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कच्चे तेल में तेजी से 6.5 प्रतिशत के ऊपर जा सकती है महंगाई दर, आरबीआई को बढ़ानी चाहिए रेपो रेट: एसबीआई रिसर्च
कच्चे तेल में तेजी से 6.5 प्रतिशत के ऊपर जा सकती है महंगाई दर, आरबीआई को बढ़ानी चाहिए रेपो रेट: एसबीआई रिसर्च इसकी वजह वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और कमोडिटी की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई में इजाफा होने की उम्मीद है। यह जानकारी एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में दी गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि अगस्त में महंगाई दर करीब 4.8-4.9 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। अगर कच्चा तेल उच्च स्तर पर बना रहता है तो अक्टूबर और नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत और उससे उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया कि भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते कच्चे तेल का बेंचमार्क 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है और अगले 15 दिनों में इसके 123 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की उम्मीद है।
खुदरा महंगाई बढ़ने के शुरुआती संकेत साफ पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बेवरेज, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स पर दिख रहे हैं और लागत का बढ़ता बोझ अब ग्राहकों पर डाला जा रहा है।
ये सभी कारक मिलकर ब्याज दरों को 50 आधार अंक तक बढ़ाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं।
लिक्विडिटी के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में जुटाए गए फंड काफी हद तक बैंकिंग सिस्टम की फंडिंग की कमी को पूरा करते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, “इसका मतलब है कि क्रेडिट की मजबूत मांग और उसके साथ ही वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के मजबूत आंकड़ों को देखते हुए, अभी जो तेजी आई है, उसमें स्वाभाविक रूप से कमी आएगी।”
इसमें आगे कहा गया कि अगर क्रेडिट की उम्मीद के मुताबिक मांग पूरी हो जाती है, तो वित्त वर्ष 27 के आखिर तक सिस्टम में लिक्विडिटी का स्तर सामान्य हो जाएगा।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि कई संकेतों को देखते हुए, 10-साल के बेंचमार्क भारतीय यील्ड 7.15 प्रतिशत या उससे भी ऊपर जा सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, “हमारा अनुमान है कि वित्त वर्ष 27 के बाकी समय में लिक्विडिटी धीरे-धीरे कम होगी और मार्च 2027 तक यह आदर्श रूप से 6 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर होनी चाहिए।”
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर यील्ड पिछले दस सालों के उच्चतम स्तर से ऊपर जा रहे हैं। इसका एक खास असर यूएस यील्ड में तेजी के रूप में दिख रहा है और 10-साल का यील्ड अब 5 प्रतिशत के करीब पहुंच गया है, जबकि 30-साल का यील्ड घटकर 5.40 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है।
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भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियां सितंबर में तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर, पीएमआई 55.2 रहा

भारत के सर्विसेज सेक्टर में गतिविधियां सितंबर में बीते महीनों में सबसे तेजी से बढ़ी हैं। इसकी वजह मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डर्स का तेजी से बढ़ना था। यह जानकारी मंगलवार को जारी हुए एचएसबीसी इंडिया पीएमआई डेटा में दी गई।
एसएंडपी ग्लोबल की ओर से संकलित किए गए एचएसबीसी इंडिया पीएमआई डेटा में बताया गया कि सितंबर में पीएमआई बढ़कर 55.2 पर पहुंच गया है, जो कि अगस्त में 54.1 पर था। यह जून के बाद पीएमआई का सबसे उच्चतम स्तर है।
सितंबर में नए बिजनेस में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और यह पिछले तीन महीनों में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा है। इस दौरान कंपनियों ने डिजिटल समाधान, खाने-पीने की चीजों, इंश्योरेंस, लोन, सॉफ्टवेयर, ट्रांसपोर्टेशन और टूर-एंड-ट्रैवल के लिए ज्यादा मांग देखी।
एचएसबीसी इंडिया ने कहा कि फाइनेंस, इंश्योरेंस और कंज्यूमर सर्विस सेक्टर की बिक्री में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई।
एचएसबीसी की भारत में मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, “पीएमआई सर्वेक्षण से पता चलता है कि घरेलू मांग बढ़ने की वजह से भारत का सर्विस सेक्टर लगातार बेहतर हो रहा है।”
उन्होंने कहा, “साथ ही, निर्यात का कारोबार भी बढ़ता रहा, हालांकि ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो गई।” उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर में इनपुट लागत का दबाव कम होने से सर्विस प्रोवाइडर्स को अपनी बिक्री की कीमतें बढ़ाने की जरूरत कम पड़ी।
हालांकि, सर्वेक्षण से अनुसार सर्विसेज पीएमआई का औसत जुलाई-सितंबर तिमाही में पिछली तिमाही के मुकाबले कम रहा और इसने मार्च 2022 को खत्म हुई तिमाही के बाद से अपना सबसे कमजोर तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया।
इसके अलावा, भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग में भी सुधार हुआ। कंपनियों ने जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, यूके और अमेरिका से बेहतर कारोबार की सूचना दी।
सितंबर में नए निर्यात बिजनेस में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ गई। हालांकि, बेहतर ऑर्डर बुक और पाइपलाइन में मौजूद प्रोजेक्ट्स ने सर्विस कंपनियों द्वारा और भर्तियां करने में मदद की।
रोजगार में ठीक-ठाक रफ्तार से बढ़ोतरी हुई, हालांकि नौकरी पैदा करने की दर अगस्त के मुकाबले थोड़ी कम हुई।
इनपुट लागत का दबाव भी कम हुआ, क्योंकि इनपुट कीमतों में महंगाई नवंबर 2025 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई।
इसके अलावा, एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स — जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों शामिल हैं — अगस्त के 54.3 से बढ़कर सितंबर में 55.9 हो गया है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य खुलना बेहद जरूरी, घटते तेल भंडार से बढ़ रहा वैश्विक ऊर्जा संकट का जोखिम: सऊदी अरामको सीईओ

सऊदी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमीन नासिर ने सोमवार को चेतावनी दी कि वैश्विक तेल भंडार खतरनाक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह सामान्य नहीं होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों को आगे और आपूर्ति संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।
लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम को संबोधित करते हुए नासिर ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में तेल भंडार बाजार को झटकों से बचाने का काम करते हैं, लेकिन वर्तमान में ये भंडार काफी कम हो चुके हैं, जिससे किसी भी नए संकट का असर अधिक गंभीर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार जारी करने का फैसला अल्पकालिक राहत जरूर दे सकता है, लेकिन इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूद मांग और आपूर्ति के मूल असंतुलन का समाधान नहीं होगा।
नासिर ने कहा कि जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और ईंधन की आवाजाही पूरी तरह सामान्य नहीं होती और बाजार का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन बाजारों पर दबाव बना रह सकता है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए लगभग 10 करोड़ बैरल आपातकालीन तेल और डीजल भंडार जारी करने की योजना की घोषणा की है।
अरामको प्रमुख ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूरी तरह खुल जाने के बाद भी वैश्विक तेल भंडार को दोबारा सामान्य स्तर पर पहुंचाने में करीब दो वर्ष तक का समय लग सकता है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान दबाव केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि मध्यम अवधि तक भी बने रह सकते हैं।
गौरतलब है कि इस वर्ष अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, को प्रभावित किया था। इसके चलते तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
हालांकि, खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक देशों ने निर्यात बहाल करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। नतीजतन, कच्चे तेल की आपूर्ति संघर्ष से पहले के स्तरों के करीब पहुंचने लगी है।
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत ने तेल परिवहन बनाए रखने के लिए अपने स्वयं के टैंकर बेड़ों का उपयोग बढ़ाया है। वहीं सऊदी अरामको ने रास तनुरा टर्मिनल से निर्यात बढ़ाया है और हालिया हमले के बाद प्रभावित हुई ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को भी लगभग 80 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है।
इसके बावजूद बाजार में खतरे की धारणा बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी और लाल सागर में जारी सुरक्षा जोखिमों के कारण तेल बाजार अभी भी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को कीमतों में शामिल कर रहा है।
इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड पिछले एक महीने से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। यह संकेत देता है कि निवेशक अभी भी संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर चिंतित हैं।
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संचार साथी पोर्टल पर विजिट्स 30 करोड़ के पार; 5,000 करोड़ रुपए की साइबर धोखाधड़ी रोकने में मिली मदद

संचार साथी पोर्टल पर मई 2023 में लॉन्च होने के बाद से कुल विजिट्स की संख्या 30 करोड़ से अधिक हो गई है और इससे 5,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के संदिग्ध साइबर-फ्रॉड से होने वाले नुकसान को रोकने में मदद मिली है। यह जानकारी संचार मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।
मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इससे 14 लाख से ज्यादा खोए और चोरी हुए हैंडसेट बरामद करने में भी मदद मिली है। साथ ही, इसने अपने नाम पर मौजूद मोबाइल कनेक्शन के बारे में जानने के लिए नागरिकों के 4 करोड़ से ज्यादा अनुरोधों का समाधान किया गया।
दूरसंचार विभाग (डीओटी) की ओर से विकसित किया गया यह पोर्टल हर मोबाइल यूजर को आसान और इस्तेमाल में सरल टूल देता है, जिनसे वे संदिग्ध कॉल या मैसेज की रिपोर्ट कर सकते हैं, यह जान सकते हैं कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं, खोए या चोरी हुए हैंडसेट को ब्लॉक कर सकते हैं, और हैंडसेट खरीदने से पहले यह पता कर सकते हैं कि वह असली है या नहीं।
मंत्रालय ने बताया कि पोर्टल पर हर विजिट नागरिक की सुरक्षा करती है और उनके द्वारा रिपोर्ट किया गया हर संदिग्ध कम्युनिकेशन कई अन्य लोगों की सुरक्षा करता है। ‘संचार साथी’ पर नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी को ऐसी काम की जानकारी में बदला जाता है, जिससे डीओटी, बैंकों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को धोखेबाजों को उनके अगले शिकार तक पहुंचने से पहले ही रोकने में मदद मिलती है। इस तरह, ‘संचार साथी’ का इस्तेमाल करने वाला हर नागरिक एक साइबर वॉरियर और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक ढाल के तौर पर काम करता है।
संचार साथी पोर्टल को आसान और यूजर-फ्रेंडली सर्विस प्रोसेस के साथ डिजाइन किया गया है। इसमें पब्लिक डैशबोर्ड और टेलीकॉम सुरक्षा, धोखाधड़ी से बचाव और जिम्मेदार डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में व्यापक जानकारी शामिल है। अंग्रेजी, हिंदी और 21 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध संचार साथी मोबाइल ऐप नागरिकों को ये सभी सेवाएं उनकी अपनी भाषा में और मोबाइल पर इस्तेमाल करने की सुविधा के साथ देता है।
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