अंतरराष्ट्रीय
वेस्टर्न यूरोप के स्मार्टफोन मार्केट में सैमसंग ने शीर्ष में बनाई जगह
पश्चिमी यूरोप के स्मार्टफोन बाजार में साल की तीसरी तिमाही में भी सैमसंग ने सूची में अपने लिए शीर्ष स्थान को बरकरार रखा है और यह क्रम सेल में गिरावट होने के बाद भी कंपनी ने जारी रखा हुआ है। गुरुवार को प्रदर्शित एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। इंडस्ट्री रिसर्चर इंटरनेशनल डेटा कॉर्प (आईडीसी) के मुताबिक, 35.6 फीसदी बाजार में हिस्सेदारी के साथ जुलाई से सितंबर तक की अवधि में दक्षिण कोरिया की इस दिग्गज तकनीकि कंपनी ने वेस्टर्न यूरोप के मार्केट में 1.03 करोड़ स्मार्टफोन की शिपिंग की है।
योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि पिछले साल के मुकाबले यह आंकड़े कुछ कम हैं, क्योंकि उस दौरान कंपनी ने 35.8 फीसदी मार्केट शेयर के साथ 1.1 करोड़ स्मार्टफोन की शिपिंग की थी।
सैमसंग के बाद दूसरे पायदान पर एप्पल और तीसरे में शाओमी का नाम शुमार है।
राष्ट्रीय समाचार
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ खुला बाजार, सेंसेक्स 188 अंक चढ़ा, निफ्टी में 0.21 प्रतिशत की तेजी

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बावजूद हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में खुला। रियल्टी, धातु और दवा क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करते दिखाई दिए। हालांकि बाद में यह बढ़त कम हो गई और बाजार लाल निशान में आ गया।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 163.35 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,701.07 पर खुला, और सत्र में एक समय यह 0.24 प्रतिशत यानी 187.95 अंकों की बढ़त के साथ 77,725.67 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि दिन का लो 77,445.86 रहा।
वहीं निफ्टी 50 ने भी 52.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत मजबूत होकर 24,284.05 के स्तर पर कारोबार शुरू किया। वहीं दिन के सत्र में इसने 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,284.05 का हाई टच किया, जबकि दिन का लो 24,206.80 रहा।
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.73 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें, तो निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा बढ़त वाला सूचकांक रहा और इसमें 0.7 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी मेटल में 0.48 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 0.32 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी रीट्स एवं रियल्टी भी हरे निशान में रहे और क्रमशः 0.32 प्रतिशत तथा 0.28 प्रतिशत तक मजबूत हुए।
दूसरी ओर निफ्टी आईटी सबसे कमजोर क्षेत्र रहा, जिसमें 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम सेक्टर में 0.17 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.19 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कारोबारी सत्र की तेजी को बनाए रखना आसान नहीं होगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बढ़ रहे हैं। उनका मानना है कि ब्रेंट कच्चा तेल 94 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं।
हालांकि, व्यापक बाजार में मजबूती बने रहने की संभावना जताई जा रही है। संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी और घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े सकारात्मक संकेत बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी कंपनियां, फार्मा क्षेत्र और अनुबंध आधारित अनुसंधान एवं विनिर्माण सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है। ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद इन क्षेत्रों में खरीदारी जारी है।
तकनीकी दृष्टि से विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी ने लगातार सात सत्रों की गिरावट के बाद तेजी का संकेत देने वाला डोजी पैटर्न बनाया है, जो बिकवाली के दबाव में कमी का संकेत देता है। यदि निफ्टी 24,060 से 24,000 के समर्थन क्षेत्र के ऊपर बना रहता है, तो इसमें 24,317 से 24,380 और उसके बाद 24,400 से 24,545 तक बढ़त देखने को मिल सकती है।
वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले। एशियाई बाजारों में कमजोरी रही, क्योंकि वॉल स्ट्रीट पर लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से दबाव देखा गया।
इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड 93.96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद तेल कीमतों में बढ़त आई, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों में से कुछ लागू कर सकता है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी, भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है। हालांकि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और बेहतर आर्थिक संकेतक बाजार को सहारा देते रहेंगे।
व्यापार
टाटा मोटर्स 1 सितंबर से कारों और एसयूवी की कीमतों में 25,000 रुपए तक की करेगी बढ़ोतरी

देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड ने अपनी यात्री वाहनों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। कंपनी ने शुक्रवार को कहा कि वह 1 सितंबर 2026 से अपने पूरे यात्री वाहन पोर्टफोलियो, जिसमें पेट्रोल-डीजल मॉडल और इलेक्ट्रिक वाहन दोनों शामिल हैं, की कीमतों में 25,000 रुपए तक की वृद्धि करेगी।
कंपनी के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी का स्तर सभी मॉडलों और वेरिएंट्स के लिए अलग-अलग होगा। टाटा मोटर्स ने कहा कि यह निर्णय बढ़ती इनपुट लागत और लगातार बने हुए मुद्रास्फीति के दबावों के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित करने के लिए लिया गया है।
टाटा मोटर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि वह लागत में आई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा पहले से खुद वहन कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ते खर्चों के कारण अब कीमतों में संशोधन करना आवश्यक हो गया है।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अन्य प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां भी अपने वाहनों की कीमतें बढ़ा चुकी हैं। हाल ही में हुंडई मोटर इंडिया ने बढ़ती कच्चे माल की लागत, ऊंचे परिचालन खर्च और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए अपने वाहन पोर्टफोलियो की कीमतों में 1 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की घोषणा की थी।
वहीं, मारुति सुजुकी ने भी अगस्त से अपने एरिना और नेक्सा मॉडल्स की कीमतों में वृद्धि की थी। कंपनी ने विभिन्न मॉडलों और वेरिएंट्स के अनुसार 2,500 रुपए से 30,000 रुपए तक कीमतें बढ़ाई थीं।
कीमतों में लगातार हो रहे ये बदलाव ऑटोमोबाइल उद्योग पर पड़ रहे निरंतर लागत दबाव के बीच आए हैं, जिसमें कंपनियां कच्चे माल, पुर्जों, लॉजिस्टिक्स और परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी के कारण लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर हो रही हैं। हालांकि वाहन निर्माता लागत अनुकूलन के जरिए ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को सीमित रखने की कोशिश भी कर रहे हैं।
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स का शुद्ध लाभ घटकर 859 करोड़ रुपए रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 4,003 करोड़ रुपए था। यह सालाना आधार पर करीब 79 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। तिमाही आधार पर भी कंपनी का लाभ 85 प्रतिशत कम हुआ है।
इस बीच, घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार के शुरुआती कारोबार के दौरान टाटा मोटर्स के शेयर 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ 319.70 रुपए पर कारोबार करता दिखाई दिए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 15.87 प्रतिशत तक टूटा है, वहीं पिछले एक साल में करीब 23 प्रतिशत गिरा है, जबकि इस साल अब तक कंपनी के शेयर 13 प्रतिशत से ज्यादा गिरे हैं।
एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 52 सप्ताह में शेयर ने 419 रुपए का उच्चतम और 294.30 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है।
राष्ट्रीय समाचार
एसबीआई ने बचत खातों से नकद निकासी की फीस में किया बदलाव, अब 15 रुपए प्रति लेनदेन का करना होगा भुगतान

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने बेसिक बचत बैंक जमा (बीएसबीडी) खातों से नकद निकासी की फीस में बदलाव किया है। अब खाताधारकों को एक निश्चित सीमा से अधिक बार निकासी करने पर 15 रुपए प्रति लेनदेन का भुगतान करना होगा। यह जानकारी बैंक की ओर से गुरुवार को दी गई।
एसबीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि बदले हुए नियमों के तहत, ग्राहकों को हर महीने चार बार मुफ्त कैश निकालने की सुविधा मिलती रहेगी, जबकि इस सीमा से ज्यादा बार नकद निकालने पर हर लेनदेन के लिए 15 रुपए (जीएसटी को हटाकर) के शुल्क का भुगतान करना होगा।
हालांकि, बैंक के अनुसार, सभी डिजिटल लेनदेन बिना किसी रोक-टोक के मुफ्त बने रहेंगे।
इसके अलावा, बैंक ने आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) लेनदेन के नियमों में भी बदलाव किया है। पहले, महीने के चार मुफ्त लेनदेन की गिनती करते समय डिजिटल लेनदेन के तहत एईपीएस लेनदेन को शामिल नहीं किया जाता था। बदले हुए नियमों के तहत, इस छूट को हटा दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, एसबीआई का वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121.22 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 19,160.44 करोड़ रुपए था।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बैंक की ब्याज से आय सालाना आधार पर 8.5 प्रतिशत बढ़कर 1,27,896.46 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में 1,17,830.28 करोड़ रुपए थी।
अन्य आय को मिलाकर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एसबीआई की कुल आय सालाना आधार पर 6.2 प्रतिशत बढ़कर 1,43,819.15 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,35,341.56 करोड़ रुपए थी।
इस दौरान बैंक के कुल खर्च में भी बढ़ोतरी देखी गई है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एसबीआई का कुल खर्च सालाना आधार पर 5.2 प्रतिशत बढ़कर 1,10,289.97 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 1,04,797.09 करोड़ रुपए था।
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