राजनीति
पवन कल्याण और पीएम मोदी के मिलने की संभावना
टॉलीवुड अभिनेता और जन सेना पार्टी के अध्यक्ष पवन कल्याण और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुक्रवार की रात मुलाकात करने की संभावना है। पवन कल्याण दिन में बाद में बंदरगाह शहर पहुंचेंगे और रात करीब साढ़े आठ बजे प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे।
जन सेना के सूत्रों के मुताबिक, बैठक उस होटल में होगी, जहां मोदी ठहरेंगे।
जन सेना की राजनीतिक मामलों की समिति के अध्यक्ष एन. मनोहर के भी बैठक के दौरान पवन कल्याण के साथ जाने की संभावना है। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से मिली जानकारी के अनुसार बैठक तय की गई है।
यह आंध्र प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि भाजपा के सहयोगी पवन कल्याण 2024 के चुनावों में सत्तारूढ़ वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) को लेने के लिए विपक्ष का एक महागठबंधन बनाने के इच्छुक हैं।
मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के आलोचक अभिनेता ने कुछ महीने पहले कहा था कि वह वाईएसआरसीपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए बीजेपी के रोडमैप का इंतजार कर रहे हैं।
अगले चुनावों में वाईएसआरसीपी विरोधी वोटों के विभाजन को रोकने के लिए पवन कल्याण की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) को सहयोगी के रूप में रखने की इच्छा के मद्देनजर यह बैठक महत्वपूर्ण होगी।
पवन कल्याण ने 2014 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों में तेदेपा-भाजपा गठबंधन का समर्थन किया था।
जन सेना ने चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन अभिनेता-राजनेता ने गठबंधन के लिए प्रचार किया था और मोदी और तेदेपा नेता एन. चंद्रबाबू नायडू के साथ कुछ जनसभाओं को संबोधित किया था।
जन सेना ने बाद में 2014 में राज्य के विभाजन के समय आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने के लिए भाजपा और तेदेपा दोनों के साथ संबंध तोड़ लिया था।
2019 में, जन सेना ने वाम दलों और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था, लेकिन उसने 175 सदस्यीय विधानसभा में सिर्फ एक सीट जीती थी, जिसमें पवन कल्याण खुद दोनों सीटों पर हार गए थे।
2020 में, जन सेना और भाजपा अपने गठबंधन को पुनर्जीवित करने के लिए सहमत हुए। हालांकि, उन्होंने अभी तक लोगों के मुद्दों पर कोई संयुक्त कार्यक्रम नहीं किया है।
राज्य के भाजपा नेता भी टीडीपी के साथ गठबंधन को पुनर्जीवित करने के पवन कल्याण के सुझाव के समर्थन में नहीं हैं।
प्रधानमंत्री शनिवार को विशाखापत्तनम में विभिन्न परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। वह एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे, जिसमें मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के भाग लेने की संभावना है।
पवन कल्याण को जनसभा में आमंत्रित किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर पिछले कुछ दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं।
इस पर प्रदेश भाजपा के नेता चुप्पी साधे हुए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में खपत मजबूत, दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान : वित्त मंत्रालय

भारतीय अर्थव्यवस्था की गति मजबूत बनी हुई है और वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में जीडीपी के 7.35 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी अक्टूबर की मासिक समीक्षा में दी गई।
मासिक समीक्षा में बताया गया कि देश की जीडीपी वृद्धि को सहारा मजबूत औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा खपत, पोर्ट ट्रैफिक, जीएसटी संग्रह और ऑटोमोबाइल बिक्री से मिल रहा है, जो दिखाता है कि देश में खपत मजबूत बनी हुई है।
समीक्षा में बताया गया, “वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि के बाद, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में पेश किए गए विभाग के ‘नाउकास्टिंग मॉडल’ के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.35 प्रतिशत रहने का अनुमान है।”
जुलाई-सितंबर तिमाही में औद्योगिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं। अगस्त 2026 में ‘इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन’ (आईआईपी) में सालाना आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र की 9 प्रतिशत की वृद्धि का मुख्य योगदान रहा। सितंबर में ‘इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज’ (आईसीआई) में सालाना आधार पर 7.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सितंबर में ‘एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई’ अगस्त के 52.8 से बढ़कर 55.1 हो गया, जो विनिर्माण गतिविधियों में तेजी से हो रहे विस्तार को दर्शाता है।
वित्त मंत्रालय की समीक्षा में कहा गया, “हाल की नीतिगत पहल, निवेश और कंपनियों के स्तर पर हो रहे बदलाव यह दर्शाते हैं कि विनिर्माण, स्थानीयकरण और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने के प्रयास जारी हैं। आगे चलकर, विनिर्माण आधार को व्यापक बनाने के लिए पैमाने में वृद्धि, घरेलू मूल्य संवर्धन, सप्लाई चेन को मजबूत करना और निर्यात के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।”
वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद, सितंबर 2026 में भारत का बाहरी क्षेत्र मजबूत बना रहा। इस दौरान वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में 11 प्रतिशत (सालाना आधार पर) की वृद्धि दर्ज की गई। इस वृद्धि में वस्तुओं के निर्यात का मुख्य योगदान रहा, जिसमें 23.1 प्रतिशत (सालाना आधार पर) की बढ़ोतरी हुई। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पादों की अहम भूमिका रही।
इसके अलावा, भारत की बाहरी स्थिति को पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार का भी समर्थन मिला, जो 16 अक्टूबर 2026 तक 721 अरब डॉलर के स्तर पर था।
इस दौरान भारत के वित्तीय क्षेत्र ने भी मजबूती दिखाई। वैश्विक स्तर पर सॉवरेन बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और इक्विटी बाजारों में उतार-चढ़ाव का इस पर बहुत कम असर पड़ा। मनी मार्केट में कामकाज सुचारू रूप से चलता रहा; बाजार दरें पॉलिसी रेपो रेट के करीब बनी रहीं और ओएमओ (ओपन मार्केट ऑपरेशंस) के जरिए अतिरिक्त नकदी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया गया। कुल बैंक क्रेडिट ग्रोथ में भी तेजी बनी रही, जो सालाना आधार पर 21.6 प्रतिशत तक बढ़ गई।
समीक्षा के अनुसार, आने वाले समय में महंगाई के दूसरे दौर के असर को रोकने के लिए हाल ही में बढ़ाई गई ब्याज दरों का असर, केंद्रीय बैंक द्वारा नकदी के सक्रिय प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
राजनीति
आई-पैक छापेमारी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की ईडी की मांग पर सुरक्षित रखा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। मामला कोलकाता स्थित राजनीतिक सलाहकार संस्था आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के कार्यालय में हुई ईडी की तलाशी के दौरान कथित हस्तक्षेप से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एनवी अंजारिया की पीठ ने फैसला सुरक्षित रखा कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए या फिर पश्चिम बंगाल की नई निर्वाचित सरकार खुद इस पर निर्णय ले।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि राज्य में सरकार बदल चुकी है, इसलिए अब राज्य सरकार खुद तय कर सकती है कि जांच सीबीआई को सौंपनी है या नहीं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के किसी विशेष आदेश की आवश्यकता नहीं है।
पीठ ने भी सवाल किया कि बदली हुई परिस्थितियों में पश्चिम बंगाल सरकार स्वयं मामले को सीबीआई को क्यों नहीं सौंप सकती। अदालत ने कहा कि जब ईडी ने याचिका दायर की थी, तब जो स्थिति थी, वह अब बदल चुकी है।
वहीं, ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यदि फैसला राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया तो पक्षपात के आरोप लग सकते हैं। उनके अनुसार, मामले में पूर्व मुख्यमंत्री के साथ-साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भी आरोप हैं, इसलिए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है।
राजू ने यह भी कहा कि इस मामले से जुड़े कई क्रॉस-केस हैं, इसलिए सभी मामलों की जांच एक ही एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए ताकि पूरे विवाद की एक साथ जांच हो सके।
उन्होंने अदालत को बताया कि ईडी ने स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर ही सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। यदि जांच को लेकर फैसला राज्य सरकार पर छोड़ दिया गया तो बाद में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
यह मामला 8 जनवरी को ईडी द्वारा कोलकाता में आई-पैक ऑफिस और इसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के घर पर की गई तलाशी से जुड़ा है। यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत की गई थी।
ईडी का आरोप है कि तलाशी के दौरान ममता बनर्जी पुलिस अधिकारियों और अन्य वरिष्ठ अफसरों के साथ वहां पहुंचीं और जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।
एजेंसी ने ममता बनर्जी, तत्कालीन पश्चिम बंगाल पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार, तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त मनोज कुमार वर्मा समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है।
ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वह आई-पैक कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस से संबंधित गोपनीय और स्वामित्व वाले डेटा को सुरक्षित रखने के लिए गई थीं, जिसका संबंध पार्टी की चुनावी रणनीति से था।
15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ईडी अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर पर रोक लगा दी थी और परिसर से जुड़े सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया था।
इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि यदि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री किसी चल रही जांच में हस्तक्षेप करता है तो इससे लोकतंत्र खतरे में पड़ सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में बंद, सेंसेक्स 905 अंक उछला

भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 905.01 अंक या 1.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,151.04 और निफ्टी 237.90 अंक या 1.05 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,936.75 पर था।
बाजार में चौतरफा खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 566.95 अंक या 0.99 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,841.65 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 176.45 अंक या 0.95 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,811.35 पर बंद हुआ।
सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी (2.75 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (2.34 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (2.20 प्रतिशत), निफ्टी सर्विसेज (1.61 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (1.24 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (1.18 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.18 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (1.17 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (1.15 प्रतिशत) की तेजी के साथ सबसे ज्यादा बढ़त के साथ बंद हुए।
मुख्य सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑटो (0.24 प्रतिशत) की गिरावट के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, पावर ग्रिड, इटरनल, बजाज फाइनेंस, एचयूएल, एसबीआई, टाइटन, एनटीपीसी, बीईएल, इन्फोसिस, आईटीसी, भारती एयरटेल, एमएंडएम, एलएंडटी, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक,एचसीएल टेक और बजाज फिनसर्व गेनर्स थे। ट्रेंट, मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक लूजर्स थे।
जानकारों ने कहा कि अमेरिकी फेड द्वारा दरों में बढ़ोतरी रोकने, कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी और संस्थागत निवेशकों की ओर से फिर से खरीदारी शुरू होने के चलते भारतीय शेयर बाजारों में तेजी आई, जबकि बाहरी माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। मजबूत उपभोक्ता मांग के कारण एफएमसीजी शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दिखी। इसके अलावा, फाइनेंशियल, आईटी, रियल्टी और पावर सेक्टर में भी मजबूती आई। मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी तेजी रही, जो बाजार के व्यापक दायरे में सुधार का संकेत है।
उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में विदेशी निवेशकों की खरीदारी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के लगातार समर्थन से बाजार में लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर हुई है। कंपनियों की कमाई में लचीलापन और घरेलू मांग में स्थिरता बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं, हालांकि इनपुट लागत बढ़ने से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें, रुपये में कमजोरी, घरेलू बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक अनिश्चितता अभी भी प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।
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