अंतरराष्ट्रीय
टमाटर हिमाचल में प्रमुख ऑफ-सीजन नकदी फसलों में से एक
हिमाचल प्रदेश के निचले और मध्य पहाड़ियों में टमाटर प्रमुख ऑफ-सीजन नकदी फसलों में से एक के रूप में उभर रहा है। सोलन, सिरमौर और कुल्लू जिलों में राज्य के कुल उत्पादन का 86 प्रतिशत उत्पादन होता है। गैर-मौसमी टमाटर की खेती मानसून के दौरान पहाड़ियों में चरम पर होती है, जब उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में फसल की कटाई नहीं हो रही होती है।
राज्य सालाना 320,700 टन टमाटर का उत्पादन करता है और इसका उत्पादन 498,000 टन बढ़ाने का लक्ष्य है।
कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने आईएएनएस को बताया कि कुछ किसानों के लिए गैर-मौसमी टमाटर की खेती आय का मुख्य स्रोत है।
राज्य के कुल वृक्षारोपण का लगभग 46 प्रतिशत सोलन जिले में है, जिसमें 90 प्रतिशत से अधिक उपज मुख्य रूप से दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के बाजारों में जाती है।
टमाटर उगाने वाली अन्य पट्टियां सिरमौर (30 प्रतिशत) और कुल्लू (10 प्रतिशत) हैं, जबकि शेष शिमला, मंडी और बिलासपुर जिलों में हैं।
अधिकांश किसान स्थानीय कृषि उपज मंडी समितियों के माध्यम से अपनी उपज बेचना पसंद करते हैं, जबकि कुछ सीधे अन्य राज्यों की कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) को भेजते हैं।
सालोगरा के किसानों के एक समूह का बिगबास्केट जैसे ऑनलाइन रिटेल स्टोर के साथ बाजार से जुड़ाव है। टमाटर की उपज को ई-मार्केटप्लेस के माध्यम से बेचता है।
इस समय 22,753 किसान, जिनमें से कई छोटी जोत वाले हैं, 203 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार के साथ टमाटर उत्पादन में लगे हुए हैं।
कंवर ने कहा कि पॉलीहाउस का इस्तेमाल बेमौसम सब्जियों के उत्पादन के लिए भी किया जा रहा है।
पालमपुर में सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय ने रोग प्रतिरोधी उच्च उपज देने वाली टमाटर की किस्में विकसित की हैं, जो हैं पालम पिंक, पालम प्राइड, हिम प्रगति, हिम पालम, चेरी येलो और पालम टोमैटो हाइब्रिड 1।
इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय नियमित रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे 25,000 से अधिक किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि सरकार सिंचाई सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है और वर्षाजल संचयन को बढ़ावा दे रही है।
फसलों के व्यवस्थित विविधीकरण के लिए कृषि विभाग ने सब्जियों की अधिक उपज देने वाली संकर किस्मों की शुरुआत, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को लोकप्रिय बनाने और संरक्षित खेती की योजना तैयार की है। गुणवत्ता में सुधार के लिए राज्य भर में जैविक और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
कंवर ने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत अनाज फसलों को सब्जियों में विविधीकरण के लिए किसानों को 50 प्रतिशत की सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिसमें टमाटर की फसल की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
व्यापार
टाटा मोटर्स ने कमर्शियल वाहनों के दाम 2.5 प्रतिशत तक बढ़ाए, 1 जुलाई से लागू होंगी नई कीमतें

टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स (टीएमसीवी) ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी है और नई कीमतें 1 जुलाई से लागू होंगी। यह जानकारी गुरुवार को कंपनी की ओर से दी गई।
एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी ने कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी होना और लागत का बढ़ना है। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल पर विभिन्न होगी और 2.5 प्रतिशत तक सीमित होगी।
इस बढ़ोतरी से टाटा मोटर्स कमर्शियल व्हीकल्स भी उन कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने मध्य पूर्व संकट के चलते कच्चे माल और लागत में बढ़ोतरी के कारण कीमतों में इजाफा किया है।
इससे पहले, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल (टीएमपीवी) ने 12 जून को अपनी ईंधन (पेट्रोल, डीजल और सीएनजी) और इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का ऐलान किया। नई कीमतें एक जुलाई से लागू होंगी।
कंपनी की ओर से जारी की गई एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि कीमतों में बढ़ोतरी की वजह इनपुट लागत में बढ़ोतरी होना था।
टीएमपीवी ने कहा कि वह लागत में हुई बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद वहन कर रही है, जबकि हालिया कीमत संशोधन के जरिए बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल रही है।
कंपनी ने कहा कि कीमत में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वैरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी। वहीं, मध्य पूर्व तनाव के चलते मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया जैसी कंपनियां गाड़ियों की कीमतों में बढ़ोतरी कर चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त, वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में, टीएमसीवी के मुनाफे में सालाना आधार पर 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि आय 22 प्रतिशत बढ़कर 24,452 करोड़ रुपए हो गया। इस दौरान कंपनी का एबिटा मार्जिन 13.90 प्रतिशत रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर 4 रुपए का डिविडेंड भी घोषित किया।
व्यापार
शीर्ष 10 में से आठ कंपनियों का मार्केटकैप 1.90 लाख करोड़ रुपए बढ़ा

भारतीय शेयर बाजार में बीते हफ्ते शीर्ष 10 में से आठ कंपनियों का मार्केटकैप 1.90 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। इसकी वजह घरेलू बाजार में मजबूती रैली थी।
इस दौरान सेंसेक्स 1,284.61 अंक या 1.73 प्रतिशत की मजबूती के साथ 75,527.95 और निफ्टी 256.20 अंक या 1.10 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,622.90 पर बंद हुआ।
बाजार में तेजी की वजह अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ना है। इससे वैश्विक स्तर पर अस्थिरता में कमी आई, जिसमें भारत के साथ दुनिया के बाजार में खरीदारी देखने को मिली।
विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्ष एक शांति समझौता करने के अंतिम दौर में है। जल्द ही अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक डील हो सकती है।
समीक्षा अवधि में आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एलएंडटी और एचयूएल के मार्केट कैप में बढ़ोतरी हुई है, जबकि टीसीएस और एलआईसी के वैल्यूएशन में कमी देखने को मिली है।
आईसीआईसीआई बैंक का मार्केटकैप 56,223 करोड़ रुपए बढ़कर 9.61 लाख करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, एचडीएफसी बैंक का बाजार मूल्यांकन 38,571 करोड़ रुपए बढ़कर 11.89 लाख करोड़ रुपए हो गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का बाजार मूल्यांकन 36,138 करोड़ रुपए बढ़कर 9.39 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 18,367 करोड़ रुपए बढ़कर 5.72 लाख करोड़ रुपए हो गया है। भारती एयरटेल का मार्केटकैप 14,380 करोड़ रुपए बढ़कर 11.11 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
एलएंडटी का मार्केटकैप 13,241 करोड़ रुपए बढ़कर 5.57 लाख करोड़ रुपए हो गया है। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केटकैप 10,984 करोड़ रुपए बढ़कर 5.09 करोड़ रुपए हो गया है।
दूसरी तरफ, टीसीएस का मार्केटकैप 13,296 करोड़ रुपए घटकर 7.82 लाख करोड़ रुपए हो गया है। एलआईसी का मार्केटकैप 822 करोड़ रुपए कम होकर 5.05 लाख करोड़ रुपए रह गया है।
व्यापार
सोना एक हफ्ते में करीब 6,400 रुपये और चांदी 14,300 रुपये से अधिक सस्ती हुई

सोने और चांदी में इस हफ्ते गिरावट देखने को मिली, जिससे सोना और चांदी क्रमशः 6,400 रुपये और 14,300 हजार रुपये से अधिक सस्ते हो गए हैं।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 6,438 रुपये कम होकर 1,47,800 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,54,238 रुपए पर था।
22 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,35,385 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,41,282 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,10,850 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,15,679 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
इस हफ्ते सोने में सबसे न्यूनतम दाम 11 जून को सुबह के सत्र में 1,44,782 रुपये प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 9 जून को सुबह के सत्र में 1,52,519 रुपये प्रति 10 ग्राम देखा गया। सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 14,326 रुपये कम होकर 2,42,582 रुपये प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,56,908 रुपये प्रति किलो था। इस हफ्ते चांदी में सबसे न्यूनतम दाम 11 जून को शाम के सत्र में 2,32,591 रुपये प्रति किलो देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 9 जून को शाम के सत्र में 2,45,938 रुपये प्रति किलो देखा गया।
वैश्विक अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम 4,248 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 68 डॉलर प्रति औंस के करीब आ गया है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह महंगाई बढ़ने की आशंका और अमेरिका – ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत उच्च स्तर पर रहना है। इसके साथ ही ब्याज दरों के बढ़ाने की आसान कहां है निवेशकों को सोने और चांदी में मुनाफा वसूली पर मजबूर किया है।
बीते एक वर्ष में सोने और चांदी ने शानदार रिटर्न दिया है। डॉलर में इस दौरान सोने ने 24 प्रतिशत से अधिक और चांदी ने 87 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है।
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