर्धारित शर्तों, सेबी के नियमों और अन्य नियामकीय प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा।
एचडीएफसी बैंक ने अपने विवरण में कहा कि यह मंजूरी केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित शर्तों और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के लागू नियमों के अनुपालन के अधीन है।
एलआईसी देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में से एक है, जबकि एचडीएफसी बैंक भारत के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है। ऐसे में इस मंजूरी को वित्तीय क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
बाजार में इस खबर का सकारात्मक असर भी देखने को मिला। गुरुवार के शुरुआती कारोबार में एनएसई पर एलआईसी का शेयर 1.7 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ 420.15 रुपए के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। दिन के सत्र में स्टॉक ने 421 रुपए का हाई छुआ। वहीं, कंपनी का पिछले 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 468.48 रुपए और निम्नतम स्तर 360.75 रुपए है।
वहीं एचडीएफसी बैंक का शेयर भी करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 725.8 रुपए के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। दिन के कारोबारी सत्र में बैंकिंग शेयर ने 728.30 रुपए का हाई टच किया। इसके साथ ही स्टॉक ने पिछले 52 सप्ताह के दौरान 1,020.50 रुपए का उच्चतम स्तर और 722 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ।
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