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Thursday,02-April-2026
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चुनाव आयोग ने वापस लिया 65 साल से ऊपर वालों को पोस्टल बैलेट सुविधा का आदेश

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भारतीय निर्वाचन आयोग ने बीते दिनों जारी अपने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें 65 साल से अधिक उम्र के मतदाताओं को पोस्टल बैलेट से वोट देने की सुविधा देने का ऐलान किया गया था। चुनाव आयोग ने गुरुवार को जारी सूचना में कहा है कि आगामी बिहार विधानसभा और अन्य उपचुनावों में 65 वर्ष से अधिक के मतदाताओं को पोस्टल बैलेट सुविधा न देने का फैसला किया गया है। चुनाव आयोग ने कहा है कि कोरोना वायरस को देखते हुए 65 वर्ष से अधिक के लोगों को वोट डालने के लिए पोस्टल बैलेट सुविधा देने की सिफारिश हुई थी। ताकि वे बगैर किसी के संपर्क में आए अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। आयोग की सिफारिश पर विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 19 जून को नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी थी। लेकिन इस नियम को लागू नहीं किया जाएगा।

आयोग ने तर्क देते हुए कहा है कि इन नियमों को लागू करने से पहले आयोग जमीनी हालात से लगातार रूबरू हो रहा है। कोरोना वायरस से उपजे इस अप्रत्याशित माहौल में चुनाव तैयारियों की लगातार आयोग निगरानी कर रहा है। कमीशन ने हर पोलिंग सेंटर पर एक हजार वोटर्स की संख्या सीमित कर दी है। मतदाताओं को कोरोना से बचाने के लिए अन्य तमाम उपाय किए जा रहे हैं। जिसके लिए अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था हो रही है।

ऐसे में इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए अब 65 साल से ऊपर के लोगों को पोस्टल बैलेट की सुविधा न देने का फैसला किया गया है। हालांकि, पोस्टल बैलेट की सुविधा पहले की तरह 80 साल से ऊपर के लोगों को मिलेगी। इसके अलावा कोविड पॉजिटिव या फिर होम आइसोलेशन में रहने वाले पोस्टल बैलेट से वोट डाल सकेंगे। इसके लिए सक्षम अधिकारी से प्रमाणपत्र भी देना होगा।

राष्ट्रीय समाचार

भारत की डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 30 तक करीब चार गुना बढ़ेगी, 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश होने की उम्मीद: रिपोर्ट

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भारत की डेटा सेंटर क्षमता वित्त वर्ष 30 तक करीब चार गुना बढ़कर 4 गीगावाट हो सकती है। इसमें 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश होने की संभावना है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रति मिलियन इंटरनेट उपभोक्ताओं पर 1.2 मेगावाट की डेटा सेंटर क्षमता मौजूद है, जो कि वैश्विक औसत प्रति मिलियन 5 मेगावाट की क्षमता से काफी कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटलीकरण, लागत प्रतिस्पर्धा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का बढ़ता उपयोग भारत के डेटा सेंटर क्षेत्र में मजबूत वृद्धि के कारक हैं। वैश्विक डेटा सेंटर बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2025 तक लगभग 4 प्रतिशत और क्षमता 1.2 गीगावाट होने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2022-2025 के दौरान देश की को-लोकेशन डेटा सेंटर क्षमता दोगुनी होकर 1.2 गीगावाट हो गई, साथ ही उच्च उपयोग स्तर (औसतन 90 प्रतिशत से अधिक) ने भी इसमें योगदान दिया।

रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-2030 के दौरान उद्योग के राजस्व में लगभग 24 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) का अनुमान लगाया है, जिसमें ईबीआईटीडीए मार्जिन लगभग 40-42 प्रतिशत पर स्थिर रहेगा। हालांकि, विकास चरण में उच्च पूंजीगत व्यय चक्र के कारण लीवरेज स्तर अपेक्षाकृत उच्च बना रह सकता है।

लंबी अवधि के समझौतों के माध्यम से इस क्षेत्र में राजस्व की मजबूत स्पष्टता है, जो स्थिर नकदी प्रवाह सुनिश्चित करती है और ग्राहकों की उच्च स्तर की प्रतिबद्धता को बढ़ावा देती है।

केयरएज रेटिंग्स की निदेशक पूजा जालान ने कहा, “उच्च पूंजीगत व्यय, मजबूत प्रायोजकों की धन जुटाने की क्षमता और भारतीय डेटा सेंटर संस्थाओं को लक्षित बड़े इक्विटी निवेशों के साथ यह उद्योग तेजी से विकास कर रहा है।”

उन्होंने कहा कि एआई-आधारित मांग विकास की रफ्तार को गति देगी, जबकि उद्योग की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए विद्युत अवसंरचना का समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती लागत और कमीशनिंग की समयसीमा में वृद्धि के बीच नकदी प्रवाह को प्रबंधित करने की क्षमता निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण होगी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के वर्षों में डेटा सेंटर की लागत में 50-70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण भूमि की ऊंची कीमतें, एडवांस कूलिंग टेक्नोलॉजी को अपनाना और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश है। इसके साथ ही, कार्यक्षेत्र में बदलाव और मंजूरी मिलने में देरी के कारण कमीशनिंग की समयसीमा भी बढ़ गई है।

केयरएज रेटिंग्स के एसोसिएट डायरेक्टर तेज किरण ने कहा कि डेटा सेंटर की मांग वर्तमान में एंटरप्राइज आईटी और क्लाउड स्टोरेज द्वारा संचालित है, लेकिन अगले 5-7 वर्षों में एआई-आधारित कार्यभार विकास के अगले चरण को गति प्रदान करेगा।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

हम उन पर भरोसा नहीं करते’: पाकिस्तान की यूएस-ईरान बातचीत में मध्यस्थता की कोशिश पर इजरायली राजदूत

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भारत में इजरायल के राजदूत रियुवेन अजार ने कहा कि इजरायल उन देशों पर भरोसा नहीं करता है जिनके साथ उसके डिप्लोमैटिक संबंध नहीं हैं। जब न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ बातचीत के दौरान इजरायली राजदूत से पूछा गया कि क्या मौजूदा हालात में इजरायल पाकिस्तान पर भरोसा करता है, तो उन्होंने यह प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कर दिया है कि इजरायल पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करता है।

अजार ने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल का नजरिया उसके अपने और खास साथियों के अंदाज से तय होता है। इजरायली राजदूत ने आईएएनएस से ​​कहा, “हम ऐसे देश पर भरोसा नहीं करने जा रहे हैं जिसके हमारे साथ डिप्लोमैटिक संबंध नहीं हैं। हम अपने और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर भरोसा करते हैं।”

दरअसल, जब से अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये दावा किया कि ईरान और अमेरिका हमले को रोकने के लिए बातचीत की पहल हो रही है, तब से पाकिस्तान ने दोनों पक्षों में बातचीत की मध्यस्थता की पेशकश की। इसी के बाद इजरायली राजदूत ने पाकिस्तान को लेकर यह प्रतिक्रिया दी है।

बता दें, एक तरफ ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच भारी संकट जारी है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी भारी तनाव है। ऐसे में अपने देश के साथ जारी झगड़े को सुलझाने के बजाए पाकिस्तानी सरकार ने अमेरिका और ईरान में सुलह कराने की पहल कर दी। पाकिस्तान ने खुद को बातचीत के लिए एक संभावित जगह के तौर पर पेश किया है। इसके लिए उसने वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ अपने संबंधों का हवाला दिया है, जबकि वह अफगानिस्तान में आम लोगों और आम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले करता रहता है।

उनसे पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अमेरिका के कथित निवेश प्लान और इसका भारत-इजरायल संबंधों पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछा गया। अजार ने कहा कि यह मामला सीधे तौर पर इजरायल से जुड़ा नहीं है, जबकि उन्होंने नई दिल्ली के साथ करीबी सहयोग की बात दोहराई।

उन्होंने कहा, “इजरायल इससे जुड़ा नहीं है। भारत के साथ हमारा बहुत बड़ा सहयोग है। खुशकिस्मती से, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की वजह से, हम रक्षा क्षेत्र और दूसरे क्षेत्रों में बड़े समझौते को आगे बढ़ा पाए हैं और उन पर हस्ताक्षर कर पाए हैं।”

बता दें, इजरायल ने पहले भी आतंकी घटनाओं के बाद भारत को मजबूत डिप्लोमैटिक समर्थन दिया है। जम्मू और कश्मीर के पहलगाम हमले के बाद इजरायल उन पहले देशों में से था जिसने भारत के सेल्फ-डिफेंस के अधिकार के लिए एकजुटता और समर्थन दिखाया था। बता दें, पहलगाम हमले में पाकिस्तान के समर्थन वाले आतंकवादियों ने 26 पर्यटकों की हत्या की थी।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले की निंदा करने के लिए खुद प्रधानमंत्री मोदी से बात की और इजरायल में 7 अक्टूबर को हुए हमलों से तुलना करते हुए एकजुटता दिखाई। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं होना चाहिए।

पहलगाम हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करते हुए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। अजार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह भी कहा था कि इजरायल भारत के सेल्फ-डिफेंस के अधिकार का समर्थन करता है और कहा कि “आतंकवादियों को पता होना चाहिए कि उनके जघन्य अपराधों से छिपने की कोई जगह नहीं है।”

नेतन्याहू उन पहले ग्लोबल नेताओं में से थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत के जवाब का समर्थन किया और दोहराया कि हर देश को अपने नागरिकों को बॉर्डर पार के खतरों से बचाने का मौलिक अधिकार है।

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राजनीति

पश्चिम एशिया में संकट पर सर्वदलीय बैठक का भाजपा सांसदों ने किया समर्थन

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक को लेकर सत्तापक्ष के सांसदों ने सरकार की पहल का समर्थन किया है और इसे राष्ट्रीय एकजुटता की दिशा में एक अहम कदम बताया है। भाजपा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही इस मुद्दे पर संसद में जानकारी दे चुके हैं।

भाजपा शशांक मणि त्रिपाठी ने संसद के बाहर समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि दो दिन पहले लोकसभा में प्रधानमंत्री ने अपने बयान के माध्यम से पूरे देश को पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात से अवगत कराया था। इस संकट की घड़ी में सभी राजनीतिक दलों को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, कोविड-19 महामारी के समय जिस तरह देश ने एकजुटता दिखाई थी, उसी प्रकार इस वैश्विक संकट में भी सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें सभी दलों के सुझाव लिए जाएंगे।

गुजरात विधानसभा द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल पारित किए जाने पर शशांक त्रिपाठी ने इसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यदि गुजरात ने यह पहल की है तो अन्य राज्यों को भी इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे कानून देश में समानता और न्याय की भावना को मजबूत करेंगे।

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत को लेकर भी भाजपा सांसद त्रिपाठी ने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि इस बातचीत से युद्ध में विराम की उम्मीद जगी है।

शंशाक त्रिपाठी के मुताबिक, प्रधानमंत्री पहले ही मध्य-पूर्व के कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से संवाद कर चुके हैं और शांति स्थापित करने के लिए भारत की भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका और अन्य देशों के बीच जारी संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत से यह संकेत मिलता है कि युद्ध पर विराम लग सकता है। सर्वदलीय बैठक में सभी विपक्षी नेताओं को आमंत्रित किया गया है ताकि भारत की भूमिका पर व्यापक चर्चा हो सके।

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