अंतरराष्ट्रीय समाचार
जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री से कहा- धीमी गति से हो रहा सैनिकों को पीछे हटाने का काम
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ मुलाकात के दौरान उन्होंने उनसे कहा कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर सैनिकों को पीछे हटाने का काम ‘प्रगति पर’ है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक इसकी रफ्तार ‘धीमी’ है। पूर्वी लद्दाख में पिछले करीब 2 साल से जारी गतिरोध के कारण व्याप्त तनाव के बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत दौरे पर आए हैं। उनके साथ बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, जयशंकर ने कहा, “विदेश मंत्री वांग यी के साथ मेरी बातचीत अभी समाप्त हुई है। हमने लगभग तीन घंटे तक मुलाकात की और खुले और स्पष्ट तरीके से एक व्यापक और वास्तविक एजेंडे को संबोधित किया। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की, जो अप्रैल 2020 में चीनी कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप बाधित हुए हैं।”
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, “जब तक बहुत बड़ी तैनाती होती है, सीमा की स्थिति सामान्य नहीं होती है। हमारे पास अभी भी तनाव वाले क्षेत्र हैं और पैंगोंग त्सो सहित कुछ तनाव वाले क्षेत्रों (की समस्या) हल करने में प्रगति हुई है। आज हमारी चर्चा यह रही कि इसे कैसे आगे बढ़ाया जाए। इसे लेकर 15 दौर की बातचीत हो चुकी है।”
उन्होंने कहा, “अगर आप मुझसे पूछें कि क्या आज हमारा रिश्ता सामान्य है, तो मेरा जवाब है नहीं, यह सामान्य नहीं है। आज हमारा प्रयास इस मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने का है।”
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अप्रैल 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर एक आक्रामक कदम उठाया था, जिससे भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पैदा हो गया।
दो साल बीत जाने के बाद भी विवाद का समाधान नहीं हो पाया है।
जयशंकर ने आगे कहा कि उन्होंने वांग से कहा कि वर्तमान स्थिति को लेकर ‘काम प्रगति पर है, मगर जाहिर तौर पर यह उम्मीद से धीमी गति से हो रहा है’।
जयशंकर ने कहा, “इसे आगे ले जाने की आवश्यकता है, क्योंकि एलएसी पर सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया को पूरा करना आवश्यक है।”
जयशंकर ने यह भी कहा कि उन्होंने चीन में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों का मुद्दा उठाया, जिन्हें कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण वापस जाने और अपनी शिक्षा फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं है।
उन्होंने कहा, “मैंने चीन में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की दुर्दशा को भी ²ढ़ता से उठाया, जिन्हें कोविड प्रतिबंधों का हवाला देते हुए वापस जाने की अनुमति नहीं दी गई है। हमें उम्मीद है कि चीन गैर-भेदभावपूर्ण ²ष्टिकोण अपनाएगा, क्योंकि इसमें कई युवाओं का भविष्य शामिल है।”
जयशंकर के साथ बातचीत से पहले वांग ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से उनके साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में मुलाकात की और चीन आने का निमंत्रण दिया।
सूत्रों के मुताबिक, निमंत्रण का जवाब देते हुए डोभाल ने कहा कि वह तत्काल मुद्दों को सफलतापूर्वक हल करने के बाद यात्रा कर सकते हैं।
डोभाल ने शेष क्षेत्रों में जल्दी और पूर्ण रूप से अग्रिम स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की और द्विपक्षीय संबंधों को अपने प्राकृतिक पाठ्यक्रम में ले जाने के लिए बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया।
उन्होंने वांग से यह भी कहा कि शांति की बहाली से आपसी विश्वास बनाने और संबंधों में प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।
सीमा विवाद शुरू होने के बाद से वांग की यह यात्रा ऐतिहासिक कही जा सकती है, क्योंकि विवाद शुरू होने के बाद किसी भी उच्च स्तरीय चीनी अधिकारी की यह पहली यात्रा है।
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जापान के बोनिन द्वीप में कांपी धरती, 6.3 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से लोगों में दहशत

जापान के बोनिन द्वीप में रविवार सुबह 6.3 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप के झटकों से इलाके में हलचल मच गई। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप का केंद्र प्रशांत महासागर के क्षेत्र में काफी गहराई पर था। शुरुआती रिपोर्टों में बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस घटना की जानकारी साझा की। भूकंप का केंद्र प्रशांत महासागर के क्षेत्र में काफी गहराई पर था। 6.3 तीव्रता के भूकंप के इन झटकों से लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
हाल फिलहाल के समय में भूकंप की घटनाए जो पकड़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएं चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और बढ़ा सकती हैं।
बीते गुरुवार को भी तिब्बत में 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई और करीब 32 लोग घायल हुए।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, शुक्रवार सुबह भी तिब्बत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। एक दिन पहले गुरुवार रात आए 7.0 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद शुक्रवार सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर एक बार फिर धरती कांप उठी। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.4 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 15 किलोमीटर की गहराई पर था।
अगले दिन शुक्रवार को फिर से तिब्बत के साथ-साथ पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन में भी लोगों ने भूकंप के झटके महसूस किए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के मुताबिक, पाकिस्तान में सुबह 4:56 बजे 4.9 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र 28.919 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 64.678 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। इसकी गहराई 15 किलोमीटर रही।
वहीं, अफगानिस्तान में सुबह 5:54 बजे 4.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र 35.138 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 69.442 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। भूकंप की गहराई 25 किलोमीटर दर्ज की गई।
इसके अलावा, चीन में रविवार सुबह 6:05 बजे 4.4 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। एनसीएस के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 32.542 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 93.835 डिग्री पूर्वी देशांतर पर था। भूकंप की गहराई 15 किलोमीटर दर्ज की गई।
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इटली की पीएम मेलोनी ने सुरक्षा बलों की सराहना की, कहा-प्रदर्शन का अधिकार हमेशा सुरक्षित रहना चाहिए

इटली में प्रदर्शन और विरोध की आग के बीच देश की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने नियंत्रण बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने का अधिकार हमेशा सुरक्षित रहना चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में पीएम मेलोनी ने कहा, ”मैं उन सभी महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों का धन्यवाद करना चाहती हूं, जिन्होंने आज भी इटली के विभिन्न शहरों और सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए काम किया। यह सब उन्होंने कुछ हिंसक लोगों की ओर से झड़प और अव्यवस्था फैलाने की कोशिशों के बावजूद किया।”
पीएम मेलोनी ने कहा कि मैं माटेओ पियान्टेदोसी, प्रीफेक्ट्स, क्वेस्टर्स और उन सभी लोगों का भी धन्यवाद करती हूं, जिन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की इन कार्रवाइयों का समन्वय और प्रबंधन किया। प्रदर्शन करने का अधिकार हमेशा सुरक्षित रहना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे नागरिकों का अपनी शहरों में सुरक्षित माहौल में रहने का अधिकार भी सुरक्षित रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हाल ही में मंत्रिपरिषद की ओर से मंजूर किए गए कदम भी इसी दिशा में हैं। उनका उद्देश्य राज्य को ऐसे अधिक प्रभावी साधन देना है, जिनसे हिंसा को रोका जा सके और अपराधियों तथा उपद्रवियों को पूरे शहरों में अराजकता फैलाने से रोका जा सके क्योंकि सुरक्षा हर व्यक्ति के लिए सुनिश्चित होनी चाहिए। उन लोगों के लिए जो शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना चाहते हैं, उनके लिए जो काम करते हैं, और उनके लिए जो बिना डर के अपने शहर में रहना चाहते हैं। हमें उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं छोड़नी चाहिए जिनका मकसद सिर्फ टकराव और हिंसा फैलाना है।
इटली के मीडिया के अनुसार, शनिवार शाम भी कई शहरों में बढ़ती महंगाई, सेना के विस्तार और रक्षा खर्च बढ़ाने के खिलाफ लोगों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए। बोलोग्ना में कुछ प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। रोम में शनिवार दोपहर प्रदर्शनकारी पियाजा डेला रिपब्लिका से युद्ध-विरोधी मार्च के लिए निकले। शाम को शहर के केंद्र में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें शुरू हो गईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
ट्यूरिन में भी शनिवार शाम प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। यहां लोगों का मुख्य विरोध बढ़ते सैन्य खर्च और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर था।
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मिशिगन में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं पर राजनीतिक दलों की नजर, ट्रंप करेंगे रैली

मिशिगन में रहने वाला भारतीय-अमेरिकी समुदाय, जो राज्य का सबसे बड़ा एशियाई समुदाय है, मिडटर्म चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में राजनीतिक दलों के लिए अहम बन गया है। यह राज्य कांग्रेस में सत्ता संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ऐसे में एशियाई-अमेरिकी राजनीतिक संगठन भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रविवार को मिशिगन के पोर्ट ह्यूरॉन में अपने समर्थकों को संबोधित करने वाले हैं।
व्हाइट हाउस के कार्यक्रम के अनुसार, ट्रंप रविवार को पोर्ट ह्यूरॉन के मैकमोरन प्लेस में रैली करेंगे। यह लगातार तीन दिनों में उनकी तीसरी चुनावी रैली होगी। इससे पहले वह शुक्रवार को फ्लोरिडा के फोर्ट मायर्स और शनिवार को जॉर्जिया के पेरी में कार्यक्रम कर चुके हैं।
ओकलैंड यूनिवर्सिटी के छात्र समाचार पत्र ‘द ओकलैंड पोस्ट’ के अनुसार, एशियाई-अमेरिकी उम्मीदवारों और मतदाताओं का समर्थन करने वाली सुपर पीएसी ‘एएपीआई विक्ट्री फंड’ ने 17 अक्टूबर को डेट्रॉइट के गॉडफ्रे होटल में एक कार्यक्रम आयोजित किया। द ओकलैंड पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन और राज्य की विदेश मंत्री जोसलिन बेन्सन, जो गवर्नर पद की डेमोक्रेट उम्मीदवार हैं, शामिल हुईं।
समूह की अध्यक्ष लिन्ह गुयेन ने अखबार से कहा, “हमने सुपर पीएसी इसलिए बनाई क्योंकि एशियाई मतदाताओं और एशियाई उम्मीदवारों के समर्थन के लिए पर्याप्त राजनीतिक फंडिंग नहीं थी।” उन्होंने कहा कि मिशिगन और जॉर्जिया जैसे राज्य, जहां एशियाई-अमेरिकी आबादी अच्छी संख्या में है और जहां चुनावी मुकाबला कड़ा रहता है, संगठन के लिए अब पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।
गुयेन ने कहा, “हम अब्दुल एल-सय्यद जैसे उम्मीदवारों को वोट दे सकते हैं और इस पर गर्व भी कर सकते हैं।” उन्होंने यह बात डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार अब्दुल एल-सय्यद के संदर्भ में कही। समूह ने मिशिगन में जिन नेताओं का समर्थन किया है, उनमें अब्दुल एल-सय्यद, जोसलिन बेन्सन, लेफ्टिनेंट गवर्नर गार्लिन गिलक्रिस्ट द्वितीय और भारतीय मूल के विधायक रंजीव पुरी शामिल हैं।
‘एएपीआईडेटा’ की एक जानकारी के अनुसार, मिशिगन में करीब 1,38,644 भारतीय-अमेरिकी रहते हैं, जो राज्य का सबसे बड़ा एशियाई समुदाय है। वहीं राज्य में लगभग 1,23,545 एशियाई-अमेरिकी मतदाता मतदान के पात्र हैं।
मिशिगन में भारतीय-अमेरिकी आबादी मुख्य रूप से ओकलैंड काउंटी के उपनगरीय इलाकों जैसे ट्रॉय, नोवी, कैंटन और फार्मिंगटन हिल्स में रहती है। ये इलाके प्रतिस्पर्धी कांग्रेस क्षेत्रों के भीतर या आसपास आते हैं। मिशिगन से भारतीय मूल के एकमात्र अमेरिकी सांसद श्रीथानेदार हैं, जो डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं और डेट्रॉइट आधारित 13वें कांग्रेसनल जिले का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पोर्ट ह्यूरॉन, जो सेंट क्लेयर काउंटी में स्थित है, राज्य के उस क्षेत्र में आता है जहां आमतौर पर रिपब्लिकन पार्टी का प्रभाव ज्यादा माना जाता है। हाल के चुनावों में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का झुकाव आम तौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर रहा है। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी ने भी कुछ प्रवासी समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है।
इस चुनावी चक्र में दोनों प्रमुख दल ऐसे माहौल में मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जहां एच-1बी वीजा नियमों में सख्ती और सोशल मीडिया पर बढ़ती भारत-विरोधी टिप्पणियां भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मिशिगन के मतदाता तीन नवंबर को गवर्नर, अमेरिकी सीनेटर और राज्य के सभी 13 प्रतिनिधि सभा (हाउस) सदस्यों का चुनाव करेंगे।
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