महाराष्ट्र
मुंबई में बारिश से पेड़ गिरने की घटनाओं में बढ़ोतरी, पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं : म्युनिसिपल कमिश्नर।
मुंबई में बारिश के दौरान बेहतर इंतज़ाम सड़कों पर पंपिंग और ड्रेनेज और दूसरे कामों में बीएमसी काफी सफल रही है और बारिश के दौरान भी बीएमसी के अधिकारी और कर्मचारी सड़क पर थे। यह दावा मुंबई म्युनिसिपल कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने किया है। मुंबई में बारिश 1 जुलाई 2026 से 7 जुलाई 2026 तक मुंबई में 300 एमएम से ज़्यादा बारिश हुई। मुंबई में दिल्ली, पुणे और बेंगलुरु शहरों से ज़्यादा बारिश हुई। छह पंपिंग स्टेशन, नौ मिनी पंपिंग स्टेशन और 540 सबमर्सिबल पंप की मदद से जमा पानी की तेज़ी से निकासी की गई। भारी बारिश के दौरान भी मुंबई में सड़क और रेल यातायात आसानी से चलता रहा। पानी की सप्लाई
07 जुलाई 2026 तक मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले 7 तालाबों में पानी का स्टोरेज = 28.92%6 जुलाई 2026 को सुबह 6 बजे से 7 जुलाई 2026 को सुबह 6 बजे तक 24 घंटों में पानी का स्टोरेज 12% बढ़ा।
07 जुलाई 2025 तक पानी का स्टोरेज 67.88% था। मुंबई को पानी सप्लाई करने वाले 7 तालाबों के इलाके में अभी तक उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है। उपलब्ध पानी के स्टोरेज का रेगुलर रिव्यू किया जा रहा है और हालात के हिसाब से पानी की कमी के बारे में सही फैसले लिए जाएंगे।
सड़कें और ट्रांसपोर्ट
2,118 किलोमीटर. मुंबई में रोड नेटवर्क का रखरखाव नगर निगम करता है। 700 किलोमीटर सड़कों की सीमेंट कंक्रीटिंग दो फेज में शुरू हो चुकी है। जिसमें से 577.46 किलोमीटर सड़कों की कंक्रीटिंग पूरी हो चुकी है। बाकी सड़कों पर काम चल रहा है। कंक्रीटिंग फेज़-1 का 89.81% और फेज़-2 का 73.72% काम पूरा हो चुका है। गड्ढों की समस्या कम हुई है और गड्ढे भरने का खर्च 35% बचा है। ईस्टर्न एक्सप्रेसवे और वेस्टर्न एक्सप्रेसवे कंक्रीट की नहीं बल्कि बिटुमिनस सड़कें हैं। इन हाईवे पर गड्ढे वाली जगहों पर काम पहले ही हो चुका है।
गड्ढों को भरने के लिए एक कॉन्ट्रैक्टर रखा गया है। मानसून का मौसम खत्म होते ही इन दोनों सड़कों की ‘रीसरफेसिंग’ की जाएगी।
7) गड्ढों की शिकायतों के समाधान के लिए एक अलग ऐप उपलब्ध है। ‘मार्ग’ जैसा शिकायत रजिस्ट्रेशन सिस्टम है। अखबारों और मीडिया के ज़रिए भी जानकारी मिलती है। जिससे पहले के मुकाबले गड्ढों पर ध्यान देने और कार्रवाई करने की स्पीड बढ़ गई है।
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नालों की सफाई
नदियों/नालों की रेगुलर सफाई होती है। गाद निकाली जाती है। जब कम समय में 300 एमएम बारिश होती है और उसी समय समुद्र का लेवल साढ़े चार मीटर बढ़ जाता है, तो मुंबई जैसे शहर में पानी जमा होना स्वाभाविक है, जो तीन तरफ से समुद्र से घिरा है और जिसका ‘रिक्लेमेशन’ हो चुका है।
3) नगर निगम इन समस्याओं को हमेशा के लिए हल करने के लिए नेशनल डिजास्टर रिलीफ फंड से फंड लेने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह IIT बॉम्बे की मदद से एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट तैयार कर रहा है। 300 से 350 ‘फ्लड पॉइंट्स’ को कम करने के लिए एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसमें नए पंपिंग स्टेशन बनाना, पंपिंग स्टेशनों की कैपेसिटी बढ़ाना, ऑटोमैटिक फ्लड कंट्रोल गेट लगाना और सीवरेज चैनलों के नेटवर्क को मजबूत करना शामिल है।
4) नागरिकों से अनुरोध है कि वे ठोस कचरा और तैरता हुआ कचरा नदियों और नालों में न फेंकें।
पिछले दो दिनों में तेज हवाओं के कारण पेड़ों के गिरने की संख्या में बढ़ोतरी
मानसून के दौरान हर साल तेज हवाएं चलती हैं, लेकिन इस साल पिछले चार-पांच दिनों से 50 से 70 किलोमीटर की स्पीड से हवाएं चल रही हैं। जिसकी वजह से इस मॉनसून में पेड़ों को बहुत नुकसान हुआ। हर साल मॉनसून में या अलग-अलग वजहों से पेड़ गिरते हैं। इस साल, एक साल में गिरने वाले पेड़ों में से 50% पेड़ सिर्फ़ एक दिन में गिर गए। 2022 में 655 पेड़ गिरे। 2023 में 687, 2024 में 653 और 2025 में 855 पेड़ गिरे। जबकि 2026 में 830 पेड़ गिरे। 830 में से 480 पेड़ प्राइवेट सेक्टर में थे। जितनी टहनियाँ होती हैं, उतने ही पेड़ गिरते हैं। इस साल 1,238 टहनियाँ गिरीं। इनमें से 709 प्राइवेट सेक्टर में थीं।
मुंबई में सड़क के दोनों ओर पेड़ों की जड़ों तक पानी पहुँचाने के लिए कदम उठाए जाएँगे
2018 के ट्री सेंसस के मुताबिक, मुंबई में 29 लाख 75 हज़ार पेड़ हैं। इनमें से 2 लाख पेड़ सड़क के दोनों ओर हैं। सड़क के किनारे लगे पेड़ बहुत खतरनाक होते हैं। कई पेड़ सड़क के किनारे फुटपाथ पर हैं। इसके अलावा, सड़क के नीचे पानी ले जाने वाले गटर या दूसरे चैनल भी हो सकते हैं। सड़कें कंक्रीट की हो गई हैं, कुछ जगहों पर पेवर ब्लॉक बिछाए गए हैं। इसलिए, ऐसे पेड़ों की जड़ों तक पानी पहुंचाना ज़रूरी है। जड़ें दूर तक फैली होती हैं। इसलिए, नगर निगम इस पर भी विचार कर रहा है कि क्या यह अनुमान लगाया जा सकता है कि संबंधित पेड़ों की जड़ें कितनी दूर तक फैली हैं और उस हद तक छेद करके उन पर जाल लगाकर पानी डाला जा सकता है। ऐसा एक्सपेरिमेंट पहले मालाबार हिल इलाके में किया जा चुका है।
पेड़ों की देखभाल के लिए एक्सपर्ट्स की मदद ली जाएगी
हम मुंबई यूनिवर्सिटी के कुछ एक्सपर्ट्स, जैसे डॉ. संजय देशमुख और आईआईटी से जानकारी लेकर इस बारे में जानेंगे। पेड़ों की जड़ों तक पानी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है जो ज़मीन में बहुत अंदर तक जाती हैं। हम पेड़ों की साइंटिफिक प्रूनिंग पर भी ज़ोर देंगे। सड़कों के किनारे लगे 2 लाख पेड़ों में से नगर निगम ने इस साल 1 लाख पेड़ काटे हैं। इसके साथ ही इन पेड़ों का सर्वे किया जाएगा और जहां ज़रूरी होगा, उन्हें काटा जाएगा। इसके लिए पक्का तरीका इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए एक्सपर्ट की राय भी ली जाएगी।
अलग-अलग अंडरग्राउंड चैनलों पर काम करते समय सावधानी बरती जाएगी।
कई पेड़ 50 से 60 साल पुराने हैं। उनकी जड़ें बहुत गहरी हो गई हैं। इसके लिए सड़कें बनाई गईं।
महाराष्ट्र
घाटकोपर रोड चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर गिराए गए

मुंबई ; घाटकोपर (वेस्ट) में झुनझुनवाला कॉलेज और अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड के बीच सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर को गिराने का अभियान कल (7 अक्टूबर, 2026) मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ‘एन’ वार्ड (एन वार्ड) ऑफिस द्वारा चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व असिस्टेंट कमिश्नर (‘एन’ वार्ड) जयदीप मोरे ने किया। ऑपरेशन के दौरान म्युनिसिपल अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पर्याप्त पुलिस सुरक्षा भी तैनात की गई थी।
महाराष्ट्र
नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर बस दुर्घटनाग्रस्त; 2 यात्रियों की मौत और 6 घायल

महाराष्ट्र के नासिक जिले के पेठ तालुका में करंजाली के निकट सावलघाट क्षेत्र में नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में दो यात्रियों की मौत हो गई जबकि छह यात्री घायल हुए हैं।
जिला नियंत्रण कक्ष को दुर्घटना की सूचना 6 अक्टूबर की रात 11 बजे प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के समन्वय के लिए दो पुलिस निरीक्षक और एक अनुविभागीय पुलिस अधिकारी तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हुए। बस में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया और घायलों को अलग-अलग एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए नाशिक लाया गया।
रात 00:30 बजे से 02:15 बजे के बीच नासिक सिविल अस्पताल में आठ लोगों को लाया गया। इनमें सात व्यक्ति जीवित थे जबकि एक व्यक्ति को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। इसके अलावा दुर्घटना में एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हुई है। वर्तमान में दो घायल मरीज सिविल अस्पताल में भर्ती हैं जबकि अन्य घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें अस्पताल में भर्ती किए बिना छुट्टी दे दी गई।
हादसे में घायल प्रमिला राउत (53) को गंभीर चोट के कारण सिविल अस्पताल के ई-वार्ड में भर्ती किया गया है। वहीं, बाल विमल जगदीश (65) के बाएं हाथ की ह्यूमरस हड्डी में फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें एमओडब्ल्यू वार्ड में भर्ती किया गया है। अन्य घायलों में यश देसाई, आरती देसाई, नयन वासोने तथा स्वाति सुरेश बडाणे शामिल हैं।
दुर्घटना में राहुल ओझा और महेंद्र पाल (48) की मौत हुई है। महेंद्र पाल को सिविल अस्पताल, नासिक में मृत अवस्था में लाया गया था। मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पेठ तालुका के सावलघाट क्षेत्र में हादसे के समय बादल और कोहरे की स्थिति के कारण दृश्यता काफी कम थी। प्रशासन की प्राथमिक जांच में कम दृश्यता को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना गया है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर संबंधित एजेंसियों की जांच जारी है।
महाराष्ट्र
‘विद्यार्थियों की मांग नहीं मानी तो पूरा महाराष्ट्र बंद करेंगे,’ मनोज जरांगे पाटिल की सरकार को चेतावनी

महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर पुणे में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन का जमीनी नेतृत्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं। इस बीच मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरंगे पाटिल भी आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, “बच्चों, अगर इन लोगों ने आपकी बात नहीं सुनी तो यहां बैठे सभी नेताओं से भी कहता हूं और आपसे भी कहता हूं, आपके लिए पूरा महाराष्ट्र बंद कर देंगे। इन्हें क्या हो गया है, इन्हें घमंड हो गया है।”
उन्होंने छात्रों से कहा, “आपके साथ हुआ अन्याय जाति से परे है। अगर मैं जातिवादी होता तो यहां नहीं आता। यहां महाराष्ट्र के किसानों के बच्चे बैठे हैं और मैं किसान का बेटा बनकर आया हूं, जाति के नाम पर नहीं।”
जरांगे पाटिल ने कहा कि आरक्षण की मांग करने का मतलब यह नहीं है कि वे छात्रों को उनके हाल पर छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि मेहनतकश माता-पिता की उम्मीद है कि उनके बेटे और बेटियां भी अधिकारी बनें और सरकार को इस भावना को समझना चाहिए।
छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने को राजनीति बताने पर भी जरांगे पाटिल ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि क्या सरकार चाहती है कि छात्रों के पीछे कोई खड़ा न हो और उन्हें कोई ताकत न मिले।
उन्होंने पूछा, “रोहित दादा राजनीतिक नेतृत्व करते हैं, इस पर किसी को संदेह है तो राज्य सरकार मुझे इसका जवाब दे। इससे पहले एमपीएससी में दो साल की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। क्या वह राजनीतिक था? फिर यह आंदोलन राजनीतिक कैसे हुआ? आज बच्चे अनशन पर बैठे हैं। उनकी जान का क्या? उनके सवालों का क्या? आप हर बात को राजनीतिक रंग क्यों देंगे?”
पत्रकारों से बातचीत में जरांगे पाटिल ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और सीएम फडणवीस को जवाब देना चाहिए। गृहमंत्री के तौर पर उन्हें विद्यार्थियों का दिल जीतने का काम करना चाहिए।
छात्रों के बीच तीन गुटों में आंदोलन होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “न कांग्रेस आपकी है, न राष्ट्रवादी आपकी है, न भाजपा आपकी है, न शिवसेना आपकी है, न महायुति आपकी है, न महाविकास आघाड़ी आपकी है। हमारे असली हीरो हमारे माता-पिता हैं। वे मेहनत करके हमें पढ़ाते हैं।”
उन्होंने कहा कि आंदोलन तीन जगह हो या एक जगह, न्याय छात्रों को ही चाहिए। मुख्यमंत्री को सभी आंदोलनों पर तत्काल ध्यान देकर उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए और उनका विश्वास जीतना चाहिए। उन्होंने छात्रों से एकजुट रहने की अपील भी की।
सरकार के मंत्री और विधायक एक आंदोलन की ओर जा रहे हैं जबकि दूसरे आंदोलन की ओर सरकार का प्रतिनिधिमंडल नहीं आया है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को सभी जगह जाना चाहिए और छात्रों की राय सुननी चाहिए।
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