राजनीति
‘यह मुंबई हमारी है’, शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर उद्धव गुट ने विरोधियों को दिया संदेश
शिवसेना की स्थापना को आज 60 साल पूरे हो गए हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने पार्टी की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि पिछले छह दशकों में शिवसेना को तोड़ने और कमजोर करने के कई प्रयास किए गए। पार्टी का दावा है कि विरोधियों के मन में शिवसेना के प्रति भय के कारण समय-समय पर कई समानांतर ‘सेनाओं’ का गठन हुआ और वे खत्म भी हो गईं, लेकिन बालासाहेब ठाकरे द्वारा रखी गई नींव और स्थापित की गई विचारधारा अडिग रही।
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में छह सांसदों की हालिया बगावत का नाम लिए बिना कहा गया कि आज भी व्यावसायिक सोच से प्रेरित कई नकली संगठन खड़े किए जा रहे हैं, लेकिन शिवसेना की स्थापना कभी व्यापारिक सौदे के रूप में नहीं हुई। संपादकीय में कहा गया कि शिवसेना प्रमुख ने पार्टी को कभी कारोबार नहीं बनने दिया। इसलिए समय-समय पर अवसरवादी और सौदेबाजी करने वाले लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया गया, ताकि मराठी अस्मिता और हिंदुत्व की यह धारा शुद्ध बनी रहे, जिसकी गूंज आज भी महाराष्ट्र की घाटियों में सुनाई देती है।
संपादकीय में कहा गया कि शिवसेना ने मराठी समाज को स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया। लोगों में यह आत्मविश्वास जगाया कि वे कह सकें, “यह मुंबई हमारी है।” पार्टी ने आम लोगों को पार्षद बनाया और शाखाओं का ऐसा मजबूत नेटवर्क खड़ा किया, जो जनता के लिए पारिवारिक न्यायालय की तरह काम करता था। सड़क, पानी, स्कूल में प्रवेश, अस्पताल में सहायता और राशन कार्ड जैसी समस्याओं के समाधान के लिए शिवसैनिक दिन-रात लोगों की सेवा में जुटे रहते थे। अन्याय की किसी भी घटना पर सबसे पहले शिवसैनिक ही मौके पर पहुंचते थे।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में महाराष्ट्र के इस गौरव को खत्म करने और राज्य के स्वाभिमान को कमजोर करने की कोशिशें तेज हुई हैं। संपादकीय में कहा गया कि पार्टी की स्थापना के समय से ही राजनीतिक महत्वाकांक्षा से प्रेरित लोगों ने समय-समय पर पीठ में छुरा घोंपा। इसके बावजूद शिवसेना हर वार को सहते हुए आज इस मुकाम तक पहुंची है, क्योंकि उसके विरोधियों में कभी सामने से मुकाबला करने का साहस नहीं था। इसमें बालासाहेब ठाकरे के उस कथन का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि “मेरी पीठ पर इतने घाव हो चुके हैं कि अब नए घाव के लिए भी जगह नहीं बची।”
संपादकीय में कहा गया कि शिवसेना ने समाजसेवा की परिभाषा बदल दी। चाहे कोई स्थानीय दुर्घटना हो या बम विस्फोट, शिवसैनिक हमेशा सबसे पहले राहत कार्य में पहुंचते थे। रक्तदान शिविर, शिक्षा अभियान, स्वास्थ्य शिविर और मुफ्त किताब-कॉपी वितरण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी हर घर तक पहुंची। निस्वार्थ भाव से काम करते हुए शिवसेना मजदूरों और श्रमिकों का सबसे बड़ा सहारा बनी।
संपादकीय के अनुसार, इसी जनसेवा के दम पर शिवसेना ने नगर निगमों, महाराष्ट्र विधानसभा और संसद तक अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। पार्टी ने आम नागरिकों को विधायक, सांसद और मंत्री बनाया और महाराष्ट्र के गौरव का प्रतीक बनी।
संपादकीय में कहा गया कि 60वें वर्ष में प्रवेश करते समय पार्टी के मन में एक पीड़ा भी है। एक ओर जहां समर्पित कार्यकर्ताओं की बड़ी सेना हमेशा पार्टी के साथ खड़ी रही, वहीं दूसरी ओर कुछ अवसरवादी, स्वार्थी और दल-बदल करने वाले लोग निजी लाभ के लिए पार्टी छोड़कर चले गए। इसे वर्तमान राजनीति में नैतिकता के पतन का प्रतीक बताया गया।
जिस तरह शिवसेना ने सह्याद्रि की घाटियों में मराठी अस्मिता का संदेश फैलाया, उसी तरह हिंदुत्व का शंखनाद कर पूरे हिंदू समाज को जागृत किया। मलंगगढ़ से लेकर अयोध्या आंदोलन तक हिंदुत्व की लड़ाई में शिवसेना ने बड़े बलिदान दिए। इसमें सवाल उठाया गया कि “क्या आज खुद को हिंदुत्व का सबसे बड़ा समर्थक बताने वाले लोग उस योगदान का एक अंश भी दे पाए हैं?”
संपादकीय के अंत में कहा गया कि जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में कहा जाता है कि यदि वे नहीं होते तो हिंदुओं की पहचान समाप्त हो जाती, उसी विरासत को शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे ने आगे बढ़ाया और देश की अखंडता की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) शिवसेना का स्थायी मंत्र रहा है। यह मंत्र आज भी गूंज रहा है और भविष्य में भी गूंजता रहेगा। शिवसेना अमर है।
राष्ट्रीय समाचार
33.60 लाख करोड़ रुपए की 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर सरकार की नजर, कनेक्टिविटी क्षेत्र को सबसे ज्यादा प्राथमिकता: सरकार

केंद्र सरकार वर्तमान में देशभर में चल रही 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निगरानी कर रही है, जिनकी संशोधित कुल लागत 33.60 लाख करोड़ रुपए है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के अनुसार, अगस्त 2026 तक ये परियोजनाएं 17 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के तहत संचालित की जा रही हैं।
मंत्रालय ने बताया कि इन परियोजनाओं पर अब तक 16.33 लाख करोड़ रुपए का खर्च किया जा चुका है, जो कुल संशोधित परियोजना लागत का लगभग 48.59 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स) के क्रियान्वयन में लगातार प्रगति हो रही है।
आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में परियोजनाएं उन्नत चरण में पहुंच चुकी हैं। कुल 647 परियोजनाओं ने 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति हासिल कर ली है, जबकि 312 परियोजनाएं वित्तीय दृष्टि से 80 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी हैं। मंत्रालय का कहना है कि परियोजनाएं शुरुआती और अंतिम दोनों चरणों में संतुलित रूप से मौजूद हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि एक तरफ नई परियोजनाएं शुरू हो रही हैं तो दूसरी ओर कई परियोजनाएं पूर्णता के करीब पहुंच चुकी हैं।
सरकार ने बताया कि केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिए पैमाना (पीएआईएमएएनए) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है, जिससे विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, समय पर समीक्षा और डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद मिल रही है।
क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सबसे अधिक 1,191 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी संशोधित अनुमानित लागत 16.05 लाख करोड़ रुपए है, जो दर्शाता है कि सरकार कनेक्टिविटी-आधारित विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है।
कुल 1,731 परियोजनाओं में 715 मेगा परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें प्रत्येक की लागत 1,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक है। इनका मूल लागत मूल्य 25.89 लाख करोड़ रुपए है। वहीं 1,016 प्रमुख परियोजनाएं ऐसी हैं जिनकी लागत 150 करोड़ रुपए से 1,000 करोड़ रुपए के बीच है और उनकी कुल लागत 4.83 लाख करोड़ रुपए है।
मंत्रालय के अनुसार, भौतिक और वित्तीय प्रगति के आंकड़े बड़े पैमाने पर एक-दूसरे के अनुरूप हैं। शुरुआती चरण में वित्तीय व्यय अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देता है क्योंकि परियोजनाओं में प्रारंभिक निवेश अधिक होता है, जबकि अंतिम चरण में भौतिक प्रगति वित्तीय प्रगति से आगे निकल जाती है, जो निर्माण कार्यों के समापन को दर्शाती है।
मंत्रालयवार आंकड़ों में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय सबसे आगे है। इसके अंतर्गत 982 परियोजनाएं (57 प्रतिशत) चल रही हैं, जो कुल परियोजनाओं का लगभग 57 प्रतिशत हैं। इनकी संशोधित लागत 9.52 लाख करोड़ रुपए है, जो कुल लागत का लगभग 28 प्रतिशत है। इससे राष्ट्रीय अवसंरचना विकास में सड़क क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका स्पष्ट होती है।
वहीं रेल मंत्रालय के पास 147 परियोजनाएं (8 प्रतिशत) हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत 3.14 लाख करोड़ रुपए (9 प्रतिशत) है। दूसरी ओर कोयला मंत्रालय के तहत 122 परियोजनाएं (7 प्रतिशत) चल रही हैं, जिनकी लागत 2.22 लाख करोड़ रुपए (7 प्रतिशत) है।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु : मदुरांतकम रैली में विजय ने भ्रष्टाचार को लेकर स्टालिन को दी चुनौती

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने शुक्रवार को मदुरांतकम उपचुनाव के लिए आयोजित एक प्रचार रैली में डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन को राजनीति में आने से पहले और बाद की अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने की चुनौती दी।
उन्होंने विपक्ष पर भ्रष्टाचार को बचाने का आरोप भी लगाया।
विजय ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, “हम भ्रष्ट लोगों के गिरोह को नहीं छोड़ेंगे। अब आप तमिलनाडु की जनता को धोखा नहीं दे सकते।” हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई विशेष सबूत पेश नहीं किया।
विजय ने कहा कि उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) ने विधानसभा की 108 सीटें जीतकर सरकार बनाई और राज्य की स्थापित राजनीतिक पार्टियों के सामने एक विकल्प पेश किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी होने के बावजूद एआईएडीएमके और डीएमके ने टीवीके के खिलाफ प्रभावी रूप से हाथ मिला लिया है। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ राजनेताओं पर आरोप लगाया कि उन्होंने दशकों तक सत्ता में रहते हुए जनता के पैसे तक अपनी पहुंच बनाई।
उन्होंने कहा कि सामान्य परिवारों से जुड़े लोगों की पार्टी सरकारी धन का गलत इस्तेमाल किए बिना शासन कर सकती है। हम जनता के पैसे को हाथ नहीं लगाएंगे और न ही किसी दूसरे को इसे हाथ लगाने देंगे।
विजय ने दावा किया कि उनकी सरकार ने विधानसभा में पिछली सरकारों के कथित गलत कामों का मुद्दा उठाया, लेकिन उनसे सबूत मांगे गए और अदालत में चल रहे मामलों पर चर्चा करने को लेकर आपत्ति जताई गई।
उन्होंने कहा कि युवा मतदाताओं को दशकों पुराने भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में जानने का अधिकार है। विजय ने कहा कि वह पिछले 35 वर्षों से राज्य की राजनीतिक व्यवस्था को देखते आ रहे हैं और उस पर सवाल उठाते रहेंगे।
स्टालिन को सीधे चुनौती देते हुए विजय ने पूछा कि क्या डीएमके नेता कह सकते हैं कि उन्होंने कभी जनता के पैसे का गलत इस्तेमाल नहीं किया? क्या वह वादा कर सकते हैं कि उनकी पार्टी भ्रष्टाचार नहीं करेगी?
विजय ने स्टालिन से राजनीति में आने से पहले और बाद की अपनी संपत्ति का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने को भी कहा।
विजय ने कहा कि ये सवाल उनकी पार्टी के चुनाव प्रचार का मुख्य हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा कि डीएमके प्रमुख चुनाव जीतें या हारें, स्टालिन उनके ‘स्वीट अंकल’ हैं।
विजय ने दावा किया कि डीएमके ने अब टीवीके को अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्वीकार करना शुरू कर दिया है। उनकी पार्टी को पूरे तमिलनाडु के सामान्य परिवारों से ताकत मिल रही है।
विजय की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब मदुरांतकम और धारापुरम में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए राजनीतिक दलों ने अपना प्रचार तेज कर दिया है। टीवीके ने मदुरांतकम से मरगथम कुमारवेल को उम्मीदवार बनाया है।
राष्ट्रीय समाचार
गुजरात: भारतमाला एक्सप्रेसवे पर खड़े डंपर से एसयूवी की टक्कर, चार की मौत

शुक्रवार को गुजरात के सूरत जिले के कामरेज के पास भारतमाला एक्सप्रेसवे पर एक एसयूवी की टक्कर में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई।
यह दुर्घटना कामरेज इलाके में तापी ओवरब्रिज के पास हुई, जब महाराष्ट्र से गुजरात की ओर आ रही एसयूवी एक्सप्रेसवे पर रुके हुए डंपर के पिछले हिस्से से टकरा गई।
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कार में सवार चारों लोगों की मौत हो गई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डंपर में हवा का दबाव बिगड़ गया था, जिसके बाद चालक ने वाहन को सड़क पर रोक दिया था।
पीछे से आ रही एसयूवी ने फिर खड़े हुए डंपर से टक्कर मार दी। टक्कर से कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
कार में सवार सभी लोग एक ही परिवार के सदस्य थे, और बताया जा रहा है कि वे मुंबई से पाटन जिले के शंखेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए जा रहे थे।
मृतकों की पहचान राजीव जैन, जयंती दोषी, प्रवीण जैन और संजय खेमचंद के रूप में हुई है।
दुर्घटना के बाद एक्सप्रेसवे पर यातायात अस्थायी रूप से बाधित हो गया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही कामरेज पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।
शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, जबकि यातायात सुचारू रूप से चलाने के लिए क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटा दिया गया।
पुलिस टक्कर के कारणों की जांच कर रही है, जिसमें तकनीकी खराबी की सूचना मिलने के बाद डंपर को एक्सप्रेसवे पर किस तरह खड़ा किया गया था और सामने से आ रही कार ने खड़े वाहन को कैसे टक्कर मारी आदि जानकारी शामिल हैं।
जांच आगे बढ़ने के साथ ही और अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।
इससे पहले, इसी एक्सप्रेसवे पर 8 अप्रैल को एना/दास्तान गांव के पास एक मालवाहक ट्रक के पिछले हिस्से से कार टकराने से खंभात के एक परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई थी।
परिवार किम की ओर जा रहा था। मृतकों की पहचान होजेफा अदेनवाला, मुर्तजा अदेनवाला, मुनीरा अदेनवाला और जॉयब मुर्तजा अदेनवाला के रूप में हुई।
ट्रक का बायां आगे का टायर फट जाने के बाद वह एक्सप्रेसवे पर रुक गया था।
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