राजनीति
कमल नाथ को प्रभात झा ने चीनी एजेंट बताया
भारत और चीन की सीमा पर चल रहे तनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ पर बड़ा हमला बोला है और उन्हें चीन का एजेंट करार दिया है। प्रभात झा ने यहां शुक्रवार को संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस के लोग चीन की भाषा क्यों बोल रहे है इसका रहस्योद्घाटन हुआ है। उसमें सबसे बड़ी भूमिका राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ की है। वे जब वाणिज्यमंत्री थे तब चीन के एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे।
झा ने कमल नाथ केा चीनी एजेंट बताए जाने के पीछे तर्क दिया और कांग्रेस के शासन काल का जिक्र करते हुए कहा, “भारत की कांग्रेस पार्टी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बीच बहुत से मुद्दों पर समझौता होता है। देश में जो चीजें बहुत सरलता से उपलब्ध हैं ऐसी चीजों के उपलब्ध हेाने के बावजूद भी 250 चीजों का आयातित करना और उस पर आयातित शुल्क कम करना और उसके जरिए जो आर्थिक लाभ हुआ और पैसा आया उससे कांग्रेस की मदद करना और राजीव फाउंडेशन में देना राष्ट्रीय अपराध है और इसका एक मात्र व्यक्ति जिम्मेदार है उस समय के वाणिज्य मंत्री। यह सब रिकार्ड पर उपलब्ध है।”
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष झा ने कमल नाथ से पूछा है कि उन्हें यह बताना चाहिए कि वे भारत के नागरिक हैं या चीन के एजेंट इसका जवाब उन्हें देना पड़ेगा। यह देश के गांव-गांव और गली-गली में बताया जाएगा, कांग्रेस और राहुल गांधी आखिर चीन की भाषा क्यों बोल रहे है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जेडी वेंस ने पत्नी उषा को दिया आस्था में वापसी का श्रेय, बोले- ‘रिश्ते ने बदली मेरी सोच’

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईसाई धर्म में अपनी वापसी भारतीय-अमेरिकी पत्नी उषा वेंस को इसका श्रेय दिया है। उन्होंने कहा कि अंतर-धार्मिक विवाह में पत्नी के सहयोग और प्यार, परिवार व प्रतिबद्धता के प्रति उनकी सोच पर पड़े प्रभाव ने उनकी आध्यात्मिक यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
न्यूयॉर्क टाइम्स के स्तंभकार रॉस डाउथैट के साथ बातचीत में जेडी वेंस ने कहा कि उषा के साथ उनके रिश्ते ने न सिर्फ उनकी निजी जिंदगी को बदला, बल्कि कई सालों तक नास्तिक रहने और आध्यात्मिक उलझन के बाद आस्था के प्रति उनके नजरिए को भी बदला।
वेंस ने कहा, “मुझे महसूस हुआ कि उषा से प्यार करने पर पता चला कि प्यार में असल में कुछ पवित्र होता है।” अपनी नई किताब पर चर्चा के दौरान जेडी वेंस ने यह टिप्पणी की। इस किताब में जेडी वेंस ने अपने मुश्किल बचपन, आस्था से दूर होने और आखिर में कैथोलिक धर्म अपनाने तक की यात्रा का जिक्र किया है।
वेंस ने बताया कि दादी ही उनके धार्मिक जीवन का मुख्य आधार थीं, लेकिन दादी के निधन के बाद ईसाई धर्म से उनका जुड़ाव कमजोर पड़ गया था। उन्होंने कहा, “जब मेरी दादी का निधन हुआ, तो ईसाई धर्म से मेरा जुड़ाव भी टूट गया। यह कोई संयोग नहीं है कि दादी की मौत के करीब दो साल बाद ही मैंने खुद को नास्तिक कहना शुरू कर दिया था।”
कई सालों तक वे धर्म से दूर रहे। उन्होंने खुद को शिक्षा, करियर की महत्वाकांक्षाओं और निजी उपलब्धियों में लगाए रखा। पीछे मुड़कर देखने पर उन्होंने कहा कि इन चीजों से उन्हें आखिर में कोई संतुष्टि नहीं मिली। उन्होंने कहा, “मुझे एहसास हुआ कि इस तरह की भागदौड़ ने मुझे अंदर से काफी खोखला कर दिया था।”
उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में बदलाव धर्मशास्त्र की वजह से नहीं, बल्कि रिश्तों की वजह से आया। जेडी वेंस ने पत्नी उषा के बारे में विस्तार से बात की, जिनसे उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले शादी की थी। हालांकि उषा ईसाई धर्म को नहीं मानतीं, लेकिन वेंस ने कहा कि धर्म में लौटने के उनके फैसले में उषा का साथ एक अहम वजह बना।
उन्होंने कहा, “सच कहूं तो, अपनी आस्था में लौटने पर मुझे थोड़ा बुरा लग रहा था, क्योंकि मेरे साथ कई तरह की जरूरतें और जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई थीं।”
उपराष्ट्रपति ने बताया कि उनकी पत्नी ने ऐसी जिम्मेदारियां भी उठाईं, जिनकी उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी। वेंस ने कहा, “मैं हर रविवार इस बारे में सोचता हूं, जब मैं अपनी 36 हफ्ते की गर्भवती पत्नी (जो खुद ईसाई नहीं हैं) और अपने तीनों बच्चों के साथ कहीं जाता हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “उषा ने इसके लिए कभी हामी नहीं भरी थी। उन्होंने तो सोचा था कि रविवार को आराम से देर तक सोएंगी और इन सब झंझटों से दूर रहेंगी। लेकिन उषा का रवैया हमेशा सकारात्मक रहा।”
वेंस ने कहा, “वह यह सब बेहद धैर्य के साथ करती हैं। उनका न सिर्फ इसे स्वीकार करना बल्कि मेरी इस यात्रा का समर्थन करना मेरे लिए एक तरह का संकेत था कि मेरे लिए इस रास्ते पर आगे बढ़ना सही है।” वेंस ने कहा कि उषा ने शादी और रिश्तों के बारे में उनकी समझ को पूरी तरह बदल दिया।
उन्होंने कहा, “रिश्तों को लेकर हमारे समाज में यह भावना थी कि रोमांस में कुछ भी पवित्र नहीं है। मुझे लगता है कि सभी ने इसे महसूस किया होगा। जब उन्हें प्यार हुआ, तो यह सोच बदल गई। उषा ईसाई नहीं हैं, फिर भी उन्होंने पुरुष और स्त्री के मिलन के बारे में मेरी सोच को पूरी तरह बदल दिया। बिना जाने ही उन्होंने मुझे इसे एक बेहद ईसाई दृष्टिकोण से देखने में मदद की।”
वेंस ने ईसाई दोस्तों और परिवारों को भी श्रेय दिया, जिन्होंने उन्हें आस्था की ओर लौटने में मदद की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का वे सबसे अधिक सम्मान करते थे, उनमें से कई ईसाई थे और उनकी जिंदगी उन मूल्यों को दिखाती थी जिन्हें वे खुद अपनाना चाहते थे।
जेडी वेंस ने कहा कि पति और पिता बनने के बाद उन्हें जीवन के अर्थ, जिम्मेदारी और उद्देश्य जैसे गहरे सवालों का सामना करना पड़ा। इन्हीं सवालों ने उन्हें आखिरकार ईसाई धर्म की ओर वापस पहुंचाया।
राजनीति
विदेश मंत्री जयशंकर मंगोलिया और दक्षिण कोरिया का करेंगे दौरा, रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को देंगे बढ़ावा

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर 22 से 25 जून तक मंगोलिया और कोरिया गणराज्य की आधिकारिक यात्रा करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत की द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने के साथ ही रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाना है।
विदेश मंत्रालय ने सोमवार को इस दौरे की घोषणा करते हुए कहा कि जयशंकर 24 और 25 जून को दक्षिण कोरिया जाने से पहले 22 और 23 जून को मंगोलिया जाएंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा, “विदेश मंत्री 22 और 23 जून को मंगोलिया जाएंगे। इस दौरे के दौरान वह मंगोलिया के शीर्ष नेतृत्व से मिलेंगे और अपने समकक्ष विदेश मंत्री बी बत्त्सेत्सेग के साथ चर्चा करेंगे।”
बयान में आगे कहा गया, “विदेश मंत्री 24 और 25 जून को दक्षिण कोरिया का दौरा करेंगे। इस दौरे के दौरान जयशंकर दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्युन के साथ बातचीत करेंगे। वह 25 जून को जेजू में जेजू फोरम फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी में मुख्य भाषण भी देंगे।”
मंगोलिया दौरे पर दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग की समीक्षा करने और लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान देने की उम्मीद है।
भारत और मंगोलिया सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और लोकतांत्रिक मूल्यों में निहित घनिष्ठ संबंध साझा करते हैं। भारत और मंगोलिया ने 24 दिसंबर 1955 को राजनयिक संबंध स्थापित किए। मंगोलिया ने अगले वर्ष नई दिल्ली में अपना दूतावास खोला जबकि भारत ने 22 फरवरी 1971 को उलानबटार में अपना रेजिडेंट मिशन खोला। भारत की पहल से राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के स्थिर विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ।
यह यात्रा 13 अक्टूबर 2025 को मंगोलियाई राष्ट्रपति खुरेलसुख उखना की भारत यात्रा के दौरान जयशंकर से मुलाकात के कुछ महीनों बाद हो रही है। इस बातचीत को द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इससे पहले अप्रैल 2026 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति लीजे म्युंग ने भारत का दौरा किया था। इसके बाद अब डॉ. एस जयशंकर के दौरे पर भारत-रिपब्लिक ऑफ कोरिया द्वारा संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण के रोड मैप को आगे बढ़ाने पर बातचीत होने की उम्मीद है।
बातचीत का फोकस सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जरूरी मिनरल और नई तकनीकी में सहयोग होने की उम्मीद है।
दोनों पक्षों के बीच सप्लाई चेन की मजबूती को बल देने, रक्षा सहयोग बढ़ाने और भारत-कोरिया व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) के तहत हुई प्रगति का आकलन करने की कोशिशों की समीक्षा करने की भी उम्मीद है।
इस दौरे से भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। साथ ही, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुख्य साझेदारों के साथ भारत के जुड़ाव को भी मजबूती मिलेगी।
राजनीति
पंजाब की महिलाओं को 1 जुलाई को मिलेंगे तीन महीने के पैसे, अरविंद केजरीवाल के दावे पर कांग्रेस ने घेरा

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत पंजाब की महिलाओं को 1 जुलाई को सम्मान राशि के पैसे मिलेंगे। वहीं, कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस योजना को लेकर सवाल उठाया है।
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा, “पंजाब की सभी मां, बहनों और बेटियों को बहुत-बहुत बधाई। 1 जुलाई को उनके खाते में तीन महीने के पैसे एक साथ आयेंगे। हर सामान्य वर्ग की महिला को तीन हजार और हर अनुसूचित जाति की महिला को 4500 रुपए मिलेंगे। एक परिवार में यदि एक से अधिक महिला हैं तो हर महिला को ये सम्मान राशि मिलेगी। पूरी दुनिया का ये सबसे बड़ा महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम है।”
कांग्रेस के नेता अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने एक्स पर पोस्ट किया है, “1 जुलाई में बस आठ दिन बचे हैं। क्या पंजाब की महिलाओं को पिछले 51 महीनों के बकाया 51,000 रुपये मिलेंगे? बात 3,000 रुपये की नहीं है। बात उन 51,000 की है, जिनका वादा पंजाब की हर पात्र महिला से आप सरकार के सत्ता में आने पर किया गया था। विज्ञापन और प्रचार पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन पंजाब की महिलाएं अभी भी 2022 में किए गए वादे के पूरा होने का इंतज़ार कर रही हैं। 3,000 रुपये देकर गुमराह न करें। बकाया पूरे 51,000 रुपये का भुगतान करें। पंजाब की महिलाएं जवाबदेही की हकदार हैं, बहाने की नहीं।”
गौरतलब है कि पंजाब सरकार ने महिलाओं के लिए ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ के तहत सम्मान राशि का ऐलान किया है। इस योजना के माध्यम से राज्य की सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,000 रुपये प्रति माह और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं को 1,500 प्रति माह दिए जाएंगे। इसकी पहली किस्त के रूप में महिलाओं के बैंक खातों में सीधे तीन महीने (अप्रैल, मई और जून) का एक साथ पैसा 1 जुलाई को ट्रांसफर किया जाएगा।
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