राजनीति
राम मंदिर ट्रस्ट की धनराशि का दुरूपयोग, सुप्रीम कोर्ट को जांच का आदेश देना चाहिए: प्रियंका गांधी
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट जमीन की ब्रिकी में करोड़ों रुपए के घोटाले का आरोप लगाते हुए उच्चत्तम न्यायालय से जमीन अधिग्रहण तथा इसकी बिक्री की न्यायिक जांच के आदेश दिए जाने की मांग की है।
उन्होंने गुरूवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा”भगवान राम ईमानदारी का प्रतीक हैं लेकिन अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य से जुड़े ट्रस्ट से भारतीय जनता पार्टी समर्थित नेताओं और अधिकारियों को फायदा हुआ है।”
सुश्री वाड्रा ने कहा “इस मंदिर के निर्माण का कार्य शीर्ष अदालत के आदेश पर किया जा रहा है और इस मामले की पूरी जांच का आदेश न्यायालय को ही देना चाहिए क्योंकि जिला स्तर के अधिकारी इन नेताओं के खिलाफ जांच नहीं कर सकते हैं।”
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस जमीन सौदे में राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों के हस्ताक्षर कागजों पर हैं और राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव चम्पत राय को इस घोटाले की जानकारी है । इसके अलावा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य और ट्रस्ट में शामिल अनिल मिश्रा तथा अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय इस जमीन सौदे में गवाह हैं। इस ट्रस्ट की धनराशि का दुरूपयोग नेताओं और अधिकारियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था। सुश्री वाड्रा ने कहा कि दो करोड़ रुपए कीमत की जमीन को वर्ष 2017 में ट्रस्ट को 26.5 करोड़ रुपए में बेचा गया था।
उन्होंने इस मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा “2.33 हेक्टेयर जमीन को दो करोड़ रुपए में खरीदा गया था और यह जमीन वक्फ की थी और इस मामले में वर्ष 2018 में एक प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी।”
कांग्रेस नेता ने कहा “18 मार्च 2021 को शाम 6.51 बजे इसके सचिव चम्पत राय की तरफ से 10.37 वर्ग गज जमीन को ट्रस्ट को आठ करोड़ रुपए में बेचा गया था। इसके बाद शेष जमीन 12,000 वर्ग मीटर को शाम 7.10 बजे दो करोड़ में बेचा गया था और इसके पांच मिनट बाद इसी जमीन को ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपए में बेच दिया गया। इन तीनों जमीन सौदों में अनिल मिश्रा और ऋषिकेश उपाध्याय बतौर गवाह थे।”
जब उनका ध्यान भाजपा के इस बयान की तरफ दिलाया गया जिसमें कहा गया कि कांग्रेस राम मंदिर निर्माण में अवरोध पैदा कर रही है तो उन्होंने कहा “हम ट्रस्ट की धनराशि को भाजपा की तरफ की जा रही लूट खसोट में अवरोध पैदा करेंगे।”
महाराष्ट्र
मुंबई में लगातार बारिश का असर, विहार झील के बाद तुलसी झील में भी शुरू हुआ ओवरफ्लो

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब शहर की जलापूर्ति करने वाली झीलों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने जानकारी दी कि विहार झील के बाद अब तुलसी झील भी ओवरफ्लो होने लगी है। हालांकि, मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली सभी झीलों में कुल जल भंडारण अभी अधिकतम क्षमता का 41.43 प्रतिशत ही पहुंचा है।
बीएमसी के जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तुलसी झील मंगलवार रात 11:43 बजे ओवरफ्लो होने लगी। इससे कुछ घंटे पहले उसी दिन रात 9 बजे विहार झील भी ओवरफ्लो होकर बहने लगी थी। पिछले कुछ दिनों से झील के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण दोनों झीलें भर गईं।
बीएमसी के जल अभियांत्रिकी विभाग ने बताया कि तुलसी झील मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली 7 प्रमुख झीलों में से एक है। खास बात यह है कि यह उन दो झीलों में शामिल है जो बृहन्मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र के भीतर स्थित हैं। यह झील रोजाना औसतन 1.8 करोड़ लीटर (18 मिलियन लीटर) पानी मुंबई को उपलब्ध कराती है।
तुलसी झील पिछले वर्ष 16 अगस्त 2025 को ओवरफ्लो हुई थी, जबकि 2024 में 4 अगस्त को यह भरकर बहने लगी थी।
तुलसी झील मुंबई नगर निगम मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर (करीब 22 मील) दूर स्थित है। यह एक कृत्रिम झील है, जिसका निर्माण वर्ष 1879 में पूरा हुआ था। उस समय इस झील के निर्माण पर लगभग 40 लाख रुपए खर्च किए गए थे।
झील का कैचमेंट एरिया लगभग 6.76 किलोमीटर है, जबकि पूरी तरह भरने पर इसका जल क्षेत्रफल लगभग 1.35 वर्ग किलोमीटर हो जाता है। पूरी क्षमता से भरने पर इसमें 804.6 करोड़ लीटर (8046 मिलियन लीटर) उपयोग योग्य पानी संग्रहित किया जा सकता है। यही वजह है कि इसे मुंबई को पानी सप्लाई करने वाली झीलों में सबसे छोटी झील माना जाता है।
बीएमसी ने यह भी बताया कि जब तुलसी झील पूरी तरह भर जाती है, तो उसका अतिरिक्त पानी विहार झील में पहुंचता है। लगातार हो रही बारिश के कारण आने वाले दिनों में शहर की अन्य जलापूर्ति झीलों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद लाल निशान में खुला शेयर बाजार; सेंसेक्स 78,000 के नीचे फिसला

अमेरिका के ईरान पर हमले के बाद भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बुधवार को लाल निशान में हुई। सुबह 9:22 पर सेंसेक्स 407 अंक या 0.52 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 77,772 अंक और निफ्टी 134 अंक या 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,264 पर था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 169 अंक या 0.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,116 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 55 अंक या 0.29 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,164 अंक पर था।
सूचकांकों में सबसे अधिक दबाव ऑयल एवं गैस और ऑटो स्टॉक्स पर देखा जा रहा था। निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी ऑटो टॉप लूजर थे। इसके बाद निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी एफएमसीजी लाल निशान में थे। निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी आईटी और निफ्टी इंडिया डिफेंस हरे निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस, टीसीएस, पावर ग्रिड और टेक महिंद्रा गेनर्स थे। इंडिगो, एशियन पेंट्स, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एमएंडएम, इटरनल, एचयूएल , अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, बीईएल, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, ट्रेंट और भारती एयरटेल लूजर्स थे।
वैश्विक बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। टोक्यो और सोल लाल निशान में थे, जबकि शंघाई और हांगकांग हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को लाल निशान में बंद हुए थे।
बाजार में गिरावट की वजह अमेरिका की ओर से ईरान पर ताजा हमले करना और ईरान के तेल बेचने के लाइसेंस को रद्द करना है।
अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरान पर नए हमले हॉर्मुज के गुजर रहे तीन तेल से लदे जहाजों पर हमले के बाद किए गए हैं। इससे दोनों देशों में फिर से तनाव बढ़ गया है।
इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 76.13 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.64 प्रतिशत की मजबूती के साथ 72.33 डॉलर प्रति बैरल पर था।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान का दावा, ‘अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों पर की जवाबी कार्रवाई’

मध्य पूर्व के हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं। यूएस सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद आईआरजीसी ने भी अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का दावा किया। इस बीच बहरीन और कुवैत में लगातार एयर रेड सायरन बज रहे हैं। कई जगह धमाके सुनाई दिए हैं। कुवैत ने एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव कर दिया है।
ईरानी सेना ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी ईरान पर अमेरिका के हमलों के जवाब में बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी बलों को निशाने पर लेते हुए ड्रोन हमला किया।
सेना ने कहा, “अमेरिका के संघर्ष विराम का बार-बार और खुलेआम उल्लंघन करने के गंभीर परिणाम होंगे और क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने अब सैन्य ड्रोन हमलों के वैध लक्ष्य होंगे।” यह बयान ऐसे समय आया है, जब बहरीन ने बुधवार सुबह दूसरी बार सायरन बजने की जानकारी दी।
बहरीन के गृह मंत्रालय ने इसकी पुष्टि करते हुए लोगों से शांत रहने और तुरंत नजदीकी सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है।
इससे पहले, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया था कि उसने दक्षिणी ईरान के प्रांतों पर हुए हमलों के जवाब में बहरीन और कुवैत स्थित 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हमलों में बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के मुख्यालय और कुवैत के अली अल-सलेम एयर बेस को निशाना बनाने का दावा किया गया था।
वहीं, अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका पर समझौते की पांच शर्तें तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिका लगातार समझौते का उल्लंघन कर रहा है।
गालिबाफ के मुताबिक, “अमेरिका ने होर्मुज में ईरान के अधिकारों में दखल दिया, लगातार सैन्य हमलों की धमकी दी, ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंध फिर से लागू किए, दक्षिणी ईरान पर एयरस्ट्राइक की और लेबनान में जारी इजराइली सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया।”
तो अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले के बाद कहा कि ईरान के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर सटीक हमला किया गया। इसके अलावा होर्मुज में ईरान की 60 से ज्यादा छोटी मिलिट्री बोट्स को भी निशाना बनाया गया।
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