राजनीति
न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर अन्नदाता को गुमराह होने की जरूरत नहीं
कोरोना महामारी के संकट के समय पूरे देश का पेट भरने की शक्ति साबित करने वाले अन्नदाता को उनकी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर गुमराह होने की जरूरत नहीं है। मोदी सरकार के हर फैसले में किसानों का हित सर्वोपरि होता है, क्योंकि सरकार का मानना है कि किसान समृद्ध होगा, तो देश समृद्ध होगा। इसलिए एमएसपी को हटाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद एमएसपी पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया, जिससे किसानों को फसलों की लागत पर 50 फीसदी से ज्यादा लाभ के साथ एमएसपी मिलना सुनिश्चित हुआ है।
मोदी सरकार के प्रयासों का ही नतीजा है कि कोरोना काल में भी एमएसपी पर गेहूं की रिकॉर्ड खरीद हुई है। इसके अलावा दलहनी और तिलहनी फसलों की भी एमएसपी पर खरीद कर सरकार ने किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाया। अबकी बार खरीफ सीजन में तय समय से पहले ही धान की खरीद शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ फसलों की एमएसपी पर खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है।
किसानों को उनकी फसलों का बेहतर व लाभकारी दाम मिले इसके लिए सरकार प्रयासरत है और इसी मकसद से नये कानून के जरिए कृषि क्षेत्र में सुधार के कार्यक्रमों को लागू करने का मार्ग सुगम बनाया गया है। किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर चल रही यह सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी, जो अन्नदाता की समृद्धि के मार्ग में बाधक बने।
किसानों को आर्थिक आजादी दिलाने और उनकी समृद्धि की कामना से मोदी सरकार ने कोरोना काल में कृषि क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव के मकसद से तीन अहम फैसले लेते हुए तीन अध्यादेश लाए, जिन्हें संसद के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया गया और संसद की मुहर लगने के बाद महामाहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हस्ताक्षर के साथ अब ये कानून बन गए हैं।
इससे कृषि उत्पादों के विपणन के लिये न सिर्फ एक देश एक बाजार का वर्षों से संजोये सपने को मोदी सरकार ने साकार किया है, बल्कि कृषि को उद्योग का दर्जा दिलाने की दिशा में मार्ग प्रशस्त किया है। किसान अब अपनी उपज का दाम खुद तय कर पायेंगे। ऐसे में अब उन्हें एमएसपी को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
वर्ष 2014-15 में गेहूं, ज्वार, मूंग, सूर्यमुखी, राम तिल और नारियल के एमएसपी से तुलना करें तो 2019-20 में इन फसलों के एमएसपी में 525 रुपये से लेकर 4,410 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा हुआ है। इसी प्रकार, अन्य फसलों के एमएसपी में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। एमएसपी में यह वृद्धि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान हई है।
कोरोना काल में केंद्र सरकार के प्रयासों से रबी सीजन की फसलों की खरीद की समुचित व्यवस्था करने के लिए खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई, जिससे गेहूं की रिकॉर्ड खरीद हुई और अन्य फसलों की खरीद के परिमाण में भारी इजाफा हुआ। देशभर में सरकारी एजेंसियों ने बीते रबी खरीद सीजन में 389.76 लाख टन गेहूं सीधे किसानों से खरीदा, जोकि अब तक का रिकॉर्ड है, इसके लिए किसानों को 75,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। धान की खरीद में 2014-15 के मुकाबले 2019 में करीब 74 फीसदी का इजाफा हुआ है।
केंद्र सरकार निरंतर किसानों के हित में कार्य कर रही है। इस साल 2020 में गेहूं, धान, दलहन और तिलहन फसलों को मिलाकर किसानों को 1 लाख 13,000 करोड़ रुपये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के रूप में भुगतान किया गया है। यह भुगतान राशि पिछले वर्ष की तुलना में 31 फीसदी ज्यादा है। पिछले वर्ष कुल 86.8 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था।
फसलों का एमएसपी किसानों को दिलाने की आवश्यकता तब होती है, जब किसानों को उनके उत्पादों का उचित दाम नहीं मिलता है। लेकिन जब किसान खुद अपने उत्पादों का मूल्य तय करेगा तो फिर उन्हें एमएसपी की चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाने वाले एमएसपी के मसले पर किसानों को गुमराह कर अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन को बचाने की जुगत में हैं। इसलिए किसानों को गुमराह होने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार ने कृषि से जुड़े जो तीन कानून बनाए हैं, उनका एक ही मकसद है कि किसानों को उनके उत्पादों का अधिकतम लाभकारी दाम मिले जिससे उनके जीवन में खुशहाली आए।
देश में कोरोना वायरस संक्रमण की विषम परिस्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने जब प्रभावी कदम उठाया था, उस समय देश में रबी फसलों की कटाई चल रही थी और ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई का सीजन था। इसलिए, सरकार ने फसलों की बुवाई कटाई, परिवहन, विपणन को पूर्णबंद से मुक्त रखा। लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में कृषि उपज विपणन समिति (एमएसपी) द्वारा संचालित जींस मंडियां बंद रहने से किसानों की कठिनाइयां बढ़ गई थीं। वे अपनी फसल बेच नहीं पा रहे थे। लिहाजा, सरकार ने अध्यादेश के जरिए किसानों को देश में कहीं भी और किसी को भी फसल बेचने की आजादी देते हुए, एक देश एक कृषि उत्पाद बाजार के उनके सपने को साकार किया।
देश में जब फसलों के भंडारण, परिवहन, प्रसंस्कारण समेत मूल्यवर्धन श्रंखला दुरुस्त होगी तो किसानों को फसलों का बेहतर दाम मिलेगा। आज सिर्फ 22 अनुसूचित फसलों के लिए एमएसपी का निर्धारण किया जाता है, जबकि सरकार चाहती है कि तमाम कृषि एवं बागवानी फसलों का किसानों को लाभकारी मूल्य मिले। इसी मकसद से दशकों पुराने कानून (आवश्यरक वस्तुय अधिनियम, 1955) में संशोधन किया गया है और दो ऐसे कानून बनाये गये हैं, जिससे किसान बेरोक-टोक अपनी फसल देश में कहीं भी बेच सकता है। साथ ही किसानों को खेती करने से पहले ही दाम मिलने का भरोसा होगा, इसके लिए अनुबंध पर खेती करने का प्रावधान किया गया है। इसमें बुवाई के वक्त ही किसानों को फसल की तय कीमत मिलने का आश्वासन दिया जाएगा और कटाई के वक्त कीमत ज्यादा होने पर उसके लाभ से भी किसान वंचित नहीं होंगे। यह सिर्फ फसल का अनुबंध होगा, न कि किसानों की जमीन का।
आवश्यक वस्तु अधिनियम,1955 में संशोधन करके अनाज, दलहन, तिलहन व खाद्य तेल समेत आलू और प्याज, टमाटर को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया गया है। इन कृषि उत्पादों के भंडारण प्रसंस्करण व मूल्यवर्धन के लिए अब निजी निवेशक आगे आएंगे, जिससे किसानों को इन उत्पादों का बेहतर व लाभकारी मूल्य मिलेगा। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि बागवानी उत्पादों की खेती जिन क्षेत्रों में होती है, वहां की मंडियों में कीमतें कम होती हैं, जबकि उपभोक्ता बाजार में फल व सब्जियां ऊंचे भाव पर बिकती हैं। दरअसल उत्पादक से उपभोक्ता के बीच की जो कड़ियां हैं, उनमें कई सारे बिचैलिये होते हैं, जो मोटा मुनाफा कमाते हैं, जबकि किसानों को कम दाम मिलता है। सरकार ने इन बिचैलियों को सप्लाई चेन से हटाने के लिए ही ये कानूनी बदलाव किए हैं, जिसके बाद अब किसान सीधे थोक व्यापारी, फुटकर व्यापारी व प्रशंस्करणकर्ताओं को अपने उत्पाद बेच सकते हैं। इससे किसानों को उनकी फसलों का उचित व लाभकारी दाम दिलाना सुनिश्चित होगा।
कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) कानून, 2020 मोदी सरकार का एक ऐतिहासिक फैसला है। इससे किसानों को देशभर में कहीं भी और किसी को भी अपनी फसल बेचने की आजादी मिली है, पहले ऐसा नहीं था। किसानों को कृषि उपज मंडी समिति कानून के तहत संचालित मंडियों में आढ़तियों और व्यापारियों का मोहताज बने रहना पड़ता था। उनकी फसलों की बोली लगायी जाती थी। क्या किसी औद्योगिक उत्पाद की बिक्री के लिये उसकी बोली लगायी जाती है? शायद नहीं। क्योंकि औद्योगिक उत्पादों के दाम तो पहले से ही तय होते हैं और यह दाम तय करने का अधिकार उद्योगपतियों के हाथों में होता है। कंपनियां अपने उत्पादों के दाम तो फिर किसानों के उत्पादों का दाम कोई आढ़ती या बिचैलिया क्यों करें? किसानों की इस विवशता को आजादी के बाद अगर किसी ने समझा तो, वह देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हैं। किसानों के दर्द को महसूस करने वाले मोदी जी ने सत्ता में आने के बाद कृषि क्षेत्र की उन्नति और किसानों की समृद्धि के लिये एक के बाद एक किसान हितैषी कई फैसले लिये हैं। कृषि और सम्बद्ध क्षेत्र में सुधार के लिये लाये गये नये कानून किसानों के हक में हैं। इसे कॉरपोरेट और निजी पूंजीपतियों को फायदा दिलाने की दिशा में कदम बताने वाले दरअसल इसे मुद्दा बनाकर राजनीति करना चाहते हैं, क्योंकि उनके लिये राजनीति करने का कोई मसला नहीं बचा है। जो लोग यह कह रहे हैं कि मूल्य आश्वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा कानून 2020 से कॉरपोरेट को फायदा होगा, उनको मालूम होना चाहिए कि मोदी सरकार ने देश में दस हजार किसान उत्पादन संगठन (एफपीओ) बनाने का लक्ष्य रखा है।
दरअसल उत्पादन से लेकर बाजार तक किसानों की हिस्सेदारी होगी। मतलब उत्पादक विक्रेता भी बनेंगे। कृषि क्षेत्र में निसंदेह इन फैसलों से निजी निवेश, यहां तक कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा, लेकिन इसका सबसे ज्यादा फायदा किसानों को होगा।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में ही स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू कर विभिन्न फसलों के एमएसपी में बढ़ोतरी की गई। एमएसपी के निर्धारण में डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के फार्मूले का अनुपालन किया जा रहा है। इस सरकार ने स्वामीनाथन समिति की 201 सिफारिशों में से 200 सिफारिशों को लागू किया है, जिसका वर्षों से इंतजार किया जा रहा था। आज जो लोग एमएसपी को लेकर किसानों को गुमराह कर रहे हैं दरअसल, उनकी ही सरकारों ने कभी स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने में दिलचस्पी नहीं दिखायी। इसलिए एमएसपी को लेकर को गुमराह होने की जरूरत नहीं है। एसएसपी हमेशा रहेगा।
(लेखक केंद्र सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री हैं और इस आलेख में उनका निजी विचार है)
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा और जयशंकर की बैठक, द्विपक्षीय संबंधों और भू-राजनीतिक स्थिति पर हुई चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-ब्राजील संबंधों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र (यूएन), जी20 और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) जैसे मंचों पर आपसी सहयोग पर चर्चा की।
बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने मौजूदा वैश्विक राजनीतिक स्थिति और संवाद तथा कूटनीति को आगे बढ़ाने में ब्रिक्स 2026 की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया।
एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “ब्रिक्स इंडिया 2026 के आज नई दिल्ली में शुरू होने के अवसर पर ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा से मिलकर खुशी हुई। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की, जिसमें व्यापार और निवेश, रक्षा, ऊर्जा, कृषि तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के विषय शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र, जी20 और आईएमओ सहित विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर हमारे सहयोग पर भी बात हुई। साथ ही मौजूदा वैश्विक हालात और संवाद व कूटनीति को बढ़ावा देने में ब्रिक्स 2026 के महत्व पर विचारों का आदान-प्रदान किया।”
माउरो विएरा गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे थे। वे 12-13 सितंबर को भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं।
उनके स्वागत में विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, “18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा का हार्दिक स्वागत है। भारत और ब्राजील के बीच लंबे समय से मजबूत दोस्ती रही है और ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए दोनों देशों की प्रतिबद्धता भी मजबूत है।”
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों, साझेदार देशों और विशेष आमंत्रित देशों के नेता हिस्सा लेंगे।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों, सहयोगी देशों और आउटरीच आमंत्रित देशों के नेता एक साथ आएंगे। ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ब्रिक्स के सहयोगी देश हैं: बेलारूस, क्यूबा, बोलीविया, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।
इससे पहले फरवरी में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा भारत के राजकीय दौरे पर आए थे। उस दौरान उन्होंने दूसरे एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लिया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक की थी।
पीएम मोदी और लूला के बीच हुई चर्चा में व्यापार, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, निवेश, डिजिटल तकनीक, ग्लोबल साउथ और अन्य बहुपक्षीय मुद्दों पर भारत-ब्राजील साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया था।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली के मंडावली में चाकू से घोंपकर युवक की हत्या

पूर्वी दिल्ली के मंडावली थाना क्षेत्र में चाकूबाजी की एक सनसनीखेज वारदात ने इलाके को दहला दिया। वंश डेढा नामक युवक की कथित तौर पर चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, वारदात गुरुवार रात करीब आठ बजे की है।
सूत्रों के मुताबिक हमलावरों ने वंश पर एक नहीं, बल्कि कई बार चाकू से वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद घायल वंश को तत्काल नजदीकी मैक्स अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
फिलहाल मंडावली थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने वारदात के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। हत्या की असली वजह, हमलावरों की संख्या और वारदात में शामिल आरोपियों की पहचान पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इसके पहले 6 सितंबर को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, 6 सितंबर की रात करीब 10:15 बजे जेपीसी अस्पताल से सूचना मिली कि चाकू लगने से घायल एक युवक को अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान साहिल (19 वर्ष) पुत्र फहीम निवासी अमरोहा के रूप में हुई थी। मृतक चौहान बांगर की गली नंबर-4 स्थित एक पाउडर कोटिंग फैक्ट्री में काम करता था और वहीं रहता भी था।
प्रारंभिक जांच में पता चला कि मृतक पर उसी फैक्ट्री में काम करने वाले उसके एक सहकर्मी ने पर चाकू से हमला किया था। मामले में 7 सितंबर को जाफराबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जांच करते हुए अहम सुराग जुटाए। इसके बाद करीब चार घंटे के भीतर मुख्य आरोपी साहिल (21 वर्ष) निवासी गौतमपुरी और उसके 15 वर्षीय नाबालिग साथी को पकड़ लिया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया था।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में 80 लाख से ज्यादा एचपीवी टीकाकरण हुए पूरे : स्वास्थ्य मंत्रालय

भारत ने हेल्थ सेक्टर में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। देश में 80 लाख से ज्यादा एचपीवी टीकाकरण पूरे हो चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी एक्स पर पोस्ट के जरिए दी है।
मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “भारत ने 80 लाख एचपीवी टीकाकरण का आंकड़ा पार कर लिया है, जो प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को मजबूत करने और एचपीवी संक्रमण और इससे जुड़े कैंसर से सुरक्षा को आगे बढ़ाने में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। हर टीकाकरण के साथ, भारत अपनी बेटियों के लिए एक स्वस्थ, कैंसर-मुक्त भविष्य की ओर एक और कदम बढ़ा रहा है।”
एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन एक सुरक्षित और बेहद असरदार टीका है। यह उन संक्रमणों को रोकता है जो सर्वाइकल कैंसर, एनल और गले के कैंसर के साथ-साथ जननांग में मस्से का कारण बनते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह वैक्सीन हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन से बचाती है, जो 90 प्रतिशत तक सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह लंबे समय तक सुरक्षा देती है और कैंसर से पहले होने वाले सेल बदलावों को रोकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन सबसे ज्यादा असरदार 9 से 14 साल की उम्र के लिए यह सबसे अच्छी मानी जाती है। इस उम्र में आमतौर पर 2 डोज की जरूरत होती है। भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत सिंगल-डोज अप्रोच भी अपनाई जा रही है।
वहीं, 15 से 26 साल और कुछ वयस्कों के लिए 45 साल तक के लोगों को कैच-अप के तौर पर 3 डोज दी जाती है, जो छह महीने के अंदर पूरी की जाती है। बड़ी उम्र के टीनएजर्स और वयस्कों को भी इसका फायदा मिलता है, हालांकि सबसे अच्छा असर वायरस के संपर्क में आने से पहले होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ग्लोबल स्तर पर व्यापक निगरानी से यह साबित हुआ है कि यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे कोई लॉन्ग टर्म हेल्थ प्रॉब्लम नहीं होती। इसके कुछ सामान्य हल्के साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, लालिमा या सूजन, हल्का बुखार, सिरदर्द या थकान। ये कुछ समय में खुद ठीक हो जाते हैं।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
