राष्ट्रीय समाचार
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ खुला बाजार, सेंसेक्स 188 अंक चढ़ा, निफ्टी में 0.21 प्रतिशत की तेजी
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बावजूद हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में खुला। रियल्टी, धातु और दवा क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी के दम पर प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज करते दिखाई दिए। हालांकि बाद में यह बढ़त कम हो गई और बाजार लाल निशान में आ गया।
कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 163.35 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,701.07 पर खुला, और सत्र में एक समय यह 0.24 प्रतिशत यानी 187.95 अंकों की बढ़त के साथ 77,725.67 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जबकि दिन का लो 77,445.86 रहा।
वहीं निफ्टी 50 ने भी 52.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत मजबूत होकर 24,284.05 के स्तर पर कारोबार शुरू किया। वहीं दिन के सत्र में इसने 0.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,284.05 का हाई टच किया, जबकि दिन का लो 24,206.80 रहा।
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.73 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें, तो निफ्टी रियल्टी सबसे ज्यादा बढ़त वाला सूचकांक रहा और इसमें 0.7 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी मेटल में 0.48 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 0.32 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर और निफ्टी रीट्स एवं रियल्टी भी हरे निशान में रहे और क्रमशः 0.32 प्रतिशत तथा 0.28 प्रतिशत तक मजबूत हुए।
दूसरी ओर निफ्टी आईटी सबसे कमजोर क्षेत्र रहा, जिसमें 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम सेक्टर में 0.17 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.19 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कारोबारी सत्र की तेजी को बनाए रखना आसान नहीं होगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बढ़ रहे हैं। उनका मानना है कि ब्रेंट कच्चा तेल 94 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है और निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं।
हालांकि, व्यापक बाजार में मजबूती बने रहने की संभावना जताई जा रही है। संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी और घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े सकारात्मक संकेत बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी कंपनियां, फार्मा क्षेत्र और अनुबंध आधारित अनुसंधान एवं विनिर्माण सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है। ऊंचे मूल्यांकन के बावजूद इन क्षेत्रों में खरीदारी जारी है।
तकनीकी दृष्टि से विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी ने लगातार सात सत्रों की गिरावट के बाद तेजी का संकेत देने वाला डोजी पैटर्न बनाया है, जो बिकवाली के दबाव में कमी का संकेत देता है। यदि निफ्टी 24,060 से 24,000 के समर्थन क्षेत्र के ऊपर बना रहता है, तो इसमें 24,317 से 24,380 और उसके बाद 24,400 से 24,545 तक बढ़त देखने को मिल सकती है।
वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले। एशियाई बाजारों में कमजोरी रही, क्योंकि वॉल स्ट्रीट पर लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने से दबाव देखा गया।
इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड 93.96 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद तेल कीमतों में बढ़त आई, जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंधों में से कुछ लागू कर सकता है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी, भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है। हालांकि घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और बेहतर आर्थिक संकेतक बाजार को सहारा देते रहेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
नोएडा में आईवरी काउंटी पर 50 लाख रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना, निरीक्षण में मिलीं गंभीर खामियां

शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने निर्माणाधीन परियोजनाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। सेक्टर-115 स्थित आईवरी काउंटी (एम्बाइंसी प्राइवेट लिमिटेड) पर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामले में 50 लाख रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने की संस्तुति की गई है। परियोजना में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी कई व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं।
निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर धूल उड़ती हुई पाई गई, जबकि एंटी स्मॉग गन भी बंद मिलीं। यूपीपीसीबीबी के क्षेत्रीय कार्यालय नोएडा की ओर से मुख्य पर्यावरण अधिकारी (वृत्त-1), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक 5 अक्टूबर 2026 को सेक्टर-116 स्थित सीएएक्यूएम स्टेशन के आसपास सघन निरीक्षण किया गया। पिछले करीब चार दिनों से इस क्षेत्र में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बढ़ने के कारण प्रदूषण के संभावित स्रोतों की जांच की जा रही थी।
निरीक्षण के दौरान सेक्टर-116 स्थित सीएएक्यूएम स्टेशन से करीब 750 मीटर दूर सेक्टर-115 के प्लॉट नंबर जीएच -01 पर आईवरी काउंटी परियोजना में निर्माण कार्य जारी मिला। रिपोर्ट में बताया गया है कि निरीक्षण के समय परियोजना की ओर से विनोद कुमार सहानी, डीजीएम प्रतिनिधि के रूप में मौजूद थे। निरीक्षण टीम ने निर्माण कार्य से जुड़ी कई गंभीर कमियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार परियोजना परिसर के चारों ओर मानकों के अनुरूप विंडब्रेकिंग वॉल स्थापित नहीं मिली। निर्माणाधीन इमारतों पर आवश्यक ग्रीन नेट कवर भी नहीं पाया गया।
इसके अलावा स्प्रे गन के माध्यम से खुले में पेंट का काम किया जा रहा था। निरीक्षण में निर्माण सामग्री, मिट्टी और सीएंडडी वेस्ट को खुले में रखा पाया गया। इन सामग्रियों को ढकने और नियमित पानी का छिड़काव करने की उचित व्यवस्था नहीं मिली। हवा चलने पर खुले में रखी सामग्री से धूल उड़ती हुई पाई गई। निर्माणाधीन परिसर और अंदरूनी मार्गों पर भी बड़ी मात्रा में धूल जमा मिली। वाहनों के आवागमन के कारण धूल का उत्सर्जन हो रहा था, लेकिन इसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा था। जांच के दौरान परियोजना परिसर में दो एंटी स्मॉग गन स्थापित मिलीं, लेकिन दोनों कार्यरत अवस्था में नहीं थीं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन मशीनों की स्थापना मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। परियोजना परिसर के अंदर और बाहर वाहनों की आवाजाही से अत्यधिक धूल उड़ रही थी। इसके अलावा परियोजना के मुख्य गेट पर टायर वॉशिंग सिस्टम भी स्थापित नहीं मिला। यूपीपीसीबी के निरीक्षण में पाया गया कि परियोजना की ओर से वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्र व राज्य सरकार, सुप्रीम कोर्ट तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से समय-समय पर जारी निर्देशों का पर्याप्त अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
रिपोर्ट में सेक्टर-116 के सीएएक्यूएम स्टेशन के एक्यूआई बढ़ने में परियोजना को एक प्रमुख कारक भी बताया गया है। क्षेत्रीय अधिकारी ऋतेश कुमार तिवारी की ओर से यह निरीक्षण रिपोर्ट मुख्य पर्यावरण अधिकारी को अग्रिम आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। रिपोर्ट की प्रतिलिपि गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी तथा नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक/नोडल पर्यावरण अधिकारी को भी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर 2.0 को समर्थन देने वाले संगठनों के नेताओं की जल्द हो सकती है गिरफ्तारी: सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने जंतर-मंतर 2.0 आंदोलन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने सूत्रों के हवाले से आशंका जताई है कि आंदोलन का समर्थन कर रहे विभिन्न संगठनों के नेताओं को जल्द ही कथित तौर पर झूठे मामलों में गिरफ्तार किया जा सकता है। भारद्वाज ने कहा कि यदि ऐसी स्थिति सामने आती है तो भी 10 अक्टूबर को प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हर हाल में जारी रखा जाना चाहिए।
सौरभ भारद्वाज के इस बयान के बाद जंतर-मंतर 2.0 आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उन्होंने आंदोलन से जुड़े नेताओं और संगठनों से संभावित गिरफ्तारियों को ध्यान में रखते हुए पहले से ही वैकल्पिक नेतृत्व तैयार रखने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी एक नेता की गिरफ्तारी की स्थिति में आंदोलन की गतिविधियां रुकनी नहीं चाहिए और संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियां संभालने के लिए दूसरी पंक्ति का नेतृत्व तैयार रहना जरूरी है।
भारद्वाज ने आंदोलन से जुड़े संगठनों के बीच संचार व्यवस्था को लेकर भी विशेष तैयारी करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए प्लान-बी फॉर कम्युनिकेशन तैयार किया जाना चाहिए। इसके तहत ऐसी वैकल्पिक संचार व्यवस्था होनी चाहिए, जिसके माध्यम से किसी भी विपरीत परिस्थिति में आंदोलन से जुड़े नेताओं, संगठनों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच संपर्क बना रहे।
उन्होंने कहा कि किसी आंदोलन की ताकत केवल उसके नेतृत्व में नहीं होती, बल्कि उससे जुड़े लोगों की सामूहिक भागीदारी और उद्देश्य में होती है। इसी बात पर जोर देते हुए भारद्वाज ने कहा, “यह आंदोलन किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक पार्टी से बड़ा है।” उन्होंने आंदोलन से जुड़े लोगों से अपील की कि वे किसी भी दबाव या संभावित कार्रवाई के बावजूद शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहें।
सौरभ भारद्वाज ने विशेष रूप से 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने की बात कही। उन्होंने आंदोलन से जुड़े संगठनों से संभावित परिस्थितियों के लिए पहले से रणनीति तैयार करने और नेतृत्व की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि कुछ प्रमुख नेताओं के खिलाफ कार्रवाई होती है, तब भी आंदोलन की निरंतरता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
राजनीति
दुर्गा पूजा से पहले फंड जारी करने की मांग, ममता गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस ने सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल-जज बेंच का रुख किया। उन्होंने कोर्ट द्वारा नियुक्त उस स्पेशल ऑफिसर के खिलाफ यह कदम उठाया है, जो उन्हें पार्टी के तीन बैंक अकाउंट्स को ऑपरेट करने की इजाजत नहीं दे रहा है।
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल जज बेंच के सामने दायर अपनी याचिका में ममता गुट ने स्पेशल जज सुब्रत तालुकदार पर आरोप लगाया कि दुर्गा पूजा के त्योहार से पहले पैसे निकालने की इजाजत नहीं दी। याचिका में कहा गया है कि इस वजह से गुट त्योहार के मौसम से पहले घर का किराया और ऑफिस के कर्मचारियों की सैलरी भी नहीं दे पा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट ने कोर्ट से तीन बैंक अकाउंट से पार्टी फंड का इस्तेमाल करने की इजाजत मांगी है और इस मामले में तुरंत सुनवाई की भी मांग की है। याचिका स्वीकार करने के बावजूद जस्टिस भट्टाचार्य ने तुरंत सुनवाई की अपील खारिज कर दी। त्योहारों की छुट्टियों के बाद कोर्ट खुलने पर इस मामले पर सुनवाई होने की संभावना है।
याचिका में तृणमूल कांग्रेस गुट ने दावा किया कि कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर ने जानकारी मांगी है कि क्या इस गुट को दिया गया नया नाम और चुनाव चिह्न सिर्फ नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के लिए था, जो मंगलवार को होने हैं।
पश्चिम बंगाल पुलिस ने अवैध लेन-देन के आरोपों के कारण एक प्राइवेट बैंक में तृणमूल कांग्रेस के तीन अकाउंट फ्रीज कर दिए थे। इस कदम को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया।
इसके बाद जस्टिस भट्टाचार्य की बेंच ने उन बैंक अकाउंट को मैनेज करने के लिए एक स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया। इस साल 9 जुलाई को जस्टिस भट्टाचार्य ने आदेश दिया कि तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का फिलहाल उन बैंक अकाउंट पर कंट्रोल रहेगा।
हालांकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी आदेश दिया कि गुट बेतहाशा पैसे खर्च नहीं कर पाएगा और कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर तृणमूल कांग्रेस को उसके रोजमर्रा के कामकाज और सैलरी के लिए भुगतान करेगा। जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी आदेश दिया कि यह आदेश अगले साल 29 जनवरी तक लागू रहेगा।
पिछले महीने इस मामले पर फिर से सुनवाई हुई थी। चूंकि खाते ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के नाम पर थे, इसलिए तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट को उन्हें ऑपरेट करने का अधिकार नहीं होना चाहिए, खासकर तब जब भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने हाल ही में ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के असली चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ दोनों को फ्रीज कर दिया हो।
हालांकि जस्टिस भट्टाचार्य ने राज्य सरकार के वकील की दलील को यह कहते हुए नहीं माना कि ईसीआई का फैसला पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़ा था और आयोग का फैसला अंतिम नहीं था।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर के जरिए खाते का इस्तेमाल करने का अधिकार 29 जनवरी, 2027 तक बना रहेगा।
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