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Saturday,12-September-2026
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डोनाल्ड ट्रंप ने दिया इशारा, स्वीकार कर सकते हैं बाइडेन से हार

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Donald-Trump

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह जो बाइडेन से हार स्वीकार कर सकते हैं क्योंकि मीडिया ने जॉर्जिया में भी डेमोक्रेट को विजेता घोषित कर दिया है, जहां पर मतगणना अभी भी जारी थी।

ट्रंप अब तक बाइडेन की जीत से इनकार करते रहे हैं और उन्होंने तो कुछ नतीजों को अदालतों में चुनौती देने की कसम भी खाई है। लेकिन शुक्रवार को कोरोनावायरस पर आधारित ब्रीफिंग के दौरान कहा, “भविष्य में जो होगा, कोई नहीं जानता, कि कौनसा प्रशासन होगा। यह तो समय भी बताएगा।”

20 जनवरी को किसी और प्रशासन के बारे में बोलने का उनका पहला मौका था। इस बात को लेकर अटकलें लगाई जाती रही हैं कि आखिरकार वह हार कैसे स्वीकार करेंगे। ट्रंप के एक अज्ञात वरिष्ठ सहयोगी ने एनबीसी से कहा है कि ऐसी संभावना है कि ट्रंप चुनाव के फैसले को स्वीकार कर सकते हैं।

देश में कोविड-19 के कहर और इसकी दूसरी लहर के बीच ट्रंप ने कहा कि वह देशव्यापी लॉकडाउन लागू नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “हम लॉकडाउन में नहीं जाएंगे। यह प्रशासन लॉकडाउन में नहीं जाएगा। भविष्य में क्या होगा, कौन सा प्रशासन होगा, यह समय बताएगा।”

हालांकि मतगणना अभी भी जारी है और परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं, मीडिया ने बाइडेन को उनके अनुमानों के आधार पर विजेता का ताज पहनाया है और इस आधार पर बाइडेन और डेमोक्रेट ने मांग की है कि उन्हें अधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति चुने जाने का दर्जा दिया जाना चाहिए।

मीडिया के अनुसार, बाइडेन को 306 इलेक्टोरल कॉलेज वोट और ट्रम्प को 232 मिले हैं, जबकि जीतने के लिए 270 इलेक्टोरल कॉलेज वोटों की जरूरत होती है।

बाइडेन ट्रांजिशन टीम के प्रवक्ता जेन पसाकी ने एक ब्रीफिंग के दौरान शिकायत की कि वे लोग “कोविड को लेकर चल रहे कामों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जबकि शासन करने की तैयारी के लिए यह जरूरी है।”

कानूनी रूप से चुने गए राष्ट्रपति को कार्यालय में स्थानांतरित होने और ब्रीफिंग तक पहुंचने की आधिकारिक सुविधाएं दी जानी चाहिए। लेकिन सामान्य सेवा प्रशासन के प्रमुख एमिली मर्फी इसके लिए चुनाव परिणामों की आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राज्यों के पास आधिकारिक तौर से परिणाम घोषित करने के लिए 14 दिसंबर तक का समय है।

ट्रंप बिना सबूतों के चुनावों में धांधली होने की बात कह रहे हैं जबकि देश भर के चुनाव अधिकारियों ने ऐसी संभावना से साफ इनकार किया है।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा और जयशंकर की बैठक, द्विपक्षीय संबंधों और भू-राजनीतिक स्थिति पर हुई चर्चा

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ब्राजील संबंधों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र (यूएन), जी20 और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) जैसे मंचों पर आपसी सहयोग पर चर्चा की।

बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने मौजूदा वैश्विक राजनीतिक स्थिति और संवाद तथा कूटनीति को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स 2026 की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया।

एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर लिखा, “ब्रिक्स इंडिया 2026 के आज नई दिल्ली में शुरू होने के अवसर पर ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से मिलकर खुशी हुई। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार और निवेश, रक्षा, ऊर्जा, कृषि तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के विषय शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र, जी20 और आईएमओ सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर हमारे सहयोग पर भी बात हुई। साथ ही मौजूदा वैश्विक हालात और संवाद व कूटनीति को बढ़ावा देने में ब्रिक्स 2026 के महत्व पर विचारों का आदान-प्रदान किया।”

माउरो विएरा गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे थे। वे 12-13 सितंबर को भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं।

उनके स्वागत में विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट पर लिखा, “18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा का हार्दिक स्वागत है। भारत और ब्राजील के बीच लंबे समय से मजबूत दोस्ती रही है और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता भी मजबूत है।”

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों, साझेदार देशों और विशेष आमंत्रित देशों के नेता हिस्सा लेंगे।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों, सहयोगी देशों और आउटरीच आमंत्रित देशों के नेता एक साथ आएंगे। ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ब्रिक्स के सहयोगी देश हैं: बेलारूस, क्यूबा, ​​बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।

इससे पहले फरवरी में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा भारत के राजकीय दौरे पर आए थे। उस दौरान उन्होंने दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लिया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी।

पीएम मोदी और लूला के बीच हुई चर्चा में व्यापार, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, निवेश, डिजिटल तकनीक, ग्लोबल साउथ और अन्य बहुपक्षीय मुद्दों पर भारत-ब्राजील साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया था।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

साउथ कोरिया ने कहा- होर्मुज की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बातचीत जारी, ईरान से संपर्क भी बरकरार

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साउथ कोरिया के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से सभी जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ लगातार संपर्क में है। लंदन स्थित ‘मिडिल ईस्ट आई’ वेबसाइट के अनुसार, यह बयान ईरानी शिक्षाविद मोहम्मद मारंडी की उस चेतावनी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर सियोल, जलडमरूमध्य में नौवहन (नेविगेशन) को सुरक्षित करने के अमेरिकी नेतृत्व वाले प्रयास में शामिल होता है, तो तेहरान सियोल को दुश्मन मान सकता है और क्षेत्र में दक्षिण कोरियाई संपत्तियों को निशाना बना सकता है।

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हम मध्य पूर्व में जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सभी जहाजों – जिनमें हमारे देश के जहाज भी शामिल हैं – की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ निकटता से संवाद कर रहे हैं।” राजनयिक सूत्रों ने बताया कि दक्षिण कोरियाई सरकार ने ईरान के साथ राजनयिक बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मध्य पूर्व में जारी संघर्ष से संबंधित मुद्दों पर बातचीत जारी रखी है।

सोमवार को बाद में, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कोरियाई भाषा में एक संदेश पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि सियोल और तेहरान के बीच संबंध आपसी सम्मान के आधार पर विकसित हुए हैं और ईरान दक्षिण कोरिया के साथ अपने संबंधों को बहुत महत्व देता है। कोरियाई भाषा में किए गए इस पोस्ट में कहा गया, “फारस की खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में किसी अन्य देश की सैन्य उपस्थिति या अभियानों में भागीदारी को केवल उस पक्ष के लिए प्रत्यक्ष समर्थन माना जा सकता है जो आक्रामकता के लिए जिम्मेदार है, और इसके गंभीर परिणाम होंगे।”

प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान और दक्षिण कोरिया के बीच 64 वर्षों से राजनयिक संबंध हैं और तेहरान सियोल के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को बहुत महत्व देता है। पोस्ट में एक तस्वीर भी शामिल थी जिसमें कोरियाई भाषा में संदेश लिखा था: “खतरनाक फैसलों के परिणाम भी होते हैं।” दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। मध्य पूर्व में फिर से बढ़े तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सियोल पर दबाव बढ़ाया है कि वह जलडमरूमध्य में नौवहन को सुरक्षित करने के प्रयासों में सैन्य योगदान दे। दक्षिण कोरिया अपने योगदान के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिसमें ब्रिटेन, फ्रांस और दूसरे देशों के साथ संभावित सहयोग भी शामिल है। सियोल के राष्ट्रपति कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि उस जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में सैन्य बल या संसाधन भेजने के बारे में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और विभिन्न विकल्पों की व्यापक समीक्षा अभी भी चल रही है। अधिकारी ने यह भी कहा कि सियोल के योगदान में गैर-लड़ाकू और खोज-और-बचाव बल शामिल हो सकते हैं, और इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार ऐसे विकल्पों पर विचार करेगी जिनसे कोरियाई प्रायद्वीप पर देश की रक्षा तैयारियों से कोई समझौता न हो।

खबरों के अनुसार, सेना संभावित तैनाती के लिए कई तरह के संसाधनों की समीक्षा कर रही है, जिनमें समुद्री गश्ती विमान, विस्फोटक आयुध निपटान (ईओडी) टीमें और नौसैनिक बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें हटाने के लिए मानवरहित सिस्टम शामिल हैं। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “हम परिचालन संबंधी ज़रूरतों के आधार पर विभिन्न विकल्पों की समीक्षा कर रहे हैं।” “हम सीधे लड़ाई में शामिल हुए बिना सुरक्षित रूप से योगदान करने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं।”

सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ सांसदों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में सैनिकों की किसी भी तैनाती का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है, जबकि अन्य प्रगतिशील दलों और कुछ नागरिक समूहों ने संभावित तैनाती के खिलाफ़ और भी कड़ा रुख अपनाया है। दक्षिण कोरियाई कानून के तहत, सैन्य बलों की किसी भी विदेशी तैनाती के लिए संसदीय मंज़ूरी की आवश्यकता होती है।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

सऊदी अरब के साथ संबंध मजबूत करने में भारतीय कामगारों की अहम भूमिका: विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह 

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विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सोमवार को भारत और सऊदी अरब के बीच संबंधों को मजबूत करने में भारतीय कामगारों की भूमिका की सराहना की।

सिंह ने सऊदी अरब में अल फनार कंपनी के लेबर कैंप में भारतीय कामगारों से मुलाकात के बाद यह बयान दिया और विदेशों में रहने वाले भारतीयों, खासकर कामगारों के कल्याण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता जताई।

सिंह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “अल फनार कंपनी के लेबर कैंप में भारतीय कामगारों से मिलकर खुशी हुई। हमारे कामगार सऊदी अरब के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीयों, खासकर भारतीय कामगारों का कल्याण भारत सरकार की प्राथमिकता है।”

कीर्ति वर्धन सिंह सऊदी अरब की चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह उनकी सऊदी अरब की पहली आधिकारिक यात्रा है।

रविवार को सिंह ने सऊदी अरब के विदेश मामलों के राज्य मंत्री और जलवायु दूत आदेल अल-जुबेर से मुलाकात की और द्विपक्षीय संबंधों की “बेहतरीन” स्थिति की समीक्षा की।

बैठक के बाद, राज्य मंत्री सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा: “सऊदी अरब के विदेश मामलों के राज्य मंत्री और जलवायु दूत आदेल अल-जुबेर के साथ गर्मजोशी भरी और सार्थक बैठक हुई। भारत-सऊदी द्विपक्षीय संबंधों की बेहतरीन स्थिति की समीक्षा की और जलवायु कार्रवाई पर सहयोग पर चर्चा की।”

राज्य मंत्री सिंह ने सऊदी अरब के मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्री अहमद बिन सुलेमान अल-राजही से भी मुलाकात की और श्रम और जनशक्ति क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।

सिंह ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “श्रम और जनशक्ति क्षेत्र में भारत-सऊदी अरब सहयोग को और मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई, जो हमारी रणनीतिक साझेदारी की गहराई और बढ़ती गति को दर्शाता है। निमंत्रण और गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए अहमद बिन सुलेमान अल-राजही का आभारी हूं।”

विदेश मंत्रालय (एम ई ए) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, अपनी यात्रा के दौरान वह सऊदी अरब के पर्यावरण, जल और कृषि उप मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से भी मुलाकात करेंगे।

बयान में कहा गया है, “यह यात्रा दोनों पक्षों को मानव संसाधन, कौशल विकास, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय मामलों के क्षेत्रों में आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करने और भारत और सऊदी अरब के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी।”

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