अंतरराष्ट्रीय
लिवरपूल में बने रहने के लिए सालाह को मजबूर नहीं किया जा सकता : क्लॉप
इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) की मौजूदा चैंपियन लिवरपूल के कोच जुर्गेन क्लॉप ने कहा है कि ऐसा कोई कारण नहीं है, जिसके चलते फॉरवर्ड मोहम्मद सालाह इस क्लब को छोड़ना चाहेंगे। क्लॉप ने हालांकि साथ ही यह भी कहा कि क्लब को छोड़ने के मामले में वह सालाह की इच्छाओं के खिलाफ नहीं जाएंगे। ईएसपीएन की रिपोर्ट के अनुसार, सालाह ने इस महीने एक स्पेनिश समाचार पत्र को दिए साक्षात्कार में कहा था कि रियल मेड्रिड और बार्सिलोना के क्लब ने उनकी तारीफ की थी। ब्रिटिश मीडिया में सालाह को लेकर ऐसी खबरें थी वह ला लीगा टीम रियल मेड्रिड या बार्सिलोना से जुड़ सकते हैं।
क्लॉप ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ” मुझे लगता है कि फिलहाल लिवरपूल छोड़ने का उनका एकमात्र कारण मौसम है। और क्या कारण हो सकता है?। यह दुनिया की सबसे बड़ी क्लबों में से एक है। हम अच्छे पैसे देते हैं। हमारे पास शानदार स्टेडियम और दर्शक है।”
गौरतलब है कि नौ दिसंबर को एफसी मिडजिलैंड के खिलाफ खेले गए चैम्पियंस लीग मैच से पहले ऐसी उम्मीद की थी जा रही थी कि इस मैच के लिए सालाह को टीम का कप्तान बनाया जाएगा क्योंकि लिवरपूल के कप्तान जॉर्डन हैंडरसन और जिओगिनियो बैंच पर बैठे थे और जेम्स मिलर तथा वर्जिल वान डिक चोटिल थे।
लेकिन लिवरपूल के कोच जुर्गेन क्लोप ने सालाह को कप्तान न बनाकर ट्रेंट एलेक्जैंडर आर्नोल्ड को कप्तान बना दिया था। इस मैच में मौजूदा ईपीएल चैम्पियन लिवरपूल को 1-1 से ड्रॉ खेलना पड़ा था।
क्लॉप ने कहा, ” आप लोगों को यहां रूकने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। हम बदलाव करते हैं और खिलाड़ियों को अंदर लाते हैं। लेकिन अगर कोई खिलाड़ी जाना चाहता है तो हम उन्हें रोक नहीं सकते और शायद उन्हें वापस नहीं लाएंगे।”
इससे पहले, सालाह ने हाल में दूसरे क्लब में जाने की खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि वह लिवरपूल के साथ ही ट्रॉफी जीतना जारी रखना चाहते हैं। सालाह के गोलों ने लिवरपूल की टीम को 2019 में चैम्पियंस लीग ट्रॉफी और 2020 में प्रीमियर लीग खिताब जिताने में मदद की है।
मिस्र के खिलाड़ी ने कहा था, ” मुझे लगता है कि रियल मेड्रिड और बार्सिलोना टॉप के क्लब हैं। हम कभी नहीं जानते हैं कि भविष्य में क्या होने वाला है। फिलहाल मेरा ध्यान लिवरपूल के साथ प्रीमियर लीग और चैम्पियंस लीग खिताब जीतने पर है।”
28 साल के सालाह का लिवरपूल के साथ जून 2023 तक का करार है।
यह पूछे जाने पर कि आप कितने समय तक लिवरपूल में रहेंगे, सालाह ने कहा था, ” यह बताना मुश्किल है। फिलहाल में यह कह सकता हूं कि सब कुछ क्लब के हाथों में है। निश्चित रूप से मैं यहां कई रिकॉर्ड तोड़ना चाहता हूं।”
कोच ने कहा कि सालाह का बयान यह दशार्ता है कि लिवरपूल को छोड़ने की उनकी इच्छा नहीं है।
उन्होंने कहा, ” यदि आप दुनिया के किसी भी खिलाड़ी से पूछो, जो बार्सिलोना या रियल मेड्रिड के लिए नहीं खेल रहे हो और अगर वह एक दिन वहां खेलने की कल्पना कर सकता है तो वह कहेगा, ‘नहीं, स्पेनिश फुटबॉल मेरे लिए नहीं है।’ तो वह ऐसा क्यों कहेंगे?। सालाह मेरे लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय
ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
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