अंतरराष्ट्रीय समाचार
व्हाइट हाउस में मनाया गया मदर्स डे : ट्रंप ने शोक संतप्त माताओं को किया सम्मानित, फैमिली पॉलिसी पर दिया जोर
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मदर्स डे से पहले व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम में शोक संतप्त माताओं को सम्मान दिया। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने सीमा सुरक्षा, ड्रग नियंत्रण और परिवार-केंद्रित नीतियों पर अपनी सरकार के रिकॉर्ड पर भी प्रकाश डाला।
रोज गार्डन में बोलते हुए ट्रंप ने एंजल मॉम्स और गोल्ड स्टार मॉम्स को संबोधित किया। उन्होंने उन्हें बेहद खास बताया और उनकी पीड़ा को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “लाखों अमेरिकी परिवारों के लिए रविवार प्यार, आभार और खुशी से भरा होगा। वैसे, मेरी मां बहुत अच्छी थीं।”
राष्ट्रपति ने कहा कि वहां मौजूद कई माताएं अपने बच्चों के लिए हर परिस्थिति में खड़ी रहीं, चाहे वह सामान्य जीवन हो या बेहद कठिन समय। राष्ट्रपति ट्रंप ने उनके दर्द को अपनी इमिग्रेशन नीति से जोड़ते हुए कहा कि कुछ माताओं ने ओपन बॉर्डर पॉलिसी की वजह से अपने प्रिय बच्चों को खो दिया। उन्होंने आगे कहा, “इन बेहद बहादुर और साहसी महिलाओं ने भयानक त्रासदी को भी मजबूत संकल्प में बदल दिया है।”
ट्रंप ने कहा, “हमने अपने देश के इतिहास की सबसे खराब और खतरनाक सीमा स्थिति को तेजी से अमेरिकी इतिहास की सबसे मजबूत सीमा व्यवस्था में बदल दिया है। पिछले 11 महीनों में हमारे यहां गैर-कानूनी प्रवेश लगभग ना के बराबर हुए हैं।”
उन्होंने सीमा सुरक्षा को ड्रग्स की रोकथाम से भी जोड़ा। ट्रंप ने कहा, “हमारी सीमाओं पर जानलेवा फेंटानिल की तस्करी 59 फीसदी कम हो गई है और समुद्री रास्तों से आने वाली ड्रग्स 97 फीसदी घट गई हैं। जमीनी रास्तों पर रोकथाम की कोशिशें भी और मजबूत होंगी।”
इस कार्यक्रम में ट्रंप ने मैरी एन मेंडोजा, टैमी नोबल्स और जैकलीन मेडिना समेत कई मांओं का नाम लेकर उनका उल्लेख किया और कहा, “आप जिस दौर से गुजर रही हैं, वह बेहद दुखद है।”
उन्होंने मरीन कैप्टन जेसी मेल्टन की कहानी याद करते हुए गोल्ड स्टार परिवारों को भी श्रद्धांजलि दी और कहा, “जेसी ने हमारे देश के लिए अपनी जान दे दी। आपके महान बेटों जैसे लोगों की वजह से ही अमेरिका आज एक मजबूत और आजाद देश है।”
राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान में एबी गेट हमले को लेकर पिछली सरकार की आलोचना करते हुए इसे बेहद बड़ी विफलता बताया।
ट्रंप ने परिवारों के लिए बनाई गई कानूनी और नीतिगत पहलों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़ी टैक्स कटौती लागू की और चाइल्ड टैक्स क्रेडिट को 2,200 डॉलर तक बढ़ाया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर अमेरिकी नवजात बच्चे के लिए निवेश के उद्देश्य से अपने आप 1,000 डॉलर दे रही है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “हमने फेवर्ड नेशन्स नीति के जरिए दवाओं की कीमतें कम कर दी हैं। हमने उन्हें 50, 60 और 70 फीसदी तक घटाया है।” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका में अब दुनिया की सबसे कम दवा कीमतें हैं।
उन्होंने आईवीएफ की कीमत कम करके और रेगुलेटरी रुकावटों को कम करके परिवार शुरू करना पहले से कहीं ज्यादा आसान बनाने की कोशिशों के बारे में भी बताया। अपनी बात खत्म करते हुए, ट्रंप ने कहा, “अमेरिका की माताएं हमारे देश का भविष्य बना रही हैं। मैं बस आप सभी को मदर्स डे की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देना चाहता हूं।”
मदर्स डे अमेरिका में मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस अवसर को परिवारों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर मनाया जाता है और माताओं को सम्मान दिया जाता है। व्हाइट हाउस पारंपरिक रूप से इस मौके का इस्तेमाल उन माताओं को सम्मानित करने के लिए करता है, जिन्होंने सैन्य सेवाओं या हिंसक घटनाओं में अपने बच्चों को खो दिया है।
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ट्रंप और पीएम मोदी के बीच होगी द्विपक्षीय बातचीत; व्यापार, एआई और वैश्विक सुरक्षा पर जोर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को जी7 नेताओं, आउटरीच पार्टनर्स और प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ आयोजित वर्किंग लंच से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।
बैठक के दौरान दोनों नेता आर्थिक विकास, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), निवेश साझेदारी और विभिन्न वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
इससे पहले मंगलवार को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया।
‘नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को पुनर्स्थापित करना’ विषय पर आयोजित जी7 वर्किंग सत्र से पहले दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की। इस सत्र में जी7 देशों, साझेदार देशों, विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
व्हाइट हाउस ने शनिवार को कहा था कि यह बैठक उस समय होगी, जब दोनों नेता जी7 नेताओं, आउटरीच पार्टनर्स और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के प्रमुख अधिकारियों के साथ वर्किंग लंच में शामिल होने वाले होंगे।
एवियन पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह विश्व नेताओं से मिलने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने को लेकर उत्साहित हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “जी7 शिखर सम्मेलन के लिए फ्रांस के एवियन पहुंच गया हूं। विश्व नेताओं के साथ बातचीत करने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए उत्सुक हूं। भारत अधिक टिकाऊ और समृद्ध विश्व के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
भारत को 15 से 17 जून तक आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भारत के साथ-साथ ‘ग्लोबल साउथ’ के हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्व नेताओं के साथ चर्चा करेंगे। यह जी7 शिखर सम्मेलन में भारत की 13वीं और प्रधानमंत्री मोदी की लगातार सातवीं भागीदारी होगी।
16 और 17 जून को जी7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र आयोजित किए गए हैं, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी अन्य आमंत्रित देशों के नेताओं के साथ हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, चर्चा का मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और विकास के लिए एकजुटता को मजबूत करने, समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा देने तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी एवं जिम्मेदार उपयोग पर रहेगा।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “जी7 समिट में भारत की नियमित भागीदारी शांति, सुरक्षा, विकास और पर्यावरण की स्थिरता से जुड़ी ग्लोबल चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका और योगदान को बढ़ती मान्यता को दर्शाती है। साथ ही, जी7 और जी20 व ‘वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने लगातार ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं, चिंताओं और विकास संबंधी आकांक्षाओं को प्रमुखता से उठाया है।”
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मस्कट: भारत भेजे गए एमटी सेट्टेबेलो हमले में मारे गए दो भारतीय नाविकों के पार्थिव शरीर

ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को बताया कि जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर हुए हमले में जान गंवाने वाले दो भारतीय समुद्री कर्मियों के पार्थिव शरीर भारत भेज दिए गए हैं।
दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
दूतावास ने कहा, “ आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया, जिन्होंने एमटी सेट्टेबेलो पर हुए दुखद हमले में अपनी जान गंवाई, उनके पार्थिव शरीर भारत वापस भेज दिए गए हैं। इस कठिन समय में हमारी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं।”
मंगलवार को दूतावास ने यह भी बताया था कि जहाज के सभी 21 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित रूप से ओमान से भारत लौट रहे हैं। रवाना होने से पहले भारत के ओमान में राजदूत प्रशांत पीसे ने चालक दल से मुलाकात की और उनका हौसला बढ़ाया।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, पलाऊ ध्वज वाले जहाज एमटी सेट्टेबेलो पर 30 समुद्री मील दूर सोहर के पास हमला हुआ था। इस घटना के बाद 21 भारतीयों को बचा लिया गया, जबकि 3 नाविकों की मौत हो गई।
दूतावास ने बताया कि ओमान मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया।
इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए कूटनीतिक स्तर पर आपत्ति दर्ज कराई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से बात कर इस हमले पर विरोध दर्ज कराया।
विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कहा था कि नागरिक जहाजों पर इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है और इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ता है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया था कि उसने उस जहाज को निशाना बनाया था, क्योंकि वह ईरान से तेल ले जाने और अमेरिकी निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप था। सेना के अनुसार कार्रवाई के दौरान जहाज को निष्क्रिय किया गया।
भारत ने इस घटना को गंभीर बताते हुए नागरिक समुद्री जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की अपील की है।
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भारत ने अफगानिस्तान को भेजी जरूरी दवाओं की बड़ी खेप : विदेश मंत्रालय

भारत सरकार ने एक बार फिर मदद का हाथ बढ़ाते हुए अफगानिस्तान को आवश्यक दवाओं की बड़ी खेप भेजी है। इस सहायता के माध्यम से भारत ने अफगान जनता के स्वास्थ्य, कल्याण और राहत प्रयासों के प्रति अपने निरंतर सहयोग को दोहराया है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है और कठिन परिस्थितियों में भी वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, ” भारत ने 5 टन जरूरी दवाओं की खेप अफगानिस्तान भेजी है। इस तरह हमने अफगान जनता के कल्याण और मानवीय सहायता पहुंचाने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता सुनिश्चित की है।”
यह नई खेप अफगानिस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने और वहां की तत्काल चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से भेजी गई है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान को दवाइयों, खाद्यान्न, टीकों और अन्य मानवीय सहायता सामग्री की आपूर्ति करता रहा है।
हाल के वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान को जीवनरक्षक दवाइयां, खाद्य सहायता और आपदा राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। नई खेप इसी मानवीय सहयोग की निरंतरता का हिस्सा है।
अप्रैल में भी भारत ने टीबी टीकाकरण कार्यक्रम को बल देने के लिए 13 टन बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और इससे जुड़े सामानों की खेप भेजी थी।इसकी पुष्टि भी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर की थी।
इसी साल बाढ़ और भूकंप ने अफगानिस्तान में भारी तबाही मचाई थी। जिसके बाद भारत की ओर से 5 अप्रैल को मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री (एचएडीआर) पहुंचाई गई थी।
वहीं, मार्च में, भारत ने अफगानिस्तान को 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल, किट और उपकरण भेजे थे। यह मदद काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तानी हमले में घायल हुए लोगों की सहायता के लिए दी गई थी। पाकिस्तान के एक हमले में काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2,000 बिस्तरों वाले ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
भारत पिछले कई वर्षों से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराता रहा है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर और अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी के बीच नवंबर 2025 में हुई बैठक में व्यापार, संपर्क और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी।
बैठक के बाद जयशंकर ने कहा था कि भारत अफगान जनता के विकास और कल्याण के लिए अपने समर्थन को जारी रखेगा। दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया था।
इससे पहले भारत ने अफगानिस्तान के भूकंप प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और खाद्य सहायता भी भेजी थी। बाल्ख, समनगन और बगलान प्रांतों में आए विनाशकारी भूकंप (2025) के बाद भारत ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए खाद्यान्न और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई थी।
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