राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली के मंडावली में चाकू से घोंपकर युवक की हत्या
पूर्वी दिल्ली के मंडावली थाना क्षेत्र में चाकूबाजी की एक सनसनीखेज वारदात ने इलाके को दहला दिया। वंश डेढा नामक युवक की कथित तौर पर चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, वारदात गुरुवार रात करीब आठ बजे की है।
सूत्रों के मुताबिक हमलावरों ने वंश पर एक नहीं, बल्कि कई बार चाकू से वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद घायल वंश को तत्काल नजदीकी मैक्स अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
फिलहाल मंडावली थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने वारदात के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। हत्या की असली वजह, हमलावरों की संख्या और वारदात में शामिल आरोपियों की पहचान पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इसके पहले 6 सितंबर को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, 6 सितंबर की रात करीब 10:15 बजे जेपीसी अस्पताल से सूचना मिली कि चाकू लगने से घायल एक युवक को अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान साहिल (19 वर्ष) पुत्र फहीम निवासी अमरोहा के रूप में हुई थी। मृतक चौहान बांगर की गली नंबर-4 स्थित एक पाउडर कोटिंग फैक्ट्री में काम करता था और वहीं रहता भी था।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि मृतक पर उसी फैक्ट्री में काम करने वाले उसके एक सहकर्मी ने पर चाकू से हमला किया था। मामले में 7 सितंबर को जाफराबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जांच करते हुए अहम सुराग जुटाए। इसके बाद करीब चार घंटे के भीतर मुख्य आरोपी साहिल (21 वर्ष) निवासी गौतमपुरी और उसके 15 वर्षीय नाबालिग साथी को पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया था।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु में 79 प्रतिशत खनिज परिवहन ट्रकों में नहीं लगा जीपीएस, सरकार ने बढ़ाई समयसीमा

तमिलनाडु में निर्माण खनिजों के परिवहन के लिए पंजीकृत पांच में से लगभग चार ट्रकों में जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण नहीं लगे हैं, जिसके चलते खनिज आवागमन की निगरानी को कड़ा करने के उद्देश्य से मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद स्थापना की समय सीमा को एक बार फिर बढ़ा दिया गया है।
खनिज प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पर पंजीकृत 1.4 लाख ट्रकों में से 30 सितंबर तक केवल 30,000 ट्रकों में ही वाहन स्थान ट्रैकिंग उपकरण लगे हुए थे। शेष 79 प्रतिशत ट्रकों को एम-रेत, पी-रेत और अन्य निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों को ढकने की आवश्यकता का पालन करना बाकी है।
भूविज्ञान एवं खनन विभाग ने परिवहन संघों द्वारा अतिरिक्त समय की मांग के बाद, समय सीमा को बढ़ाकर 31 अक्टूबर कर दिया है। मूल समय सीमा 31 मार्च को पहले ही बढ़ा दी गई थी जबकि सरकार ने अलग से घोषणा की थी कि जीपीएस उपकरण के बिना वाहनों को 1 सितंबर से खनिज पारगमन पास मिलना बंद हो जाएगा।
वाहन ट्रैकर्स को खनिज प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने का उद्देश्य ट्रकों द्वारा सामग्री लोड करने के स्थान और उनकी आवाजाही को रिकॉर्ड करके खनिज परिवहन की निगरानी को मजबूत करना है। ऐसे रिकॉर्ड अधिकारियों को अनधिकृत खदानों से आने वाली आपूर्ति की पहचान करने और अवैध खनन और परिवहन उल्लंघनों की जांच करने में मदद कर सकते हैं।
इस प्रणाली के धीमी गति से लागू होने पर ट्रक मालिकों ने सरकार की इस प्रणाली को लागू करने की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं। तमिलनाडु राज्य ट्रक मालिक संघ के महासचिव जी. गणेश ने कहा कि ट्रैकिंग उपकरणों की लागत में भारी गिरावट आई है, जो 15,000 रुपये से घटकर 3,700 रुपये हो गई है।
उन्होंने कहा कि कई विक्रेता एआईएस-140 मानक को पूरा करने वाले एक लाख से अधिक उपकरण उपलब्ध करा सकते हैं और उनका तर्क था कि उपलब्धता को देखते हुए और देरी को उचित नहीं ठहराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस आवश्यकता को लागू करने में सरकार की अनिच्छा ने अवैध खनन पर अंकुश लगाने के उसके संकल्प पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विभाग के अधिकारियों ने कहा कि लगभग 37 अधिकृत आपूर्तिकर्ताओं के पास अल्पावधि के भीतर शेष सभी वाहनों को सुसज्जित करने के लिए पर्याप्त स्टॉक नहीं है।
एक अधिकारी ने बताया कि यह नवीनतम विस्तार कई संगठनों के अनुरोधों के बाद किया गया है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि फर्जी क्यूआर कोड वाले फर्जी खनिज पारगमन पास बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
खनन संबंधी उल्लंघनों की शिकायतों के लिए जल्द ही एक समर्पित नंबर शुरू किया जाएगा और इसे चेन्नई स्थित विभाग के नियंत्रण कक्ष से जोड़ा जाएगा।
निर्माण की मांग और अधिकृत खदान उत्पादन के बीच पर्याप्त अंतर के बीच प्रवर्तन संबंधी चुनौतियां सामने आती हैं।
तमिलनाडु में निर्माण सामग्री की औसत दैनिक आवश्यकता लगभग 5.25 लाख यूनिट है, जबकि खदानों से अनुमत उत्पादन केवल 1.2 लाख यूनिट है, जो गहन नियामकीय जांच की आवश्यकता को उजागर करता है।
राजनीति
राज्यसभा की ‘तीन’ से ‘403’ तक पहुंची सपा की नजर, अखिलेश के पोस्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल, राजभर ने कसा तंज

उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के एक संक्षिप्त सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रदेश की सियासत में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” राजनीतिक हलकों में उनके इस संदेश को राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
अखिलेश के इस संकेत से माना जा रहा है कि सपा राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी। पार्टी पहले ही दो प्रत्याशियों-धनराज लखवानी और प्रो. रामगोपाल यादव को मैदान में उतार चुकी है। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार की संभावित दावेदारी को लेकर चल रही चर्चाओं पर अखिलेश के एक्स पोस्ट ने काफी हद तक विराम लगाने का संकेत दिया है।
विश्लेषक कहते हैं कि अखिलेश यादव ने अपने संदेश में राज्यसभा की ‘तीन’ सीटों के बजाय विधानसभा की ‘403’ सीटों को लक्ष्य बताते हुए पार्टी की प्राथमिकता का राजनीतिक संकेत भी दिया है। इसे सपा की आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अखिलेश के पोस्ट पर सुभासपा अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तत्काल तंज कसा।
ओम राजभर ने एक्स पर लिखा, ”मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स! वैसे कभी-कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया। रही बात 403 की तो बस यही कहूंगा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है।”
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत है। मौजूदा विधानसभा में प्रभावी संख्या 396 मानी जा रही है। सपा के पास अपने विधायकों के साथ कांग्रेस के संभावित समर्थन को जोड़ने पर दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या मौजूद है। सपा के सामने असली चुनौती तीसरी सीट को लेकर थी। तीन प्रत्याशियों को जिताने के लिए 111 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती।
दो सीटों के लिए 74 वोट खर्च होने के बाद पार्टी के पास सीमित अतिरिक्त मत बचते हैं। ऐसे में तीसरी सीट के लिए उसे करीब 12 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ती। यही वजह है कि तीसरे उम्मीदवार की स्थिति शुरू से ही सपा के लिए आसान नहीं मानी जा रही थी।
इसके अलावा पार्टी के कुछ विधायकों के पिछले राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान करने का रिकॉर्ड भी सपा की चिंता बढ़ाता है। दूसरी ओर, भाजपा के अपने 255 विधायकों के अलावा अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल के नौ, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के छह और निषाद पार्टी के पांच विधायक हैं। तीन निर्दलीय तथा जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायकों के समर्थन को भी भाजपा के पक्ष में माना जा रहा है।
इस गणित से भाजपा खेमे के पास करीब 293 विधायकों का समर्थन बैठता है, जबकि आठ सीटों पर जीत के लिए 296 मतों की जरूरत होगी। ऐसे में आठवीं सीट के लिए भाजपा को कुछ अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
राष्ट्रीय समाचार
नोएडा में आईवरी काउंटी पर 50 लाख रुपए का पर्यावरणीय जुर्माना, निरीक्षण में मिलीं गंभीर खामियां

शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने निर्माणाधीन परियोजनाओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। सेक्टर-115 स्थित आईवरी काउंटी (एम्बाइंसी प्राइवेट लिमिटेड) पर पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामले में 50 लाख रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाए जाने की संस्तुति की गई है। परियोजना में वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी कई व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं।
निरीक्षण के दौरान निर्माण स्थल पर धूल उड़ती हुई पाई गई, जबकि एंटी स्मॉग गन भी बंद मिलीं। यूपीपीसीबीबी के क्षेत्रीय कार्यालय नोएडा की ओर से मुख्य पर्यावरण अधिकारी (वृत्त-1), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक 5 अक्टूबर 2026 को सेक्टर-116 स्थित सीएएक्यूएम स्टेशन के आसपास सघन निरीक्षण किया गया। पिछले करीब चार दिनों से इस क्षेत्र में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बढ़ने के कारण प्रदूषण के संभावित स्रोतों की जांच की जा रही थी।
निरीक्षण के दौरान सेक्टर-116 स्थित सीएएक्यूएम स्टेशन से करीब 750 मीटर दूर सेक्टर-115 के प्लॉट नंबर जीएच -01 पर आईवरी काउंटी परियोजना में निर्माण कार्य जारी मिला। रिपोर्ट में बताया गया है कि निरीक्षण के समय परियोजना की ओर से विनोद कुमार सहानी, डीजीएम प्रतिनिधि के रूप में मौजूद थे। निरीक्षण टीम ने निर्माण कार्य से जुड़ी कई गंभीर कमियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार परियोजना परिसर के चारों ओर मानकों के अनुरूप विंडब्रेकिंग वॉल स्थापित नहीं मिली। निर्माणाधीन इमारतों पर आवश्यक ग्रीन नेट कवर भी नहीं पाया गया।
इसके अलावा स्प्रे गन के माध्यम से खुले में पेंट का काम किया जा रहा था। निरीक्षण में निर्माण सामग्री, मिट्टी और सीएंडडी वेस्ट को खुले में रखा पाया गया। इन सामग्रियों को ढकने और नियमित पानी का छिड़काव करने की उचित व्यवस्था नहीं मिली। हवा चलने पर खुले में रखी सामग्री से धूल उड़ती हुई पाई गई। निर्माणाधीन परिसर और अंदरूनी मार्गों पर भी बड़ी मात्रा में धूल जमा मिली। वाहनों के आवागमन के कारण धूल का उत्सर्जन हो रहा था, लेकिन इसे नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा था। जांच के दौरान परियोजना परिसर में दो एंटी स्मॉग गन स्थापित मिलीं, लेकिन दोनों कार्यरत अवस्था में नहीं थीं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन मशीनों की स्थापना मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। परियोजना परिसर के अंदर और बाहर वाहनों की आवाजाही से अत्यधिक धूल उड़ रही थी। इसके अलावा परियोजना के मुख्य गेट पर टायर वॉशिंग सिस्टम भी स्थापित नहीं मिला। यूपीपीसीबी के निरीक्षण में पाया गया कि परियोजना की ओर से वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्र व राज्य सरकार, सुप्रीम कोर्ट तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से समय-समय पर जारी निर्देशों का पर्याप्त अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
रिपोर्ट में सेक्टर-116 के सीएएक्यूएम स्टेशन के एक्यूआई बढ़ने में परियोजना को एक प्रमुख कारक भी बताया गया है। क्षेत्रीय अधिकारी ऋतेश कुमार तिवारी की ओर से यह निरीक्षण रिपोर्ट मुख्य पर्यावरण अधिकारी को अग्रिम आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। रिपोर्ट की प्रतिलिपि गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी तथा नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक/नोडल पर्यावरण अधिकारी को भी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
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