राष्ट्रीय
कैबिनेट ने सभी जरुरी रबी फसलों के लिए बढ़ाया न्यूनतम समर्थन मूल्य
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने बुधवार को रबी विपणन सीजन (आरएमएस) 2022-23 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में वृद्धि को मंजूरी दे दी, जिसका उद्देश्य तिलहन, दलहन और मोटे अनाज के पक्ष में एमएसपी को फिर से संगठित करना है। कैबिनेट की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि किसानों को इन फसलों के तहत बड़े क्षेत्र में भेजने और मांग-आपूर्ति असंतुलन को ठीक करने के लिए सर्वोत्तम तकनीकों और कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए ऐसा किया गया है।
सरकार ने किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए आरएमएस 2022-23 के लिए रबी फसलों के एमएसपी बढ़ाई है। मसूर (मसूर), रेपसीड और सरसों (प्रत्येक 400 रुपये प्रति क्विंटल) के लिए पिछले वर्ष की तुलना में एमएसपी में सबसे अधिक पूर्ण वृद्धि की सिफारिश की गई है, इसके बाद चने (130 रुपये प्रति क्विंटल) की जगह है।
कुसुम के मामले में पिछले साल की तुलना में 114 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। अंतर पारिश्रमिक का उद्देश्य फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।
आरएमएस 2022-23 के लिए रबी फसलों के लिए एमएसपी में वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के अनुरूप है, जिसमें एमएसपी को उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर तय करने की घोषणा की गई है, जिसका लक्ष्य किसानों के लिए उचित पारिश्रमिक है।
कैबिनेट विज्ञप्ति में कहा गया है, “किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर अपेक्षित रिटर्न गेहूं और रेपसीड और सरसों (प्रत्येक में 100 प्रतिशत) के मामले में सबसे अधिक होने का अनुमान है, इसके बाद दाल (79 प्रतिशत), चना (74 प्रतिशत), जौ (60 प्रतिशत) और कुसुम (50 प्रतिशत) का स्थान है।”
इसके अतिरिक्त, खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन-तेल पाम (एनएमईओ-ओपी), सरकार द्वारा हाल ही में घोषित केंद्र प्रायोजित योजना, खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात निर्भरता को कम करने में मदद करेगी।
विज्ञप्ति में कहा गया है, “11,040 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ, यह योजना न केवल क्षेत्र के विस्तार और उत्पादकता में सहायता करेगी, बल्कि किसानों को उनकी आय और अतिरिक्त रोजगार के सृजन से भी लाभान्वित करेगी।”
2018 में सरकार द्वारा घोषित अम्ब्रेला योजना, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) किसानों को उनकी उपज के लिए पारिश्रमिक रिटर्न प्रदान करने में सहायता करेगी।
इस योजना में तीन उप-योजनाएं शामिल हैं, अर्थात, मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस), मूल्य कमी भुगतान योजना (पीडीपीएस) और निजी खरीद और स्टॉकिस्ट योजना (पीपीएसएस) शामिल हैं।
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नीट यूजी और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से जुड़े मुद्दों पर संसदीय स्थायी समिति की बैठक

नई दिल्ली, 1 जून: नीट-यूजी परीक्षा व सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर संसदीय स्थायी समिति वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल कर रही है। नीट-यूजी परीक्षा के विषय पर, सोमवार को हो रही समिति की बैठक में विमर्श किया जा रहा है। सोमवार को यहां शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव और नेशनल एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक को समिति के समक्ष जवाब देने के लिए बुलाया गया है।
समिति देश की प्रमुख प्रवेश एवं बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रही है। मंगलवार को कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी। संसद भवन एनेक्सी परिसर में शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति की यह महत्वपूर्ण बैठक शुरू हुई है।
बैठक के एजेंडे में कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) बनाम पारंपरिक पेन-एंड-पेपर परीक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर चर्चा शामिल है। इसके साथ ही नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों, परीक्षा संचालन की पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्र प्रबंधन और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।
बैठक में विशेष रूप से नीट-यूजी परीक्षा में कथित प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं और उससे जुड़े विवादों पर सवाल किए जाएंगे। परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर पड़े प्रभाव को लेकर एनटीए और स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों से जवाब मांगे जा सकते हैं। समिति इस बात की भी समीक्षा कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
गौरतलब है कि इस वर्ष नीट-यूजी के प्रश्न लीक होने की वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। अब इसकी पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। पुनर्परीक्षा के निर्णय, उसकी आवश्यकता, परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपाय तथा प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी समिति की चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
संसदीय दस्तावेजों के अनुसार, बैठक के पहले सत्र में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों (2025-26) से संबंधित रिपोर्टों पर सरकार की ओर से की गई कार्रवाई की समीक्षा है। इसके बाद शुरू हुए दूसरे सत्र में शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और एनटीए के वरिष्ठ अधिकारियों से परीक्षा प्रणाली और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाने हैं।
समिति की अगली बैठक 2 जून को होगी, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और सीबीएसई अध्यक्ष शामिल होंगे। बैठक में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के उपयोग और उससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की जाएगी।
ओएसएम के तहत उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया जाता है, लेकिन छात्रों और शिक्षकों ने स्कैन की गुणवत्ता, आरेखों के मूल्यांकन और तकनीकी समस्याओं जैसे मुद्दों पर चिंता जताई है। इसके अलावा, कक्षा 9 और 10 में त्रिभाषा सूत्र के क्रियान्वयन की स्थिति और उसके प्रभावों की भी समीक्षा की जाएगी। संसदीय स्थायी समिति की ये बैठकें देश की परीक्षा व्यवस्था, प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता और शिक्षा प्रणाली में सुधार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
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उत्तराखंड: सीआईएसएफ ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए किया मॉक ड्रिल

तपोवन, 1 जून: उत्तराखंड के तपोवन में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने सोमवार को मॉक ड्रिल किया। इसमें आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्टेट फायर सर्विसेज़, लोकल पुलिस, बीआरओ, एनटीपीसी, आईबी, एलआईए, एसडीएम ऑफिस, एचसीसी और मेडिकल टीमों ने भी हिस्सा लिया।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मॉक ड्रिल का आयोजन प्रमुख रूप से बादल फटने और बाढ़ की स्थिति में कैसे रेस्क्यू ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया जाए, इसके लिए अभ्यास करना था। इस मॉक ड्रिल से पहले ही पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई थी, जिसके आधार पर सबकुछ अंजाम दिया गया। मॉक ड्रिल के दौरान यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि कुछ भी रूपरेखा से परे नहीं हो।
वहीं, मॉक ड्रिल समाप्त होने के बाद इसे सफल बताया जा रहा है और साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि इससे हमें आने वाले दिनों में किसी भी प्रकार की आपदाग्रस्त स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी। ध्यान देने वाली बात है कि इस मॉक ड्रिल का आयोजन करने से पहले इसकी रूपरेखा पहले ही निर्धारित कर ली गई थी।
वहीं, इस मॉक ड्रिल के आयोजन का एक मकसद यह भी था कि सुरक्षाकर्मियों की मौजूदा कार्यकुशलता का आकलन किया जा सके। इस मॉक ड्रिल से यह भी पता चल गया कि अगर किसी कारणवश हमें किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो उससे निपटने के लिए हमारा मौजूदा सुरक्षा दस्ता कितना कुशल और सक्षम है। इसी देखते हुए इस मॉक ड्रिल को काफी सार्थक माना जा रहा है।
साथ ही, कई बार यह भी देखने को मिला है कि तालमेल के अभाव में रेस्क्यू ऑपरेशन जैसे संवेदनशील प्रक्रियाओं को संपन्न करने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में इस तरह के मॉक ड्रिल को काफी उपयोगी माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस मॉक ड्रिल के बाद अगर अब किसी भी प्रकार की खामियां सामने आई होंगी, तो उसे पुन: दुरूस्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
बता दें कि उत्तराखंड प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से हमेशा से ही संवेदनशील सूबों की फेहरिस्त में शुमार रहा है। ऐसी स्थिति में सीआईएसएफ के इस कदम को काफी माना जा रहा है। \
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नीट परीक्षा रद्द, सीबीआई करेगी जांच, जल्द होगा नई परीक्षा की डेट का ऐलान

नई दिल्ली, 12 मई। देश भर में आयोजित की गई मेडिकल की नीट यूजी परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। यह परीक्षा एमबीबीएस में दाखिले के लिए थी। मंगलवार को यह जानकारी साझा की गई।
परीक्षा आयोजित करने वाले संस्थान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि 3 मई को आयोजित की गई नीट परीक्षा रद्द कर दी गई है। अब यह परीक्षाएं दोबारा से आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है।
गौरतलब है कि नीट परीक्षा में पूछे गए कई प्रश्न परीक्षा होने से पहले ही लीक होने की बातें सामने आई थी। अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई द्वारा की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी परीक्षा से जुड़े सारे दस्तावेज एवं अन्य जानकारियां सीबीआई के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने यह बड़ा फैसला लेते हुए 3 मई 2026 को आयोजित नीट (यूजी) 2026 परीक्षा को रद्द करने और परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा की है।
यह परीक्षा 3 मई रविवार को देशभर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में इस वर्ष लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। एजेंसी ने कहा कि यह निर्णय भारत सरकार की मंजूरी के बाद लिया गया है। एजेंसी के अनुसार, 8 मई 2026 को परीक्षा से जुड़े मामलों को स्वतंत्र जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया था। केंद्रीय एजेंसियों ने इस संबंध में जानकारी साझा की थी।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों व कानून प्रवर्तन संस्थाओं से प्राप्त जांच रिपोर्टों तथा तथ्यों की समीक्षा की गई है। प्राप्त रिपोर्ट व सूचनाओं और निष्कर्षों के आधार पर यह पाया गया कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को बरकरार रखना उचित नहीं होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने बताया कि मौजूदा हालात को देखते हुए नीट की परीक्षा दोबारा करवाना अनिवार्य हो गया है। राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा रद्द की गई है। इसलिए अब विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह परीक्षा दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का कहना है कि दोबारा आयोजित की जाने वाली नीट परीक्षा की नई तिथियां और नए प्रवेश पत्र जारी करने का कार्यक्रम जल्द ही आधिकारिक माध्यमों से घोषित किया जाएगा। भारत सरकार ने पूरे मामले की व्यापक जांच के लिए इस प्रकरण को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीई) को सौंपने का भी निर्णय लिया है। एजेंसी ने कहा कि वह जांच एजेंसी को सभी रिकॉर्ड, दस्तावेज और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने यह माना कि परीक्षा दोबारा कराने से छात्रों और उनके परिवारों को वास्तविक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन एजेंसी के अनुसार परीक्षा प्रणाली पर लोगों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने मंगलवार को इस विषय में जानकारी देते हुए कहा कि यदि यह कदम नहीं उठाया जाता तो राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को अधिक गंभीर और दीर्घकालिक नुकसान पहुंच सकता था।
इसके साथ ही एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मई 2026 चक्र में छात्रों द्वारा किया गया पंजीकरण, उम्मीदवार विवरण और चुने गए परीक्षा केंद्र पुनर्परीक्षा में स्वत मान्य रहेंगे। जिन छात्रों ने नीट परीक्षा के लिए आवेदन किया था ऐसे छात्रों को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले आवेदन कर चुके या परीक्षा में शामिल हो चुके छात्रों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क भी नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा पहले जमा की गई परीक्षा फीस वापस की जाएगी।
पुनर्परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी अपने आंतरिक संसाधनों से आयोजित करेगी। एजेंसी ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट खबरों से बचें। छात्रों की सहायता के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। अभ्यर्थी 011-40759000 और 011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं।
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