राष्ट्रीय समाचार
दो अलग-अलग लोन धोखाधड़ी मामले में ईडी 12 जगहों पर चला रही तलाशी अभियान
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पटना जोन ने ईडी पटना जोन ने शुक्रवार को मेसर्स रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड (आरएचआरएल), गया, बिहार द्वारा किए गए बैंक फ्रॉड के मामले में पीएमएलए की धारा 17 के तहत सर्च ऑपरेशन चला रही है। इस कंपनी को मिस्टर अखौरी गोपाल और उनके बेटे निशांत और नितेश कंट्रोल करते हैं। ईडी 9 जगहों पर सर्च कर रही है जिनमें गया में 6, गुरुग्राम में 2 और नई दिल्ली में एक जगह शामिल हैं। वहीं, एक अन्य मामले में ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस 3 जगहों पर तलाशी अभियान चला रही है।
जांच के दौरान यह पता चला कि आरएचआरएल ने सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के ग्रुप से मिले 85 करोड़ रुपये में से 58 करोड़ रुपये का गलत इस्तेमाल किया। यह रकम उनके सीए द्वारा दी गई नकली प्रोजेक्ट पूरा होने की रिपोर्ट के आधार पर ली गई थी। इन लोन के बदले अखौरी गोपाल और उनके परिवार के सदस्यों की पर्सनल गारंटी भी बैंकों को दी गई थी।
ग्रुप की एक संबंधित कंपनी की बकाया रकम के बदले 5 प्रॉपर्टीज टाटा मोटर्स लिमिटेड के पास गिरवी रखी गई थीं। हालांकि, हाल ही में गिरवी होने के बावजूद इन प्रॉपर्टीज को बहुत कम कीमत पर बेच दिया गया और सेल डीड में इसे कैश पेमेंट के तौर पर दिखाया गया।
पता चला है कि कुछ खरीदार कम आय वाले लोग हैं और इतनी बड़ी रकम का इंतजाम करने में सक्षम नहीं हैं। शक है कि वे अखौरी गोपाल के बेनामीदार/प्रॉक्सी हैं। इस बिक्री का मकसद प्रॉपर्टीज को हटाना था ताकि ईडी द्वारा कोई सख्त कार्रवाई न की जा सके। सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, अपराध से हुई कमाई (पीओसी) लगभग 131.79 करोड़ रुपये (एनपीए वैल्यू) है।
वहीं, ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस ने पीएमएलए, 2002 के नियमों के तहत एआरएसएस ग्रुप (ओडिशा) और एएमआर/एएमआरएल ग्रुप से जुड़ी जगहों पर तलाशी अभियान चला रहा है। एआरएसएस ग्रुप से जुड़े लोगों में इसके पुराने प्रमोटर व डायरेक्टर परिवार के सदस्य अनिल अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, सुनील अग्रवाल और सुभाष अग्रवाल शामिल हैं और एएमआर/एएमआरएल ग्रुप प्रमोटर महेश कुमार रेड्डी अल्थुरु से जुड़ा है।
यह तलाशी एसआरईआई इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड (एसआईएफएल) और एसआरईआई इक्विपमेंट फाइनेंस लिमिटेड (एसआईएफएल) से लिए गए कथित धोखाधड़ी वाले व अनियमित लोन और उनके बाद लोन न चुकाने की जांच के सिलसिले में की जा रही है। इसमें फंड की ‘एवरग्रीनिंग’, फंड को दूसरी जगह लगाने व राउंड-ट्रिपिंग और दूसरी अनियमितताओं का शक भी शामिल है। तलाशी कोलकाता, चेन्नई, बैंगलोर और हैदराबाद में की जा रही है।
राजनीति
दीया मिर्जा के दीपावली वीडियो पर सियासी घमासान, शिवसेना ने किया विरोध तो एनसीपी आई सपोर्ट में

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा अभिनेत्री दीया मिर्जा का पर्यावरण-अनुकूल और पटाखा-मुक्त दीपावली को बढ़ावा देने वाला जागरूकता वीडियो हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। एक ओर शिवसेना के नेता आनंद दुबे ने वीडियो का विरोध किया है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो अभिनेत्री दीया मिर्जा के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।
शिवसेना प्रवक्ता आनंद दुबे ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि कलाकार लोगों को ज्ञान देने के बजाय टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें। उन्होंने कहा, “देखिए, सनातन इतना महान है कि उसे दीया मिर्जा या किसी से जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं है। दीपावली का पावन पर्व सभी हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा त्योहार होता है। हमें दीपावली का पर्व कैसे और किस तरह से मनाना है, ये किसी और से जानने की जरूरत नहीं है। हमें अच्छी तरह से अपनी संस्कृति के बारे में पता है और यह भी पता है कि पर्यावरण की किस तरह से रक्षा करनी है।”
उन्होंने कहा कि कलाकार टेलीविजन पर अपनी कला का प्रदर्शन करें, हम अपना काम कर लेंगे। हम अपनी परंपरा, आदर्शों और मूल्यों को हमेशा आगे रखकर चलते हैं। तो हमें किसी से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है कि किस तरह से त्योहार मनाना चाहिए।”
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र परिवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रैस्टो का कहना है कि दीया मिर्जा ने हाई कोर्ट के आदेशों का पालन किया है। उन्होंने कहा, “दीया मिर्जा ने खुद अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पर वीडियो जारी नहीं किया है, बल्कि बीएमसी के किसी इंचार्ज ने उन्हें वीडियो बनाने के लिए अप्रोच किया था और दीया मिर्जा ने वीडियो बना दी, तब कहीं जाकर बीएमसी के हैंडल पर वीडियो डाली गई। जब दीया मिर्जा को अप्रोच किया जा रहा था, तब बीएमसी की मेयर ऋतु रावडे को इस बात की जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने उस समय कुछ भी क्यों नहीं कहा था? इसका मतलब है कि बीएमसी में भी अलग-अलग ग्रुप बन रहे हैं, जो मेयर को कुछ बताते नहीं हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “इसी तरह का वीडियो माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे ने भी बनाया था। दोनों ने भी वही बात कही थी। इस वीडियो को लेकर बेवजह विवाद बढ़ाया जा रहा है। देखिए, दीपावली का त्योहार हम सभी मनाते हैं। यह खुशी का पर्व है, तो जब भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस तरह की बातें कही जाती हैं, तो यह गलत है। दीया मिर्जा ने कोई गलती नहीं की, उन्हें सिर्फ बताया गया था कि ये हाई कोर्ट के आदेश हैं। बीएमसी ने वही बात दीया मिर्जा समेत सभी कलाकारों से कहलवाई, लेकिन भाजपा बात का बतंगड़ बना रही है।”
राष्ट्रीय समाचार
भारत ने यूएई को अनार और कीवी का किया निर्यात, किसानों की बढ़ेगी आय

भारत के अनार और कीवी फलों की ताजा खेप यूएई के दुबई के बाजार में पहुंच गई है, जिससे देश के किसानों के लिए नए बाजारों के रास्ते खुले हैं। यह केंद्र सरकार के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से संभव हुआ है। यह जानकारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को दी।
वाणिज्य मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी एक बयान के अनुसार, एपीडा ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से सिंदूरी किस्म के 1.3 मीट्रिक टन अनार और अरुणाचल प्रदेश के जीरो से 1.5 मीट्रिक टन कीवी के परीक्षण निर्यात को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई तक पहुंचाने में मदद की है।
अनार की इस खेप में 2-2 किलोग्राम के 650 बॉक्स शामिल थे, जिसका निर्यात उत्तर प्रदेश स्थित अमामा एक्सपोर्ट्स ने किया। इस पहल के तहत स्थानीय उत्पादकों और एक किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) को निर्यातक से जोड़ा गया है, जिससे हिमाचल प्रदेश के बागवानी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने के अवसर मिल रहे हैं।
बयान के अनुसार, अनार सीधे स्थानीय किसानों और भुंतर एफपीओ से खरीदे गए थे, जो लगभग 600 किसानों से जुड़ा हुआ है। कुल्लू जिला बागवानी प्रशासन ने खरीद और समन्वय में मदद करके इस पहल को समर्थन दिया।
यह पहल किसानों के लिए बाजार संपर्क मजबूत करने में प्रत्यक्ष खरीद और एफपीओ के माध्यम से सामूहिक भागीदारी की भूमिका को दर्शाती है। इस निर्यात में शामिल किसानों को घरेलू बाजार में प्रचलित कीमतों की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक मूल्य मिला।
सिंदूरी किस्म हिमाचल प्रदेश में उगाई जाने वाली अनार की प्रमुख किस्मों में शामिल है। इसके अलावा यहां भगवा और कंधारी किस्मों की भी खेती होती है। आकर्षक लाल छिलके, रसीले दानों और मीठे-खट्टे स्वाद के लिए पहचाने जाने वाले सिंदूरी अनार ताजा खपत के लिए उपयुक्त हैं और इनमें निर्यात बाजार की भी अच्छी संभावनाएं हैं।
अरुणाचल प्रदेश से 1.5 मीट्रिक टन कीवी की परीक्षण निर्यात खेप सफलतापूर्वक दुबई पहुंची और अल कुसैस स्थित लुलु हाइपरमार्केट में प्रदर्शित की गई। यह पहल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस फल की संभावनाओं का आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) के तहत शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ‘कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी’ ब्रांडिंग अभियान के अंतर्गत राज्य के कीवी क्षेत्र को बढ़ावा देना और मजबूत करना है। राज्य सरकार के सहयोग से लागू इस पहल का लक्ष्य राज्य के कीवी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पेश करना, उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया का आकलन करना और स्थानीय उत्पादकों के लिए निर्यात के अवसर बढ़ाने हेतु मजबूत बाजार संपर्क विकसित करना है।
अरुणाचल प्रदेश की ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जलवायु और प्राकृतिक वातावरण कीवी की खेती के लिए अनुकूल हैं। यहां उगने वाले कीवी की गुणवत्ता और स्वाद विशिष्ट हैं। राज्य के उत्पादों में प्रीमियम घरेलू बाजारों, निर्यात को बढ़ावा देने और मूल्यवर्धित उत्पादों के क्षेत्र में अच्छी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से हेवर्ड, मोंटी, एलिसन और ब्रूनो किस्मों की खेती की जाती है। इनमें हेवर्ड किस्म की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी मांग है।
इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कीवी उत्पादकों को संभावित विदेशी बाजारों से जोड़ना भी है, ताकि भविष्य में होने वाली खेपों के माध्यम से बिक्री के अतिरिक्त माध्यम और किसानों को बेहतर आय के अवसर मिल सकें। उम्मीद है कि इस परीक्षण निर्यात से बाजार की प्रतिक्रिया का आकलन करने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अरुणाचल प्रदेश के कीवी की पहुंच बढ़ाने के लिए जरूरी आवश्यकताओं की पहचान करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय समाचार
गुजरात में 9.08 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगे, 2027 के लक्ष्य का 90 प्रतिशत पूरा

केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत गुजरात में 9.08 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं। इसके साथ ही, मार्च 2027 तक 10 लाख घरों में सोलर सिस्टम लगाने के लक्ष्य का 90 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया गया है।
इन सोलर सिस्टमों की कुल क्षमता 3,408 मेगावाट है। इस योजना के तहत रूफटॉप सोलर क्षमता के मामले में गुजरात देश का अग्रणी राज्य बन गया है।
राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कुल रूफटॉप सोलर क्षमता का 18.21 प्रतिशत हिस्सा है। यह उपलब्धि ऐसे समय में हासिल हुई है, जब राज्य नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और बिजली के पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को तेज कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। वहीं, देश का लक्ष्य 2030 तक अपनी बिजली की 50 प्रतिशत जरूरतें अक्षय ऊर्जा स्रोतों से पूरी करना है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने मार्च 2027 तक 10 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का लक्ष्य तय किया है। घरों की छतों पर सौर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद से राज्य सरकार वित्तीय सहायता और नियामकीय रियायतें प्रदान करती है। छह किलोवाट तक के सिस्टम लगाने वाले उपभोक्ताओं को नियामकीय शुल्क के रूप में 2,950 रुपए की सहायता प्राप्त होती है।
सरकार ने ‘नेटवर्क मजबूत करने के शुल्क’ को भी माफ कर दिया है और ‘नेट मीटरिंग एग्रीमेंट’ की अनिवार्यता को भी हटा दिया है। छोटे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सोलर सिस्टम लगाना और भी सस्ता हो सके, इसके लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी दी गई है।
अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) परिवारों को 2.18 किलोवाट-पीक तक की क्षमता वाले रूफटॉप सोलर सिस्टम लगवाने के लिए निर्धारित लागत का केवल पांच प्रतिशत योगदान देना होगा। अन्य उपभोक्ताओं को 10 प्रतिशत योगदान देना होगा।
इस योजना के तहत केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता और उपभोक्ता के योगदान को घटाने के बाद, तय लागत की बाकी बची राशि का खर्च राज्य सरकार उठाती है। राज्य ने आवासीय उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाना और आसान बनाने के लिए कुछ प्रावधान भी पेश किए हैं।
अपनी सोलर नीति के तहत, घर वाले ‘नेट मीटरिंग’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें ग्रिड से ली गई बिजली और ग्रिड को वापस दी गई अतिरिक्त बिजली, दोनों का हिसाब रखा जाता है।
घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लिए ‘कनेक्टेड लोड’ की कोई सीमा नहीं है। साथ ही, घर वाले अपने सिस्टम से पैदा हुई अतिरिक्त बिजली को बेच भी सकते हैं। सरकार ने बताया कि “घरेलू उपभोक्ताओं को बैंकिंग शुल्क से भी छूट दी गई है।”
रूफटॉप सोलर के अलावा, गुजरात ने पूरे राज्य में काफी बड़ी मात्रा में अक्षय ऊर्जा क्षमता हासिल की है। इस साल 30 सितंबर तक, राज्य की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 55,511.46 मेगावाट थी, जो देश की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता का 18.55 प्रतिशत है।
राज्य की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में सोलर पावर का हिस्सा 36,234.55 मेगावाट है, जो भारत की कुल सोलर क्षमता का 21.2 प्रतिशत है। वहीं, पवन ऊर्जा की क्षमता 17,043.76 मेगावाट है, जो देश की कुल पवन ऊर्जा क्षमता का 28.8 प्रतिशत है।
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