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Saturday,13-June-2026
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कर्नाटक के एक गांव में तेंदुए के दो शावकों को बचाया गया

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Karnataka


मांड्या (कर्नाटक), 9 फरवरी :
कर्नाटक के मांड्या जिले के कोलागेरे गांव में एक खेत में स्थानीय युवाओं ने गुरुवार को बड़ी चट्टान के नीचे फंसे दो तेंदुए के शावकों को बचाया। शिवमूर्ति, कीर्ति कुमार और उनके दोस्तों ने देखा कि तेंदुए के आठ शावक बड़ी सी चट्टान के नीचे फंसे हुए हैं। उन्होंने शावकों के लिए रास्ता बनाया और उन्हें बाहर निकाला। हालांकि, वे केवल दो शावकों को ही पकड़ सके और अन्य छह शावक बाहर आते ही गायब हो गए। युवकों ने दोनों शावकों को घर ले जाकर खाना खिलाया।

वन अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। वे युवक के घर गए और घर लाए दोनों शावकों को अपने कब्जे में ले लिया। अधिकारियों ने मादा तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगा दिया है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को चेतावनी दी है कि वे अपने खेतों और सुनसान जगहों के पास अकेले न निकलें, क्योंकि मादा तेंदुआ उन पर हमला कर सकती है। अधिकारियों ने छह शावकों की तलाश भी शुरू कर दी है।

राजनीति

दल बदलने वाले नेताओं के बढ़ते चलन के बीच राजनीति निजी स्वार्थ का धंधा बनी : शिवसेना (यूबीटी)

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बंगाल में टीएमसी की करारी हार के बाद कई सांसदों और विधायकों के पार्टी छोड़ने के बीच, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से शुक्रवार को दावा किया कि देश की राजनीति अब केवल अपने फायदे के सौदे तक सिमटकर रह गई है।

दल-बदलने वाले नेताओं के बढ़ते चलन के बीच राजनीति अब निजी स्वार्थ का धंधा बनी: शिवसेना (यूबीटी)शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ में कहा गया कि वोटर किसी खास पार्टी के चुनाव चिह्न और विचारधारा के आधार पर वोट देते हैं और उम्मीद करते हैं कि उन्हें सही प्रतिनिधित्व मिलेगा, लेकिन अपना फायदा देखने वाले राजनीतिक अवसरवादी नेता “अपने निजी फायदे के लिए तुरंत एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कूद जाते हैं।” नर्सरी राइम ‘हॉप अलोंग, लिटिल कद्दू’ की तरह, ये अवसरवादी नेता और उनके लीडर कूदते-फांदते दिल्ली पहुंच जाते हैं।

‘सामना’ के संपादकीय में तर्क दिया गया कि जिस तरह अंगूर और आम की कई किस्में विकसित की गई हैं, उसी तरह इन अस्थिर नेताओं की भी नई नस्लें सामने आई हैं; इनमें सबसे आगे ‘सायोनी घोष’ किस्म है।

संपादकीय में कहा गया है कि कई लोग सोच रहे हैं कि सायोनी घोष जैसे लोगों से कैसे निपटा जाए? मुखपत्र में कहा गया कि चुनाव प्रचार के दौरान, घोष ने अपने तीखे और जोशीले भाषणों से अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ‘मिनी-ममता’ की छवि बनाई, हर रैली में भाजपा पर जमकर निशाना साधा और ममता बनर्जी को अपनी मां जैसा माना। टीएमसी के सांसदों के बीच दरारें पड़ने लगीं, तो बहुत कम लोगों की उम्मीद थी कि सायोनी का भी नाम उस सूची में होगा।

संपादकीय में आगे कहा गया है कि ममता के खेमे में हालात बदलने के साथ ही सायोनी घोष ने अपनी “मातृ-तुल्य” नेता और तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है और भाजपा के खेमे में शामिल हो गई हैं। हालांकि, पार्टी छोड़ने वाले टीएमसी सांसदों ने अभी के लिए एक स्वतंत्र समूह बनाया है, लेकिन वे जल्द ही भाजपा में शामिल हो जाएंगे।

संपादकीय के अनुसार, “जब आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था, तो सायोनी घोष ने उनके इस धोखे पर बहुत नाराजगी जताई थी। उन्होंने आधुनिक राजनीति में वफादारी और नैतिकता के पूरी तरह खत्म होने पर अफसोस जताया था। जब उनसे पूछा गया था कि क्या वह भी कभी भाजपा में शामिल होंगी, तो गुस्से में घोष ने कहा था, ‘मैं घोष हूं, चड्ढा नहीं, जो शॉर्ट्स (निकर) पहनकर पाला बदल ले।’ लेकिन आज, वह खुद वैसी ही बन गई हैं; उन्होंने ईमानदारी का चोला उतार फेंका है और सत्ताधारी पार्टी के इशारों पर नाचने वालों की कतार में शामिल हो गई हैं।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि बेतहाशा महत्वाकांक्षा और धोखेबाजी नेताओं को “थाली में रखे बैंगन” यानी “दलबदलू” बना देती है।

‘सामना’ में कहा गया, “यह अब सिर्फ एक मुहावरा नहीं रह गया है; यह आज की भारतीय राजनीति की कड़वी सच्चाई बन गया है। दल-बदलू नेता बैंगन की तरह होता है, जिसे चूल्हे पर पक रही किसी भी डिश में मिलाया जा सकता है, चाहे वह भरता हो या भजिया; उसका अपना कोई खास स्वाद नहीं होता।”

मुखपत्र में कहा गया कि हाल ही में महाराष्ट्र की राजनीति में ऐसे दल-बदलू नेताओं की बाढ़ सी आ गई है और उन्हें खूब बढ़ावा दिया जा रहा है। “सायोनी घोष का मामला एक बेहतरीन केस स्टडी है। ये ‘थाली के बैंगन’ जैसे नेता गिरगिट से भी तेजी से रंग बदलते हैं। यह चलन इतना आम हो गया है कि इस पर पीएचडी रिसर्च भी हो सकती है। मौकापरस्त राजनीति का चलन इतना बढ़ गया है कि हर कोई दल-बदलू बनना चाहता है। यह देश की राजनीति और विचारधारा के गंभीर पतन को दर्शाता है।

संपादकीय में कहा गया, “आखिरकार, ये नेता सस्ती और हर जगह आसानी से मिलने वाली चीजें बन गए हैं। इनमें न तो कोई मजबूती है और न ही कोई खास पहचान; राजनीतिक दबाव पड़ते ही ये नरम पड़ जाते हैं और मुरझा जाते हैं। अब इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।”

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राजनीति

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करना महिला सशक्तीकरण के दावों के विपरीत : संजय राउत

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मुंबई, 10 जून: शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने को ‘काला दिन’ बताया।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मीनाक्षी नटराजन एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इसके बावजूद भी उनका नामांकन रद्द कर दिया गया है। आखिर यह क्या है? एक तरफ आप महिला शक्ति वंदन अधिनियम लाकर यह दावा करते हैं कि आपके लिए महिला सशक्तीकरण मायने रखता है, तो वहीं दूसरी तरफ आप एक महिला का नामांकन रद्द कर देते हैं। आखिर क्यों? आपने ऐसा करके एक महिला का अपमान किया है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, उन्होंने मीनाक्षी नटराजन पर दर्ज केस का भी जिक्र किया। संजय राउत ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के ऊपर कोई भी केस दर्ज नहीं है। मैंने खुद उस पूरी वस्तुस्थिति को समझने का प्रयास किया है। लिहाजा मैं इस बात को दावे के साथ कह सकता हूं कि ऐसा कुछ भी नहीं है, उन्हें सिर्फ एक कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। अब इन लोगों के लिए नियम कायदे कानून भी अलग हो चुके हैं। एक नारी वंदना और पुरुष वंदना। परमल नाथवानी झारखंड से बीजेपी से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके नामांकन पत्र में कुछ खामियां थीं। लेकिन, वहां के रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें अपनी कमियों को दूर करने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। लेकिन, यह नियम और कानून नाथवानी के मामले में लागू नहीं किया गया है, बल्कि उनका नामांकन पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। आखिर यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है? ये लोकतंत्र की हत्या है।

इसके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल पूरे होने के मौके पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के पूरे 12 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन, इन सालों में एक दिन भी ऐसा नहीं गया है, जब प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने विसंगति पूर्ण व्यवहार न किया हो।

उन्होंने कहा कि यह लोग महिला राजनेता को राजनीति में आने से रोक रहे हैं। सुनियोजित तरीके से उनका नामांकन खारिज कर रहे हैं, ताकि उन्हें राज्यसभा में आने से रोका जा सके और दूसरी तरफ यही लोग महिला मतदाताओं को रिझाने के मकसद से महिला शक्ति वंदन अधिनियम ला रहे हैं। आखिर ऐसी स्थिति में एक महिला को न्याय कैसे मिलेगा। अब ऐसे में सवाल यही है कि क्या हम चीफ जस्टिस से न्याय की उम्मीद कर सकते हैं। मौजूदा समय में हमारे न्यायतंत्र को पूरी तरह से ध्वस्त करके रख दिया गया है।

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राजनीति

कर्नाटक: देवेगौड़ा के राज्यसभा नामांकन मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया मगरमच्छ के आंसू बहाने का आरोप

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बेंगलुरु, 9 जून: कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने कांग्रेस नेताओं पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा को राज्यसभा के लिए नामित नहीं किए जाने के मुद्दे पर मगरमच्छ के आंसू बहाने की कोई जरूरत नहीं है।

विजयेंद्र ने यह प्रतिक्रिया कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद के बयानों पर दी।

मंगलवार को जारी बयान में विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं को देवगौड़ा के खिलाफ अपनी पार्टी की पुरानी राजनीतिक कार्रवाइयों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक समय देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री को हटाने की कोशिश की थी और आज भी वही ‘गंदी राजनीति’ जारी रखे हुए है।

उन्होंने कहा कि अब कांग्रेस नेता देवगौड़ा के प्रति झूठी सहानुभूति दिखा रहे हैं, जो पूरी तरह हास्यास्पद है। विजयेंद्र ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा देवगौड़ा का सम्मान किया है और उन्हें गरिमा के साथ देखा है।

हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देवगौड़ा ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन किया है और उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही देश की एकता और विकास बेहतर तरीके से सुनिश्चित हो सकता है। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता इस राजनीतिक समीकरण को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और देवगौड़ा के नाम का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

विजयेंद्र ने कहा कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में देवगौड़ा के योगदान का भावुकता के साथ उल्लेख किया था और उनकी सार्वजनिक सेवा की सराहना की थी। यह दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस रिश्ते में अविश्वास पैदा करने की कोशिश कांग्रेस की ‘विकृत राजनीति’ का उदाहरण है।

विजयेंद्र ने कहा कि कर्नाटक की जनता राजनीतिक वास्तविकता को समझती है और कांग्रेस के ऐसे प्रयासों से गुमराह नहीं होगी।

सोमवार को कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा को राज्यसभा टिकट नहीं दिए जाने की खबरों पर भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) नेतृत्व की आलोचना की थी। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से हैरान करने वाला और आंखें खोलने वाला घटनाक्रम बताया था।

वहीं, केंद्रीय इस्पात और भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेताओं की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए सुरजेवाला को ‘वसूलीवाला’ करार दिया था।

दूसरी ओर, केपीसीसी अध्यक्ष बी. के. हरिप्रसाद ने बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि देवगौड़ा को राज्यसभा का टिकट नहीं देना राज्य की जनता के साथ विश्वासघात है।

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