अंतरराष्ट्रीय समाचार
दलाई लामा ने पीएम मोदी को 71वें जन्मदिन की बधाई दी
तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 71वें जन्मदिन पर बधाई दी। उन्होंने कोविड-19 महामारी जैसी चुनौतियों के बावजूद देश को आगे बढ़ाने लिए उनकी प्रशंसा की। दलाई लामा ने मोदी को लिखे पत्र में लिखा, “मैं आपको आपके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई देता हूं। आप एक लंबा और स्वस्थ जीवन जीते रहें।”
“एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो इस देश के बारे में गहराई से परवाह करता है, मैं आपको उस बढ़ते आत्मविश्वास के लिए बधाई देता हूं, जो आपने कोविड -19 महामारी जैसी चुनौतियों के बावजूद हासिल किया है, जिसने दुनिया भर के लोगों को प्रभावित किया है। दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में, भारत की सफलता न केवल भारत के लोगों को लाभान्वित करती है, बल्कि समग्र रूप से विश्व के विकास में भी योगदान देती है।”
“मुझे विश्वास है कि नुकसान नहीं करने की सदियों पुरानी भारतीय परंपराएं- करुणा की प्रेरणा से समर्थित अहिंसा, न केवल प्रासंगिक हैं बल्कि आज की दुनिया में आवश्यक हैं। मेरा यह भी मानना है कि इन सिद्धांतों को आधुनिक मानवता के व्यापक लाभ के लिए शिक्षा के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है।”
“जब भी मुझे ऐसा करने का अवसर मिलता है, मैं नियमित रूप से भारत के मजबूत लोकतंत्र, इसकी गहरी जड़ें धार्मिक बहुलवाद और इसके उल्लेखनीय सद्भाव और स्थिरता की सराहना करता हूं।”
“निर्वासन में रह रहे तिब्बतियों के लिए, भारत न केवल हमारी आध्यात्मिक शरणस्थली है, बल्कि 62 वर्षों से अधिक समय से हमारा भौतिक घर भी रहा है। क्या मैं फिर से गर्मजोशी के लिए भारत की सरकार और लोगों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर ले सकता हूं जो हमें उदार आतिथ्य मिला है।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान पर आर्थिक दबाव तेज, हर दिन 50 करोड़ डॉलर का नुकसान : ट्रंप

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की हालिया संघर्ष का अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक छोटे से पोस्ट के जरिए अपने अंदाज में ईरान की बदहाली बयां की।
उन्होंने कहा कि ईरान “कैश के लिए तरस रहा है” और हर दिन करीब 50 करोड़ डॉलर का नुकसान झेल रहा है, जिससे वह तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाना चाहता है। वहां के नौसैनिक और पुलिस को वेतन नहीं मिल रहा है और वो सब दुखी हैं।
ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने ईरान की तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है।
होर्मुज, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है, इस पूरे संकट का केंद्र बन गया है।
दरअसल, ईरान की अर्थव्यवस्था इस जलमार्ग और तेल निर्यात पर अत्यधिक निर्भर है। एक अनुमान के मुताबिक, नाकेबंदी के कारण ईरान को रोजाना लगभग 43.5 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो तेल निर्यात और व्यापार रुकने से जुड़ा है।
हालात को और गंभीर बनाते हुए रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान का 90 प्रतिशत से अधिक समुद्री व्यापार इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में लंबे समय तक नाकेबंदी रहने पर आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप हो सकती हैं, जिससे मुद्रा पर दबाव, महंगाई और बैंकिंग संकट जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
इस बीच, क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां पहले रोजाना 100 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब यह संख्या बेहद सीमित रह गई है। कई टैंकर और जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह आर्थिक दबाव ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए बनाया गया है। हालांकि, तेहरान ने इस रणनीति को “आर्थिक युद्ध” बताया है और चेतावनी दी है कि यदि नाकेबंदी जारी रही तो वह इसका जवाब दे सकता है।
स्थिति सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पहले ही चेतावनी दे चुका है कि इस संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।
एटलांटिक काउंसिल ऑफ युनाइटेड स्टेट्स के अनुसार, अगर हॉर्मुज लंबे समय तक बाधित रहता है, तो न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। तेल की कीमतों में तेजी, आपूर्ति में कमी और व्यापार मार्गों में बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
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ईरानी शिक्षा मंत्री का दावा, ‘1,300 में से आधे से अधिक स्कूलों की मरम्मत पूरी’

अमेरिका-इजरायल एयर स्ट्राइक के बाद 40 दिन तक चले संघर्ष में ईरान की कई इमारतों और बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुंचा। कई शैक्षिक संस्थान तबाह हो गए। इस बीच ईरान में शिक्षा व्यवस्था को बहाल करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। शिक्षा मंत्री अलीरेजा काजेमी ने कहा है कि संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए 1,300 स्कूलों में से 775 की मरम्मत अब तक पूरी कर ली गई है।
ईरानी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, शिक्षा मंत्री ने बताया कि करीब 20 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए थे, जबकि सबसे अधिक नुकसान तेहरान, केर्मानशाह, इस्फहान और होर्मोजगान प्रांतों में हुआ। उन्होंने कहा कि बुरी तरह से क्षतिग्रस्त स्कूलों की मरम्मत अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है।
काजेमी ने यह भी बताया कि हमलों के बावजूद देश में शैक्षिक गतिविधियां जारी रहीं। कई स्थानों पर कक्षाएं ऑफलाइन चलाई गईं, जबकि अन्य जगहों पर ऑनलाइन माध्यम अपनाया गया, जिसमें इरानियन टेलीविजन स्कूल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
छात्रों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग सेवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। इसके साथ ही स्कूलों में उन 170 लोगों की याद में कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो मिनाब स्थित शजराह तैयबा प्राइमरी स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए थे। इनमें अधिकांश छात्राएं और शिक्षक थे। अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के पहले दिन (28 फरवरी) ही प्राइमरी स्कूल पर हमला हुआ। हमले का शिकार हुई बच्चियों की उम्र 7 से 12 बरस के बीच की बताई गई थी।
ईरान सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, ताकि युद्ध के असर को कम किया जा सके और छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।
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डोनाल्ड ट्रंप के कड़ा रुख अपनाने से ईरान से चल रही वार्ता लड़खड़ाई

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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता असमंजस की स्थिति में लग रही है क्योंकि तेहरान ने पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में शामिल होने को लेकर हिचकिचाहट दिखाई है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कड़ा रुख अपना लिया है। इससे आगामी संघर्ष विराम की समय सीमा से पहले किसी समझौते को लेकर नए संदेह पैदा हो गए हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर, जिसके इस्लामाबाद में होने की उम्मीद थी, अब अनिश्चित हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ है, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अमेरिका की ओर से ईरान के झंडे वाले एक जहाज को ज़ब्त किए जाने के बाद वे इस बातचीत में शामिल नहीं हो सकते हैं।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अब तक, हमने बातचीत के अगले दौर के बारे में कोई फैसला नहीं किया है।
यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का संघर्ष-विराम खत्म होने वाला है। इससे दोनों पक्षों पर किसी समझौते पर पहुंचने का दबाव बढ़ गया है, वरना उन्हें फिर से दुश्मनी शुरू होने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।
सीएनएन के अनुसार, इस अनिश्चितता को और बढ़ाते हुए, ट्रंप के सार्वजनिक बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट ने इस नाज़ुक बातचीत को और भी पेचीदा बना दिया है।
दोनों पक्ष सात हफ्ते से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए किसी समझौते के काफी करीब लग रहे थे। लेकिन ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि ईरान कुछ अहम शर्तों पर सहमत हो गया है, जबकि अधिकारियों का कहना था कि उन शर्तों को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया था।
ईरानी अधिकारियों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इन दावों को खारिज कर दिया और इस बात पर संदेह जताया कि क्या बातचीत का अगला दौर आगे बढ़ पाएगा?
बातचीत से परिचित एक व्यक्ति ने सीएनएन को बताया कि ईरानियों को यह बात पसंद नहीं आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति सोशल मीडिया के जरिए बातचीत कर रहे थे और ऐसा दिखा रहे थे जैसे उन्होंने उन मुद्दों पर सहमति दे दी हो जिन पर वे अभी तक सहमत नहीं हुए थे।
बदलती समय-सीमाओं और अमेरिका से मिलने वाले मिले-जुले संकेतों ने इस भ्रम को और भी बढ़ा दिया है। ट्रंप कभी यह संकेत देते हैं कि समझौता बस होने ही वाला है, तो कभी चेतावनी देते हैं कि अगर बातचीत विफल रही तो फिर से सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप के बुधवार के बाद संघर्ष विराम को आगे बढ़ाने की संभावना कम है, जिससे कूटनीतिक प्रयासों में और भी तेजी आ गई है।
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तों पर सहमत नहीं होता है, तो उसे पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे अहम बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने वाले हमलों का सामना करना पड़ सकता है।
हालाँकि, ईरान ने जोर देकर कहा है कि वह दबाव में आकर बातचीत नहीं करेगा। ईरान की संसद के स्पीकर और एक अहम वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने कहा कि तेहरान ‘धमकियों के साये में’ बातचीत स्वीकार नहीं करेगा।
यह गतिरोध दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है। ईरानी अधिकारी वाशिंगटन की कूटनीति के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि दोनों पक्ष संभावित बातचीत की तैयारियां जारी रखे हुए हैं।
अनिश्चितता के बावजूद अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि एक प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान जाने की उम्मीद है। हालांकि इसका समय और इसमें कौन शामिल होगा, यह अभी तय नहीं है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक महत्व को देखते हुए मौजूदा बातचीत के नतीजों का क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
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