राजनीति
हिंदू शब्द पर विवाद : कर्नाटक के सीएम बोले, कांग्रेस का कोई स्पष्ट रुख नहीं
कर्नाटक में सत्तारूढ़ भाजपा ने ‘हिंदू’ शब्द और उसके अर्थ पर विवादास्पद बयान को लेकर बुधवार को भी विपक्षी कांग्रेस पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने आरोप लगाया कि केपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जारकीहोली द्वारा हिंदू धर्म पर दिए गए बयान पर कांग्रेस का कोई स्पष्ट रुख नहीं है। रायबाग में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ सतीश ने अपना बयान वापस लेने से इनकार कर दिया और दूसरी तरफ केपीसीसी अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार ने कहा है कि ऐसे बयान अस्वीकार्य हैं।
विधानसभा में विपक्ष के नेता सिद्धारमैया इस विवाद से दूर रहे। बोम्मई ने मांग की, “मुझे नहीं पता कि उस पार्टी में स्पष्टता की कमी क्यों है। सतीश के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। अगर वह लाइन पर नहीं आते हैं तो पार्टी नेताओं को इसकी पुष्टि करनी होगी।”
हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए महागठबंधन इस तरह का व्यवहार कर रहा है। यह देश को भ्रम और शासन की स्थिति में रखने की कांग्रेस की मंशा को दर्शाता है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। वह मंदिरों में जाते हैं और पूजा करते हैं और परोक्ष रूप से ऐसे बयानों का समर्थन करते हैं। बोम्मई ने कहा कि इस तरह का दोहरा रुख कांग्रेस के लिए अच्छा नहीं है।
यह पूछे जाने पर कि अगर उनका बयान गलत है तो सतीश के इस्तीफे की पेशकश के बारे में बोम्मई ने कहा कि कांग्रेस नेता को पहले यह बताना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर बयान दिया, क्योंकि यह उनके बयानों का सबूत होगा।
बोम्मई ने कहा, “कांग्रेस नेताओं का यह बयान कि यह चर्चा का विषय नहीं है, अनुचित है। आने वाले दिनों में उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।”
सतीश जारकीहोली ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि ‘हिंदू’ शब्द भारतीय नहीं है। उन्होंने कहा कि यह शब्द ‘फारसी’ है।
रविवार को मानव बंधुत्व वेदिक द्वारा आयोजित निप्पनी कस्बे में एक समारोह को संबोधित करते हुए जारकीहोली ने सवाल किया कि “भारत और फारस के बीच क्या संबंध है? हिंदू कोई भारतीय शब्द नहीं है। यह फारसी है। हिंदू शब्द कैसे हमारा हो गया, इस पर बहस की जरूरत है।”
राजनीति
चक्रवात ‘अर्नब’ से तबाही पर खड़गे और प्रियंका गांधी ने जताई चिंता, कार्यकर्ताओं से मदद की अपील

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश में चक्रवात अर्नब से हुई तबाही और ओडिशा में भारी बारिश और बाढ़ से बने हालात पर चिंता जताई। दोनों नेताओं ने पार्टी कार्यकर्ताओं से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करने की अपील की।
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दोनों राज्यों में चक्रवात और खराब मौसम से प्रभावित लोगों के प्रति एकजुटता जताई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से राहत और बचाव कार्यों में सहयोग करने को कहा।
उन्होंने लिखा, “मेरी संवेदनाएं आंध्र प्रदेश में चक्रवात ‘अर्नब’ से तबाही झेल रहे लोगों और ओडिशा में भारी बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों के साथ हैं। मैं सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करती हूं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आग्रह करती हूं कि वे प्रभावित लोगों की हर संभव मदद करें और राहत तथा बचाव प्रयासों में सहयोग दें।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी आंध्र प्रदेश में जान-माल के नुकसान और ओडिशा में चक्रवात से जनजीवन में आए व्यवधान पर दुख जताया। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य सरकारों के साथ मिलकर राहत और पुनर्वास के उपाय करने और प्रभावित परिवारों को मदद सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
खड़गे ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण आंध्र प्रदेश में लोगों की जान जाने और ओडिशा में जनजीवन में बड़े पैमाने पर व्यवधान से बहुत दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदना। केंद्र सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिलकर राहत और पुनर्वास के समन्वित प्रयास करने चाहिए और पीएम केयर्स फंड के जरिए सभी प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए। मैं कांग्रेस कार्यकर्ताओं से आग्रह करता हूं कि वे मुसीबत में फंसे लोगों की हर संभव मदद करें।”
इस बीच, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को बताया कि चक्रवात ‘अर्नब’ ने राज्य में सात लोगों की जान ले ली है और इससे करीब 4,600 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।
चक्रवात प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का प्रारंभिक अनुमान 4,600 करोड़ रुपए है, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद यह आंकड़ा बढ़ सकता है।
सीएम नायडू ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से चक्रवात से हुए नुकसान के बारे में बात की है, उन्हें मौजूदा स्थिति और राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी है और केंद्र को नुकसान पर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है।
वहीं, ओडिशा सरकार ने भी चक्रवात के कारण असाधारण रूप से भारी बारिश से आई बाढ़ के बाद गंजम और गजपति जिलों में बचाव और राहत अभियान तेज कर दिया है।
राजनीति
एमएलसी चुनाव के बाद एकनाथ शिंदे की शिवसेना नेताओं को नसीहत, ‘दोस्ती में कुश्ती नहीं होनी चाहिए’

महाराष्ट्र के विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव 2026 के नतीजों में महायुति गठबंधन को दो सीटें मिलने के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के नेताओं को संयम बरतने और कम बोलने की नसीहत दी है।
एकनाथ शिंदे ने साफ निर्देश दिया है कि शिवसेना और भाजपा के नेता सार्वजनिक रूप से आपस में बयानबाजी न करें, ताकि गठबंधन की एकजुटता पर असर न पड़े। उन्होंने कहा, “दोस्ती में कुश्ती नहीं होनी चाहिए।”
नतीजे आते ही महायुति में दरार की खबरें तेज हो गई थीं। भाजपा ने खुलेआम आरोप लगाया था कि पुणे और नागपुर में शिवसेना से उचित सहयोग और समर्थन नहीं मिला, जिसकी वजह से गठबंधन को झटका लगा। भाजपा के आरोपों का शिवसेना की तरफ से जवाब भी दिया गया था, लेकिन अब एकनाथ शिंदे ने अपने विधायकों और मंत्रियों को हिदायत दी है कि इस मुद्दे पर अब आगे कुछ न बोलें।
गुरुवार रात हुई एक अहम बैठक के बाद एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के नेताओं और पदाधिकारियों को निर्देश दिए। एकनाथ शिंदे ने कहा कि विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद महायुति में पैदा हुए विवाद को आगे न बढ़ाया जाए।
उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजों का महायुति के तौर पर आत्ममंथन किया जाना चाहिए। चुनाव के दौरान जो गलतियां हुई हैं, उन्हें दोबारा नहीं दोहराया जाए। इसके साथ ही ध्यान रखा जाए कि गठबंधन में किसी तरह की दरार न आए और हमारे आपसी विवादों का फायदा विरोधियों को न मिले।
एकनाथ शिंदे ने यह भी कहा कि हर सीट पर हुई हार की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए उन्होंने स्थानीय पदाधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है कि महायुति के तौर पर काम करते समय कहां गलतियां हुईं और क्या कमियां रह गईं।
एकनाथ शिंदे ने स्पष्ट किया कि महायुति की समन्वय समिति और वरिष्ठ नेताओं की बैठक में इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
फिलहाल पार्टी के प्रवक्ताओं और पदाधिकारियों को मीडिया से बातचीत के दौरान सहयोगी दलों की आलोचना नहीं करने की हिदायत दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी नेता आपसी मतभेद और बयानबाजी से बचें और एकजुट होकर फिर से काम में जुट जाएं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भूटान की हिमनद झील के फटने से बंगाल-असम में बाढ़ की चेतावनी, प्रशासन सतर्क

उत्तर-पश्चिमी भूटान में शिंताफू झील के फटने से पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में अचानक बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है। अधिकारी इन दोनों राज्यों की ओर बहने वाली नदियों के किनारे स्थित संवेदनशील इलाकों पर नजर रख रहे हैं।
यह घटना गुरुवार शाम भूटान के गासा जिले में हुई। इससे गासा त्साचू में मौजूद बुनियादी ढाँचा बह गया। गासा त्साचू, मो छू नदी के पास स्थित एक लोकप्रिय प्राकृतिक गर्म पानी का स्रोत है। बाढ़ का पानी पहुँचने से पहले ही इस इलाके को खाली करा लिया गया था, इसलिए किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
मो छू नदी के उद्गम स्थल पर स्थित शिंताफू झील, भूटान की उन 17 हिमनद झीलों (ग्लेशियल लेक्स) में से एक है, जिन्हें संभावित रूप से खतरनाक माना गया है। इससे पहले 26 अगस्त 2021 को भी गासा त्साचू को अचानक आई बाढ़ से भारी नुकसान पहुंचा था, जब उफान पर बह रही मो छू नदी ने अपना रास्ता बदलकर गर्म पानी के स्रोत की ओर रुख कर लिया था।
रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ का पानी पुनाखा जोंग से लगभग आठ किलोमीटर दूर, काबेसा गेवोग के श्रीगंग इलाके से आगे निकल गया है, जिससे नदी के निचले इलाकों को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भूटान ने पश्चिम बंगाल और असम के प्रशासन को इस हिमालयी देश की सीमा से लगे जिलों के लिए संभावित खतरे के बारे में सतर्क कर दिया है। असम का धुबरी जिला और पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग पहाड़ियां, अलीपुरद्वार तथा जलपाईगुड़ी को संवेदनशील इलाकों के रूप में चिह्नित किया गया है।
पश्चिम बंगाल में, कूच बिहार प्रशासन ने संकोश नदी के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क कर दिया है। यह नदी उत्तरी भूटान से निकलती है और उस नदी प्रणाली का हिस्सा है, जो हिमालयी क्षेत्र से पानी को असम में ब्रह्मपुत्र नदी तक पहुंचाती है।
अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
अलीपुरद्वार जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित कुमार शॉ ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। आईएएनएस से बात करते हुए, एसपी शॉ ने गुरुवार को कहा, “लोग थोड़े घबराए हुए हैं। मेरी सभी से अपील है कि किसी भी तरह से घबराने की जरूरत नहीं है। हम अलर्ट मोड पर हैं, प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है और सभी एजेंसियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, इसलिए कोई समस्या नहीं है। हमें उम्मीद है कि हम कोई समाधान निकाल लेंगे और जनता को हो रही परेशानियों को दूर कर देंगे।”
इस अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) ने भूटान में बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पुनाखा के गुमा गेवोग के अंतर्गत डोचुखा-जोमलिंगथांग-रित्सा चिवोग इलाके में इस साल की शुरुआत में लगाए गए सौर-ऊर्जा संचालित सिंचाई लिफ्टिंग सिस्टम को मो छू नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि के कारण आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है।
एक स्थानीय नेता ने बताया कि सिंचाई प्रणाली ने काम करना बंद कर दिया है, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि नुकसान कितना हुआ है।
इस बीच, बाढ़ के साथ बहकर आए मलबे ने जोमलिंगथांग इलाके में पुनाखा-गासा राजमार्ग के एक हिस्से को ढक दिया है, जिससे सड़क संपर्क प्रभावित हो सकता है।
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लेशियर झील के फटने से आई बाढ़) तब होती है, जब ग्लेशियर के पीछे हटने से बनी झील में जमा पानी अचानक बाहर निकल आता है – अक्सर ऐसा किसी प्राकृतिक बांध के टूटने के कारण होता है। ऐसी घटनाएं भारी बारिश, भूस्खलन, हिमस्खलन, भूकंप या ग्लेशियर के तेजी से पिघलने के कारण हो सकती हैं।
मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पीछे हटने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है, जिससे ग्लेशियर झीलों की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। पानी का अचानक बाहर निकलना एक शक्तिशाली बाढ़ का रूप ले सकता है, जिससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, बुनियादी ढांचे और कृषि भूमि को खतरा पैदा हो सकता है।
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