राजनीति
चीन के साथ सीमा मुद्दे से गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है : मनमोहन
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांग्रेस कार्यकारिणी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में चीन पर पार्टी के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे से उचित तरीके से नहीं निपटा गया तो इससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के इस विचार का समर्थन करते हुए कि लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर आमना-सामना एक पूर्ण विकसित संकट है, मनमोहन सिंह ने कहा, “सीमा पर बने संकट से अगर ²ढ़ता से नहीं निपटा गया, तो इससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सर्वदलीय बैठक में भाग ले चुके पूर्व रक्षामंत्री ए.के. एंटनी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने सीडब्ल्यूसी को सीमा की स्थिति पर जानकारी दी।
सर्वदलीय बैठक में मोदी के बयान और बाद में पीएमओ द्वारा स्पष्टीकरण के बाद मनमोहन सिंह ने सोमवार को प्रधानमंत्री की निंदा की थी और उन पर “गलत सूचना” देने का आरोप लगाया था। सिंह ने कहा था कि प्रधानमंत्री को अपने शब्दों के असर के बारे में पता होना चाहिए।
सिह ने कहा था, “प्रधानमंत्री अपने शब्दों का इस्तेमाल अपने रुख के एक अनुमोदन के रूप में नहीं कर सकते और उन्हें यह हर हाल में सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार के सभी अंग इस संकट से निपटने और इसे और बढ़ने से रोकने के लिए एकसाथ मिलकर काम करें।”
मनमोहन सिंह ने सोमवार को अपने बयान में कहा था, “हम सरकार को याद दिलाते हैं कि गलत सूचना कूटनीति या निर्णायक नेतृत्व का कोई विकल्प नहीं है।”
मनमोहन सिंह शुक्रवार की सर्वदलीय बैठक में, वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवान घाटी में 15 जून की रात की घटना, जिसमें एक कमांडिंग ऑफिसर सहित 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे, पर मोदी के बयान और बाद में पीएमओ के स्पष्टीकरण की आलोचना कर रहे थे।
प्रधानमंत्री के उस बयान का इस्तेमाल चीन ने गलवान घाटी में अपने कुकृत्यों से इंकार करने के लिए किया था।
महाराष्ट्र
मुंबई एनसीबी ने ड्रग सिंडिकेट के किंगपिन और मुख्य सहयोगी की 3.78 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की

मुंबई के ड्रग तस्करों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देशों के मुताबिक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। एसएएफईएमए और एनडीपीएस एक्ट के तहत मुंबई में सक्षम अथॉरिटी और एडमिनिस्ट्रेटर ने कई प्रॉपर्टीज़ को फ्रीज/अटैच करने की पुष्टि की है। इन प्रॉपर्टीज़ में 5 बैंक अकाउंट, 1 अचल प्रॉपर्टी, कैश, ज्वेलरी और 2 गाड़ियां शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत 3,78,24,124 रुपये है। ये प्रॉपर्टीज़ दानिश एम और उसकी मुख्य साथी हिना एस की हैं, जो एक बड़े ड्रग तस्करी मामले में आरोपी है। यह मामला 18 नवंबर, 2025 को पुणे में नितिन जी नाम के एक कैरियर से 502 ग्राम मेफेड्रोन जब्त करने से जुड़ा है। इसके बाद के ऑपरेशन में हिना एस के घर से 839 ग्राम मेफेड्रोन बरामद हुई और उसके साथी एम.जेड. शेख को भी सितंबर 2025 में गिरफ्तार कर लिया गया। दानिश एम और हिना एस ने बाद में जगह बदल ली और फरार हो गए। लेकिन, कड़ी निगरानी और इंटेलिजेंस के आधार पर, उसे गोवा के एक रिसॉर्ट में पहचाना गया, जहाँ से उसे अक्टूबर 2025 में गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, एक और मुख्य साथी शेख उर्फ दानिश पप्पी, जो बायकुला, डोंगरी और नागपाड़ा में ड्रग डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर काम कर रहा था, उसे 25 अप्रैल 2026 को मुंबई में घुसते समय गिरफ्तार किया गया। एनसीबी एक पूरी, 360-डिग्री जांच स्ट्रेटेजी के तहत ज़ब्ती, गिरफ्तारी, फाइनेंशियल जांच और कानूनी कार्रवाई के ज़रिए ड्रग ट्रैफिकिंग नेटवर्क को पूरी तरह से खत्म करने के लिए कमिटेड है। मामले की आगे की जांच चल रही है, और दूसरे फाइनेंशियल लिंक की भी जांच की जा रही है। यह कार्रवाई ड्रग ट्रैफिकिंग नेटवर्क को खत्म करने और उनकी गैर-कानूनी संपत्ति को ज़ब्त करने के एनसीबी के पूरे कमिटमेंट को दिखाती है। एनसीबी भारत सरकार के “ड्रग-फ्री इंडिया” के विज़न के मुताबिक सख्त कानून लागू करने के साथ-साथ जागरूकता फैलाने के लिए डेडिकेटेड है। एनसीबी ने नागरिकों से ड्रग ट्रैफिकिंग के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करने की अपील की है। कोई भी व्यक्ति एम एएनएएस – नेशनल नारकोटिक्स हेल्पलाइन (टोल-फ्री नंबर: 1933) पर ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़ी जानकारी शेयर कर सकता है। जानकारी देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी।
राजनीति
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को राहुल गांधी ने बताया ‘चुनावी बिल’

महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार का घेराव किया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रोजगार और मजदूरों की स्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कह दिया था कि चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी। आज कमर्शियल गैस सिलेंडर 993 रुपए महंगा हुआ। यह एक ही दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। यह चुनावी बिल है। फरवरी से अब तक 1,380 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। यह सिर्फ 3 महीनों में 81 प्रतिशत का इजाफा है।”
उन्होंने आगे लिखा, “चायवाला, ढाबा, होटल, बेकरी, हलवाई हर किसी की रसोई पर बोझ बढ़ा और इसका असर आपकी थाली पर भी पड़ेगा। पहला वार गैस पर, अगला वार पेट्रोल-डीजल पर।”
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में बढ़ती बेरोजगारी के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ‘हम दो-हमारे दो’ नीति का नतीजा हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने मजदूर विरोधी लेबर कोड लागू किया, जिससे नोएडा, पानीपत के आईओसीएल, एनटीपीसी पतरातू और श्रीपेरंबदूर में सैमसंग फैक्ट्री समेत कई जगहों पर असंतोष देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि नया लेबर कोड नौकरी की सुरक्षा के बजाय कॉन्ट्रैक्ट लेबर और ‘हायर एंड फायर’ जैसी नीतियों को बढ़ावा देता है, इसलिए इसकी समीक्षा की जानी चाहिए। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने मनरेगा को खत्म कर दिया है और मजदूरी का 40 प्रतिशत बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया है, जिससे राज्यों के लिए रोजगार देना मुश्किल हो गया है।
खड़गे ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण लोगों को मजबूरन गिग वर्क की ओर जाना पड़ रहा है, और करीब 69 प्रतिशत लोग न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक दशक (2014-15 से 2022-23) में मजदूरों की आय में सालाना 1 प्रतिशत से भी कम वृद्धि हुई है।
इसके अलावा, उन्होंने पढ़े-लिखे युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में करीब 30 लाख पद खाली हैं, लेकिन उन्हें भरा नहीं जा रहा। साथ ही, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण से भी नौकरियां कम हुई हैं और एमएसएमई सेक्टर को नुकसान पहुंचा है।
कांग्रेस ने इस दौरान मजदूरों के लिए पांच प्रमुख मांगें भी रखीं, जिनमें मनरेगा को दोबारा शुरू करना और शहरों तक विस्तार, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपए प्रतिदिन तय करना, ‘राइट टू हेल्थ’ कानून लागू करना, असंगठित श्रमिकों के लिए बीमा और ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाने के साथ नए लेबर कोड की समीक्षा शामिल है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में रहते हैं तो मराठी सीखें, लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा नहीं: सीएम फडणवीस

महाराष्ट्र में मराठी भाषा के अनिवार्य इस्तेमाल को लेकर बढ़ती बहस के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को इस बात पर जोर दिया कि जहां अपनी मातृभाषा पर गर्व करना जरूरी है, वहीं, राज्य सरकार भाषा के आधार पर होने वाली हिंसा या भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र दिवस के मौके पर हुतात्मा चौक पर मीडिया से बात करते हुए ये बाते कहीं। उन्होंने कहा कि राज्य में रहने वाले हर व्यक्ति को स्थानीय भाषा सीखनी चाहिए, उन्होंने भाषाई गौरव के नाम पर हिंसा या डराने-धमकाने के इस्तेमाल के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी।
राज्य सरकार ने रिक्शा चालकों को मराठी बोलने और जिनको नहीं आती उनको सीखने के लिए अनिवार्य कर दिया है। जिसके बाद रिक्शा यूनियनों ने विरोध किया। रिक्शा यूनियनों के विरोध की वजह से सरकार को अनुपालन की समय सीमा अगस्त तक बढ़ानी पड़ी।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने सवाल उठाया कि किसी में मराठी बोलने से इनकार करने की ‘हिम्मत’ कैसे हो सकती है? जिसके बाद मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया। राज ठाकरे ने सरकार की नरमी की आलोचना करते हुए सुझाव दिया कि नियमों का पालन न करने वाले चालकों के परमिट तुरंत रद्द कर दिए जाने चाहिए।
राज ठाकरे को जवाब देते हुए, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र कभी भी ‘संकीर्ण सोच वाला’ राज्य नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने कभी भी ऐसी मानसिकता नहीं रखी कि प्रवासी यहां न रहें या यहां केवल कुछ खास लोग ही रहें। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने हमें सिखाया है कि ‘महाराष्ट्र धर्म’ इस तरह के बहिष्कार का समर्थन नहीं करता। मुझे यह देखकर गर्व होता है कि मेरे मराठी भाई देश भर में जिस भी राज्य में रहते हैं, वहां की संस्कृति और विकास में योगदान दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी सीखनी चाहिए। उन्होंने जोर-जबरदस्ती को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार का इरादा निवासियों को भाषा सीखने में मदद करना है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मराठी एक ‘सुंदर और सरल’ भाषा है, जिसे बिना किसी संघर्ष या हमले का सहारा लिए आसानी से सिखाया जा सकता है।
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