अंतरराष्ट्रीय समाचार
न्यूयॉर्क गवर्नर ने महामारी पर व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया पर उठाए सवाल
व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ मार्क मीडोज का कथन कि ‘देश में महामारी नियंत्रित नहीं होने वाली है’, को लेकर महामारी के प्रति निष्क्रियता अपनाए जाने पर सवाल उठाते हुए न्यूयॉर्क राज्य के गवर्नर एंड्रयू क्युमो ने कहा कि कोविड-19 को हराया जा सकता है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने रविवार को क्युमो के आधिकारिक बयान का हवाला देते हुए कहा, “अमेरिकी आत्मसमर्पण नहीं करते हैं। और उन्होंने तो अभी कोई लड़ाई भी नहीं लड़ी है और न्यूयॉर्क में हमने जो सीखा, वह था कि अगर आप लड़ते हैं, तो आप जीतेंगे जरूर, क्योंकि न्यूयॉर्क भी जीता। अन्य राज्य भी जीते।”
इसके बाद गवर्नर ने ट्वीट में भी कहा, “न्यूयॉर्क में हमने साबित किया कि हम इस वायरस को नियंत्रित कर सकते हैं।”
गौरतलब है कि रविवार सुबह सीएनएन से बात करते हुए मीडोज ने कहा था, “हम महामारी को नियंत्रित नहीं सकते हैं। हम इस तथ्य को नियंत्रित करने जा रहे हैं कि हमें वैक्सीन मिलेगा, चिकित्सा बेहतर होगी।”
उनसे पूछे जाने पर कि देश में महामारी नियंत्रित क्यों नहीं हो रही है, इस पर चीफ ऑफ स्टाफ ने जवाब दिया, “क्योंकि यह फ्लू की तरह एक संक्रामक वायरस है।”
बयान में क्यूमो ने मीडोज की टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि व्हाइट हाउस ने शुरू से ही माना है कि वे वायरस को नियंत्रित नहीं कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, “यह एकमात्र तर्क है, जो नियंत्रित होने के तथ्य से इनकार करता है और यह झूठ है। यदि आपको लगता है कि आप इसे नियंत्रित कर सकते हैं, तो आप इसे नियंत्रित करने का प्रयास करेंगे, यदि आपको विश्वास नहीं है कि आप इसे नियंत्रित कर सकते हैं, तो आप इसके बारे में झूठ ही बोलेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने बिना गोली चलाए आत्मसमर्पण कर दिया। यह किसी अमेरिकी का महान आत्मसमर्पण था।”
उन्होंने कहा, “यदि न्यूयॉर्क वायरस को नियंत्रित नहीं करता, तो ग्राफ ऊपर जाना जारी रहता और हम अपने अस्पताल में सैकड़ों हजारों लोगों को देखते।”
उन्होंने कहा, “ग्राफ को समतल करते हुए, वायरस को नियंत्रित किया जा रहा है।”
गवर्नर ने बयान में आगे कहा, “यही उन्होंने किया और पहले ही आत्मसमर्पण के कारण 217,000 लोग मारे गए।”
नेचर मेडिसिन जर्नल में 24 अक्टूबर को प्रकाशित एक अध्ययन में वाशिंगटन विश्वविद्यालय के हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन विश्वविद्यालय के शोधकतार्ओं ने कहा कि फरवरी 2021 के अंत तक अमेरिका में कोविड-19 से ज्यादा से ज्यादा 5 लाख से अधिक लोगों की जान जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
यूक्रेन के दक्षिणी शहर जापोरिज्जिया पर बड़ा रूसी हमला, 13 की मौत
कीव, 9 जनवरी। यूक्रेन के दक्षिणी शहर जापोरिज्जिया पर रूस ने एक बड़ा मिसाइल हमला किया। यूक्रेन के अधिकारियों के मुताबिक इस हमले में 13 लोग मारे गए और 63 अन्य घायल हो गए।
जापोरिज्जिया के क्षेत्रीय गवर्नर इवान फेडोरोव ने इस बड़े हमले की जानकारी देते हुए कहा कि स्थानीय समयानुसार शाम करीब 4 बजे शहर में दो बम गिरे, जिससे औद्योगिक बुनियादी ढांचे और आवासीय इमारतों को काफी नुकसान पहुंचा है।
फेडोरोव ने कहा कि घायलों में से चार की हालत गंभीर है।
स्टेट सर्विस फॉर इमरजेंसी ने बताया कि इस हमले में चार प्रशासनिक इमारतें और 27 वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि हमले में 13 लोगों के मारे जाने की खबर है।
जेलेंस्की ने इस हमले की एक वीडियो शेयर की, जिसमें हमले की भयावह तस्वीरें देखी जा सकती हैं।
एक्स पर एक वीडियो शेयर करने के साथ जेलेंस्की ने कहा, “रूसियों ने जापोरिज्जिया पर बम बरसाए। यह शहर पर जानबूझकर किया गया हमला था। अब तक इस हमले में कई लोगों के घायल होने की खबरें मिल रही हैं। सभी घायलों को आवश्यक सहायता मुहैया कराई जा रही है।”
उन्होंने दुनिया के बड़े देशों से अपील भी की। कहा, “पीड़ित परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है। यह बहुत दुख की बात है कि इस हमले में मरने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। एक शहर पर हवाई बमबारी से ज्यादा क्रूर कुछ नहीं है, यह जानते हुए कि आम नागरिक इसका निशाना बनेंगे। दुनिया रूस पर दबाव बनाए कि वो ऐसा न करे। केवल ताकत के जरिए ही इस तरह के युद्ध को स्थायी शांति के साथ समाप्त किया जा सकता है।”
यूक्रेन के प्रॉसिक्यूटर जनरल कार्यालय ने हमले में हुए नुकसान का ब्योरा दिया।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले में यात्रियों को ले जा रही एक ट्राम और एक बस को काफी नुकसान पहुंचा है।
गवर्नर इवान फेडोरोव ने कहा कि रूसी सेना ने दोपहर में एक आवासीय क्षेत्र में बम दागे और हमले में दो आवासीय इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं।
इससे पहले बुधवार को यूक्रेनी सेना ने बताया कि उसने रूस में एक ईंधन भंडारण डिपो को निशाना बनाया है।
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ग्रीस में एचएमपीवी ने दी दस्तक, 71 साल का शख्स पीड़ित
एथेंस, 9 जनवरी। ग्रीस में 71 वर्षीय एक व्यक्ति में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है।
मरीज को निमोनिया तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याएं थीं। मरीज की उत्तरी बंदरगाह शहर थेसालोनिकी में गहन देखभाल की जा रही है। वहीं राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संगठन ने चिकित्सा कर्मचारियों को कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करने और सख्त स्वच्छता उपाय अपनाने की सलाह दी है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, एथेंस के नेशनल एंड कपोडिस्ट्रियन विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर गिकिकास मैगियोर्किनिस ने जनता को आश्वस्त किया कि इसको लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यह वायरस पहले से ही मौजूद है और खतरनाक नहीं है।
मंगलवार को इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्री बुदी गुनादी सादिकिन ने घोषणा की थी कि देश में श्वसन वायरस एचएमपीवी का संक्रमण पाया गया है, लेकिन उन्होंने जनता को आश्वस्त करते किया कि यह बीमारी खतरनाक नहीं है।
सादिकिन ने मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर कहा, “हमारी रिपोर्ट से पता चलता है कि इससे कई बच्चे संक्रमित हुए हैं। हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। हालांकि, यह कोई नई बीमारी नहीं है। यह 2001 से इंडोनेशिया में मौजूद है और हमने इस वायरस के कारण कोई गंभीर प्रभाव नहीं देखा है।”
उन्होंने कहा कि इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही हैं तथा उन्होंने जनता से स्वस्थ एवं स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “यदि किसी व्यक्ति की इम्यूनिटी कमजोर है तो उसे फ्लू हो सकता है। हालांकि, हमारा शरीर इस वायरस से निपटने में सक्षम है। हमें पर्याप्त आराम करके और नियमित शारीरिक व्यायाम करके अपनी इम्यूनिटी को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता है।”
2001 में खोजा गया एचएमपीवी, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (आरएसवी) के साथ न्यूमोविरिडे परिवार का सदस्य है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार आणविक नैदानिक परीक्षण (मॉलिक्युलर डायग्नोस्टिक टेस्ट) के व्यापक उपयोग से ऊपरी और निचले श्वसन संक्रमण के एक महत्वपूर्ण कारण के रूप में एचएमपीवी की पहचान हुई है।
सीडीसी के अनुसार एचएमपीवी सभी आयु वर्ग के लोगों में श्वसन रोग का कारण बन सकता है। यह ज्यादातर बच्चों, वृद्धों और कमजोर इम्यूनिटी वालों को निशाना बनाता है।
सीडीसी के अनुसार, एचएमपीवी से जुड़े सामान्य लक्षणों में खांसी, बुखार, नाक बंद होना और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं।
कोविड-19 और फ्लू के विपरीत, एचएमपीवी के लिए कोई टीका या इसके उपचार के लिए कोई एंटीवायरल दवा नहीं है। इसके बजाय, डॉक्टर गंभीर रूप से बीमार की देखभाल उनके लक्षणों को देखकर करते है।
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झूठी खबरें फैलाने वाला पाकिस्तान अब खुद फेक न्यूज से डरा, 2 अरब रुपये करेगा खर्च
इस्लामाबाद, 7 जनवरी। भारत के खिलाफ लगातार झूठी खबरें और प्रचार चलाने वाले पाकिस्तान को अब खुद फेक न्यूज का डर सता रहा है। इसका मुकाबल करने के लिए सरकार ने भारी भरकम रकम भी जारी करने का फैसला किया है।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संघीय सरकार ने राज्य संस्थाओं को निशाना बनाकर फर्जी खबरों और गलत सूचना अभियानों के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए 2 अरब रुपये आवंटित किए हैं।
वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब की अध्यक्षता में आर्थिक समन्वय समिति [ईसीसी] की बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया। इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को कमजोर करने के लिए जानबूझकर फैलाई जा रही गलत सूचनाओं का मुकाबला करने की कोशिशों को मजबूत करना है।
आवंटित बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, [1.945 बिलियन रुपये], रक्षा मंत्रालय को जाएगा। बताया जा रहा है कि इस कदम को पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का भी समर्थन हासिल है।
रिपोर्ट के मुताबिक विस्तृत ब्रीफिंग में ईसीसी को बताया गया कि सेना की पब्लिस रिलेशंस विंग, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस [आईएसपीआर] गलत सूचनाओं से निपटने में सबसे आगे है। हालांकि, गलत सूचना फैलाने की रणनीति के लगातार विकसित होने की वजह से आईएसपीआर की क्षमताओं को बढ़ाने की जरुरत है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार के इस फैसले ने पाकिस्तान के नागरिकों को और अधिक नाराज कर दिया है जो रिकॉर्ड-उच्च मुद्रास्फीति, गरीबी और बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। बता दें पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और उसकी सारी उम्मीदें विदेशी कर्ज पर ही टिकी हैं।
आलोचकों ने स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे तत्काल घरेलू संकटों को संबोधित करने के बजाय नैरेटिव कंट्रोल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सरकार की आलोचना की है।
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