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Wednesday,17-June-2026
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आईपीएल-13 : 13वें प्रयास में पहली बार चैम्पियन बनना चाहेंगे दिल्ली कैपिटल्स

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Delhi-Capitals

दिल्ली कैपिटल्स आईपीएल की उन टीमों में से एक है जिससे उम्मीदें तो काफी रही हैं लेकिन यह टीम खिताब अभी तक नहीं जीत सकी है। पहले दिल्ली डेयरडेविल्स के नाम से जानी जाने वाली इस टीम ने 2008 और 2009 दोनों सीजनों के सेमीफाइनल में कदम रखा लेकिन इसके बाद यह टीम फिसड्डी ही साबित रही। फ्रेंचाइजी ने 2018 में अपना नाम बदला और दिल्ली कैपिटल्स रखा, इसके पीछे मंशा साफ थी, किस्मत बदलना। 2018 में तो नहीं लेकिन 2019 में युवा कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में टीम की किस्मत बदली और टीम लंबे अरसे बाद प्लेऑफ में पहुंची।

इस बार अय्यर की कप्तानी वाली यह टीम पिछले सीजन से एक कदम आगे जाना चाहेगी और अपना पहला आईपीएल खिताब जीतने की कोशिश करेगी।

टीम की सबसे अच्छी बात यह है कि टीम में युवा जोश और अनुभव का अच्छा मिश्रण है। ऋषभ पंत, पृथ्वी शॉ, अय्यर वो खिलाड़ी हैं जिन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जाता है। वहीं शिखर धवन, अजिंक्य रहाणे, रविचंद्रन अश्विन, ईशांत शर्मा का अनुभव टीम को और मजबूत करता है।

टीम की बल्लेबाजी काफी मजबूत है। दिल्ली के लिए खेलते हुए पंत आईपीएल में अलग ही रूप में रहते हैं। उनकी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी गेंदबाजों के लिए डर है। पृथ्वी भी इसी रास्ते पर हैं। पृथ्वी ने पिछले सीजन भी अच्छा किया था लेकिन वो अभी तक उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।

भारतीय टीम से खेलते हुए अय्यर ने बीते सीजन अच्छा किया था। शीर्ष क्रम में पंत, धवन, पृथ्वी के बाद मध्य क्रम में अय्यर रहाणे, मार्कस स्टोइनिस, एलेक्स कैरी, शिमरन हेटमायेर टीम को मजबूत करते हैं।

फिनिशर के तौर यहां कैरी और स्टोइनिस को अहम भूमिका में देखा जा सकता है।

दिल्ली के पास अक्षर पटेल, अश्विन के रूप में दो अच्छे हरफनमौला खिलाड़ी भी हैं। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की धीमी पिचों को देखते हुए दिल्ली को फायदा होगा क्योंकि टीम के पास अच्छे स्पिनर भी हैं। पटेल और अश्विन के अलावा दिल्ली के पास नेपाल के संदीम लामिछाने, अमित मिश्रा के विकल्प हैं।

जहां तक तेज गेंदबाजों की बात है तो राबाडा और ईशांत पर ज्यादा भार होगा। इनका साथ देने के लिए कीमो पॉल, आवेश खान और मोहित शर्मा के विकल्प दिल्ली के पास हैं।

दिल्ली को बस अपने खिलाड़ियों के प्रदर्शन में निरंतरता की जरूरत है। उसके पास वो जरूरी संतुलन है जो उसे खिताब की रेस में बनाता है।

दिल्ली कैपिटल्स टीम : श्रेयस अय्यर (कप्तान), अजिंक्य रहाणे, शिखर धवन, शिमरन हेटमायेर, पृथ्वी शॉ, मार्कस स्टोइनिस, ललित यादव, रविचंद्रन अश्विन, अक्षर पटेल, कीमो पॉल, डेनिल सैम्स, एलेक्स कैरी, ऋषभ पंत, कागिसो रबाडा, संदीप लामिछाने, ईशांत शर्मा, आवेश खान, तुषार देशपांडे, हर्षल पटेल, अमित मिश्रा एनरिक नोर्टजे।

खेल

रिकॉर्ड बनाना नहीं, देश को वर्ल्ड कप जिताना अहम लक्ष्य: काइलियन एमबाप्पे

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फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पहले ही मुकाबले में काइलियन एमबाप्पे का जलवा देखने को मिला। एमबाप्पे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेनेगल के खिलाफ खेले गए मुकाबले में दो गोल दागे, जिसके बूते फ्रांस ने 3-1 से मैच को अपने नाम किया। दो गोल करने के साथ ही एमबाप्पे फ्रांस की ओर से ज्यादा इंटरनेशनल गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं।

काइलियन एमबाप्पे फ्रांस की ओर से खेलते हुए अब कुल 58 गोल कर चुके हैं। उन्होंने इस मामले में ओलिवियर गिरौद को पीछे छोड़ा, जिन्होंने टीम के लिए 57 गोल किए। हालांकि, मैच के बाद 27 वर्षीय एमबाप्पे ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि अपने देश को वर्ल्ड कप जिताना है। उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि मेरा नाम फ्रांस के फुटबॉल इतिहास में याद रखा जाए। मेरी कोशिश है कि टीम फाइनल तक पहुंचे और वर्ल्ड कप जीते। रिकॉर्ड और उपलब्धियां मेरे करियर का हिस्सा हैं, लेकिन टीम की सफलता सबसे महत्वपूर्ण है।”

मैच की शुरुआत में सेनेगल ने फ्रांस को कड़ी टक्कर दी। पहले हाफ में सेनेगल के खिलाड़ी निकोलस जैक्सन और इस्माइला सार ने गोल करने के अच्छे मौके बनाए। एक समय ऐसा लगा कि सेनेगल बढ़त हासिल करने में सफल हो जाएगा, लेकिन फ्रांस के मजबूत डिफेंस ने सेनेगल के प्रयासों को एक के बाद एक करके विफल कर दिया।

पहले हाफ में कोई गोल नहीं हुआ। हालांकि, दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपना खेल पूरी तरह बदल दिया। टीम ने लगातार आक्रामक खेल दिखाया और सेनेगल के गोल पर दबाव बनाया। माइकल ओलिस के शानदार पास पर एमबापे ने पहला गोल करके फ्रांस को बढ़त दिलाई। इस गोल के साथ उन्होंने गिरौद के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।

स्टॉपेज टाइम में एमबापे ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर दूसरा गोल किया और फ्रांस के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। मैच के अंतिम क्षणों में सेनेगल के युवा खिलाड़ी इब्राहिम मबाये ने सेनेगल की तरफ से एक गोल किया, लेकिन यह गोल टीम की हार को नहीं टाल सका, और फ्रांस ने मुकाबले को 3-1 से अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ही फ्रांस ने 2022 विश्व कप के पहले मैच में सेनेगल से मिली हार का हिसाब भी चुकता कर लिया।

एमबाप्पे फीफा विश्व कप के इतिहास में भी फ्रांस की तरफ से सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। एमबाप्पे वर्ल्ड कप में अब 14 गोल कर चुके हैं। उन्होंने जस्ट फॉनटेन (13 गोल) को इस मामले में पीछे छोड़ा। एमबाप्पे लियोनेल मेसी से भी आगे निकल गए हैं। मेसी ने फीफा वर्ल्ड कप में खेले 26 मुकाबलों में कुल 13 गोल किए हैं। एमबापे की नजर वर्ल्ड कप इतिहास में सबसे ज्यादा 16 गोल करने वाले जर्मनी के महान खिलाड़ी मिरोस्लाव क्लोज के रिकॉर्ड पर होगी। एमबापे के नाम वर्ल्ड कप में फिलहाल 14 गोल हैं और वह इस रिकॉर्ड से सिर्फ दो गोल दूर हैं।

वहीं, सेनेगल के खिलाड़ी इब्राहिम मबाये ने भी इस मैच में इतिहास रचा। 18 साल और 142 दिन की उम्र में वह किसी अफ्रीकी देश के लिए वर्ल्ड कप में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। मैच के बाद उन्होंने कहा कि उनकी टीम दूसरे हाफ में अपने खेल का स्तर बनाए नहीं रख सकी और टीम की छोटी गलतियों का पूरा फायदा फ्रांस ने उठाया।

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खेल

ईरान के कोच ने फीफा, अमेरिका पर साधा निशाना, कहा- हमें तुरंत जाने के लिए कहा गया

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ईरान के हेड कोच आमिर घालेनोई ने फीफा विश्व कप ग्रुप जी के पहले मैच में न्यूजीलैंड के साथ 2-2 से ड्रॉ होने के बाद अपनी टीम के यात्रा योजना में अचानक हुए बदलाव पर निराशा जताई।

मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में घालेनोई ने कहा, “उनकी टीम को अचानक बताया गया कि उन्हें लॉस एंजिल्स में मैच के तुरंत बाद मेक्सिको लौटना होगा। टीम को पहले बताया गया था कि वे मंगलवार लंच तक अमेरिका में रह सकती हैं, लेकिन जैसे ही मैच खत्म हुआ, ट्रिप प्लान बदल गया।”

घालेनोई ने कहा, “मैच के बाद उन्होंने कहा कि हमें तुरंत जाना होगा। हमें प्लेन में बैठकर तिजुआना में अपने कैंप में लौटने के लिए कहा गया है, और हम इससे परेशान हैं। वे हमें जल्दी वापस जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। वे हालात को और मुश्किल बना रहे हैं और मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं, लेकिन हम इसे अपना श्रेष्ठ करने से रोकने नहीं देंगे।”

कोच ने यह भी दावा किया कि टूर्नामेंट की तैयारी के दौरान ईरान को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा, “हमें मैच से दो रात पहले पहुंचना था, लेकिन उन्होंने इजाजत नहीं दी। हमें आज रात यहीं रुकना था और लंच टाइम पर लौटना था। मुझे लगता है कि हमारी टीम पूरे विश्व कप में सबसे ज्यादा परेशान है। हमारा फेडरेशन यहां नहीं है, हमारा मीडिया यहां नहीं है, हमारा मैनेजमेंट यहां नहीं है।”

ईरान के स्ट्राइकर मेहदी तारेमी ने हालात को बहुत बुरा मानते हुए कहा, “यह खिलाड़ियों और स्टाफ के लिए बहुत चिंता की बात है। हम बस इस हालात से थक चुके हैं। यह बहुत बुरा है, और इसका असर हमारी टीम पर पड़ता है।”

वर्ल्ड कप में ईरान का शामिल होना अनिश्चितता की वजह से खराब हुआ है, जो मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और उससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा है। इस बीच, फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच के बाद ईरान टीम के ड्रेसिंग रूम में जाकर खिलाड़ियों से मुलाकात की।

ईरान की यात्रा से जुड़ी चिंताएं ग्रुप स्टेज में भी जारी रह सकती हैं। उनका अगला ग्रुप जी मैच बेल्जियम के खिलाफ रविवार को सोफी स्टेडियम में होना है।

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फीफा विश्व कप 2026: स्पेन और केप वर्डे का मुकाबला 0-0 से ड्रॉ रहा, 40 साल के गोलकीपर वोजिन्हा मैच के हीरो रहे

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फीफा विश्व कप 2026 में सोमवार को खेले गए ग्रुप एच के मुकाबले में स्पेन को केप वर्डे ने अपने करिश्माई प्रदर्शन से हैरान कर दिया है। विश्व कप के इतिहास में अपना पहला मैच खेल रही केप वर्डे के सामने मजबूत स्पेन को ड्रॉ खेलना पड़ा है। मैच में एक भी गोल नहीं हो सका और परिणाम 0-0 से ड्रॉ रहा।

केप वर्डे के लिए उसके गोलकीपर वोजिन्हा हीरो बनकर उभरे। मैच अवधि के लगभग 75 प्रतिशत समय में गेंद पर स्पेन का कब्जा था। लेकिन, 40 साल के इस गोलकीपर ने स्पेन के मजबूत स्ट्राइकरों द्वारा किए गए दो दर्जन से अधिक प्रयासों (27 बार) को असफल कर दिया। वोजिन्हा ने एक भी गेंद को एक बार भी गोल पोस्ट के अंदर नहीं जाने दिया और मुकाबले में केप वर्डे को स्पेन के मुकाबले लाकर खड़ा कर दिया। मैच बराबरी पर खत्म होने की घोषणा के बाद वोजिन्हा रोते हुए पिच से चले गए। वोजिन्हा को उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

केप वर्डे ने शुरू से ही पांच लोगों के लो ब्लॉक में मजबूत रक्षापंक्ति सजाई थी। अपने ही बॉक्स में टीम अधिकांश खिलाड़ियों को रखा था। स्पेन ने गेंद को एक तरफ से दूसरी तरफ घुमाया, लेकिन केप वर्डे के खिलाड़ियों ने हर बार स्पेन के गोल करने के इरादों पर पानी फेर दिया।

लुइस डे ला फ्यूएंटे के लामिन यामल और निको विलियम्स को बेंच पर रखकर शुरू करने के फैसले ने स्पेन की धार को कमजोर कर दिया। फेरान टोरेस और गैवी, जिन्हें बाहर इस्तेमाल किया गया, वे उस तेज और वन-ऑन-वन ​​खतरा देने के लिए संघर्ष कर रहे थे जिसकी वजह से हाल के वर्षों में स्पेन एक खतरनाक टीम बनकर उभरी है।

स्पेन के कप्तान रोड्रिगो मैच के बाद कहा, “ऐसा नहीं होना था। हमने मौके बनाए, लेकिन हम गोल नहीं कर सके। इतनी रक्षात्मक टीम के खिलाफ खेलना मुश्किल है। हमें अपनी फिनिशिंग सुधारने की जरूरत है।”

केप वर्डे के मिडफील्डर लारोस डुआर्टे ने मैच के बाद कहा, “आज हमारा फोकस रक्षात्मक खेल पर था। हम दूसरे मैचों में गेंद के साथ अपनी क्षमता दिखा सकते हैं। हम जानते हैं कि हम क्या कर सकते हैं। अगले राउंड के लिए क्वालीफाई करने के बारे में अभी से वास्तविक और अच्छा लग रहा है।”

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