अंतरराष्ट्रीय समाचार
राष्ट्रपति ट्रंप ने तीन अमेरिकी सैनिकों को उनकी वीरता और जज्बे के लिए मेडल ऑफ ऑनर से किया सम्मानित
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वियतनाम युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध में असाधारण बहादुरी दिखाने के लिए रिटायर्ड मरीन मेजर जेम्स कैपर्स जूनियर, रिटायर्ड आर्मी मेजर निकोलस डॉकरी और मरणोपरांत मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू. रिप्ले को अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य सम्मान ‘मेडल ऑफ ऑनर’ दिया।
व्हाइट हाउस में समारोह के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने तीनों सैनिकों को हिम्मत और कुर्बानी की मिसाल बताया, जो अमेरिकी सुरक्षा बलों की पहचान है। ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी सुरक्षा बलों के कमांडर इन चीफ के तौर पर सेवा करने से बड़ा कोई खास मौका मेरे लिए नहीं है। धरती पर अब तक के सबसे बहादुर और महान हीरो की 250 साल की परंपरा। लेकिन कुछ ही लोगों को हमारा सबसे बड़ा सैन्य सम्मान, कांग्रेसनल मेडल ऑफ ऑनर मिला है।”
कैपर्स को 1967 में वियतनाम में चार दिन के टोही मिशन के दौरान उनके कामों के लिए पहचान मिली थी।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, उस समय के सेकंड लेफ्टिनेंट कैपर्स और उनकी टीम ने उत्तरी वियतनामी रेजिमेंटल बेस कैंप का पता लगाने की कोशिश में दुश्मन की बड़ी सेना से बार-बार भिड़ंत की। एक हमले में कई गंभीर चोटें लगने के बावजूद, उन्होंने अपने सैनिकों का नेतृत्व करना जारी रखा, सपोर्टिंग फायर को कोऑर्डिनेट किया और उन्हें निकालने का काम निर्देशित किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि कैसे कैपर्स बुरी तरह घायल होने के बावजूद लड़ते रहे। उन्होंने कहा, “उनके सभी साथी घायल हो गए, लेकिन जेम्स एक पैर पर उठ खड़े हुए और आगे बढ़ते गए। उनका एक पैर उनकी पूरी वजन नहीं उठा सकता था। मुश्किल से होश में आने पर, उन्होंने पूरे एक घंटे तक क्लोज एयर सपोर्ट के लिए कॉल किया।”
बता दें कि क्लोज एयर सपोर्ट एक सैन्य हवाई रणनीति है, जिसमें लड़ाकू विमानों (फिक्स्ड-विंग) और हेलीकॉप्टरों (रोटरी-विंग) द्वारा दुश्मन के उन ठिकानों पर सटीक हमले किए जाते हैं, जो जमीन पर लड़ रहे मित्र देशों की सेनाओं के बहुत करीब होते हैं।
राष्ट्रपति ने बताया कि कैपर्स को असल में 1967 में मेडल ऑफ ऑनर के लिए रिकमेंड किया गया था, लेकिन पेपरवर्क पूरा होने से पहले उनके कमांडिंग ऑफिसर की मौत हो जाने के बाद अवॉर्ड प्रोसेस रुक गया।
ट्रंप ने कहा, “जेम्स, देश ने तुम्हें बहुत लंबा इंतजार करवाया। इसलिए मैं तुमसे कहता हूं, बधाई हो, तुम कर पाए।”
कर्नल जॉन डब्ल्यू. रिप्ले को यह सम्मान मरणोपरांत 2 अप्रैल, 1972 को उत्तरी वियतनाम के एक बड़े हमले के दौरान उनके कामों के लिए मिला। उस समय के कैप्टन रिप्ले, एक सीनियर मरीन सलाहकार के तौर पर, दुश्मन की तेज फायरिंग के बीच एक पुल के नीचे बार-बार चढ़े और 500 पाउंड से ज्यादा विस्फोटक रखे, जिससे पुल का ढांचा नष्ट हो गया और आगे बढ़ रही दुश्मन सेना रुक गई।
ट्रंप ने कहा, “लगातार पांच घंटे तक, वह एक्सप्लोसिव ले गए, चार्ज लगाए और हर एक तक एक प्राइमर कॉर्ड पहुंचाया। जब जॉन ने एक्सप्लोसिव ब्लास्ट किया, तो पुल नदी में गिर गया, जिससे आगे बढ़ रहे लोग मारे गए।”
डॉकरी को अक्टूबर 2012 में अफगानिस्तान के कपिसा प्रांत में तालिबान के हमले के दौरान की गई कार्रवाई के लिए सम्मानित किया गया था। व्हाइट हाउस ने कहा कि घायल सैनिकों को बचाने, जवाबी हमलों का नेतृत्व करने और हवाई मदद का निर्देशन करते समय उन्होंने बार-बार दुश्मन की गोलीबारी का सामना किया।
ट्रंप ने बताया कि कैसे निकोलस डॉकरी ने ना केवल घायल साथियों को बचाया, बल्कि उन्हें दुश्मन के हमलों से सुरक्षित किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “जब उनके चारों ओर मोर्टार फायर की गड़गड़ाहट हो रही थी, निक ने अपने घायल साथी को अपने शरीर से कवर कर लिया। मेजर डॉकरी, आप उस दिन युद्ध के मैदान से जाने वाले आखिरी आदमी थे और आप इसे एक लीजेंड और हीरो के तौर पर छोड़ गए।”
समारोह खत्म करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि देश उन सैनिकों का कर्जदार है जिन्होंने लड़ाई में अपनी जान जोखिम में डाली।
उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम अपनी स्थापना की 250वीं सालगिरह के करीब पहुंच रहे हैं, हमें याद है कि हम उन जैसे हीरो के लिए सब कुछ कर्जदार हैं जिनका हम आज जश्न मना रहे हैं। हम आपका शुक्रिया अदा करते हैं और हम आपको कभी नहीं भूलेंगे।”
मेडल ऑफ ऑनर अमेरिकी सुरक्षा बलों के उन सदस्यों को दिया जाता है जो ड्यूटी से हटकर अपनी जान जोखिम में डालकर “वीरता और निडरता” से अपनी अलग पहचान बनाते हैं। यह अमेरिकी सरकार द्वारा दिया जाने वाला सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है।
ये सम्मान ऐसे समय में दिए जा रहे हैं जब अमेरिका 2026 में अपनी स्थापना की 250वीं सालगिरह मनाने की तैयारी कर रहा है। अपने पूरे इतिहास में, मेडल ऑफ ऑनर उन सेवा सदस्यों को दिया गया है जिनके लड़ाई में किए गए कामों को सैन्य हिम्मत और कुर्बानी के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड को दिखाने वाला माना जाता है।
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नेपाल: भारी बारिश का अलर्ट, टूरिज्म बोर्ड ने यात्रा संबंधी चेतावनी जारी की

नेपाल टूरिज्म बोर्ड (एनटीबी) ने पर्यटकों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। मौसम विभाग के हवाले से चेतावनी दी गई है कि 25 से 27 सितंबर के बीच देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।
26 अगस्त को ही नेपाल में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मंगलवार शाम तक इस बाढ़ में 1,451 लोगों की मौत हो गई थी और 5,705 लोग लापता हो गए थे, इनमें 636 विदेशी भी शामिल हैं।
मंगलवार को ही जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग (डीएचएम) ने शुक्रवार से रविवार तक पूर्वी कोशी, दक्षिणी मधेश, मध्य बागमती और पश्चिमी सुदूरपश्चिम प्रांतों के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। कर्णाली, गंडकी और लुंबिनी समेत पश्चिमी प्रांतों में भी गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने का अनुमान लगाया है। इन्हीं सब हालात को देखते हुए एनटीबी ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है।
एनटीबी ने अपनी एडवाइजरी में कहा, “नदी घाटियों के पास पहाड़ी और ज्यादा ऊंचे इलाकों में जाने वाले पर्यटकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, क्योंकि वहां मौसम तेजी से बदल सकता है और ऊंचे इलाकों में बर्फबारी भी हो सकती है।”
भोटे कोशी और त्रिशूली नदी बेसिन इलाके में कई पर्यटक 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का शिकार हुए थे।
बोर्ड ने यात्रियों को सलाह दी कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताज़ा जानकारी और आधिकारिक सलाह देख लें और सड़क, फ़्लाइट और ट्रेकिंग-रूट की स्थितियों के बारे में अपडेट रहें।
इसने यात्रियों को यह भी सलाह दी कि वे खराब मौसम से प्रभावित या ज़्यादा जोखिम वाले इलाकों में जाने से बचें। सलाह में कहा गया है, “नदियों, झरनों, खड़ी ढलानों और भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका वाले इलाकों के पास खास सावधानी बरतें।”
पर्यटन बोर्ड ने यात्रियों से यह भी कहा कि वे असुरक्षित मौसम में ट्रेकिंग, पर्वतारोहण और दूसरी आउटडोर गतिविधियों से बचें।
उन्होंने कहा, “स्थानीय अधिकारियों, सुरक्षा एजेंसियों, पर्यटन पेशेवरों और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और मौसम की स्थिति व टूर ऑपरेटरों की सलाह के आधार पर पहले से ही सुरक्षित जगहों पर रहें या वहां चले जाएं।”
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दक्षिण कोरिया: किम जोंग उन ने ‘वैचारिक तौर-तरीकों में बदलाव’ का किया आह्वान

उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने पार्टी पदाधिकारियों से कहा है कि वे “समय की मांग” के मुताबिक पार्टी के प्रचार और वैचारिक अभियान को नए सिरे से तैयार करें।
योनहाप ने कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से बताया कि सोमवार को सूचना क्षेत्र के अधिकारियों के लिए पार्टी की तीसरी कार्यशाला के समापन भाषण में किम ने “वैचारिक कामकाज की सामग्री, स्वरूप, तरीकों और साधनों” को आधुनिक बनाने के लिए “सिद्धांतों से जुड़े मुद्दों” और कार्यों को रेखांकित किया।
उन्होंने “सूचना और प्रेरणा के काम में नवाचार और संस्कृति के निर्माण” का आह्वान किया और जोर दिया कि ये “समय, क्रांति और लोगों की उम्मीदों” के अनुरूप हों।
खासकर, किम ने “प्रतिक्रियावादी वैचारिक संस्कृति के प्रसार को पूरी तरह से रोकने” के लिए “आधुनिक सूचना और तकनीकी साधनों” के इस्तेमाल का आह्वान किया; इस कदम को बाहरी विचारों और प्रभावों के प्रवाह को अधिक प्रभावी ढंग से रोकने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
केसीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, चार दिन तक चली यह कार्यशाला सोमवार को संपन्न हुई। यह कार्यशाला किम के “क्रांतिकारी विचारों” और “पार्टी की क्रांतिकारी विरासतों और नेतृत्व की उपलब्धियों” पर आधारित वैचारिक शिक्षा पर केंद्रित थी।
प्रतिभागियों से आग्रह किया गया कि वे “वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया के नौवें कांग्रेस के फैसलों को लागू करने के लिए जनता को प्रेरित करने हेतु सूचना और प्रचार अभियान को तेज करें” और हर क्षेत्र व इकाई के हिसाब से वैचारिक कामकाज को तैयार करें।
कार्यशाला में “वैचारिक कामकाज के नए स्वरूपों और तरीकों,” “यथार्थवादी और आकर्षक ढंग से सूचना का काम करने” के तरीकों को प्रभावी बनाने की नीति के अनुसार विजुअल एड्स (दृश्य साधनों) के इस्तेमाल” पर भी चर्चा की गई।
इस साल का सत्र 2022 में शुरू हुई ऐसी कार्यशालाओं की श्रृंखला में तीसरी कार्यशाला थी। किम ने उद्घाटन और समापन, दोनों समारोहों में हिस्सा लिया और हर बार भाषण दिया।
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प्योंगयांग से बातचीत की अपील, दक्षिण कोरिया-यूएस-जापान ने परमाणु निरस्त्रीकरण पर जताई प्रतिबद्धता

दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के शीर्ष राजनयिकों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही प्योंगयांग से बातचीत फिर शुरू करने की अपील भी की है। तीनों देशों ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला हुआ है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने सोमवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह से इतर त्रिपक्षीय बैठक की।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तीनों देशों ने “उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों से होने वाली आय को रोकने तथा संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों को लागू करने की प्रतिबद्धता” भी दोहराई।
बयान में कहा गया, “तीनों देशों ने डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया (डीपीआरके) यानी उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। बातचीत का रास्ता खुला है और उत्तर कोरिया को बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए।”
योनहाप के मुताबिक यह अपील ऐसे समय की गई है जब उत्तर कोरिया लगातार अपने हथियार कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रहा है। उत्तर कोरिया ने मंगलवार को बताया कि उसके नेता किम जोंग-उन की मौजूदगी में रविवार को एक नए हथियार तंत्र का परीक्षण किया गया। उत्तर कोरिया ने इस हथियार के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन इसे अपनी हथियार तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उत्तर कोरिया के साथ बातचीत फिर शुरू करने की अपील को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस इच्छा के संदर्भ में भी देखा जा रहा है कि वह इस साल किम जोंग-उन के साथ फिर बैठक कर अपनी व्यक्तिगत कूटनीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं।
हालांकि अमेरिका ने प्योंगयांग के साथ बातचीत की संभावना खुली रखने के साथ ही दक्षिण कोरिया और जापान की रक्षा के प्रति अपनी ‘आयरनक्लैड’ प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
बयान के अनुसार “अमेरिका ने कहा कि दक्षिण कोरिया और जापान की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्धता अमेरिकी सैन्य क्षमता और उसकी परमाणु क्षमताओं से स्वीकृत है।”
तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने उत्तर कोरिया द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के उल्लंघन और उनसे बचने के प्रयासों की निगरानी करने वाले बहुपक्षीय प्रतिबंध निगरानी दल (एमएसएमटी) के काम का भी स्वागत किया।
उन्होंने उत्तर कोरिया के आईटी कर्मचारियों से जुड़े साइबर खतरों को लेकर विभिन्न देशों द्वारा जारी चेतावनियों का भी स्वागत किया। “तीनों देशों ने जून में हुई त्रिपक्षीय कार्य समूह की बैठक के जरिए उत्तर कोरिया से जुड़े साइबर खतरों से निपटने के प्रयासों में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।”
बैठक में ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। तीनों देशों ने ताइवान से जुड़े मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया और यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध किया।
उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दुनिया के अन्य हिस्सों में नौवहन तथा हवाई उड़ान की स्वतंत्रता, निर्बाध वैध व्यापार और समुद्र के अन्य वैध उपयोगों को बनाए रखने के समर्थन की बात कही। इन सभी गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि के अनुरूप रखने पर जोर दिया गया।
ताइवान का मुद्दा ऐसे समय में चर्चा में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को व्हाइट हाउस में शिखर बैठक प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच भू-राजनीतिक मुद्दों सहित कई विषयों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के अनुसार, चो, रुबियो और मोतेगी ने पूर्वोत्तर एशिया तथा पश्चिम एशिया की स्थिति समेत प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। तीनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच आपसी संपर्क और समन्वय को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
बैठक में आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। तीनों देशों ने आर्थिक दबाव तथा गैर-बाजार नीतियों और ऐसी गतिविधियों का विरोध करने की बात कही, जिनसे बाजार में असंतुलन पैदा होता है और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है।
तीनों देशों ने महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित रखने तथा स्वतंत्र और पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई। इसके तहत त्रिपक्षीय आपूर्ति श्रृंखला प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने और आर्थिक सुरक्षा पर नई त्रिपक्षीय बातचीत शुरू करने का स्वागत किया गया।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी तीनों देशों ने क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। इसमें तेल भंडार बढ़ाना तथा तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है।
विदेश मंत्रियों ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती में तेजी लाने के लिए 7 जुलाई को हुए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन को लागू करने की योजना पर भी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि यह काम परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा मानकों और परमाणु अप्रसार के उच्चतम मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
इसके अलावा तीनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, डिजिटल बुनियादी ढांचे और जैव प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के विकास और सुरक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने पर सहमति जताई।
दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के शीर्ष राजनयिकों की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तीनों देशों के बीच समन्वय लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है। इससे पहले तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की त्रिपक्षीय बैठक 7 जुलाई को तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान और 22 जुलाई को फिलीपींस में आसियान से जुड़े क्षेत्रीय मंच के दौरान हुई थी।
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