अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका को समझना होगा कि मित्र को कमजोर नहीं करना चाहिये : सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूक्रेन पर हमले के कारण रूस पर लगायी गयी पाबंदियों के बावजूद उससे संबंध बनाये रखने की भारत की नीति को स्पष्ट करते हुये कहा कि यह पड़ोस की सुरक्षा चुनौतियों पर आधारित है और अमेरिका को यह समझना चाहिये कि अगर उसे मित्र चाहिये तो वह कमजोर मित्र नहीं हो सकता है और न ही मित्र को कमजोर करना चाहिये।
वित्त मंत्री ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने विश्व बैंक समूह की स्प्रिंग मीटिंग्स के लिये अमेरिका की अपनी वर्तमान यात्रा के दौरान की गयी बातचीत से यह बात समझी है।
अमेरिका में भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू द्वारा आयोजित रात्रिभोज में उन्होंने कई अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात की, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन और अन्य अधिकारी भी शामिल थे।
अपनी यात्रा के समापन पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सीतारमण ने कहा, भारत निश्चित रूप से एक मित्र बनना चाहता है लेकिन अगर अमेरिका भी एक मित्र चाहता है, तो वह कमजोर मित्र नहीं हो सकता है और मित्र को कमजोर किया भी नहीं जाना चाहिये।
उसने कहा, इसलिये हम निर्णय ले रहे हैं। हम सोच समझकर अपना रूख स्पष्ट कर रहे हैं क्योंकि हमें भौगोलिक स्थिति की वास्तविकताओं को देखते हुये यानी जहां हम हैं, वहां मजबूत होने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि चीन के साथ उत्तरी सीमा पर तनाव है, जो कोविड -19 महामारी के बावजूद जारी है, पाकिस्तान के साथ पश्चिमी सीमा पर लगातार तनावपूर्ण स्थिति है। अफगानिस्तान में आतंकवादी रोधी कार्रवाईयों के लिये भेजे जाने वाले सैन्य उपकरण पड़ोसी देश के रास्ते भारत भेज दिये जाते हैं।
सीतारमण ने कहा, आपका पड़ोस वह है, जो आपके आसपास मौजूद है। आप जब रिश्तों के बारे में बात कर रहे हों तो आपको इसे ध्यान में रखना होगा।
अमेरिका भारत पर लगातार यह दबाव बना रहा है कि वह रूस के हमले के खिलाफ अधिक सख्त रुख अपनाये और उसके साथ अपने व्यापारिक संबंधों, विशेष रूप से ऊर्जा आयात को रोके या कम करे। अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के एक वरिष्ठ अधिकारी ने तो भारत को ‘परिणाम’ भुगतने तक की धमकी दे दी।
भारत ने न तो रूस के हमले की प्रत्यक्ष निंदा की है और न ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसके खिलाफ लाये गये प्रस्तावों के पक्ष में वोट दिया है। हर बार भारत ने रूस के मसले पर खुद को वोटिंग से दूर रखा है।
भारत ने बातचीत के जरिये इस समस्या का हल निकालने का आह्वान किया है। इसके अलावा भारत ने यूक्रेन को मानवीय सहायता भेजी है।
भारत ने हालांकि बूचा में हुये नरसंहार की निंदा की है और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा इसकी स्वतंत्र जांच कराने के आह्वान का समर्थन किया है।
परिणाम भुगतने की धमकी देने के बावजूद अमेरिका का जो बाइडेन प्रशासन रूस को लेकर भारत की स्थिति को समझने की बात करता रहता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का परिणाम शेष देशों की तरह भारत भी भुगत रहा है। युद्ध के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है और भारत भी इसका हिस्सा है। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि यूक्रेन से सूरजमुखी के तेल की आपूर्ति और रूस से उर्वरकों की आपूर्ति की बाधा ऐसी कई चुनौतियों में से एक है।
सीतारमण विश्व व्यापार संगठन द्वारा भारतीय अनाज के निर्यात पर प्रतिबंध हटाने की संभावना को लेकर सबसे अधिक उत्साहित थीं।
उन्होंने कहा, “डब्ल्यूटीओ की निदेशक नाइजीरिया की न्गोजी ओकोंजो-इवेला ने कहा है कि आप इस मुद्दे को उठायें। हम इसे सकारात्मक रूप से देख रहे हैं और उम्मीद है कि इसका हल निकाल लिया जायेगा।”
व्यापार
सोना इस हफ्ते चार हजार रुपए और चांदी आठ हजार रुपए से अधिक सस्ती हुई

सोने और चांदी में इस हफ्ते बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे दोनों कीमती धातुओं का दाम क्रमश: 4,000 रुपए और 8,000 रुपए से अधिक घट गया।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 4,694 रुपए कम होकर 1,54,884 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,59,578 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
22 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,41,874 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,46,173 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,16,163 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,19,684 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
इस हफ्ते 24 कैरेट सोने में सबसे न्यूनतम दाम 2 सितंबर को शाम के सत्र में 1,51,184 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 31 अगस्त को शाम के सत्र में 1,55,835 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया।
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 8,436 रुपए कम होकर 2,35,456 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,43,892 रुपए प्रति किलो था।
इस हफ्ते चांदी में उच्चतम दाम 31 अगस्त को शाम के सत्र में 2,37,199 रुपए प्रति किलो देखा गया। वहीं, न्यूनतम दाम 3 सितंबर को सुबह के सत्र में 2,28,360 रुपए प्रति किलो देखा गया।
आईबीजेए की ओर से दिन में दो बार सुबह और शाम के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों को जारी किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 66 डॉलर प्रति औंस के करीब था।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ना था। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। वहीं, ईरान भी मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इससे बॉन्ड यील्ड, डॉलर और कच्चा तेल भी मजबूत हो गया है।
व्यापार
मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और आईटी में खरीदारी

मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के सत्र में बढ़त के साथ खुला। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 466 अंक या 0.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,619 और निफ्टी 46 अंक या 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,916 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी को बढ़ाने का काम डिफेंस और आईटी ने किया। सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.89 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स थे।
इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी पीएसई भी हरे निशान में थे।
दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी कमोडिटीज लाल निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 63,237 अंक पर करीब सपाट कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 83 अंक या 0.42 प्रतिशत की तेजी के साथ 20,134 पर था।
सेंसेक्स पैक में बजाज फिनसर्व, इंडिगो, ट्रेंट, इन्फोसिस, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, एमएंडएम, आईटीसी, एसबीआई, एचसीएल टेक, एलएंडटी, पावर ग्रिड और टाटा स्टील गेनर्स थे। एक्सिस बैंक, इटरनल, भारती एयरटेल और एचयूएल लूजर्स थे।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार हरे निशान में बंद हुए थे। इस दौरान मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 1.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 1.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
जानकारों ने कहा कि बाजार के लिए मौजूदा समय में घरेलू स्तर पर सकारात्मक और वैश्विक स्तर पर नकारात्मक फैक्टर्स बने हुए हैं। घरेलू स्तर शानदार 7.8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ और निजी निवेश का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है, लेकिन अमेरिका, यूरोप, यूके और जापान में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना वैश्विक बाजारों के लिए एक अहम नकारात्मक कारक बना हुआ है, जिसे लेकर निवेशक सतर्क बने हुए है।
व्यापार
मध्य पूर्व में तनाव से भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद, सेंसेक्स 374 अंक फिसला

मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 373.93 अंक या 0.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,570.35 और निफ्टी 141.35 अंक या 0.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,914.45 पर था।
बाजार में गिरावट व्यापक आधार पर थी। लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 332.90 अंक या 0.53 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,001.60 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 74 अंक या 0.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,812.25 पर था।
बाजार में गिरावट का नेतृत्व ऑटो और आईटी शेयरों में किया। निफ्टी ऑटो 1.79 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 1.75 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 1.25 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 0.81 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.75 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.73 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन 0.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी एनर्जी 0.59 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.54 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.38 प्रतिशत, निफ्टी ऑयलएंडगैस 0.33 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.21 प्रतिशत और निफ्टी इन्फ्रा 0.03 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, टाइटन, ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा और आईटीसी गेनर्स थे। एशियन पेंट्स, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एचसीएल टेक, बीईएल, इन्फोसिस, एसबीआई, इंडिगो, एचयूएल, टीसीएस, टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक, इटरनल, टाटा स्टील और अल्ट्राटेक सीमेंट लूजर्स थे।
बाजार के जानकारों ने कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध फिर से शुरू होने से मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें फिर से 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। यह भारत के साथ वैश्विक बाजारों पर भी दबाव बनाने का काम कर रहा है। इससे ऑटो, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
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