खेल
आईपीएल-13 : दिल्ली को हरा मुंबई ने जीता पांचवां खिताब
मुंबई इंडियंस ने मंगलवार को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए खिताबी मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स को पांच विकेटों से हरा आईपीएल के 13वें सीजन का खिताब अपने नाम कर लिया। मुंबई का यह पांचवां आईपीएल खिताब है। इससे पहले उसने 2013, 2015, 2017 और 2019 में आईपीएल ट्रॉफी जीती थी। दिल्ली पहली बार फाइनल खेल रही थी, लेकिन खिताब नहीं जीत सकी।
दिल्ली ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 156 रन बनाए। मुंबई ने 18.4 ओवरों में यह लक्ष्य पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया।
मुंबई के लिए कप्तान रोहित शर्मा ने 68 रन बनाए। अपनी पारी में कप्तान ने 51 गेंदों का सामना किया जिनमें से पांच पर चौके और चार पर छक्के लगाए। ईशान किशन ने 19 गेंदों पर नाबाद 33 रन बनाए।
दिल्ली के लिए ऋषभ पंत ने 38 गेंदों पर चार चौके और दो छक्कों की मदद से 56 रन बनाए। कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ उन्होंने तीसरे विकेट के लिए 96 रनों की साझेदारी की।
अय्यर ने नाबाद 65 रनों की पारी खेली। अपनी पारी में कप्तान ने 50 गेंदों का सामना कर छह चौके और दो छक्के लगाए हैं।
मुंबई के लिए ट्रेंट बाउल्ट ने तीन, नाथन कुल्टर नाइल ने दो विकेट लिए।
खेल
‘जब गोल्ड जीतने पर राष्ट्रगान बजा, वह पल शानदार था,’ एरोबिक जिम्नास्टिक्स में इतिहास रचने के बाद अरिहा ने साझा किए अनुभव

भारतीय एयरोबिक जिम्नास्ट अरिहा पंगमबम ने कुछ हफ्तों पहले एशियन एयरोबिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता था, जिसके साथ वह एशियन चैंपियनशिप में सीनियर महिला व्यक्तिगत श्रेणी में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। फिलीपींस में हुए फाइनल में उन्होंने 19.100 अंक हासिल किए, जिसमें आर्टिस्ट्री (कलात्मकता) में 8.650, एग्जीक्यूशन (प्रदर्शन) में 7.600 और डिफिकल्टी (कठिनाई) में 2.850 अंक शामिल थे।
इस उपलब्धि के बाद अरिहा ने ‘आईएएनएस’ के साथ बातचीत में कहा, “जब मुझे यह गोल्ड मेडल मिला, तो वह पल बहुत शानदार था। मैं इसे शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती। जब मैंने पोडियम पर अपने देश का राष्ट्रगान बजते हुए सुना, तो उस पल मुझे गर्व भी महसूस हुआ क्योंकि मैं कुछ हासिल कर पाई थी, सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए। वह बहुत शानदार अनुभव था और मैं उस समय बहुत खुश थी।”
22 वर्षीय जिम्नास्ट ने कहा, “हम डबल फ्लेक्स फ्लोर, यानी लकड़ी का फ्लोर इस्तेमाल करते हैं। भारत में उत्तराखंड में एक फ्लोर है जो हमें नेशनल गेम्स के दौरान मिला था, लेकिन दुर्भाग्य से, न सिर्फ मैं, बल्कि पूरे भारत के ज्यादातर जिम्नास्ट उस पर ट्रेनिंग भी नहीं कर पाए। हम आमतौर पर रबड़ इंटरलॉकिंग मैट पर ट्रेनिंग करते हैं, इसलिए सिर्फ एक दिन में तालमेल बिठाना हमारे लिए बहुत मुश्किल होता है। प्रतियोगिता से पहले हमें खुद को ढालने के लिए एक दिन की पोडियम ट्रेनिंग दी जाती है, इसलिए हममें से ज्यादातर जिम्नास्ट को मुश्किल होती है, क्योंकि हमें उस फ्लोर पर कभी ठीक से ट्रेनिंग करने का मौका नहीं मिला। यही वह मुश्किल थी जिसका हमने सामना किया।”
उन्होंने कहा, “मुझे खुद पर बहुत गर्व था, और यह बहुत शानदार था क्योंकि हमने कभी अपना राष्ट्रगान बजते हुए नहीं सुना था। हम बस दूसरे देशों का राष्ट्रगान बजते हुए सुनते थे, और मैं सोचती थी कि पोडियम पर हमारा राष्ट्रगान कब सुनाई देगा? तो जब इस साल मुझे मेडल मिला और हमारा राष्ट्रगान बजा, तो वह वाकई बहुत शानदार अनुभव था। मैं इसे शब्दों में बयां भी नहीं कर सकती। यह न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि हमारी पूरी टीम के लिए एक बहुत बड़ा पल था।”
“कोच ने मेरा काफी मार्गदर्शन किया है। सिर्फ जिम्नास्टिक्स में स्किल्स या मुश्किल एलिमेंट्स सीखने में ही नहीं, बल्कि आमतौर पर भी उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया है। वे कभी पढ़ना नहीं छोड़ते, कभी सीखना नहीं छोड़ते। उन्हें देखकर ही मुझे बहुत प्रेरणा मिलता है। चूंकि, मैंने फिजिकल एजुकेशन लिया है, इसलिए ट्रेनिंग के दौरान भी वे मुझे बायोमैकेनिक्स और एनाटॉमिकल टर्म्स सिखाते थे, ताकि मैं स्किल्स और जो हम कर रहे हैं, उसे गहराई से समझ सकूं। उन्होंने सफल एथलीट्स की कई कहानियाँ सुनाकर हमें मोटिवेट भी किया, ताकि मुझे हार न मानने और अपने लक्ष्यों के लिए आगे बढ़ने की वजह मिल सके। हालांकि प्रतियोगिता के समय मेरा परिवार वहां मौजूद नहीं था। असल में, मेरी बहन मेरे साथ उसी कैटेगरी में कॉम्पिटिशन में हिस्सा ले रही थी, जो हमारे लिए एक बहुत अच्छा पल था, लेकिन मेरे माता-पिता घर पर लाइवस्ट्रीम के जरिए इसे देख रहे थे। मेरे फोन करने से पहले ही उन्होंने मुझे फोन किया और वे बहुत खुश थे।”
डेलिगेशन के हेड इंदरजीत सिंह राठौर ने कहा, “उस जीत का अहसास बहुत शानदार था। हमने जो हासिल किया है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। असल में, पूरे भारत को भी वैसा ही महसूस हुआ होगा। जब पोडियम पर राष्ट्रगान बजता है और भारत का झंडा सबसे ऊपर होता है, तो यह कोई मामूली बात नहीं होती। जब अरिहा ने ऐसा किया, तो हमारी 49 लोगों की पूरी टीम खुशी से रो पड़ी। यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी।”
उन्होंने कहा, “मैं बस यही सोच रहा था कि अगर हमने एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है, तो भविष्य में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल जीत सकते हैं। मुझे अपने खिलाड़ियों, बच्चों और कोचों की काबिलियत पर भरोसा है; उन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, और हमें उम्मीद है कि इस बार हम वर्ल्ड कप में और भी मेडल जीतेंगे। बेशक, दूसरे देशों के मुकाबले हमारे पोडियम और इंफ्रास्ट्रक्चर उतने अच्छे नहीं हैं। लेकिन इसके बावजूद हमने यह कामयाबी हासिल की। हमारे जिम्नास्ट्स की काबिलियत की वजह से, सही पोडियम न होने पर भी उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन भविष्य में, हमें उम्मीद है कि बड़ी कंपनियां और सरकार हमें अच्छा पोडियम इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेंगी ताकि हम और भी मेडल जीत सकें। अरिहा निश्चित रूप से बहुत अच्छा कर रही है। वह नेशनल चैंपियन है और अब एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडलिस्ट भी बन गई हैं। मुझे उसके लिए वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी सफलता की उम्मीद है। उसे जिस भी मदद या सपोर्ट की जरूरत होगी, मैनेजमेंट टीम उसके साथ है।”
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
खेल
गीतिका जाखड़: अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित होने वालीं पहली भारतीय महिला पहलवान, कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता सिल्वर मेडल

गीतिका जाखड़ की गिनती भारत की मशहूर महिला पहलवानों में की जाती है। महज 13 साल की उम्र में अखाड़े में कदम रखने वालीं गीतिका को पहलवानी का खेल विरासत में मिला। गीतिका ने एशियाई खेलों के साथ-साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में भी देश के लिए शानदार प्रदर्शन किया।
गीतिका का जन्म 18 अगस्त, 1985 को हरियाणा के हिसार जिले के अग्रोहा गांव में हुआ। गीतिका के घर में शुरुआत से ही खेलकूद का माहौल था। उनके दादा खुद पहलवान रहे जबकि पिता स्पोर्ट्स अफसर थे। गीतिका को भी बचपन से ही इस खेल से खास लगाव हो गया और उन्होंने 13 साल की उम्र में पहली बार अखाड़े में कदम रखा। महज 15 साल की उम्र में गीतिका ने भारत केसरी का खिताब अपने नाम किया और अगले 9 साल लगातार इस खिताब को जीतने में सफल रहीं। इसके बाद गीतिका ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
2003 और 2005 के कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गीतिका का जलवा देखने को मिला और वह गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहीं। वहीं, साल 2007 में उन्होंने सिल्वर मेडल पर कब्जा जमाया। नेशनल गेम्स में दमदार प्रदर्शन के लिए गीतिका को ‘भीम पुरस्कार’ से भी नवाजा गया। पहलवानी के खेल में देश का नाम रोशन करने के लिए गीतिका को साल 2006 में भारतीय सरकार द्वारा ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। वह यह पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।
गीतिका का एशियाई खेलों में भी दबदबा रहा। उन्होंने 2006 में सिल्वर मेडल अपने नाम किया, जबकि 2014 में हुए एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता। साल 2007 में गीतिका नेशनल गेम्स और सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने में सफर रहीं। गीतिका को 2009 में कल्पना चावला उत्कृष्टता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। 2011 में गीतिका नेशनल चैंपियनशिप जीतने वाली सबसे कम उम्र की पहलवान बनीं। 2014 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गीतिका ने दमदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। गीतिका ने साल 2019 में हरियाणा पुलिस में डीसपी पद पर रहते हुए विश्व कुश्ती खेल (पुलिस) में 60 किलोग्राम में सिल्वर मेडल जीता।
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