राजनीति
मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर चयनात्मक दृष्टिकोण लोकतंत्र के लिए खतरनाक : पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि मानवाधिकार का बहुत ज्यादा हनन तब होता है, जब उसे राजनीतिक रंग से देखा जाता है, राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है, राजनीतिक नफा-नुकसान के तराजू से तौला जाता है। किसी भी घटना का जिक्र किए बिना प्रधानमंत्री ने सचेत करते हुए कहा, “इस तरह का सलेक्टिव व्यवहार (चयनात्मक दृष्टिकोण) लोकतंत्र के लिए भी उतना ही नुकसानदायक होता है।”
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में मानवाधिकार की व्याख्या कुछ लोग अपने-अपने तरीके से, अपने-अपने हितों को देखकर करने लगे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को 28वें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के स्थापना दिवस कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा मानवाधिकारों को बरकरार रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा, “दशकों से मुस्लिम महिलाएं तीन तलाक के खिलाफ कानून की मांग कर रही थीं। हमने ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाकर, मुस्लिम महिलाओं को नए अधिकार दिए हैं।”
पीएम मोदी ने कहा कि आज महिलाओं के लिए काम के अनेक सेक्टर्स को खोला गया है, वो 24 घंटे सुरक्षा के साथ काम कर सकें, इसे सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े-बड़े देश ऐसा नहीं कर पा रहे, लेकिन भारत आज करियर वुमेन को 26 हफ्ते की पेड मैटरनिटी लीव दे रहा है। इसी तरह, प्रधानमंत्री ने ट्रांसजेंडर, बच्चों और घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू समुदायों के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों के बारे में बताया।
सख्त कानून व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने 650 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए हैं और दुष्कर्म के जघन्य अपराध के लिए मौत की सजा की शुरुआत की है।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा कतार में अंतिम व्यक्ति के बारे में सोचा है और यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की है कि कोई भी व्यक्ति, यहां तककि जो अपने बुनियादी मानवाधिकारों से अनजान हैं, उन्हें भी नहीं छोड़ा जाए।
उन्होंने कहा, “यही कारण है कि हम जन-धन योजना, उज्जवला योजना और स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाएं लेकर आए हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि मानवाधिकार की अवधारणा का गरीबों की गरिमा से गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि जब गरीब से गरीब व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का बराबर लाभ नहीं मिलता है तो अधिकारों का सवाल उठता है। प्रधानमंत्री ने गरीबों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि जो गरीब कभी शौच के लिए खुले में जाने को मजबूर था, उस गरीब को जब शौचालय मिलता है, तो उसे डिग्निटी भी मिलती है, इसी प्रकार जो गरीब कभी बैंक के भीतर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था उस गरीब का जब जनधन खाता खुलता है, तो उसमें हौसला आता है, उसकी डिग्निटी बढ़ती है। इसी तरह, रुपे कार्ड, महिलाओं के लिए उज्जवला गैस कनेक्शन और पक्के मकानों का संपत्ति का अधिकार जैसे उपाय उस दिशा में प्रमुख कदम हैं।
हाल के पैरालंपिक में पैरा-एथलीटों के प्रेरणादायक प्रदर्शन को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में दिव्यांगजन के लिए कानून बनाए गए हैं। उन्हें नई सुविधाओं से जोड़ा गया है। दिव्यांगजनों के लिए अनुकूल भवन बनाए जा रहे हैं और दिव्यांगों के लिए भाषा का मानकीकरण किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने कहा कि महामारी के दौरान गरीब, असहाय और वरिष्ठ नागरिकों को उनके खाते में सीधे वित्तीय सहायता दी गई। वन नेशन-वन राशन कार्ड के लागू होने से प्रवासी मजदूरों की परेशानी काफी कम हुई।
उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी काम किया गया है और इस दिशा में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण अधिनियम पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सभी कदमों से देश से अन्याय को खत्म करने में मदद मिलेगी।
इस बात को दोहराते हुए कि उनकी सरकार मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील है और भारतीय समाज के हर वर्ग के सर्वोत्तम हित में काम कर रही है, पीएम मोदी ने आगे कहा कि राजग सरकार जम्मू और कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के विकास की दिशा में भी गंभीरता से काम कर रही है।
राजनीति
दीया मिर्जा के दीपावली वीडियो पर सियासी घमासान, शिवसेना ने किया विरोध तो एनसीपी आई सपोर्ट में

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा अभिनेत्री दीया मिर्जा का पर्यावरण-अनुकूल और पटाखा-मुक्त दीपावली को बढ़ावा देने वाला जागरूकता वीडियो हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। एक ओर शिवसेना के नेता आनंद दुबे ने वीडियो का विरोध किया है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो अभिनेत्री दीया मिर्जा के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।
शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि कलाकार लोगों को ज्ञान देने के बजाय टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा, “देखिए, सनातन इतना महान है कि उसे दीया मिर्जा या किसी से जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। दीपावली का पावन पर्व सभी हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा त्योहार होता है। हमें दीपावली का पर्व कैसे और किस तरह से मनाना है, ये किसी और से जानने की जरूरत नहीं है। हमें अच्छी तरह से अपनी संस्कृति के बारे में पता है और यह भी पता है कि पर्यावरण की किस तरह से रक्षा करनी है।”
उन्होंने कहा कि कलाकार टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें, हम अपना काम कर लेंगे। हम अपनी परंपरा, आदर्शों और मूल्यों को हमेशा आगे रखकर चलते हैं। तो हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है कि किस तरह से त्योहार मनाना चाहिए।”
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र परिवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो का कहना है कि दीया मिर्जा ने हाई कोर्ट के आदेशों का पालन किया है। उन्होंने कहा, “दीया मिर्जा ने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर वीडियो जारी नहीं किया है, बल्कि बीएमसी के किसी इंचार्ज ने उन्हें वीडियो बनाने के लिए अप्रोच किया था और दीया मिर्जा ने वीडियो बना दी, तब कहीं जाकर बीएमसी के हैंडल पर वीडियो डाली गई। जब दीया मिर्जा को अप्रोच किया जा रहा था, तब बीएमसी की मेयर ऋतु रावडे को इस बात की जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने उस समय कुछ भी क्यों नहीं कहा था? इसका मतलब है कि बीएमसी में भी अलग-अलग ग्रुप बन रहे हैं, जो मेयर को कुछ बताते नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह का वीडियो माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे ने भी बनाया था। दोनों ने भी वही बात कही थी। इस वीडियो को लेकर बेवजह विवाद बढ़ाया जा रहा है। देखिए, दीपावली का त्योहार हम सभी मनाते हैं। यह खुशी का पर्व है, तो जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस तरह की बातें कही जाती हैं, तो यह गलत है। दीया मिर्जा ने कोई गलती नहीं की, उन्हें सिर्फ बताया गया था कि ये हाई कोर्ट के आदेश हैं। बीएमसी ने वही बात दीया मिर्जा समेत सभी कलाकारों से कहलवाई, लेकिन भाजपा बात का बतंगड़ बना रही है।”
राजनीति
तमिलनाडु में नई तमिल फिल्मों को बड़ी राहत, रिलीज के पहले हफ्ते में रोजाना 6 शो की मंजूरी

तमिलनाडु सरकार ने फिल्म उद्योग को बड़ी राहत देते हुए नई तमिल फिल्मों के प्रदर्शन को लेकर महत्वपूर्ण फैसला किया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के सभी सिनेमाघरों में नई रिलीज होने वाली तमिल फिल्मों के लिए रिलीज की तारीख से एक सप्ताह तक प्रतिदिन छह शो (सुबह 6:00 बजे से अगले दिन सुबह 2:30 बजे के बीच) चलाने की अनुमति देने के आदेश जारी किए हैं।
यह फैसला तमिल फिल्म एक्टिव प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, तमिल फिल्म प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और तमिलनाडु थिएटर एवं मल्टीप्लेक्स ओनर्स एसोसिएशन की मांगों पर विचार करने के बाद लिया गया। संगठनों ने सरकार से नई फिल्मों के प्रदर्शन के लिए शो की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया था।
वर्तमान में तमिलनाडु सिनेमा (विनियमन) नियम, 1957 के तहत सिनेमाघरों को जारी ‘सी’ फॉर्म लाइसेंस की शर्तों के अनुसार प्रतिदिन चार शो प्रदर्शित करने की अनुमति है, हालांकि राज्य सरकार पहले से ही नई तमिल फिल्मों को रिलीज के बाद सात दिनों तक प्रतिदिन पांच शो चलाने की विशेष अनुमति दे रही थी। इसके अलावा स्थानीय त्योहारों, सार्वजनिक अवकाशों तथा सप्ताहांत पर भी पांच शो के प्रदर्शन की व्यवस्था लागू थी।
फिल्म उद्योग की मांग पर विचार-विमर्श के बाद मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु सिनेमा (विनियमन) नियमों में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया। इसके तहत अब नई तमिल फिल्मों को रिलीज की तारीख से सात दिनों तक प्रतिदिन सुबह 6 बजे से अगले दिन सुबह 2:30 बजे तक अधिकतम छह शो प्रदर्शित किए जा सकेंगे।
इससे पहले तमिलनाडु की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री विजय ने उच्चस्तरीय समिति के गठन का आदेश दिया। यह समिति पूर्व पुलिस महानिदेशक जेके त्रिपाठी, आईपीएस (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य जेलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना और उसे और अधिक मजबूत बनाने के लिए सिफारिशें देना है। यह फैसला थेनी जिला जेल से हाल ही में 17 कैदियों के फरार होने की घटना के बाद लिया गया है।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य प्रदेश: राज्यसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का नामांकन खारिज

मध्य प्रदेश में 12 नवंबर को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए मंगलवार को जांच के दौरान कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का नामांकन खारिज कर दिया गया। इससे भाजपा उम्मीदवार और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को चुनौती देने की विपक्षी दल की कोशिश को बड़ा झटका लगा है।
राजकुमार लोहानी ने नामांकन दाखिल करने के आखिरी दिन, सोमवार को कांग्रेस विधायकों के समर्थन से अपने नामांकन पत्र दाखिल किए थे।
लोहानी का नामांकन इसलिए खारिज कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने अनिवार्य ‘फॉर्म 26’ हलफनामा जमा नहीं किया था। इस हलफनामे में उम्मीदवार की संपत्ति, देनदारियों, शैक्षणिक योग्यता और यदि कोई आपराधिक रिकॉर्ड हो तो उसका विवरण देना होता है।
लोहानी ने कमियों को सुधारने का मौका मांगा। उन्होंने झारखंड में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का उदाहरण दिया, जिन्हें अपने नामांकन पत्रों में सुधार करने की अनुमति दी गई थी।
कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे, जो लोहानी के प्रस्तावकों में से एक थे, ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने पुरी के नामांकन हलफनामे पर भी आपत्तियां जताईं।
कटारे ने मंगलवार को तीन आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री की पत्नी का नाम न बताने, विदेशी मुद्रा में कुछ विदेशी संपत्तियों की घोषणा करने और हलफनामे के नोटरीकरण में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए।
कटारे ने प्रेस से बात करते हुए कहा, “हमने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने इन तीनों बिंदुओं पर आपत्तियां जताई हैं। हमें बहुत उम्मीद तो नहीं है, लेकिन देखते हैं कि रिटर्निंग ऑफिसर क्या फैसला लेते हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुरी के हलफनामे में जिनेवा में एक अपार्टमेंट और विदेशी बैंक खातों का विवरण ठीक से नहीं दिया गया है।
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के कारण जरूरी हो गया था।
भाजपा ने 28 अक्टूबर को पुरी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। उन्होंने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव और राज्य भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया।
230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 65 विधायक हैं। इससे चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को संख्या बल के लिहाज से काफी बढ़त हासिल है।
उपचुनाव के लिए मतदान 12 नवंबर को होना है और उसी दिन वोटों की गिनती भी की जाएगी।
नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 5 नवंबर है।
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