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Saturday,08-August-2026
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फोनपे वॉलेट इनएक्टिविटी नोटिफिकेशन: यूजर्स के लिए क्या जानना है जरूरी?

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हाल ही में फोनपे द्वारा भेजे गए वॉलेट निष्क्रियता (इनएक्टिविटी) नोटिफिकेशन के बाद डिजिटल वॉलेट और उनके काम करने के तरीके को लेकर उपभोक्ताओं की दिलचस्पी बढ़ गई है। इन चर्चाओं के दौरान एक महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि कई यूजर्स अब भी यह मानते हैं कि उनका फोनपे अकाउंट, यूपीआई अकाउंट और फोनपे वॉलेट एक ही चीज हैं। जबकि वास्तव में ये अलग-अलग भुगतान माध्यम हैं, जो स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं।

जैसे-जैसे डिजिटल भुगतान लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है, यह समझना जरूरी है कि वॉलेट कैसे काम करता है और यह यूपीआई से किस तरह अलग है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर निर्णय लेने और इस्तेमाल किए जा रहे उत्पादों को सही तरीके से समझने में मदद मिलती है।

यूपीआई और वॉलेट में क्या अंतर है?

जब आप फोनपे पर यूपीआई के जरिए भुगतान करते हैं, तो पैसा सीधे आपके लिंक किए गए बैंक खाते से कटता है। दूसरी ओर, फोनपे वॉलेट एक प्रीपेड भुगतान साधन (पीपीआई) है, जिसमें पैसा आपके बैंक खाते से अलग रखा जाता है।

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि निष्क्रियता शुल्क (इनएक्टिविटी चार्ज) केवल फोनपे वॉलेट पर लागू होता है, न कि यूपीआई से जुड़े बैंक खातों पर।

वॉलेट निष्क्रियता शुल्क कैसे काम करता है?

कई यूजर्स के मन में यह सवाल है कि यदि उनके वॉलेट में बैलेंस नहीं है, तो क्या फोनपे उनके बैंक खाते से निष्क्रियता शुल्क काट सकता है? इसका जवाब है – नहीं।

यदि किसी यूजर का फोनपे वॉलेट लंबे समय तक निष्क्रिय रहा है और उसमें जीरो बैलेंस है, तो निष्क्रियता शुल्क उसके बैंक खाते या यूपीआई के जरिए वसूला नहीं जाएगा। इसी तरह वॉलेट का बैलेंस भी नकारात्मक नहीं होगा।

दूसरे शब्दों में:

-लिंक किए गए बैंक खाते से कोई कटौती नहीं होगी।

-यूपीआई के माध्यम से कोई राशि नहीं काटी जाएगी।

-अपर्याप्त बैलेंस वाला वॉलेट निगेटिव बैलेंस नहीं दिखाएगा।

नियमित फोनपे उपयोग के बावजूद नोटिफिकेशन क्यों मिल सकता है?

कुछ यूजर्स ने शिकायत की है कि वे फोनपे का नियमित उपयोग करते हैं, फिर भी उन्हें निष्क्रियता नोटिफिकेशन मिला है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वॉलेट गतिविधि और यूपीआई गतिविधि को अलग-अलग ट्रैक किया जाता है।

संभव है कि कोई ग्राहक रोजाना यूपीआई के जरिए क्यूआर कोड भुगतान, बिल भुगतान या पैसे ट्रांसफर करता हो, लेकिन उसका फोनपे वॉलेट महीनों या वर्षों से इस्तेमाल न हुआ हो। ऐसे मामलों में वॉलेट को निष्क्रिय माना जा सकता है, भले ही यूजर नियमित रूप से फोनपे ऐप का इस्तेमाल कर रहा हो।

एडवांस नोटिफिकेशन और यूजर्स के विकल्प

फोनपे के अनुसार, प्रभावित यूजर्स को किसी भी निष्क्रियता शुल्क की कटौती से 15 दिन पहले सूचना दी जाती है।

इस अवधि के दौरान यूजर्स के पास ये विकल्प होते हैं:

-अपने वॉलेट को सक्रिय करना।

-यदि वे वॉलेट का उपयोग जारी रखना चाहते हैं तो उसमें पैसा जोड़ना।

-पात्र बैलेंस को निकाल लेना।

-यह तय करना कि वे वॉलेट बनाए रखना चाहते हैं या नहीं।

केवाईसी को लेकर आम सवाल

कुछ यूजर्स का मानना है कि वॉलेट को दोबारा एक्टिव करने के लिए उन्हें फुल केवाईसी करानी होगी। हालांकि, वॉलेट को एक्टिव करने के लिए न्यूनतम केवाईसी वाले वॉलेट को फुल केवाईसी में बदलना जरूरी नहीं है।

यूजर ओटीपी वेरिफिकेशन पूरा करके और वॉलेट के माध्यम से एक ट्रांजेक्शन करके अपना वॉलेट एक्टिव कर सकते हैं। फुल केवाईसी कराना सक्रियण की अनिवार्य शर्त नहीं है।

वॉलेट बैलेंस और कैशबैक को लेकर भ्रम

कैशबैक से जुड़ा एक और भ्रम भी सामने आया है। कई यूजर्स मानते हैं कि कैशबैक की राशि उनके फोनपे वॉलेट में जमा होती है। जबकि वास्तव में कैशबैक आमतौर पर एक अलग उपहार कार्ड बैलेंस में जमा किया जाता है, जो फोनपे वॉलेट से अलग होता है।

इसलिए कैशबैक प्राप्त होने का मतलब यह नहीं है कि आपका वॉलेट एक्टिव है और न ही इसका अर्थ है कि उस कैशबैक राशि पर वॉलेट निष्क्रियता शुल्क लागू होगा।

वॉलेट बंद करना और ग्राहक सहायता

कुछ यूजर्स ने ऐप के माध्यम से अपना वॉलेट बंद करने की कोशिश के दौरान त्रुटि संदेश या अतिरिक्त सत्यापन जैसी समस्याओं की शिकायत की है।

ऐसी स्थिति में यूजर्स को अकाउंट बंद करने या वॉलेट से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए फोनपे ग्राहक सहायता से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।

निष्क्रियता शुल्क क्यों लिया जाता है?

वॉलेट को प्रीपेड भुगतान साधन के रूप में विनियमित किया जाता है और इसके लिए रखरखाव, अनुपालन और परिचालन सहायता की आवश्यकता होती है, भले ही उनका सक्रिय रूप से उपयोग न किया जा रहा हो।

इसी वजह से कुछ वॉलेट प्रदाता लंबे समय से निष्क्रिय पड़े वॉलेट पर निष्क्रियता या रखरखाव शुल्क लगाते हैं। यह केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रीपेड भुगतान क्षेत्र में कई वॉलेट प्रदाताओं द्वारा अपनाई जाने वाली व्यवस्था है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निष्क्रियता शुल्क केवल फोनपे वॉलेट पर लागू होता है, जो एक अलग प्रीपेड भुगतान साधन है। यह यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होता, बैंक खाते को प्रभावित नहीं करता और वॉलेट को निगेटिव बैलेंस में भी नहीं ले जाता।

जिन यूजर्स को ऐसा नोटिफिकेशन मिला है, उनके लिए सबसे जरूरी कदम यह है कि वे यह जांचें कि उनके पास एक्टिव फोनपे वॉलेट है या नहीं और फिर तय करें कि वे उसे जारी रखना चाहते हैं, दोबारा एक्टिव करना चाहते हैं या बंद करना चाहते हैं।

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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और बेहतर तिमाही नतीजों से घरेलू बाजार ने दर्ज की लगातार दूसरी हफ्ते बढ़त, निवेशकों का भरोसा मजबूत

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कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के उम्मीद से बेहतर कॉरपोरेट नतीजों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया, जिसके चलते भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज की है। हालांकि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन मुनाफावसूली देखने को मिली, फिर भी प्रमुख सूचकांक साप्ताहिक आधार पर सकारात्मक बढ़त के साथ बंद हुए।

सप्ताह के दौरान निफ्टी 0.77 प्रतिशत मजबूत हुआ, लेकिन शुक्रवार को इसमें 0.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 24,570 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 455 अंक यानी 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499 पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह में सेंसेक्स ने 0.52 प्रतिशत की बढ़त हासिल की।

वहीं, व्यापक बाजार ने मुख्य सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 2.73 प्रतिशत उछल गया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान बड़े शेयरों के साथ-साथ मध्यम और छोटी कंपनियों की ओर भी बढ़ रहा है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। मजबूत तिमाही नतीजों और कंपनियों से जुड़े सकारात्मक घटनाक्रमों के चलते निवेशकों का रुझान इस श्रेणी की कंपनियों की ओर बना रहा। दूसरी ओर, पीएसयू बैंकिंग शेयरों में बेहतर बुनियादी स्थिति और मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के कारण अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

मेटल सेक्टर को देश में मजबूत मांग और आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं का फायदा मिला। वहीं ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में भी तेजी रही, क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि आगामी त्योहारी सीजन में वाहनों की मांग मजबूत रहेगी।

सप्ताह की शुरुआत कुछ उतार-चढ़ाव के साथ हुई थी, जिसका कारण फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) सेगमेंट में नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) व्यवस्था का लागू होना था। हालांकि निवेशकों और बाजार प्रतिभागियों के नई व्यवस्था के अनुरूप ढलने के बाद बाजार में स्थिरता लौट आई।

विश्लेषकों का कहना है कि बाजार की धारणा को सबसे अधिक समर्थन कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट से मिला। तेल सस्ता होने से भारत के लिए महंगाई और आयात लागत संबंधी चिंताओं में कमी आई है। इससे आर्थिक परिदृश्य बेहतर हुआ और निवेशकों का विश्वास बढ़ा।

वैश्विक स्तर पर भी बाजार को सहारा मिला। अमेरिका के श्रम बाजार से जुड़े अपेक्षाकृत नरम आंकड़ों के बाद निकट भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों में नरमी आई, जिससे उभरते बाजारों, विशेषकर भारत, के लिए निवेश माहौल बेहतर हुआ।

घरेलू मोर्चे पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं किया, साथ ही विकास दर (जीडीपी ग्रोथ) का अनुमान थोड़ा बढ़ाया और महंगाई का अनुमान कुछ कम किया, जिससे यह संदेश गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है।

इसके अलावा, जारी तिमाही नतीजों के सीजन ने भी बाजार को मजबूती दी है। अधिकांश कंपनियों के परिणाम बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहे हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ी और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ।

आगे की दिशा को लेकर बाजार की नजर अब अमेरिका के रोजगार और महंगाई आंकड़ों पर रहेगी, जिनसे फेडरल रिजर्व की आगामी नीतियों के बारे में संकेत मिल सकते हैं। वहीं घरेलू स्तर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई), थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) और बैंक ऋण वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति और महंगाई के रुख को समझने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और कंपनियों के नतीजे मजबूत बने रहते हैं, तो आने वाले हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार को और समर्थन मिल सकता है।

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सोना इस हफ्ते 6 हजार रुपए से अधिक महंगा हुआ, चांदी 2.3 लाख के पार

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डॉलर इंडेक्स पर दबाव और महंगाई कम होने की संभावना के चलते सोने और चांदी में इस हफ्ते तेजी देखने को मिली, जिससे सोना और चांदी क्रमशः 6 हजार रुपए और 13 हजार रुपए से अधिक महंगे हो गए हैं।

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 6,761 रुपए बढ़कर 1,49,621 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,42,860 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

22 कैरेट सोने की कीमत बढ़कर 1,37,053 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,30,860 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम बढ़कर 1,12,216 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,07,145 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

इस हफ्ते सोने में सबसे न्यूनतम दाम 3 अगस्त को शाम के सत्र में 1,42,557 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 7 अगस्त को शाम के सत्र में 1,49,621 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया।

सोने के साथ चांदी की कीमत में भी तेजी देखने को मिली है।

चांदी का दाम 13,086 रुपए बढ़कर 2,31,381 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,18,295 रुपए प्रति किलो था।

इस हफ्ते चांदी में उच्चतम दाम 7 अगस्त को शाम के सत्र में 2,31,381 रुपए प्रति किलो देखा गया। वहीं, न्यूनतम दाम 3 अगस्त को शाम के सत्र में 2,17,287 रुपए प्रति किलो देखा गया।

आईबीजेए की ओर से दिन में दो बार सुबह और शाम के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों को जारी किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम 4,400 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 63 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में तेजी की वजह कच्चे तेल में कमजोरी आने के कारण महंगाई की संभावना कम होना है। इससे साथ ही डॉलर इंडेक्स के कमजोर होने से कीमती धातुओं में तेजी को सहारा मिला है।

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ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवालों को तेल कंपनियों ने किया खारिज, कहा- जांच में नहीं मिली कोई गड़बड़ी

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देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने शुक्रवार को ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठी चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि देश भर में की गई व्यापक जांच में ईंधन में नमी या क्लोराइड सम्मिश्रण का कोई प्रमाण नहीं मिला है। कंपनियों ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीएमएस) यानी ई20 की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के भीतर है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

तेल कंपनियों ने एक साझा बयान में कहा कि हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में ई20 पेट्रोल में नमी और क्लोराइड की मात्रा को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद पूरे आपूर्ति तंत्र (सप्लाई चेन) में अतिरिक्त और गहन परीक्षण अभियान चलाया गया। जांच के नतीजों में कहीं भी ईंधन के दूषित होने का प्रमाण नहीं मिला और सभी नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए।

कंपनियों ने कहा कि ईंधन की गुणवत्ता उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है। अगर किसी ऐसी समस्या की आशंका होती है जो वाहनों के प्रदर्शन या उपभोक्ताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकती है, तो उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाती है और आवश्यक सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाते हैं।

कंपनियों के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल के लिए क्लोराइड की मात्रा को लेकर कड़े मानक निर्धारित किए हैं। इनका पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरी आपूर्ति शृंखला में उच्च स्तर की निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।

कंपनियों ने आगे बताया कि क्लोराइड का परीक्षण देश भर में विभिन्न स्तरों पर किया जाता है, जिसमें रिफाइनरी, डिस्टिलरी, डिपो, टर्मिनल और पेट्रोल पंप शामिल हैं। इस बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन की गुणवत्ता हर स्तर पर तय मानकों के अनुरूप बनी रहे।

इसके अलावा ईंधन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए सभी पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन 8 से 12 बार पानी की मिलावट और घनत्व की जांच की जाती है। कई स्थानों पर मोबाइल फ्यूल क्वालिटी टेस्टिंग लैब भी तैनात की गई हैं। साथ ही ईंधन के नमूनों की स्वतंत्र परीक्षण प्रयोगशालाओं में भी जांच कराई जाती है।

तेल कंपनियों ने कहा कि सप्लाई चेन के प्रत्येक स्तर पर लागू इस मजबूत और बहुस्तरीय परीक्षण प्रणाली ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत में ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप है।

तेल विपणन कंपनियों ने यह भी बताया कि देशभर की रिफाइनरियों से यादृच्छिक रूप से चुने गए 100 से अधिक अतिरिक्त पेट्रोल नमूनों की क्लोराइड जांच कराई गई। परीक्षण में सभी नमूनों में क्लोराइड का स्तर 1 पार्ट पर मिलियन (पीपीएम) या उससे कम पाया गया, जो निर्धारित सीमा के भीतर है।

कंपनियों के अनुसार, यह परिणाम दर्शाते हैं कि भारत की रिफाइनिंग और ईंधन वितरण प्रणाली में लागू गुणवत्ता नियंत्रण उपाय प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं और ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सामने आई आशंकाओं का कोई आधार नहीं है।

तेल कंपनियों ने भरोसा जताया कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर लगातार सख्त निगरानी रखी जा रही है।

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