महाराष्ट्र
कोरोना वायरस की महामारी से इस बार ईद उल-अज़हा में मवेशी पालकों, किसानों समेत हजारों को होगा नुकसान

कोरोना वायरस महामारी के बीच ईद उल-अज़हा का त्योहार महाराष्ट्र में सादगी से मनाने की तैयारी हो रही है लेकिन इसकी वजह से मवेशी पालकों और किसानों समेत हजारों लोगों को बड़ा आर्थिक नुकसान होने जा रहा है क्योंकि इस दौरान ये लोग अच्छी कमाई कर पाते थे। एक अनुमान के अनुसार ईद उल-अज़हा के अवसर पर प्रत्येक साल देवनार बुचड़खाने में किसान, परिवाहक और कसाई जैसे करीब 5,000 लोग काम से जुड़े होते थे।
इस साल बुचड़खाना एक तरह से खाली है क्योंकि सिर्फ वैसे ही कसाई और कर्मियों को यहां आने की मंजूरी है जिनके पास नगर निकाय का लाइसेंस है। ये ही यहां पर रोजाना की गतिविधियों में शामिल होते दिखते हैं। ईद उल-अज़हा दो हफ्ते बाद है। कोविड-19 महामारी को देखते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश और यहां तक कि महाराष्ट्र के भी अलग हिस्सों से मवेशियों की आमद बंद है। गोवंडी के एक सामाजिक कार्यकर्ता जमीर कुरैशी ने बताया, ‘‘किसान, मवेशी विक्रेता समेत 5,000 लोग इस साल प्रभावित होने जा रहे हैं। नुकसान कम करने के लिए कुछ ने हाउसिंग सोसाइटी में जाकर बकरियां बेचना शुरू कर दिया, जो गैरकानूनी है।’’
उन्होंने दावा किया कि प्रत्येक साल बृह्नमुंबई महानगरपालिका इस त्योहार के दौरान करोड़ों रुपये कमाती है लेकिन अब उसे भी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसी बीच देवनार बुचड़खाने के महाप्रबंधक डॉक्टर योगेश शेटये ने कहा, ‘‘ इस साल महामारी को देखते हुए मवेशियों की खरीद और बिक्री की अनुमति नहीं है और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से भी मवेशियों को नहीं लाया जा सकता है।’’ उन्होंने कहा कि प्रत्येक साल 2.5 लाख से ज्यादा बकरियां और कम से कम 12,000 से 14,000 मवेशी इस त्योहार के दौरान बुचड़खाने लाए जाते थे।
उन्होंने कहा कि अब इस परिसर में बीएमसी का लाइसेंस रखने वाले कसाई ही जा सकते हैं और त्योहार के लिए कोई विशेष तैयारी भी नहीं हो रही है। मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि उत्सव सादे तरीके से हो और अगर संभव हो तो कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से ‘सांकेतिक’ तौर पर ही आयोजित हो। ठाकरे ने एक आधिकारिक बयान में कहा, ‘‘पिछले चार महीने से (कोरोना वायरस महामारी की वजह से लॉकडाउन के बीच) हमने सभी धर्मों के त्योहारों को सीमित तरीके से ही मनाया है। इसी तरह से आने वाला ईद उल-अज़हा भी सादे और नियमों का पालन करते हुए, संभव हो तो, सिर्फ सांकेतिक तरीके से मनाया जाए।’’ उन्होंने कहा कि महामारी एक ‘बड़ी चुनौती’ है इसलिए लोग त्योहार के दौरान भीड़ लगाने से बचें।
महाराष्ट्र
वक्फ संपत्तियों पर भूमि माफिया के खिलाफ संघर्ष : नया संशोधित बिल चुनौतियां बढ़ा रहा है

नई दिल्ली : वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने और उनके लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने की लड़ाई पहले से ही भूमि माफिया, अतिक्रमणकारियों और अवैध समूहों के कारण कठिन थी। अब सरकार द्वारा पेश किया गया नया संशोधित बिल इस संघर्ष में एक और बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। एडवोकेट डॉ. सैयद एजाज अब्बास नक़वी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है और तुरंत सुधारों की मांग की है। उन्होंने कहा कि वक्फ का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाना था, लेकिन दुर्भाग्यवश यह उद्देश्य पूरी तरह असफल हो गया है। दूसरी ओर, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), जो सिख समुदाय की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था है, दशकों से अपने समुदाय के कल्याण में सक्रिय रूप से लगी हुई है। इसके परिणामस्वरूप, सिख समाज में भिखारियों और मानव रिक्शा चालकों की संख्या लगभग समाप्त हो गई है।
वक्फ भूमि पर अवैध कब्जे और दुरुपयोग उजागर :
डॉ. नक़वी के अनुसार, वक्फ संपत्तियों को सबसे अधिक नुकसान स्वार्थी समूहों द्वारा किए गए अवैध अतिक्रमणों से हुआ है। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि कई वक्फ संपत्तियां मूल रूप से सैयद परिवारों की दरगाहों के लिए दान की गई थीं, लेकिन उनका भारी दुरुपयोग किया गया। उन्होंने खुलासा किया कि एक प्रसिद्ध व्यक्ति ने मुंबई के ऑल्टामाउंट रोड पर स्थित एक एकड़ प्रमुख वक्फ भूमि को मात्र 16 लाख रुपये में बेच दिया, जो वक्फ के सिद्धांतों और कानूनों का खुला उल्लंघन है।
धारा 52 में सख्त संशोधन की मांग :
डॉ. नक़वी ने सरकार से वक्फ संपत्तियों को अवैध रूप से बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने वक्फ अधिनियम की धारा 52 में तत्काल संशोधन कर मृत्युदंड या आजीवन कारावास जैसी कड़ी सजा का प्रावधान करने की मांग की है। यह मुद्दा उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है जो वक्फ संपत्तियों की रक्षा के लिए पहले से ही भ्रष्ट तत्वों और अवैध कब्जाधारियों से लड़ रहे हैं। यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इन चिंताओं को गंभीरता से लेती है और वक्फ भूमि की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून लागू करती है।
महाराष्ट्र
मुंबई क्लीनअप मार्शल और स्वच्छ मुंबई अभियान समाप्त, नागरिकों से जुर्माना वसूली पर भी रोक, बीएमसी हेल्पलाइन नंबर जारी

मुंबई: मुंबई बीएमसी ने क्लीन-अप मार्शल नीति को खत्म कर दिया है, जिसके बाद अब शहर की सड़कों से क्लीन-अप मार्शल का नामोनिशान मिट गया है। महानगरपालिका ने क्लीन-अप मार्शल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है और स्वच्छ मुंबई मिशन को बंद कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब कोई भी क्लीन-अप मार्शल नागरिकों को जुर्माना भरने या कोई अन्य दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा। क्लीन-अप मार्शल के खिलाफ शिकायत के बाद मुंबई बीएमसी ने आज से क्लीन-अप मार्शल की सेवा बंद करने और स्थगित करने का फैसला किया है।
मुंबई महानगरपालिका का ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग, कचरा और स्वच्छता विभाग के अंतर्गत, मुंबई में सार्वजनिक स्वच्छता की देखरेख करता है और ‘स्वच्छ मुंबई मिशन’ को 4 अप्रैल, 2025 से बंद कर दिया गया है। हालांकि, महानगरपालिका प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि अगर इसके बावजूद उन पर कोई जुर्माना लगाया गया है, तो वे इसकी शिकायत कर सकते हैं। क्लीनअप मार्शल के बारे में शिकायत मुंबई नगर निगम के डिवीजनल कंट्रोल रूम में 022-23855128 और 022-23877691 (एक्सटेंशन नंबर 549/500) पर की जा सकती है।
महाराष्ट्र
न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक गबन के आरोपियों की संपत्ति जब्त

मुंबई: न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक से करोड़ों रुपये के गबन के मामले में मुंबई आर्थिक शाखा (ईओडब्ल्यू) ने भी संपत्ति जब्ती की कार्यवाही शुरू कर दी है। ईओडब्ल्यू ने बताया कि गबन की रकम से प्राप्त संपत्तियों की पहचान करने के बाद उसे कुर्क कर जब्त कर लिया गया है। इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और इन आरोपियों की 21 अचल संपत्तियां पाई गई हैं, जिन्हें कुर्क करने की अनुमति दी गई है।
मुंबई शहर में 107 बीएनएसएस के तहत यह पहली कार्रवाई है जिसमें आरोपियों की संपत्ति जब्त की गई है। मुंबई एओडब्ल्यू ने कहा कि जब्त संपत्तियों से बरामद राशि का भी अनुमान लगाया जाएगा। मुंबई में हुए बैंक घोटाले के बाद ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की है और आरोपियों की अन्य संपत्तियों का ब्योरा भी खंगाला जा रहा है।
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